सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Post covid syndrome - पेट साफ नहीं हो रहा है, ये कारण तो जिम्मेदार नहीं

 जो लोग कोरोना से ठीक हो रहें हैं या हो चुकें हैं उन्हें की तरह के post covid syndrome परेशान कर रहे हैं। किसी टैकीकार्डिया व्यक्ति को  हो रहा है तो किसी व्यक्ति को छाती में जकड़न महसूस हो रही है। 



विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना से ठीक हो चुके लगभग 40 प्रतिशत लोग पेट से संबंधित समस्या परेशान हो रहे हैं और ये परेशानी भी केवल एक तरह की न होकर कई तरह की है जैसे


• कब्ज होना


• पेटर्दद होना


• आंतों में दर्द


• पेट में गैस बनना या एसिडिटी


• भोजन नही पचना


• पेट खाली रहने पर भी भोजन करने जैसा एहसास होना


• पेट में जलन होना


• अर्श या बवासीर होना


पेट दर्द, कब्ज, एसिडिटी,अपच,post covid


कारण 


चिकित्सकों के मुताबिक कोरोना से ठीक हो रहें लोगों में पेट से संबंधित  परेशानियों के कई कारण जिम्मेदार है जैसे

आंतों में कोरोनावायरस के संक्रमण के कारण पेट साफ नहीं होना


Sars Cov 2 वायरस फेफड़ों के साथ साथ पेट क आंतों को भी संक्रमित करता हैं यदि आंतों में यह वायरस लम्बे समय तक मौजूद रहता है तो आंतों की कार्यप्रणाली को कम कर सकता है जिससे कब्ज, आंतों में दर्द, आंतों में घाव होना,इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, आदि बीमारीयां पैदा हो जाती हैं। यदि निचली आंतों में वायरस का संक्रमण अधिक होता है तो आंतों का मूवमेंट बहुत ही कम हो सकता है जिससे कब्ज और पेट भरा हुआ रहने जैसा अहसास होता है । समस्या यदि लम्बें समय तक बनी रहती है तो व्यक्ति मानसिक तनाव से भी ग्रसित हो जाता है।


कोरोना से संक्रमित होने पर ली गई दवाईयों के कारण पेट साफ नही होना



कोरोना संक्रमण के दौरान ली गई एंटीबायोटिक्स,एंटासिड,स्टेराइड, विटामिन,जिंक आदि ने पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड या पाचक रस के स्त्राव को सीमित या बिल्कुल खत्म ही कर दिया जिससे भोजन नहीं पच पाता है और व्यक्ति हमेशा पेट भरा हुआ या पेट फूला हुआ अहसास करता है।


एस्पिरिन या एंटीकाग्युलेंट जो कि खून को पतला करती हैं के लम्बे समय तक उपयोग से आंतों में खून का रिसाव हो जाता हैं और व्यक्ति मल के साथ खून आने से एनिमिया से ग्रसित हो जाता है। आंतों से अधिक खून का रिसाव होने से व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो सकता है और उसे उल्टी,दस्त,ठोस आहार लेने में परेशानी हो सकती है।


जो कोरोना मरीज पहले से मधुमेह या डायबिटीज से पीड़ित हैं और उन्हें स्टेराइड दी गई है तो आंत का मूवमेंट बहुत कम हो जाता है फलस्वरूप पेट पूरा साफ़ नहीं होता और कब्ज बनी रहती है।


कम शारीरिक गतिविधि के कारण पेट साफ नही होना


कोरोनावायरस से गंभीर रूप से संक्रमित होने के बाद व्यक्ति बहुत लम्बे समय तक अस्पताल में भर्ती रहता है और ठीक होने के बाद भी लम्बे समय तक बिस्तर से नही उठ पाने की वजह से शारीरिक गतिविधि बिल्कुल भी नहीं हो पाती फलस्वरूप ठोस आहार नही पचता है और पेटदर्द, एसिडिटी,अपच,गैस की वजह से छाती में दर्द जैसी समस्या बनी रहती है।


आयुर्वेदिक काढ़े के अधिक सेवन से पेट में समस्या होना


कोरोनावायरस से ठीक होने के बाद भी व्यक्ति बिना चिकित्सक की सलाह से आयुर्वेदिक काढ़े का अधिक सेवन कर रहा है, चूंकि आयुर्वेदिक काढ़े में इस्तेमाल पदार्थ जैसे कालीमिर्च,सौंठ,पीपली,अजवायन आदि गर्म होते हैं जो अधिक मात्रा में लेने से पेट में गर्मी बढ़ाकर एसिडिटी, कब्ज, बवासीर, पेट दर्द जैसी समस्या पैदा कर रहे हैं।


