मंगलवार, 27 मार्च 2018

ट्यूबरकुलोसिस [Tuberculosis] या टीबी [TB]


फेफडों की बीमारी



# ट्यूबरकुलोसिस क्या हैं ::




ट्यूबरकुलोसिस या क्षय रोग एक संक्रामक बीमारी हैं.जो एक व्यक्ति से दूसरें व्यक्ति तक सम्पर्क के माध्यम से प्रसारित होती हैं. 
   

  
यह एक जीवाणु (Bacteria) से होनें वाला रोग हैं,इस जीवाणु का नाम Microbacterium Tuberculosis हैं.




# टी.बी.का इतिहास ::





टी.बी.दुनिया की सबसे प्राचीन बीमारियों में से एक मानी गई हैं,जिसका वर्णन ॠग्वेद,अथर्ववेद ,चरक संहिता सुश्रुत संहिता आदि ग्रंथों में बड़ें विस्तारपूर्वक अलग-अलग नामों से मिलता हैं.

किसी ग्रंथ में इसे राजयोग,किसी में यक्ष्मा तो किसी में बालसा,क्षय तपेदिक आदि नामों से संबोंधित किया गया हैं.

शिव पुराण में वर्णन हैं,कि दक्ष प्रजापति ने अपने जमाई को क्रोध में आकर क्षय रोग से पीड़ित होनें का श्राप दिया था.

मनुष्यों में ट्यूबरकुलोसिस के साक्ष्य इजिप्ट की ममीज् में मिलें हैं,इन ममीज् का काल 2400 से 3000 ईसा पूर्व का माना जाता हैं.

इसके पूर्व यह बीमारी जँगली भैंसों में पाई जाती थी,ऐसा माना जाता हैं,कि जंगली भैंसों से ही यह बीमारी मनुष्यों में फैली थी.

इसका आधुनिक नाम ट्यूबरकुलोसिस (Tuberculosis) सन् 1839 में जे.एल.स्कारलीन द्धारा दिया गया हैं.



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# टीबी से प्रभावित अंग ::




टी.बी.को फेफडों से संबधित बीमारी माना जाता हैं,किंतु वास्तविकता यह हैं कि ट्यूबरकुलोसिस बाल और नाखून को छोड़कर शरीर के प्रत्येक अँग को प्रभावित कर सकती हैं.जैसें हड्डीयों की टीबी,गर्भाशय की टीबी, दाँतों की टीबी,आँतों की टीबी,पेट की टीबी आदि .

किंतु लगभग 85% मामलें फेफडों की टी.बी.के ही पाये जातें हैं.जबकि 15% अन्य अंगों की टीबी के पाये जातें हैं.

विशेषज्ञों की मानें तो टीबी के जीवाणु प्रत्येक मनुष्य के शरीर में मौंजूद रहतें हैं.लेकिन टीबी से प्रभावित वही व्यक्ति होता हैं,जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती हैं.ऐसे में टीबी के जीवाणु शरीर पर आक्रमण कर देतें हैं.





# टी.बी.के लक्षण :::





#१.दो सप्ताह से लगातार खाँसी



#२.खाँसी के साथ लगातार बुखार 



#३.वजन का लगातार घटना



#४.भूख नहीं लगना



#५.रात में पसीना आना.



#६.थोड़ा सा काम करनें पर थकावट होना



#७.सर्दी जुकाम के साथ ठंड़ लगना



#८.खाँसनें पर बलगम के साथ खून आना.



#९.फेफडों के दोनों भागों में दर्द



#१०. स्वरयंत्रशोध ( Laryngitis)



#११.सांस फूलना.




#१२.अन्य अंगों में टीबी होनें पर उस अंग से संबधित समस्या होती हैं,जैसें रीढ़ की हड्डी की टीबी होनें पर पैर और पीठ में दर्द होना.


# संक्रमण :::



ट्यूबरकुलोसिस का जीवाणु खाँसते या छींकतें समय रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में पहुँचता हैं.

यह जीवाणु खाँसनें या छींकनें पर मुहँ या नाक से निकलनें वाली Droplets Nuclei में रहता हैं तथा कई घंटो तक जीवित रह सकता हैं,यह Droplets Nuclei जब हवा में तेरते हुये किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता हैं,तो वह व्यक्ति टी.बी.से संक्रमित हो जाता हैं.


