सोमवार, 24 अगस्त 2015

श्वेत प्रदर का आयुर्वेदिक उपचार

 श्वेत प्रदर क्या है--:: 


       श्वेत प्रदर का आयुर्वेदिक उपचार जानने से पहले यह जान लेते हैं श्वेत प्रदर क्यया होता हैं। श्वेत प्रदर स्त्रीयों से सम्बंधित रोग हैं,जिसमें योनि मार्ग से तरल सफेद पदार्थ का स्त्राव होता हैं. यह रोग मुख्यत: 18 से 50  वर्ष की स्त्रीयों को होता हैं.

श्वेत प्रदर के कारण::-



इस रोग के लिये मुख्यत बेक्टेरिया tricamosa उत्तरदायी होता हैं, जो निम्न कारणों से फेलता हैं-:


  १. योनि की उचित साफ सफाई का अभाव.


  २.माहवारी के दोरान संक्रमित सेनेटरी पेड़ का इस्तेमाल.


  ३. संक्रमित व्यक्ति के साथ योन संसर्ग.


  ४.बार-बार गर्भपात.


 श्वेत प्रदर में क्या होता हैं::- 



१.कमर में लगातार दर्द जिससे देनिक कार्यों मे भी परेशानी होती हैं.


२.चिड़चिड़ापन,काम मे अरूचि,सिरदर्द ,चक्कर,उल्टी.


३.पेट पर सूजन, वजन कम होना.


४.योन सम्बंधों में अरूचि.


श्वेत प्रदर का आयुर्वेदिक उपचार::-



१.पुष्यानुग चूर्ण, सुपारी पाक,अशोक छाल, माजूफल को विशेष अनुपात मे मिलाकर सेवन करवाते हैं


२.आवँला चूर्ण शतावर चूर्ण, नागकेशर,दशमूल को फीटकरी जल मे मिलाकर योनि प्रछालन करें.


३.एलोवेरा रस को गेँहू के जवारें के रस में समान मात्रा मिलाकर सेवन करें.


४.भोजन संतुलित करें जिसमें पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन हो.


५. योगिक क्रियायें कमरबंधासन,उत्तानपादासन, कटिबंधासन करते रहे़.


नोट- वैघकीय परामर्श आवश्यक

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