सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

रीढ़ की हड्डी में‌ दर्द कैसे दूर करने के लिए सर्जरी

 भारत समेत पूरी दुनिया में बैठकर काम करने वालों का एक बहुत बड़ा वर्ग रीढ़ की हड्डी में दर्द की समस्या को लेकर बहुत परेशान हैं। और रीढ़ की हड्डी में दर्द को समाप्त करनें के तमाम जतन कर रहा हैं उदाहरण के लिए फिजियोथेरेपी, पंचकर्म चिकित्सा किंतु समस्या का पूर्ण निदान नहीं हो पाता है। और लम्बें समय बाद समस्या ओर गंभीर हो जाती हैं। 


रीढ़ की हड्डी में दर्द को स्थाई रूप से समाप्त करनें के लिए आजकल एक नवीन तकनीक Percutaneous disc Nucleoplasty बहुत प्रचलन में हैं ।


आईए जानतें हैं percutaneous disc nucleoplasty के बारें में

सर्जरी


1.Percutaneous disc Nucleoplasty एक प्रकार की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी बिना चीरा बिना टांका पद्धति से की जानें वाली सर्जरी हैं।


2.percutaneous disc nucleoplasty में रीढ़ की हड्डी के उस फैलाव को नियंत्रित किया जाता हैं जिसमें रीढ़ की हड्डी की नस दबती हैं।


3.रेडियोफ्रीक्वेंसी उपकरणों को एक छोटे-से छेद के माध्यम से रीढ़ की हड्डी तक पहुंचाकर रीढ़ की हड्डी के उन फैलाव को हटाया जाता हैं जो रीढ़ की हड्डी में दर्द के कारण हैं।


4.percutaneous disc nucleoplasty में मरीज को बेहोश करने की जरूरत नहीं पड़ती और कुछ ही घंटों में आपरेशन संपन्न होकर मरीज अपने घर जा सकता हैं।


5.percutaneous disc nucleoplasty की रिकवरी दर बहुत तेज हैं और कुछ ही दिनों में मरीज पुनः अपने सामान्य कामकाज कर सकता हैं।


6.मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, उम्र तथा जीवनशैली से संबंधित अन्य बीमारी से पीड़ित रोगी में भी percutaneous disc nucleoplasty तकनीक पूरी तरह सुरक्षित होती हैं।


7.percutaneous disc nucleoplasty अन्य प्रकार की ओपन सर्जरी के मुकाबले अधिक कारगर सर्जरी हैं,percutaneous disc nucleoplasty के बाद रीढ़ की हड्डी के दर्द का स्थाई समाधान हो जाता हैं।


8.percutaneous disc nucleoplasty में मरीज को रक्त की आवश्यकता नहीं पड़ती हैं।


9.percutaneous disc nucleoplasty तकनीक बहुत सटीक तकनीक हैं इस तकनीक के द्वारा सिर्फ उन हिस्सों को ही हटाया जाता हैं जिनसे तकलीफ होती हैं। 