टी.बी. का बेक्टेरिया T.B.ka bacteria फेफड़ों से होता हुआ खून के माध्यम से शरीर के अन्य भागों मस्तिष्क, गला,हड्डी,रीढ़ की हड्डी,गुर्दे आदि भागों तक फैल जाता हैं । जिससे इन भागों में भी टी.बी.हो जाती हैं ।


# ट्यूबरकुलोसिस का कारण:::


ट्यूबरकुलोसिस एक जीवाणुजनित रोग हैं,जो Microbacterium Tuberculosis नामक जीवाणु के संक्रमण से होता हैं.

इस जीवाणु का पता 24 मार्च, सन् 1882 को डाँ.राबर्ट कोच द्धारा लगाया गया था.

इस खोज के पूर्व टी.बी.के संदर्भ में अनेक भ्रांतियाँ प्रचलित थी जैसें भारत में टी.बी.के होनें का कारण किसी देवी देवता के क्रोधित होनें से लगाया जाता था.






#ट्यूबरकूलोसिस (TB) की जाँच विधि::



TB के लिये की जानें वाली जाँच


#१.Sputum परीक्षण.



#२.छाती के एक्स रे द्धारा.



#३.कल्चर विधि द्धारा Bacteria प्रथक्करण.



#४.Plural fluid examination method


# उपचार ::


भारत समेत सम्पूर्ण विश्व में आज टी.बी.का सर्वमान्य और प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं,जिसमें इँजेक्सन,गोलियाँ और वेक्सीन सम्मिलित हैं.

यदि मरीज निर्धारित समयावधि तक चिकित्सकों और पेरामेड़िकल स्टाफ की देखरेख में दवाईयों का डोज लेता रहें तो ट्यूबरकुलोसिस से पूर्णत: निजात पाना बहुत आसान हैं.



# टी.बी.का टीका




टी.बी.से बचाव के लियें सन् 1906 में B.C.G.(Bacillus Calmette Guerin) टीके को खोजा गया था.जो सम्पूर्ण विश्व में ट्यूबरकुलोसिस से बचाव हेतू बच्चों को लगाया जाता हैं.



# ट्यूबरकुलोसिस और विश्व ::




विश्व में लगभग 1 करोड़ लोग टी.बी.से ग्रसित हैं.इन 1 करोड़ लोगों में से लगभग 90% मरीज विश्व के विकासशील और अविकसित राष्ट्रों में पायें जातें हैं.

विश्व भर में लगभग 18 लाख लोग प्रतिवर्ष मौंत के मुँह में समा जातें हैं.




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# भारत और ट्यूबरकुलोसिस




भारत विश्व के उन चुनिंदा राष्ट्रों में से हैं,जहाँ टी.बी.अत्यधिक घातक रूप में विधमान हैं,इसका प्रमुख कारण टी.बी.के मरीज द्धारा बीच में उपचार छोड़ देना हैं.एक अनुमान के अनुसार लगभग 8% मरीज टीबी उपचार को बीच में ही छोड देतें हैं.




बीच में उपचार छोड़ देनें से यह बीमारी दूसरी बार में बहुत अधिक जटिल रूप में मरीज को प्रभावित करती हैं,जिसे MDR (Multi Drug resistance) और XDR (extreme Drug resistance) के नाम से जाना जाता हैं, इसका उपचार भी अधिक लम्बा और जोखिमपूर्ण होता हैं.क्योंकि मरीज पर दवाईयों का असर बहुत कम होता हैं.




विश्व भर में टी.बी.के 1 करोड़ मरीज पायें जातें हैं,जिसमें से लगभग 28 लाख मरीज भारत में हैं,यानि कुल मरीजों का 25% यह स्थिति हमारें लिये बहुत अधिक चिंताजनक हैं,क्योंकि टी.बी.ग्रस्त इन 25% लोगों में 70% लोग कामकाजी उम्र से संबध रखतें हैं.




कामकाजी उम्र में टी.बी.होनें का सीधा मतलब हैं,देश की अर्थव्यवस्था इन लोगों की अनुत्पादकता की वज़ह से पिछड़ी हुई होगी.



जबकि हमारें पास टी.बी.का प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं,और थोड़े से प्रयास से हम इस वर्ग पुन: कामकाजी वर्ग में सम्मिलित कर सकतें हैं.




