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तम्बाकू (Tobacco) और उससे होनें वालें स्वास्थगत नुकसान का विश्लेषण

भारत में तम्बाकू (Tobacco) का इतिहास


भारत में तम्बाकू (Tobacco) मुगलों के समय प्रचलन में आया कहा जाता हैं,कि बादशाह अकबर को एक पुर्तगाली जिसका नाम वर्नेंल था ने एक सुंदर चिलम और तम्बाकू भेंट़ किया था, अकबर को चिलम मुँह में रखकर धुँआ छोड़नें में इतना मज़ा आया कि सब दरबारी भी इसे राजसी वस्तु समझकर इसके दीवानें हो गयें ,इसके बाद जहाँगीर के शासनकाल में भारत तम्बाकू का बड़ा उत्पादक बन गया और इसे अन्य रूपों जैसे हुक्का,खैनी आदि रूपों में उपयोग किया जानें लगा.


#2.तम्बाकू की लत क्यों होती हैं tamaku ki lat :::


ऐसा क्यों होता हैं,कि दो चार बार तम्बाकू सेवन करनें के बाद मनुष्य इसका आदि होनें लगता हैं .इसका कारण हैं,जीन जिसका नाम रखा गया हैं,डेल (Del) यह डेल नामक जीन निकोटीन का स्तर खून में बनाये रखता हैं,और कम होनें पर तुरन्त मस्तिष्क को निकोटीन प्राप्त करनें का सन्देंश देता हैं.इस प्रकार मनुष्य तम्बाकू की और उन्मुख होता चला जाता हैं.


#3.तम्बाकू में पाये जानें वाले तत्व  :::



 1.निकोटीन.     |  कैंसर, उच्च रक्तचाप.


 2.कार्बन मोनो. |   ह्रदय रोग,अस्थमा.


 3.मार्श गैस.      |  नपुसंकता


 4.अमोनिया      | पेट़ की बीमारीयाँ.


 5.कोलोडाँन.    | सिरदर्द,माइग्रेन


 6.पापरिजीन.   | अन्धापन.


 7.कार्बों.एसिड़  | अनिद्रा


 8.परफैराल.      | कमज़ोर दाँत


 9.फास्फोरिल    | टी.बी.,खाँसी


10.साइनोजोन.  | रक्त विकार



इन तत्वों के अलावा भी तम्बाकू में अनेक प्रकार के लगभग चार हज़ार मिश्रित तत्व उपस्थित रहतें हैं,जैसे बेंजीपाइरिन,पोलोनियम -210,और टार.टार नामक रसायन फेफडों, नाक,और गले में जमा होकर धिरें - धिरें सम्पूर्ण शरीर में पहुँच जाता हैं,कोशिकाओं की झिल्लि फाड़कर उसमें प्रवेश कर जाता हैं और कैंसर का कारण बनता हैं.

तम्बाकू के हानिकारक प्रभाव



अधिकांश युवा सिगरेट़ के कस के साथ शराब भी पीतें हैं जो दोहरा जानलेवा होता हैं,क्योंकि सिगरेट़ का धुँआ अल्कोहल के साथ अभिक्रिया करके एक ख़तरनाक तत्व में परिवर्तित हो जाता हैं,जो रक्त में उपस्थित कोलेस्ट्राल की सफाई की प्रक्रिया को धीमा कर देता हैं,नतीजन अधिक कोलेस्ट्राल से ह्रदयघात का खतरा पैदा हो जाता हैं.



सिगरेट़ ,बीड़ी का धुँआ हमारें स्नायुतंत्र पर गंभीर नुकसान पहुँचाता हैं ,क्योंकि इसमें उपस्थित कार्बन मोनोंआक्साइड़ गैस मस्तिष्क से आक्सीजन का स्तर घटा देती हैं,नतीजन याददाश्त कमज़ोर होना,मतिभ्रम,और पागलपन जैसी समस्या पैदा हो जाती हैं.


