बुधवार, 8 जनवरी 2020

पलाश वृक्ष के औषधीय गुण और पलाश वृक्ष की प्रकृति

पलाश वृक्ष के औषधीय गुण 

पलाश
 पलाश वृक्ष के औषधीय गुण


पलाश या ढ़ाक सम्पूर्ण भारत में पाया जानें वाला वृक्ष हैं । आयुर्वेद चिकित्सा में इस वृक्ष को दिव्य औषधी की तरह प्रयुक्त किया जाता हैं ।


पलाश के वृक्ष 15 से 20 फीट तक लम्बें होतें हैं । पलाश वृक्ष के पत्तें एक साथ तीन के गुच्छे में होतें हैं ।


पलाश पर केशरिया रंग के तोतें की चोंच समान फूल खिलते हैं और लम्बी - लम्बी फलियों में इसके बीज रहतें हैं ।



पलाश वृक्ष की छाल मोटी और खुरदरी होती हैं । जिस पर गोंद निकलता हैं ।


आयुर्वेद चिकित्सा में पलाश के फल,फूल,पत्तें जड़ और गोंद समेत सम्पूर्ण वृक्ष का उपयोग किया जाता हैं । 



पलाश वृक्ष के विभिन्न नाम 



संस्कृत नाम :::


पलाश, किशुक ,रक्तपुष्प और कमलासन 



हिन्दी नाम :::


ढ़ाक , टेसू ,केसू ,खाकरा ,पलाश


लेटिन नाम :::


Butea frondosa ,Butea monosperma


आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति :::



आयुर्वेद मतानुसार पलाश अग्निदीपक ,स्निग्ध, गर्म और कसेला होता हैं ।


पलाश वृक्ष के औषधीय गुण :::



आँतो की कृमि निकालनें में :::



 पलाश के आठ दस बीजों को रातभर  पानी में भीगो दे सुबह इसका छिलका उतारकर बीज को सुखा ले , तीन दिन तक रोज तीन - तीन बीज रात को दें । और चोथे दिन एक चम्मच एरंड तेल का पान करवा दें ।

इस प्रयोग से आँतों के कीड़े निकल जातें हैं ।



चर्म रोगों में :::



पलाश के बीजों को पीसकर नीम्बू के साथ मिलाकर चर्म रोगों जैसें दाद खाज खुजली में लगानें से बहुत आराम मिलता हैं ।


चोट मोच में :::


चोंट मोच और शरीर के किसी भाग पर सूजन आनें की दशा में पलाश के पत्तों palash ke patton में तेल मिश्रित  हल्दी लपेटकर गर्म करले और हल्का गुनगुना चोट मोच और सूजन पर बाँधे इस प्रयोग से बहुत शीघ्र आराम मिलता हैं ।



विष में :::


पलाश की छाल और सौंठ समान मात्रा में मिलाकर पीस ले इस तरह पीसा गया यह मिश्रण जहरीले जानवर जैसें बिच्छू,मधुमक्खी ततैया आदि के काटनें पर एक चम्मच पानी के साथ सेवन करवानें से जहर शीघ्रता से उतर जाता हैं ।  


पेशाब रूक जानें पर :::


पलाश के फूल palash ke ful उबालकर गरमागरम पेडू पर बाँधनें से रूकी हुई पेशाब खुलकर आ जाती हैं । साथ ही गुर्दें के दर्द ,मूत्राशय की सूजन में आराम मिलता हैं । 

   



पुरूष अंडाशय की सूजन में :::


पलाश वृक्ष की छाल palash ki chhal पीसकर अंडाशय पर लगानें से अंडाशय की सूजन मिट जाती हैं ।




मिरगी में :::



पलाश वृक्ष की जड़ Palash ki jad पानी मिलाकर पत्थर पर घीस लें, इस घीसी हुई जड़ की दो चार बूँद नाक में टपकाने से मिरगी रोग मिट जाता हैं ।


बाजीकरण में :::



पलाश वृक्ष की जड़ का अंदरूनी नर्म हिस्सा निकालकर इसे दूध के साथ प्रतिदिन   5 ग्राम की मात्र  में सेवन करनें से बाजीकरण में मदद मिलती हैं । और शुक्राणुओं की संख्या में बढ़ोतरी होती हैं ।  



टूटी ह्ड्डी को जोड़ने में :::

पलाश  के गोंद palash ke gond  की 5 ग्राम मात्रा प्रतिदिन टूटी हड्डी को शीघ्रता से जोड़ने में मदद करती हैं । इसके लिये गोंद को मिश्री या गुड़ के साथ सेवन करना चाहियें ।   




लू लगने पर :::



पलाश के फूलों को रातभर पानी में भीगोनें के बाद सुबह इस पानी से स्नान करनें पर लू उतर जाती हैं । और गर्मी के कारण  शरीर में होनें वाली जलन मिटती हैं। 



अतिसार में :::


पलाश वृक्ष का गोंद मल को अवरोधित करता हैं यदि लम्बें समय से अतिसार की समस्या से परेशान है तो 10 ग्राम पलाश का गोंद आधा कप पानी में घोलकर पीलावें ,बहुत जल्दी आराम मिलता हैं ।   



स्त्रीयों के बाँझपन में :::



पलाश के फूलों को रातभर पानी में भीगों दें सुबह इसमें से फूलों को निकालकर बचे हुये पानी को प्रतिदिन 10 - 10 Ml सुबह शाम सेवन करनें से स्त्रीयों की बाँझपन की समस्या दूर होती हैं । 



रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ानें में :::



पलाश के पत्तों से बनी थाली में भोजन करनें से भोजन का स्वाद बढ़ता हैं।  और व्यक्ति की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं ।


कुपोषण दूर करनें में :::




आदिवासी समाज पलाश के पत्तों में लपेटकर रोटी को कंड़ो पर सेककर खाता हैं इस रोटी के सेवन से बच्चों का कुपोषण दूर होता हैं । 



० ह्रदयघात उपचार


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० कद्दू के औषधीय गुण



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