कम मात्रा में पानी पीना


चिकित्सकों के मुताबिक कोरोना से रिकवर हो रहें लोग कम मात्रा में पानी पीतें है तो भोजन का ठीक से पाचन नहीं हो पाता है फलस्वरुप मल सूख जाता है और शोच के वक्त मलद्वार में घर्षण बढ़ जाता है और शोच के साथ जलन और खून आता है। समस्या लम्बे समय तक बनी रहने से पेटदर्द और कब्ज की शिकायत गंभीर हो जाती हैं।


Post covid में होने वाले पेट संबंधी रोगों का उपचार


भोजन में रेशेदार और कच्ची सब्जियों का सेवन करें

कोरोनावायरस से पीड़ित लोग  हाई प्रोटीन डाइट लेने के चक्कर में रेशेदार भोजन और कच्ची सब्जियों का सेवन उस अनुपात में नहीं कर रहे हैं जो पेट की सफाई के लिए आवश्यक है, अतः भोजन में रेशेदार पदार्थों जैसे गाजर,मूली,प्याज, ककड़ी और कच्ची सब्जियों जैसे लोकी, पत्तागोभी, टमाटर का सेवन अधिक करें। 

रेशेदार भोजन का सेवन आपके भोजन को जल्दी पचा देगा जिससे पेटदर्द, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्या पैदा नहीं होगी।

अनावश्यक दवाईयों का सेवन बंद कर दें


अपने चिकित्सक की सलाह से ऐसी दवाईयों का प्रयोग या तो सीमित कर दें या फिर उन्हें बंद कर दें जो इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, कब्ज़, एसिडिटी,और पेटदर्द जैसे साइड इफेक्ट्स पैदा कर रही है। 


आयुर्वेदिक काढ़े इस्तेमाल भी चिकित्सक की सलाह से बंद कर दें।


योग करें


 ऐसी यौगिक क्रियाएं जो पेट की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने के साथ आंतों की कार्यप्रणाली को मजबूत करती हो नियमित रूप से करें, जैसे कपालभाति, धनुरासन, सेतुबंधासन, पादहस्तासन, वज्रासन, पश्चिमोत्तानासन, अर्द्ध मत्स्येंद्रासन, पवनमुक्तासन आदि। ( गर्भावस्था, उच्च रक्तचाप, ह्रदयरोगी  ये योग नहीं करें)



 आयुर्वेदिक डाइट चार्ट के अनुसार भोजन का निर्धारण करें



सोने और जागने का सही समय बनाएं



जो लोग कोरोना के बाद बेड रेस्ट पर है वे दिन में सो लेते हैं किंतु रात में आधी रात तक टीवी देखते रहते हैं,इस तरह से व्यक्ति के शरीर की बायोलाजिकल क्लाक गड़बड़ हो जाती हैं और जिस समय व्यक्ति को टायलेट में होना चाहिए था उस समय वह बिस्तर पर गहरी नींद में सोया रहता है फलस्वरूप लेट उठने से आंतें शोच के लिए सक्रिय नहीं हो पाती है और व्यक्ति पेटदर्द एसिडिटी और कब्ज से पीड़ित हो जाता है, अतः रात को जल्दी सोकर सुबह जल्दी उठने का नियम अपनाएं।


गर्भावस्था हैं तो विशेष ध्यान रखें



यदि आप गर्भावस्था में हैं और कुछ दिन पहले कोरोना से संक्रमित हुए थे तो आपको अपने पाचन संस्थान का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान अधिक मात्रा में प्रोजेस्टोरोन हार्मोन बनता है जो आंतों के मूवमेंट को धीमा कर देता है जिससे कब्ज और अपच की शिकायत बनी रहती है, इस समस्या से बचने के लिए आयुर्वेदिक डाइट चार्ट फालो कर सकते हैं। 

पंचकर्म चिकित्सा अपनाएं



पंचकर्म चिकित्सा शरीर से दूषित पदार्थों को बाहर निकालकर शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बना देती हैं अतः यदि आप युवा हैं और शरीर मजबूत है तो किसी पंचकर्म विशेषज्ञ से परामर्श कर अपना पंचकर्म करवा लें। 