नाश करता नशा



#4.बच्चों में तम्बाकू का दुष्प्रभाव :::


बच्चें या नवजात शिशु पर तम्बाकूजनित धूम्रपान का बहुत ही घातक प्रभाव देखनें को मिला हैं.जब कोई व्यक्ति घर के अन्दर या कार में धूम्रपान करता हैं,तो तम्बाकू में उपस्थित खतरनाक केमिकल धुँए के साथ कमरें की दीवारों,फर्श,बिस्तर और बच्चों के खिलोनें पर चिपक जातें हैं.ये खतरनाक  तत्व जब बच्चें के सम्पर्क में आतें हैं,तो कैंसरकारी केमिकल कम्पाउंड बनाते हैं.जो बच्चों में कैंसर के लिये उत्तरदायी हैं.
एक अध्ययन के मुताबिक बच्चों में होनें वाले कैंसर के 60% मामलों के लिये तम्बाकू उत्तरदायी होता हैं.


यदि ये तत्व बच्चें के खिलोनें पर चिपकतें हैं,और यदि बच्चा इन खिलोंनों को मुँह में लेता है तो बच्चों में अस्थमा होनें तथा उनकी वृद्धि रूकनें का खतरा पैदा हो जाता हैं.


#5. महिलाओं में तम्बाकू के दुष्प्रभाव :::



महिलाओं में तम्बाकू से होनें वाला नुकसान पुरूषों के मुकाबले दस गुना अधिक होता हैं.क्योंकि महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता पुरूषों के मुकाबले कमज़ोर होती हैं.



यदि महिला धूम्रपान कर रही हैं,तो तम्बाकू का सबसे घातक प्रभाव देखने को मिलता हैं,जिसमें शामिल हैं अनियमित मासिक चक्र,गर्भधारण करनें में परेशानी ,यदि स्त्री गर्भवती होकर धूम्रपान कर रही हैं,तो  निकोटीन और कार्बन मोनो आक्साइड़ बच्चें की आक्सीजन आपूर्ति को बाधित कर देंते हैं,जिससे बच्चा जन्मजात श्वसन संबधी समस्याओं के साथ पैदा होता हैं.या मृत भी पैदा हो सकता हैं.



तम्बाकू का खैनी,गुटका के रूप में इस्तेमाल करने से मनुष्य नपुसंक हो जाता हैं.एक समस्या और भी पैदा होती हैं,वह हैं,भोजन का नहीं पचना,एसीडीटी और भारीपन होना क्योंकि गुटका,खैनी थूकनें के दोरान वह अनेक ऐसे एंजाइम को भी थूक देता हैं,जो भोजन को पचातें हैं.

पूरी दुनिया में तम्बाकू का उपयोग करनें वाले, इन चेतावनियों से परिचित होनें के बाद भी इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं,भारत में तो तम्बाकू खपत में कमी आनें के बजाय बढ़ोतरी हो रही हैं,यह बढ़ोतरी महिलाओं और युवाओं में अधिक देखी जा रही हैं.



विश्व स्वास्थ संगठन ने चेतावनी देकर कहा हैं,कि यदि तम्बाकू के बढ़ते प्रचलन को नहीं रोका गया तो आने वाले समय में विकासशील देशों को अपने सकल घरेलू उत्पाद का बढ़ा हिस्सा तम्बाकूजनित रोगों के उपचार में ख़र्च करना पड़ेगा.सोचियें यदि कोई विकासशील राष्ट्र अपनें युवाओं का उपचार करनें में ही अपना अधिकांश संसाधन ख़पा दे,तो उस राष्ट्र का उदय होनें से पूर्व पतन निश्चित हैं.

