बुधवार, 12 अक्तूबर 2016

रक्तदान ,Blood donation

रक्तदान :::

रक्तदान को सभी दानों में श्रेष्ठ दान माना गया हैं.अन्य दानों में जहाँ हम दान लेनें वाले की आर्थिक और सामाजिक मदद करतें हैं,वही रक्तदान ऐसा दान हैं, जिसमें हम किसी अनजान या परिचित व्यक्ति को जीवनदान देतें हैं.
रक्तदान
 रक्तदान करता युवा

विश्व स्वास्थ संगठन (w.h.o.) के अनुसार दुनिया में प्रति दो सेकेण्ड़ में रक्त की आवश्यकता पड़ती हैं.यह आवश्यकता दुर्घट़ना में घायल व्यक्ति को,एनिमिया, आपरेशनों आदि अनेक प्रकारों में होती हैं.किन्तु इस आवश्यकता के मुकाबले रक्त की आपूर्ति बहुत कम हो पाती हैं,

उदाहरण के लिये भारत में प्रतिवर्ष  100 लाख यूनिट़ रक्त की आवश्यकता के मुकाबले मात्र 60 लाख यूनिट़ रक्त ही एकत्रित होता हैं.और इसमें से भी लगभग 25% रक्त उचित भंड़ारण प्रक्रिया के अभाव में नष्ट़ हो जाता हैं.

रक्त का जीवनचक्र :::

रक्त का जीवनचक्र अत्यंत लघु होता हैं.इसके अलग - अलग भागों को मात्र कुछ दिवस तक भण्ड़ारित करके रखा जा सकता हैं ,जैसे --::
० लाल रक्त कणिकाओं (w.b.c.) को 41 दिन .
० प्लेटलेट्स को पाँच दिन.
० प्लाज्मा तथा कायोप्रेसीपीटेट को एक वर्ष तक रखा जा सकता हैं.

रक्तदान कौन कर सकता हैं ?

18 वर्ष से अधिक के वे सभी स्त्री पुरूष जिनका वज़न 50  से अधिक होता हैं. तथा जो चिकित्सतकीय रूप से स्वस्थ हो रक्तदान कर सकतें हैं.

रक्तदान के फायदे :::

० नियमित रक्तदान करनें वाले व्यक्ति में ह्रदय रोग की आशंका रक्तदान न करने वाले व्यक्ति की तुलना में 50% कम होती हैं क्योंकि रक्त में उपस्थित आयरन की अधिक मात्रा अधिक कोलेस्ट्राल के लिये उत्तरदायी होती हैं,नियमित रक्तदान करनें से आयरन का स्तर कम होता रहता हैं, अत : कोलेस्ट्राल भी कम बनता हैं.

० रक्तदान करने से नई लाल रक्त कणिकाओं का उत्पादन बढ़ता हैं, क्योंकि इनका स्तर घट़नें पर तुरन्त अस्थि मज्जा (Bone marrow) द्धारा नई w.b.c.का उत्पादन शुरू कर दिया जाता हैं अत : शरीर में नया रक्त आ जाता हैं.

मोटापे से ग्रसित व्यक्ति द्धारा रक्तदान करनें से शरीर की अतिरिक्त चर्बी ऊर्जा में परिवर्तित होकर मुक्त हो जाती हैं,फलस्वरूप व्यक्ति दुबला और शारीरिक रूप से चुस्त हो जाता हैं.

० रक्तदान करने से हेपेटाइटिस वायरस के खतरे को कम करनें में मदद मिलती हैं.

० किड़नी शोथ (Nephritis) का खतरा नहीं रहता .

० सबसे बढ़कर मन में किसी की जान बचानें का सन्तोष रहता हैं, जो प्रत्येक कार्य में आशावादी दृष्टिकोण रखनें में मदद करता हैं, अत : तनाव, विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होनें की क्षमता विकसित होती हैं.


बाम्बे ब्लड़ ग्रुप [Bombay blood group] :::

बाम्बे ब्लड़ ग्रुप एक विशिष्ट किस्म का रक्त का समूह होता हैं.जो 'ओ' रक्तसमूह के अन्तर्गत आता हैं.इस समूह के रक्त चढ़ानें वाले व्यक्ति में अपने समूह से रक्त लेने के बावजूद रिएक्सन होता हैं.

रिएक्सन क्यों होता हैं :::

इस किस्म के रक्त प्राप्त करता समूह में एंटीजन H की कमी पाई जाती हैं,जिस वजह से रिएक्सन होता हैं.एंटीजन H की अनुपस्थिति की में इन्हें OH ब्लड़ समूह में रखा जाता हैं.

इस प्रकार के रक्त समूह वाले सिर्फ अपने ही समूह में रक्त का आदान प्रदान कर सकते हैं.




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