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सुखी वैवाहिक जीवन और शादी से पहले के मेडिकल टेस्ट [medical test before marriage]

सुखी वैवाहिक जीवन और शादी से पहले के मेडिकल टेस्ट [medical test before marriage]


सुखी वैवाहिक जीवन के लिए भारत में शादी से पहले लड़के लड़कियों की कुंडली मिलानें की परंपरा हैं,यदि कुंडली मिल जाती हैं तो पंडित जी दोनों पक्षों को शादी के लिए हां कह देते हैं, लेकिन हमारे यहां शादी से पहले लड़के लड़कियों का मेडिकल टेस्ट न के बराबर होता हैं और इसी कारण शादी के बाद आनें वाली संतानों को ऐसी कई आनुवंशिक और जन्मजात बीमारियों से जुझना पड़ता है । जो लाइलाज और बच्चों को स्थाई अपंग बना देती हैं । 

ऐसी बीमारियों से बचने और माता-पिता का सुखी वैवाहिक जीवन हो इसके लिए शादी से पहले कुछ आवश्यक मेडिकल टेस्ट Premarital medical Test अवश्य कराने चाहिए। जैसे

शादी के पहले कोंन से मेडिकल टेस्ट करवाना चाहिए



1.आर.एच.असंगति टेस्ट [Rh incompatibility Test ]


Rh factor लाल रक्त कोशिकाओं पर पाया जाने वाला एक प्रोटीन होता हैं । दुनियाभर में लगभग 85 प्रतिशत जनसंख्या Rh positive होती हैं जबकि 15 प्रतिशत जनसंख्या Rh negative होती हैं ।

यदि Rh positive और Rh negative स्त्री पुरुष शादी कर बच्चा पैदा करतें हैं और यदि मां Rh negative हुई और होनें वाला बच्चा Rh positive हुआ तो‌ मां का शरीर बच्चें के खून को स्वीकार नहीं करेगा , फलस्वरूप मां का Rh antibody system बच्चें की लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला कर देता हैं, जिससे बच्चे की लाल रक्त कणिकाएं टूट जायेगी । और बच्चा hemolytic anemia नामक बीमारी से ग्रस्त हो जायेगा । Hemolytic anemia में जिस अनुपात में लाल रक्त कणिकाएं [R.B.C.] टूटती हैं शरीर उस अनुपात में उसका निर्माण नहीं कर पाता है फलस्वरूप Jaundice,हो जाता हैं। 

R.B.C.कम होने से खून की oxygen परिवहन की क्षमता कम हो जाती हैं और शरीर नीला पड़ जाता हैं ।

ह्रदय में oxygen कम पहुंचने से ह्रदय को अधिक काम करना पड़ता है जिससे ह्रदय संबंधित बीमारीयां भी हो जाती हैं ।



2.F.S.H.Test [follicle stimulating hormone test] 


F.S.H. महिलाओं में मासिक धर्म (menstrual cycle) को नियंत्रित करने वाला हार्मोन हैं । जबकि पुरुषों में F.S.H.शुक्राणु के निर्माण और परिवहन को नियंत्रित करता है। इस हार्मोन की कमी होने से महिला और पुरुष दोनों संतान पैदा करने में असमर्थ होते हैं ।


3.एस्ट्रोडाल टेस्ट [Estradiol test]


एस्ट्राडाल एस्ट्रोजन हार्मोन का महत्वपूर्ण भाग है । यह टेस्ट मासिक धर्म (menstrual period) के दूसरे या तीसरे दिन किया जाता हैं, Estradiol के माध्यम अंडों की गुणवत्ता और इसकी कार्यप्रणाली की जांच की जाती हैं । यदि महिलाओं के अंडो में कोई समस्या होती हैं तो गर्भधारण नहीं हो पाता है ।


4.प्रोलेक्टिन टेस्ट [Prolactin Test]


Prolactin महिलाओं और पुरुषों की पियूष ग्रंथि [Pituitary gland] से स्त्रावित होने वाला  महत्वपूर्ण harmone हैं जो जनन तंत्र को प्रभावित करता हैं। 

महिलाओं में इस हार्मोन की कमी से अंडोत्सर्ग (evolution) नहीं हो पाता है और स्तनों में दूध निर्माण नहीं हो पाता है । जबकि पुरुषों में Prolactin harmone की कमी से योनइच्छा का अभाव हो जाता है,और सहवास (sexual intercourse) के दौरान शुक्राणुत्सर्ग (ejection) में तकलीफ़ होती हैं । 


5.Luteinizing Hormone level Test



महिलाओं में इस टेस्ट के द्धारा अंडाशय से उत्सर्जित हार्मोन असंतुलन की जांच की जाती हैं और देखा जाता हैं कि हार्मोन असंतुलन की वजह से महिला के गर्भवती होने में कोई समस्या तो नहीं है ।


पुरुषों में ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन लेवल टेस्ट के दर्शाया यह जांचा जाता हैं कि पुरुष का टेस्टास्टेरॉन हार्मोन शुक्राणु का कितना production कर रहा है ।