10.percutaneous disc nucleoplasty में गलत नस कटने का जोखिम नहीं होता हैं।


 Author:: healthylifestyehome

Reviewed by

Dr N.Nagar
MBBS,MD


• हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले की सावधानी

• स्पाइनल एवीएम

• स्पाइनल स्ट्रोक क्या होता हैं

• मांसपेशियों में दर्द का घरेलू उपचार

• सिकल सेल एनिमिया

• अच्छे डाक्टर की पहचान कैसे करें

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गेरू के औषधीय प्रयोग

गेरू के औषधीय प्रयोग गेरू के औषधीय प्रयोग   आयुर्वेद चिकित्सा में कुछ औषधीयाँ सामान्य जन के मन में  इतना आश्चर्य पैदा करती हैं कि कई लोग इन्हें तब तक औषधी नही मानतें जब तक की इनके विशिष्ट प्रभाव को महसूस नही कर लें । गेरु भी उसी श्रेणी की   आयुर्वेदिक औषधी   हैं। जो सामान्य मिट्टी   से   कहीं अधिक   इसके   विशिष्ट गुणों के लिए जानी जाती हैं। गेरु लाल रंग की मिट्टी होती हैं। जो सम्पूर्ण भारत में बहुतायत मात्रा में मिलती हैं। इसे गेरु या सेनागेरु कहते हैं। गेरू आयुर्वेद की विशिष्ट औषधी हैं जिसका प्रयोग रोग निदान में बहुतायत किया जाता हैं । गेरू का संस्कृत नाम  गेरू को संस्कृत में गेरिक ,स्वर्णगेरिक तथा पाषाण गेरिक के नाम से जाना जाता हैं । गेरू का लेटिन नाम  गेरू   silicate of aluminia  के नाम से जानी जाती हैं । गेरू की आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति गेरू स्निग्ध ,मधुर कसैला ,और शीतल होता हैं । गेरू के औषधीय प्रयोग 1. आंतरिक रक्तस्त्राव रोकनें में गेरू शरीर के किसी भी हिस्से में होनें वाले रक्तस्त्राव को कम करने वाली सर्वमान्य औषधी हैं । इसके लिय

टीकाकरण चार्ट [vaccination chart] और संभावित प्रश्न

 टीकाकरण चार्ट # 1.गर्भावस्था के समय टीकाकारण ::: गर्भावस्था की शुरूआत में Titnus का पहला टीका टी.टी - 1. टी.टी -1 के चार सप्ताह बाद टी.टी.-2 यदि पिछली गर्भावस्था में टी.टी - 2 दिया गया हैं,तो केवल बूस्टर दीजिए. # टीके की मात्रा ,कैसें और कहाँ दें 0.5 ml.मात्रा प्रशिक्षित व्यक्ति द्धारा ऊपरी बांह की मांसपेशी में. # महत्वपूर्ण गर्भावस्था के 36 सप्ताह हो गयें हो तो मात्र टी.टी.- बूस्टर देना चाहियें.  टीकाकरण का दृश्य # 2.शिशुओं के लियें टीकाकरण  #जन्म के समय ::: 1. B.C.G.  =     0.1 ml बाँह पर त्वचा के निचें. 2.हेपेटाइटिस बी.=  0.5 ml मध्य जांघ के बाहरी हिस्सें पर मांसपेशी में 3.o.p.v.या oral polio vaccine = दो बूँद मुहँ में . ०  जानिये पोलियो क्या होता हैं ? #6 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. = 0.5 ml 2.D.P.T. = 0.5 ml मध्य जांघ का बाहरी हिस्सें में माँसपेशियों में. 3.o.p.v.या oral polio vaccine. #10 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. 2.D.P.T. 3.o.p.v. #14 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. 2.D.P.T. 3.o.p.v.   #9 से 12 माह

काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan

धतूरा भगवान शिव का प्रिय पौधा है। भगवान शिव धतूरा अपने मस्तिष्क पर धारण करते हैं और जो लोग धतूरा भगवान शिव को अर्पण करते थे वे उन्हें मनचाहा आशीष प्रदान करते हैं। धतूरा भी कई प्रकार का होता है जैसे काला धतूरा, सफेद धतूरा, पीला धतूरा आदि। आज हम आपको "काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan" के बारे में बताएंगे।  काला धतूरा के फायदे और नुकसान आयुर्वेद आयुर्वेद चिकित्सा में काला धतूरा बहुत महत्वपूर्ण औषधि के रूप में बहुत लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है । धतूरा बहुत ही जहरीला फल होता है , प्रकृति में गर्म और भारी होता है। काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम धतूरा स्ट्रामोनियम DHATURA STRAMONIUM है । अंग्रेजी में इसे डेविल्स एप्पल Devil's apple, डेविल्स ट्रम्पेट Devil's trumpet के नाम से जाना जाता है। संस्कृत में इसे दस्तूर, मदन, उन्मत्त ,शिव प्रिय महामोधि, कनक आदि नाम से जानते हैं। काला धतूरा की पहचान कैसे करें  काला धतूरा के पत्ते नोक दार ,डंठल युक्त और बड़े आकार के होते हैं। काला धतूरा के फूल घंटी