भारत और तम्बाकू 

भारत में तम्बाकू उपभोग करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है विशेषज्ञों के मुताबिक जिस तरह से तम्बाकू उत्पादों का प्रचार प्रसार में समाज का प्रतिष्ठित वर्ग शामिल हैं उससे युवा वर्ग इस बुराई के प्रति अधिक आकर्षित हो रहा है । ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के मुताबिक भारत में तम्बाकू प्रारंभ करने की औसत उम्र 18.7 वर्ष हैं।

आंकड़ों की मानें तो भारत में 27 करोड़ तम्बाकू का किसी न किसी रूप में सेवन करते हैं और प्रतिवर्ष लगभग 12 लाख लोग तम्बाकू की वजह से होने वाली बीमारियों से मौंत के मुंह में समा जातें हैं। 

भारत में तम्बाकू पर प्रतिबंध हेतू अनेक गैर सरकारी संगठन प्रयासरत हैं किन्तु सरकार तम्बाकू उत्पादों से प्राप्त राजस्व के कारण तम्बाकू को प्रतिबंधित करने में असमर्थ नजर आती है, किंतु विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार को तम्बाकू उत्पादों से प्राप्त राजस्व की तुलना तम्बाकू से पैदा होने वाली बीमारियों पर अधिक पैसा खर्च करना पड़ रहा उदाहरण के तौर पर सरकार को प्रतिवर्ष तम्बाकू से 35 हजार करोड़ रुपए प्राप्त होते हैं किन्तु तम्बाकू से होने वाली बीमारियों के उपचार पर भारत सरकार 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर देती हैं ,साथ ही देश का बड़ा कामकाजी वर्ग जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी होता है असमय काल के गाल में समा जाता है।



मादकद्रव्यों का सेवन अनादिकाल से ही होता आया हैं.देवता भी इसके प्रभाव से अछूतें नहीं रह सकें हैं,सोमरस के साथ देवताओं की महफिल सजा करती थी.

भांग ओर गांजा तो धार्मिक और सांस्कृतिक रिति - रिवाजों में बस चुके हैं.

किन्तु यहाँ इनका प्रयोग की सीमित ही अनुमति दी गई हैं.

 किन्तु वर्तमान समय की बात की जायें तो प्रत्येक प्रकार के नशे का बढ़ता चलन न केवल स्वास्थ को नुकसान पहुँचा रहा हैं,बल्कि अनेक सामाजिक समस्याओं को जन्म दे रहा हैं जैसें

###पारिवारिक विघट़न :::


एक समाजशास्त्रीय शोध के अनुसार प्रत्येक पारिवारिक लड़ाई झगड़ो एँव मनमुटाव के पिछे आर्थिक कारणों के साथ मघपान या दूसरें नशों का सेवन मुख्य कारण हैं.

दहेज के उत्पीड़न के मामलों में 60% के मूल में पति, पत्नि या घर के दूसरे सदस्यों का नशा करना भी शामिल हैं. 

नशा करनें का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव परिवार झेलता हैं, सोचियें यदि घर में कोई एक कमाने वाला पुरूष अपनी कमाई का तीन चौथाई भाग नशे में उड़ा दे,तो परिवार विघटित हो जायेगा,

पत्नि बच्चों के पालन पोषण के लिये या तो मेहनत मज़दूरी करेगी या उसे अनेतिक कार्यों के लिये मज़बूर होना पड़ेगा.

बच्चे पढ़ाई लिखाई बीच में छोड़नें को मज़बूर होगें और मेहनत मज़दूरी करेगें या आपराधिक गतिविविधियों में संलग्न होगें .

यही बच्चें आगे चलकर संगठित अपराधों को जन्म देतें हैं.इसका सबसे बड़ा नुकसान देश और समाज को झेलना पड़ता हैं .देखिये 
व्यक्ति ने नशा किया.
परिवार विघटित हुआ
बच्चा बालश्रमिक बना या अपराधी बना.
स्त्री देह व्यापार की और उन्मुख हुई.
कानून व्यवस्था की समस्या में राष्ट्र की बढ़ी पूंँजी खर्च हुई.


नशेड़ी व्यक्ति के स्वास्थ की खराबी जैसे किड़नी फेल होना और अन्य बीमारीयों पर होनें वाला स्वास्थ खर्च राष्ट्र की उत्पादकता को नष्ट करता हैं.



