शनिवार, 7 जनवरी 2017

SINGHADE [WATER CHESTNUT] KE FAYDE

परिचय :::
Waterchestnut
 Singhade 

सिंघाडा जलाशयों में पैदा होनें वाला एक अत्यन्त पोष्टिक,शाकाहारी फल हैं,इसकी बाहरी त्वचा कठोर होती हैं,जबकि अन्दर का फल मुलायम,स्वादिष्ट,और सफेद रंग का होता हैं.भारतीयों समाज में सिंघाड़ा अनुपम स्थान रखता हैं, क्योंकि इसके बने आटे की रसोई उपवास जैसे पवित्र तप में उपयोग लाई जाती हैं.

प्रकृति :::

सिंघाड़ा शीत प्रकृति का फल हैं.

सिंघाड़े में पाये जानें वालें पोषक तत्व :::

  पानी                    प्रोटीन.                 फायबर

70 Gm.                 4.7 gm.              0.6mg


  वसा                   शुगर.               खनिज तत्व

0.3 gm.             23.3 gm.            1.1 gm


कैल्सियम.            फास्फोरस.           आयरन

020.0mg.              150 mg.            0.8 mg


पोटेशियम.             मैग्नीशियम.           काँपर

650 mg.                   72 mg.          1.31mg


मैगनीज.                  जिंक               क्रोमियम

0.85 mg.             1.56 mg          0.011mg


थायमिन.              राइबोफ्लेविन.      नियामिन

0.50 mg.               0.07 mg.         0.50mg


विटामिन सी                         एनर्जी

   9.0 mg.                            115 kcal

                                              [प्रति 100 ग्राम]


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सिंघाड़े के फायदे :::


• सिंघाड़ा जल का अति उत्तम स्रोत हैं,अत:जल की कमी होनें पर सिंघाड़े का सेवन अति लाभप्रद हैं,सफर के दोरान या पर्वतारोहण के समय सिंघाड़े को खानें से थकावट़ महसूस नहीं होती हैं.

• अतिसार [Dysentery] में सिंघाड़े का सेवन बहुत लाभदायक होता हैं,इसमें उपस्थित जिंक पतले दस्त में शीघ्र आराम देता हैं.

• कब्ज होनें पर इसका सेवन रात को भोजन के पश्चात किया जावें तो सुबह खुलकर पाखाना आता हैं.

• इसमें उपस्थित फायबर आंतों की गहराई से सफाई करता हैं,और उन्हें मज़बूत बनाता हैं.

• पायरिया या दाँतो से संबधित कोई अन्य समस्या होनें पर सिंघाड़े के छिलके पीसकर मंजन की तरह इस्तेमाल करें.इसके फल को खानें से भी बहुत फायदा होता हैं,क्योंकि यह विटामिन सी का उत्तम स्रोत हैं,जो कि स्वस्थ दांतों और मसूड़ो के लिये आवश्यक हैं.

• कुपोषण से ग्रसित किशोरों और बच्चों को यदि नियमित रूप से 100 gm सिंघाड़े खिलायें जायें तो तीन मास की अवधि में कुपोषण समाप्त हो जावेंगा.

• इसके आट़े से बनी रोटी गर्भवती स्त्रीयाँ खायें तो न केवल बच्चा तंदुरूस्त पैदा होगा,बल्कि प्रसव पश्चात माताओं को दूध भी पर्याप्त मात्रा में और लम्बें समय तक आयेगा.

• हड्डीयों से संबधित समस्या होनें जैसें fracture, हड्डी का अपनी जगह से खिसकना आदि में इसका सेवन बहुत लाभदायक होता हैं.साथ ही इसके गुदे को पीसकर fracture वाली जगह बांधनें से दर्द कम हो जाता हैं,तथा पेनकिलर लेनें की आवश्यकता नहीं पड़ती हैं.

• बच्चों के दाँत निकलते समय इसका सेवन करवानें से बच्चों को होनें वाली शारीरिक परेशानी नहीं होती और दाँत आसानी से निकलतें हैं.

• टाँफी,चाकलेट आदि पदार्थों के सेवन से बच्चों के दाँत बहुत जल्दी ख़राब होतें ऐसे में सिंघाड़े का सेवन अत्यन्त लाभकारी हैं,क्योंकि इसमें उपस्थित कैल्सियम और फास्फोरस दाँतों को खराब नही होनें देता.

• पथरी की समस्या होनें पर सिंघाड़े के आटे़ में हल्का नमक मिलाकर रोटी बनाकर खायें बहुत आराम मिलेगा.

• सिंघाड़ा रक्तचाप नियत्रिंत करता हैं.अत : रक्तचाप को नियमित करनें के लिये इसका सेवन बहुत चमत्कारिक परिणाम देता हैं.

• सिंघाड़े में शर्करा पर्याप्त मात्रा में उपस्थित होती हैं,जो मधुमेह रोगीयों के लिये भी अहानिकारक होती हैं.

• मिरगी रोग की समस्या होनें पर इसके आट़े का हलवा गाय के दूध में बनाकर खिलाना चाहियें.

• सिंघाड़ा " मस्तिष्क आहार" हैं,इसमें उपस्थित खनिज़ पदार्थ मस्तिष्क का सम्पूर्ण विकास करनें में मदद करतें हैं.

• सिंघाड़ा शरीर से विषैलें पदार्थों को बाहर निकालकर कैंसर जैसें रोग से बचाता हैं.

• इसमें पानी पर्याप्त मात्रा में होता हैं,जो त्वचा में नमी का स्तर बनायें रखता हैं,फलस्वरूप त्वचा मुलायम और कांतिमय बनी रहती हैं.इसके लियें सिंघाड़े का सेवन और इसके आटे का उबटन शरीर पर लगाया जाता हैं.

• इसमें पोटेशियम होता हैं,जो किड़नी की कार्यपृणाली को सुचारू रूप से चलाता हैं,अत : किड़नी रोगीयों के लियें सिंघाड़ा वरदान हैं.

तो दोस्तों हैं,ना सिंघाड़ा अनुपम फल.


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