सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

फ्रांस की क्रांति ,इसके कारण और परिणाम { what is Francis Revolution) #Cause#

#00.फ्रांस की क्रांति {French Revolution} •••••

फ्रांस की क्रांति सन् 1789 - 1799 ई.के मध्य फ्रांस के इतिहास में सामाजिक और राजनितिक उथल - पुथल की अवधि थी .
क्रांति का चित्र
 फ्रांस की क्रांति एक दृश्य

जिसके दोरान फ्रांस की सरकारी संरचना जो पहलें कैथोलिक पादरी और कुलीन वर्ग के लियें सामंतवादी विशेषाधिकारों और राजशाही पद्धति पर आधारित थी,में आमूल परिवर्तन हुआ और स्वतंत्रता, विधि सम्मत समानता,भातृत्व और नागरिकता पर आधारित हो गई.
 

#00.क्रांति के कारण (Causes of revolution) •••••


              //// सामाजिक कारण ////

##.फ्रांस का समाज 3 वर्गों में विभाजित था. जिन्हें एस्टेट़ कहा जाता था.
प्रथम एस्ट़ेट़ में केथोलिक पादरी ,दूसरें वर्ग में कुलीन ,वकील और 3 रे वर्ग में छोंट़े किसान,श्रमिक और छोट़ें व्यापारी सम्मिलित थें.

##.इन 3 एस्ट़ेट़ में से पहलें एस्ट़ेट़ को कुछ जन्मना अधिकार प्राप्त थें,जबकि तीसरा वर्ग जन्मना अभावग्रस्त था.

##.इस तीसरें एस्ट़ेट़ में उत्पन्न हुये अत्यंत प्रतिभाशाली लाँक,रूसों और मांटेस्क्यू ने समानता आधारित समाज का सपना देखा और इसके लियें आम जनता को प्रेरित किया.

##.मांटेस्क्यू की पुस्तक The sprit of laws ने समानता,भातृत्व के विचार फ्रांसीसी समाज में प्रसारित किये और क्रांति को अवश्यभांवी बना दिया.
मान्टेस्क्यू की किताब
 द स्परिट आफ लाज

##.महिलाएँ जो फ्रांसीसी समाज में दोयम दर्जें की नागरिक थी,इन्होंनें भी सामाजिक स्तरीकरण में ऊँचा स्थान प्राप्त करनें का प्रयास किया.


        //// आर्थिक कारण ////


##.फ्रांस का समाज महंगाई और करवृद्धि से परेशान था.

##.चर्च और पादरी वर्ग जो कुल जनसँख्या के मात्र 10% थे के पास कुल संपत्ति का 60% था,जबकि किसान और श्रमिक जो कुल जनसँख्या का 90% थे के पास कुल संपत्ति का 40% भाग ही था.इस व्यवस्था से श्रमिक और किसान वर्ग में असंतोंष पनपा और वे क्रांति की ओर उन्मुख हुयें.

##.पादरी और कुलीन वर्ग को करछूट़ जेसें जन्मजात अधिकार प्राप्त थें ,जबकि किसानों और श्रमिकों को नियमित कर टाइल (Tile) के अतिरिक्त चर्च को टाइथ (Tithe) भी देना पड़ता था.जिससे किसानों और श्रमिकों की आर्थिक  स्थिति शोचनीय हो गई.

##.लुई 16 वें ने फ्रांस को लगातार युद्धरत रखा जिससे फ्रांस की वित्तीय स्थिति विकट़ हो गई और जनता क्रांति के लियें प्रयासरत हो गई.

##.कड़ाके की ठंड़ की वज़ह से किसानों की फसल लगातार कई वर्षों तक नष्ट़ हो रही थी ,दूसरी और पादरी और कुलीन वर्ग अपनी ऐशोआराम की जीवनशैली के कारण आमजनता के मध्य प्रसिद्ध थे.



____________________________________________________________

●यह भी पढ़े👇👇👇

● सिन्धु घाटी सभ्यता


____________________________________________________________





                ////  राजनितिक कारण ////


##.लुई 16 वां फ्रांस के प्रशासन और राजनितिक व्यवस्था पर से पूर्णत:नियत्रंण खो चुका था.


                //// परिणाम ////


क्रांति के फलस्वरूप सामंतवादी और कुलीन वर्गों की सत्ता का अंत हो गया और सत्ता मज़दूर,किसान और उच्च मध्यम वर्गों के हाथों में केन्द्रित हो गई.

              //// क्रांति की विरासत ////


फ्रांसीसी क्रांति 19 वीं और 20 वीं शताब्दी में निम्न विरासत छोड़ गई

##. इंग्लैंड़, रूस,अमेरिका के नागरिकों ने फ्रांस की क्रांति से प्रेरणा ग्रहण कर क्रांति की.

##.स्वतंत्रता और जनवादी अधिकारों नें सम्पूर्ण विश्व से प्रेरणा ग्रहण की.

##.क्रांति के फलस्वरूप निरंकुश राजशाही  एंव सामंतवादी व्यवस्था का सम्पूर्ण विश्व में विरोध हुआ.