टी.बी.का जोखिम किन लोगों मे अधिक होता हैं 



१.कोयला खदानों,स्लेट उघोगों,पत्थर खदानों,क्रेशर मशीनों आदि में काम करनें वालें मज़दूर ।


२.धूम्रपान करनें वालें व्यक्ति , भारत में होने वाले टीबी रोग में लगभग 8 प्रतिशत टीबी का कारण तम्बाकू सेवन हैं ।


३.कुपोषित व्यक्ति या कुपोषित बच्चें



४.गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति


५.अस्थमा,copd आदि से जूझ रहे व्यक्ति



# भारत में टी.बी.से मौतें ::



टी.बी.भारत की 5 प्रमुख जानलेवा बीमारीयों में से एक हैं,जिससे प्रतिवर्ष 4.5 लाख लोग काल के गाल में समा जातें हैं.इस बीमारी से मृत्यु के मामलें में भारत शीर्ष राष्ट्रों में सम्मिलित हैं.

भारत में टीबी चिकित्सकीय व्याधि से बढ़कर सामाजिक व्याधि हैं. सामाजिक बहिष्कार के ड़र से परिवार टीबी को गोपनीय रखतें हैं और निजी चिकित्सको के पास इलाज करवाते रहतें हैं,जबकि टीबी की विश्वस्तरीय और WHO के मानदंडों पर खरी दवाईयाँ सरकारी अस्पतालों में आसानी से उपलब्ध हैं.




# टी.बी.से निपटनें की कार्ययोजना ::




विश्व स्वास्थ संगठन (W.H.O.)ने टी.बी.मुक्त विश्व के लिये सन् 2030 तक की समयसीमा तय की हैं,इसी सन्दर्भ में भारत ने एक कदम आगे बढ़तें हुये इस लक्ष्य को सन् 2025 तक प्राप्त करनें का संकल्प लिया हैं.



ट्यूबरकुलोसिस को समाप्त करनें हेतू भारत ने " टी.बी.मुक्त भारत" अभियान की शुरूआत की हैं,जिसका नारा हैं " टी.बी.हारेगा,देश जितेगा"



इस लक्ष्य को प्राप्त करनें के लियें यूनिवर्सल D.S.T.प्रणाली की शुरूआत की गई हैं,जिसके माध्यम से टी.बी.मरीजों का प्रभावी उपचार किया जा रहा हैं.



इसके अलावा सन् 2012 में इस बीमारी को अधिसूचित बीमारी माना गया हैं,जिसका इलाज किसी प्राइवेट अस्पताल में नहीं हो सकता ,यदि प्राइवेट अस्पताल में कोई टी.बी.का मरीज पँहुचता हैं,तो इसकी जानकारी नज़दीकी सरकारी अस्पताल या जिला क्षय अधिकारी को देना अनिवार्य कर दिया गया हैं.



सरकारी अस्पताल के कर्मीयों के लिये भी टी.बी.मरीज की जानकारी छुपाना अपराध घोषित कर दिया गया हैं.




टी.बी.के इलाज के लिये Joint T.B.Monitoring Mission बनाया गया हैं,जिसमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को सम्मिलित कर निगरानी का प्रभावी और निष्पक्ष माँड़ल तय किया गया हैं.




W.H.O.भी टी.बी.उन्मूलन के लिये भारत को तकनीक और दिशा निर्देश प्रदान कर रहा हैं,जिससे यह बीमारी जल्द से जल्द समाप्त हो.



# टी.बी.मरीज के लिये सावधानियाँ :::





#१.टी.बी.का इलाज करवातें समय बीच में इलाज नही छोड़ना चाहियें.



#२.खाँसते छींकतें या किसी से बात करतें वक्त मुहँ को रूमाल या कपड़े से ढँककर रखे.



#३.मरीज समुचित भोजन और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का अवश्य सेवन करें.



#४.नियमित योग,कसरत आदि करना चाहियें.




#५.खाँसते वक्त निकलें बलगम को किसी विसंक्रमित बर्तन में ही थूँके और बाद में इसका निस्तारण भी विसंक्रमित करके ही करें.




#६.टी.बी.दवाईंयों के सेवन से कई बार मरीजों को चक्कर आना,भूख न लगना,उल्टी होना,बुखार,चिढचिढापन,खुजली आदि जैसी समस्याएँ हो जाती हैं । किन्तु इस प्रकार की समस्याओं से घबराकर दवाई बंद नही करना चाहियें बल्कि चिकित्सकीय सलाह का पालन कर दवाई निरंतर रखना चाहियें ।






० सिंघाड़े के फायदे






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