बुधवार, 14 सितंबर 2016

तम्बाकू (Tobacco) और उससे होनें वालें स्वास्थगत नुकसान का विश्लेषण

#1.भारत में तम्बाकू (Tobacco) का इतिहास

भारत में तम्बाकू (Tobacco) मुगलों के समय प्रचलन में आया कहा जाता हैं,कि बादशाह अकबर को एक पुर्तगाली जिसका नाम वर्नेंल था ने एक सुंदर चिलम और तम्बाकू भेंट़ किया था, अकबर को चिलम मुँह में रखकर धुँआ छोड़नें में इतना मज़ा आया कि सब दरबारी भी इसे राजसी वस्तु समझकर इसके दीवानें हो गयें ,इसके बाद जहाँगीर के शासनकाल में भारत तम्बाकू का बड़ा उत्पादक बन गया और इसे अन्य रूपों जैसे हुक्का,खैनी आदि रूपों में उपयोग किया जानें लगा.

#2.तम्बाकू की लत क्यों होती हैं :::

ऐसा क्यों होता हैं,कि दो चार बार तम्बाकू सेवन करनें के बाद मनुष्य इसका आदि होनें लगता हैं .इसका कारण हैं,जीन जिसका नाम रखा गया हैं,डेल (Del) यह डेल नामक जीन निकोटीन का स्तर खून में बनाये रखता हैं,और कम होनें पर तुरन्त मस्तिष्क को निकोटीन प्राप्त करनें का सन्देंश देता हैं.इस प्रकार मनुष्य तम्बाकू की और उन्मुख होता चला जाता हैं.

#3.तम्बाकू में पाये जानें वाले तत्व और उनसे होनें वाला नुकसान :::


 1.निकोटीन.     |  कैंसर, उच्च रक्तचाप.

 2.कार्बन मोनो. |   ह्रदय रोग,अस्थमा.

 3.मार्श गैस.      |  नपुसंकता

 4.अमोनिया      | पेट़ की बीमारीयाँ.

 5.कोलोडाँन.    | सिरदर्द,माइग्रेन

 6.पापरिजीन.   | अन्धापन.

 7.कार्बों.एसिड़  | अनिद्रा

 8.परफैराल.      | कमज़ोर दाँत

 9.फास्फोरिल    | टी.बी.,खाँसी

10.साइनोजोन.  | रक्त विकार

कैंसर का इलाज आयुर्वैद द्धारा
इन तत्वों के अलावा भी तम्बाकू में अनेक प्रकार के लगभग चार हज़ार मिश्रित तत्व उपस्थित रहतें हैं,जैसे बेंजीपाइरिन,पोलोनियम -210,और टार.टार नामक रसायन फेफडों, नाक,और गले में जमा होकर धिरें - धिरें सम्पूर्ण शरीर में पहुँच जाता हैं,कोशिकाओं की झिल्लि फाड़कर उसमें प्रवेश कर जाता हैं और कैंसर का कारण बनता हैं.
अधिकांश युवा सिगरेट़ के कस के साथ शराब भी पीतें हैं जो दोहरा जानलेवा होता हैं,क्योंकि सिगरेट़ का धुँआ अल्कोहल के साथ अभिक्रिया करके एक ख़तरनाक तत्व में परिवर्तित हो जाता हैं,जो रक्त में उपस्थित कोलेस्ट्राल की सफाई की प्रक्रिया को धीमा कर देता हैं,नतीजन अधिक कोलेस्ट्राल से ह्रदयघात का खतरा पैदा हो जाता हैं.
सिगरेट़ ,बीड़ी का धुँआ हमारें स्नायुतंत्र पर गंभीर नुकसान पहुँचाता हैं ,क्योंकि इसमें उपस्थित कार्बन मोनोंआक्साइड़ गैस मस्तिष्क से आक्सीजन का स्तर घटा देती हैं,नतीजन याददाश्त कमज़ोर होना,मतिभ्रम,और पागलपन जैसी समस्या पैदा हो जाती हैं.

नाश करता नशा

#4.बच्चों में तम्बाकू का दुष्प्रभाव :::

बच्चें या नवजात शिशु पर तम्बाकूजनित धूम्रपान का बहुत ही घातक प्रभाव देखनें को मिला हैं.जब कोई व्यक्ति घर के अन्दर या कार में धूम्रपान करता हैं,तो तम्बाकू में उपस्थित खतरनाक केमिकल धुँए के साथ कमरें की दीवारों,फर्श,बिस्तर और बच्चों के खिलोनें पर चिपक जातें हैं.ये खतरनाक  तत्व जब बच्चें के सम्पर्क में आतें हैं,तो कैंसरकारी केमिकल कम्पाउंड बनाते हैं.जो बच्चों में कैंसर के लिये उत्तरदायी हैं.
एक अध्ययन के मुताबिक बच्चों में होनें वाले कैंसर के 60% मामलों के लिये तम्बाकू उत्तरदायी होता हैं.

यदि ये तत्व बच्चें के खिलोनें पर चिपकतें हैं,और यदि बच्चा इन खिलोंनों को मुँह में लेता है तो बच्चों में अस्थमा होनें तथा उनकी वृद्धि रूकनें का खतरा पैदा हो जाता हैं.

#5. महिलाओं में तम्बाकू के दुष्प्रभाव :::


महिलाओं में तम्बाकू से होनें वाला नुकसान पुरूषों के मुकाबले दस गुना अधिक होता हैं.क्योंकि महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता पुरूषों के मुकाबले कमज़ोर होती हैं.

यदि महिला धूम्रपान कर रही हैं,तो तम्बाकू का सबसे घातक प्रभाव देखने को मिलता हैं,जिसमें शामिल हैं अनियमित मासिक चक्र,गर्भधारण करनें में परेशानी ,यदि स्त्री गर्भवती होकर धूम्रपान कर रही हैं,तो  निकोटीन और कार्बन मोनो आक्साइड़ बच्चें की आक्सीजन आपूर्ति को बाधित कर देंते हैं,जिससे बच्चा जन्मजात श्वसन संबधी समस्याओं के साथ पैदा होता हैं.या मृत भी पैदा हो सकता हैं.

तम्बाकू का खैनी,गुटका के रूप में इस्तेमाल करने से मनुष्य नपुसंक हो जाता हैं.एक समस्या और भी पैदा होती हैं,वह हैं,भोजन का नहीं पचना,एसीडीटी और भारीपन होना क्योंकि गुटका,खैनी थूकनें के दोरान वह अनेक ऐसे एंजाइम को भी थूक देता हैं,जो भोजन को पचातें हैं.

पूरी दुनिया में तम्बाकू का उपयोग करनें वाले, इन चेतावनियों से परिचित होनें के बाद भी इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं,भारत में तो तम्बाकू खपत में कमी आनें के बजाय बढ़ोतरी हो रही हैं,यह बढ़ोतरी महिलाओं और युवाओं में अधिक देखी जा रही हैं.विश्व स्वास्थ संगठन ने चेतावनी देकर कहा हैं,कि यदि तम्बाकू के बढ़ते प्रचलन को नहीं रोका गया तो आने वाले समय में विकासशील देशों को अपने सकल घरेलू उत्पाद का बढ़ा हिस्सा तम्बाकूजनित रोगों के उपचार में ख़र्च करना पड़ेगा.सोचियें यदि कोई विकासशील राष्ट्र अपनें युवाओं का उपचार करनें में ही अपना अधिकांश संसाधन ख़पा दे,तो उस राष्ट्र का उदय होनें से पूर्व पतन निश्चित हैं.

                       

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