###व्यक्तित्व विघट़न :::


मादक द्रव्यों के सेवन madak drvyo ke sevan से व्यक्ति इनका आदि हो जाता हैं.फलस्वरूप शारीरिक क्रियाएँ असामान्य हो जाती हैं. 

जब व्यक्ति को नशा उपलब्ध नहीं होता हैं,तो चाहे अनियमित गतिविधियाँ ही क्यों नहीं करना पड़े व्यक्ति करता हैं .

छोटी बच्चीयों और बुजुर्ग स्त्रीयों के साथ होनें वाला बलात्कार अधिकांशत: ऐसे नशेड़ी व्यक्ति द्धारा ही होता हैं.महात्मा गाँधी ने यंग इंड़िया में लिखा हैं कि
शराब और अन्य मादक द्रव्यों से होनें वाली हानि कई अंशों में मलेरिया आदि बीमारियों से होनें वाली हानि की अपेक्षा असंख्य गुनी ज्यादा हैं,क्योंकि बीमारी से तो कैवल शरीर का नुकसान होता हैं किन्तु शराब और अन्य मादक द्रव्यों के सेवन से तो आत्मा और शरीर दोंनों नष्ट हो जातें हैं.

 महात्मा गांधी द्धारा कही गई उपरोक्त बातें सदियों बात भी प्रासंगिक हैं.अनेक बीमारियों की जड़ में भी नशा ही हैं. 

यदा कदा हम सुनतें रहतें हैं,कि बच्चा कुपोषण (malnutrition) से मर गया .बच्चों के कुपोषण से मरनें के मूल में भी नशा ही हैं आखिर क्या वज़ह हैं,कि प्रति व्यक्ति आय आज़ादी के बाद से कई गुना बढ़नें के बाद भी बच्चा कुपोषण से मर रहा हैं यदि गहराई में जाकर विश्लेषण करें तो पायेगें कि जिन परिवारों में मुखिया शराबी हैं,वहाँ कुपोषण से मोतें अधिक होती हैं.

63% किड़नी, लीवर,फेल होनें का  कारण शराब का सेवन हैं. इसी प्रकार अस्थमा, टी.बी.भी मघपान के सेवन से संबधित हैं.

यदि शराब और अन्य नशों के सेवन को समय रहते नियत्रिंत नहीं किया गया तो राष्ट्र को इसकी बढ़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, 

इसके लिये चाहियें कि समाज,गैर - सरकारी संगठन और सरकारें मिलकर उचित कदम उठायें.इनमें नशों के सेवन से होनें वालें दुष्परिणामों का प्रचार प्रसार.नशा छोड़ने के लियें बेहतर पुनर्वास की व्यवस्था शामिल हो.

## सामाजिक विघट़न :::


नशे का बढ़ता प्रचलन व्यक्तिगत रूप तक ही सीमित नही हैं,बल्कि इसका दायरा समाज के बीचों बीच पहुँच गया हैं.

अब धार्मिक कर्मकांड़ो,विवाह समारोह,सगाई समारोह आदि में जमकर नशा किया और कराया जाता हैं,इस बुराई के फलस्वरूप भारतीय समाज व संस्कृति की मूल भावना नष्ट हो रही हैं,और इस पर पश्चिमी संस्कृति का नशा चढ़ रहा हैं.

नशे के कारण रिश्तों में भी दूरियाँ और विघट़न बढ़ रहा हैं,विवाह समारोह में शराब पीकर वर पक्ष के लोगों द्धारा वधू पक्ष के लोगों के साथ गाली गलोज और मारपीट करनें के समाचार सुनतें हैं,और कभी - कभी तो इसकी वज़ह से ही वधू और उनके परिवार के लोग शादी करनें से ही इंकार कर देते हैं,जिसकी वज़ह से परिवारों के बीच तनाव बढ़ जाता हैं.


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