6.serum progesterone test सीरम प्रोजेस्टोरोन टेस्ट


सीरम प्रोजेस्टोरोन टेस्ट serum progesterone test महिलाओं से संबंधित महत्वपूर्ण टेस्ट हैं जिसमें यह देखा जाता हैं कि महिला का प्रोजेस्टोरोन हार्मोन लेवल किस प्रकार का है,क्योंकि प्रोजेस्टोरोन हार्मोन ही अंडाशय से निकलने वाले अंडों को स्वस्थ रखता है और महिला स्वस्थ शिशु को जन्म देने योग्य बनती हैं ।


7.हिस्टारोस्कोपी [Hysteroscopy]


महिला के गर्भाशय, फेलोपियन ट्यूब में किसी प्रकार की कोई रुकावट तो नहीं है यह देखने के लिए हिस्टारोस्कोपी की जाती हैं । इसी प्रकार की समस्या का पता लगाने के लिए हिस्टीरोसेलपिगोग्राफी भी की जाती हैं । लेकिन अंतर सिर्फ इतना है कि हिस्टारोस्कोपी में एक विशेष उपकरण योनि मार्ग से अंदर डालकर जांच की जाती हैं वहीं हिस्टीरोसेलपिगोग्राफी में एक विशेष रसायन गर्भाशय में डालकर एक्सरे किया जाता हैं और गर्भाशय में रुकावट का पता लगाया जाता हैं ।


8.Thalassemia trait थैलीसीमिया ट्रेट


शादी से पहले थैलीसीमिया ट्रेट करवाना बहुत आवश्यक है यह टेस्ट पति-पत्नी दोनों को करवाना चाहिए । थैलीसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी हैं यदि पत्नि और पति में थैलीसीमिया नहीं लेकिन यह दोनों के पारिवारिक इतिहास में है तब भी यह होने वाले बच्चे को हो सकती हैं ।

भारत में थैलीसीमिया का बहुत  जोखिम हैं और वर्तमान समय में लगभग साढ़े छः करोड़ लोग भारत में थैलीसीमिया ट्रेट की संभावना वाले हैं । 

इसी प्रकार सिकल सेल एनिमिया भी आनुवंशिक बीमारी हैं शादी से पूर्व इस बीमारी से संबंधित जांच भी अवश्य करवाना चाहिए।

 

9.शुक्राणु की जांच


पुरुषों में शुक्राणुओं की जांच कर यह पता लगाया जाता हैं कि शुक्राणु की गुणवत्ता किस किस्म की हैं,क्या सहवास के बाद शुक्राणु निर्धारित गति से गतिशील होकर महिला के अंडों तक पंहुचा रहें हैं या नहीं । 


10.टेस्टोस्टेरोन हार्मोन जांच


पुरुषों के खून की जांच कर टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर पता लगाया जाता हैं कि पुरुष बच्चा पैदा करने में सक्षम है या नहीं ।

11.आनुवांशिक बीमारियों से संबंधित टेस्ट


अलग-अलग प्रकार के कुछ टेस्ट होते हैं जिनके द्धारा पुरुषों में यह पता लगाया जाता हैं कि पुरुष को कोई आनुवंशिक बीमारी तो नहीं है जो बच्चे पैदा करने में रूकावटें पैदा कर रही हैं और इससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण टेस्ट होते हैं जैसे Testicular बायोप्सी,DNA में विकृतियों की जांच।

12.यौनजनित टेस्ट 


एचआईवी (एड्स), हेपेटाइटिस,ह्यूमन पोपिलोमा  वायरस जनित रोग,सिफलिस,गोनोरिया आदि ऐसी बीमारीयां है जिनके बारें किसी एक पक्ष को मालूम नहीं हो तो वैवाहिक जीवन शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाता हैं,ऊपर से दोनों परिवारों में तनाव अलग होता हैं। अतः वैवाहिक जीवन सुखमय हो इसके लिए यौनजनित बीमारियों से संबंधित मेडिकल टेस्ट भी अवश्य करवाना चाहिए ।


13.मानसिक रोगों से संबंधित जांचें

आजकल पारिवारिक और दांपत्य जीवन सुखमय बनाने के लिए यह बहुत जरूरी हो गया है कि पति-पत्नी का मानसिक संतुलन ठीक हो इसके लिए सित्ज्नोफ्रैनिया, पागलपन, डिप्रेशन, पर्सनलिटी डिस आर्डर आदि जांचें करवा लेना चाहिए ।


14.अन्य जांचें जो दांम्पत्य जीवन को प्रभावित करती है


कुछ अन्य प्रकार की जांचें है जो कि  महिला पुरुष को शादी से पूर्व करवा लेना चाहिए ताकि दांपत्य जीवन खुशहाल और बच्चें पैदा करने में कोई परेशान न हों जैसे थाइराइड प्रोफाइल, मधुमेह, रक्तचाप आदि ।




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