##.भारत में राजा राममोहन राय एँव टीपू सुल्तान ने फ्रांसीसी क्रांति से प्रेरणा ग्रहण कर क्रांति का सूत्रपात किया.

              //// फ्रांसीसी क्रांति के आदर्श ////

##.जनवादी अधिकार
##.स्वतंत्रता
##.विधि सम्मत समानता
##.भातृत्व

० यह भी पढ़ ले 👇👇👇



● पुनर्जागरण




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गेरू के औषधीय प्रयोग

गेरू के औषधीय प्रयोग गेरू के औषधीय प्रयोग   आयुर्वेद चिकित्सा में कुछ औषधीयाँ सामान्य जन के मन में  इतना आश्चर्य पैदा करती हैं कि कई लोग इन्हें तब तक औषधी नही मानतें जब तक की इनके विशिष्ट प्रभाव को महसूस नही कर लें । गेरु भी उसी श्रेणी की   आयुर्वेदिक औषधी   हैं। जो सामान्य मिट्टी   से   कहीं अधिक   इसके   विशिष्ट गुणों के लिए जानी जाती हैं। गेरु लाल रंग की मिट्टी होती हैं। जो सम्पूर्ण भारत में बहुतायत मात्रा में मिलती हैं। इसे गेरु या सेनागेरु कहते हैं। गेरू आयुर्वेद की विशिष्ट औषधी हैं जिसका प्रयोग रोग निदान में बहुतायत किया जाता हैं । गेरू का संस्कृत नाम  गेरू को संस्कृत में गेरिक ,स्वर्णगेरिक तथा पाषाण गेरिक के नाम से जाना जाता हैं । गेरू का लेटिन नाम  गेरू   silicate of aluminia  के नाम से जानी जाती हैं । गेरू की आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति गेरू स्निग्ध ,मधुर कसैला ,और शीतल होता हैं । गेरू के औषधीय प्रयोग 1. आंतरिक रक्तस्त्राव रोकनें में गेरू शरीर के किसी भी हिस्से में होनें वाले रक्तस्त्राव को कम करने वाली सर्वमान्य औषधी हैं । इसके लिय

टीकाकरण चार्ट [vaccination chart] और संभावित प्रश्न

 टीकाकरण चार्ट # 1.गर्भावस्था के समय टीकाकारण ::: गर्भावस्था की शुरूआत में Titnus का पहला टीका टी.टी - 1. टी.टी -1 के चार सप्ताह बाद टी.टी.-2 यदि पिछली गर्भावस्था में टी.टी - 2 दिया गया हैं,तो केवल बूस्टर दीजिए. # टीके की मात्रा ,कैसें और कहाँ दें 0.5 ml.मात्रा प्रशिक्षित व्यक्ति द्धारा ऊपरी बांह की मांसपेशी में. # महत्वपूर्ण गर्भावस्था के 36 सप्ताह हो गयें हो तो मात्र टी.टी.- बूस्टर देना चाहियें.  टीकाकरण का दृश्य # 2.शिशुओं के लियें टीकाकरण  #जन्म के समय ::: 1. B.C.G.  =     0.1 ml बाँह पर त्वचा के निचें. 2.हेपेटाइटिस बी.=  0.5 ml मध्य जांघ के बाहरी हिस्सें पर मांसपेशी में 3.o.p.v.या oral polio vaccine = दो बूँद मुहँ में . ०  जानिये पोलियो क्या होता हैं ? #6 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. = 0.5 ml 2.D.P.T. = 0.5 ml मध्य जांघ का बाहरी हिस्सें में माँसपेशियों में. 3.o.p.v.या oral polio vaccine. #10 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. 2.D.P.T. 3.o.p.v. #14 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. 2.D.P.T. 3.o.p.v.   #9 से 12 माह

काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan

धतूरा भगवान शिव का प्रिय पौधा है। भगवान शिव धतूरा अपने मस्तिष्क पर धारण करते हैं और जो लोग धतूरा भगवान शिव को अर्पण करते थे वे उन्हें मनचाहा आशीष प्रदान करते हैं। धतूरा भी कई प्रकार का होता है जैसे काला धतूरा, सफेद धतूरा, पीला धतूरा आदि। आज हम आपको "काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan" के बारे में बताएंगे।  काला धतूरा के फायदे और नुकसान आयुर्वेद आयुर्वेद चिकित्सा में काला धतूरा बहुत महत्वपूर्ण औषधि के रूप में बहुत लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है । धतूरा बहुत ही जहरीला फल होता है , प्रकृति में गर्म और भारी होता है। काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम धतूरा स्ट्रामोनियम DHATURA STRAMONIUM है । अंग्रेजी में इसे डेविल्स एप्पल Devil's apple, डेविल्स ट्रम्पेट Devil's trumpet के नाम से जाना जाता है। संस्कृत में इसे दस्तूर, मदन, उन्मत्त ,शिव प्रिय महामोधि, कनक आदि नाम से जानते हैं। काला धतूरा की पहचान कैसे करें  काला धतूरा के पत्ते नोक दार ,डंठल युक्त और बड़े आकार के होते हैं। काला धतूरा के फूल घंटी