मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

WHAT IS AIDS एड्स क्या है

#1.एड्स क्या है [WHAT IS AIDS] 
एड्स
 विश्व एड्स दिवस

एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड़ इम्यूनों डेफिसेएन्सी सिंड्रोंंम Acquired immuno deficiency syndrome हैं.

यह वायरसजनित रोग हैं,जिसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र इतना कमज़ोर हो जाता हैं,कि सामान्य बीमारी भी उपचार के द्धारा ठीक नही होती हैं.

अत:एड्स कोई बीमारी नही हैं,बल्कि बीमारीयों से लड़नें की शरीर की प्राकृतिक क्षमता का हा्स हैं.और ऐसी अवस्था में व्यक्ति साधारण बीमारी के भी चपेट़ में आकर मृत्यु को प्राप्त हो जाता हैं.

#2.एच.आई.वी.[H.I.V.] :::

एड्स के लियें जिम्मेदार वायरस का नाम HIVहैं.इसका पूरा नाम ह्यूमन इम्यूनोंडिफिसिएंसी वायरस (Human immunodeficiency virus) हैं.इस वायरस की खोज 1983 में फ्रांस के लक मोंटेगनियर नामक scientist ने की थी.
VIRUS
 HIV VIRUS

HIV वायरस भी दो प्रकार का होता हैं ::

• HIV - 1
• HIV - 2

हमारें शरीर में टी - लिम्फोसाइट नामक प्रतिरक्षी कोशिकाएँ होती हैं,यह कोशिकाएँ रोगाणुओं से शरीर की रक्षा करती हैं.किन्तु जब HIV कोशिकाँए शरीर में प्रवेश करती हैं,तो टी - लिम्फोसाइट कोशिका की सतह पर स्थित CD - 4 और CD - 26 नामक प्रोटीन से प्रतिक्रिया कर GP - 26 नामक अणु बना लेती हैं.फलस्वरूप HIV कोशिकाँए तेजी के साथ अपना विकास करती  हैं.

जब HIV कोशिकाँए बहुत अधिक सँख्या में हो जाती हैं,तो व्यक्ति सामान्य बीमारीयों से भी अपनी रक्षा नही कर पाता फलस्वरूप व्यक्ति की मृत्यु हो जाती हैं.

#3.इतिहास :::

एड्स का प्रथम रोगी संयुक्त राज्य अमेरिका में खोजा गया था,यह एक होमो सेक्सुअल पुरूष था,जिसका नाम गटेन डगास था जो कि एड्स से मरा था.

ऐसा माना जाता हैं,कि इस रोग का प्रसार बंदरो से मनुष्य में हुआ हैं.क्योंकि सिरोलाजिकल प्रमाण बताते हैं,कि मनुष्यों मे यह वायरस 1979 से पूर्व नही था.

भारत में एड्स का प्रथम रोगी सन् 1986 में खोजा गया था.

#4.लक्षण :::

एड्स कई सारे लक्षण प्रकट होतें हैं,किन्तु कुछ प्रमुख लक्षण निम्न हैं,जिनकी सहायता से एड्स को पहचाना जा सकता हैं.फिर भी पक्के तोर निष्कर्ष निकालनें से पूर्व परीक्षण करवाना चाहियें.

• वज़न का लगातार कम होना.

• लम्बें समय तक बुखार का होना.

•  दस्त उल्टी होना जो लगातार एक महिनें से हो रही हैं.

• खांसी जो लम्बें समय से चल रही हो या टी.बी.

• शरीर पर जिद्दी खुजली जो लम्बें समय से ठीक नही हो रही हो.

#5.परीक्षण :::

1.एलीसा परीक्षण (Aliza Test)

इस परीक्षण का पूरा नाम एंजाइम लिंक्ड़ इम्यूनोसारबेंट हैं.इस टेस्ट में एंजाइमों की सहायता से एन्टीबाँड़ी का पता लगाया जाता हैं.इस टेस्ट की सहायता से Hiv 1 और 2 का आसानी से पता लगाया जा सकता हैं,तथा परिणाम भी शीघृ आता हैं.

#6.एड्स फैलने के कारण :::

एड्स फैलने की मुख्यत: चार वज़ह होती हैं ::

१.असुरक्षि योन सम्पर्क से ,यदि कोई एड्स संक्रमित पुरूष या महिला स्वस्थ व्यक्ति से शारीरिक सम्पर्क स्थापित करता हैं,तो महिला के योनि दृव्य तथा पुरूष के वीर्य के माध्यम से विषाणु स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रविष्ट हो जाते हैं.

२.संक्रमित रक्त के आदान प्रदान से एड्स संक्रमित व्यक्ति का  रक्त किसी सामान्य व्यक्ति को चढ़ाया जाता हैं तो सामान्य व्यक्ति एड्स की चपेट़ में आ जाता हैं.

३.संक्रमित सिरींज के उपयोग से एड्स से संक्रमित व्यक्ति को लगाई गई सुई यदि सामान्य व्यक्ति को लगाई जाती हैं,तो उसके एड्स से संक्रमित होनें की संभावना होती हैं.

४.एड्स संक्रमित माँ से होनें वाले शिशु में एड्स का संक्रमण होता हैं.किन्तु आजकल ऐसी दवाईयाँ उपलब्ध हो गई हैं,जिससे की एड्स का फैलाव गर्भस्थ में होनें से रोका जा सकता हैं.

#7.एड्स नही फैलता :::

१.हाथ पकड़ने

२.साथ - साथ खानें या पीनें से

३.छींकने,खाँसनें तथा मच्छरो के संक्रमित व्यक्ति को काट़ने के पश्चात स्वस्थ व्यक्ति को काट़ने से क्योंकि एड्स वायरस मच्छर के पेट़ में जीवित नही रह पाता.

४.एक ही शोचालय या स्नानागार के इस्तेमाल से एड्स नही फैलता हैं.

#8.एड्स का उपचार :::

एड्स के उपचार के सन्दर्भ में अनेक परीक्षण और शोध दुनिया के समस्त विकसित और विकासशील राष्ट्रों में चल रहे हैं,किन्तु एड्स उपचार की दिशा में आंशिक सफलता ही मिली हैं.

 कुछ एंटी रिट्रोवायरल दवायें एड्स संक्रमित व्यक्ति के संक्रमण को फैलने से रोकती हैं,जिससे रोगी लम्बी जिंदगी जी सकता हैं,किन्तु यह रोगी के संक्रमण को समाप्त नही करती हैं.
एजिडाथीमाइन और जिड़ोब्यूडायन नामक दवाईयों से गर्भस्थ शिशु को संक्रमित माँ के संक्रमण से बचाया जा सकता हैं.किन्तु यह दवाईयाँ इतनी मंहगी हैं,कि विकासशील देशों के सामान्य आदमी के लिये इनको खरीद पाना लगभग असंभव हैं.

आनें समय में यदि सरकारें और विश्व स्वास्थ संगठन एड्स  पर होनें वाले शोधों को और बढ़ाने का प्रयास करती हैं,तो निश्चित रूप एड्स लाइलाज नही रह पायेगा.




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