शराब तम्बाकू और अधिक मांसाहार से दूर रहें



भारत के ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में आमजनों में बहुत बड़ी भ्रांति फैली हुई है कि शराब और मांसाहार के सेवन से कोरोना नही होता हैं,इसी मिथ्या का सहारा लेकर बड़ी आबादी शराब और मांसाहार का बहुत अधिक मात्रा में सेवन कर रही हैं इनमें वे लोग भी शामिल है जो कोरोना से रिकवर हो रहें हैं। 


वास्तव में यह बात पूरी तरह से निराधार है कि शराब और मांसाहार से कोरोना नही होता यदि ऐसा होता तो चीन अमेरिका, ब्रिटेन आदि देशों में कोरोना के एक भी केस नंही मिलना चाहिए थे क्योंकि इन देशों की 98 प्रतिशत आबादी मांसाहार का सेवन करती है। 


कोरोना से रिकवर हो रहें लोग  मांसाहार का सेवन बिल्कुल भी नहीं करें क्योंकि कोरोना संक्रमण से आंतें कमजोर हो जाती हैं और  मांसाहार में अधिक फेट और अधिक कैलोरी होने से आंतें मांसाहारी भोजन को पचाने में असमर्थ हो जाती हैं फलस्वरूप पेट से संबंधित बहुत सी समस्याएं उभर सकती हैं।


तम्बाकू का सेवन करने से हमारे शरीर को भोजन पचाने के लिए जरूरी पाचक रस जो लार के माध्यम से मिलने चाहिए थे नहीं मिल पातें हैं क्योंकि व्यक्ति तम्बाकू खाने के बाद उन्हें थूकता रहता है। और इस तरह भोजन को पचाने में परेशानी पैदा हो जाती हैं।


शराब का अधिक सेवन आंतों के साथ लिवर , किडनी और अग्नाशय को नुकसान पहुंचाता है फलस्वरूप पेट दर्द,फेटी लिवर, किडनी फेलियर जैसी समस्या उभर सकती हैं।


• हर्बल टी पीने के फायदे

• तम्बाकू से होने वाले नुकसान का स्वास्थगत विश्लेषण


by healthylifestyehome






टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गेरू के औषधीय प्रयोग

गेरू के औषधीय प्रयोग गेरू के औषधीय प्रयोग   आयुर्वेद चिकित्सा में कुछ औषधीयाँ सामान्य जन के मन में  इतना आश्चर्य पैदा करती हैं कि कई लोग इन्हें तब तक औषधी नही मानतें जब तक की इनके विशिष्ट प्रभाव को महसूस नही कर लें । गेरु भी उसी श्रेणी की   आयुर्वेदिक औषधी   हैं। जो सामान्य मिट्टी   से   कहीं अधिक   इसके   विशिष्ट गुणों के लिए जानी जाती हैं। गेरु लाल रंग की मिट्टी होती हैं। जो सम्पूर्ण भारत में बहुतायत मात्रा में मिलती हैं। इसे गेरु या सेनागेरु कहते हैं। गेरू आयुर्वेद की विशिष्ट औषधी हैं जिसका प्रयोग रोग निदान में बहुतायत किया जाता हैं । गेरू का संस्कृत नाम  गेरू को संस्कृत में गेरिक ,स्वर्णगेरिक तथा पाषाण गेरिक के नाम से जाना जाता हैं । गेरू का लेटिन नाम  गेरू   silicate of aluminia  के नाम से जानी जाती हैं । गेरू की आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति गेरू स्निग्ध ,मधुर कसैला ,और शीतल होता हैं । गेरू के औषधीय प्रयोग 1. आंतरिक रक्तस्त्राव रोकनें में गेरू शरीर के किसी भी हिस्से में होनें वाले रक्तस्त्राव को कम करने वाली सर्वमान्य औषधी हैं । इसके लिय

टीकाकरण चार्ट [vaccination chart] और संभावित प्रश्न

 टीकाकरण चार्ट # 1.गर्भावस्था के समय टीकाकारण ::: गर्भावस्था की शुरूआत में Titnus का पहला टीका टी.टी - 1. टी.टी -1 के चार सप्ताह बाद टी.टी.-2 यदि पिछली गर्भावस्था में टी.टी - 2 दिया गया हैं,तो केवल बूस्टर दीजिए. # टीके की मात्रा ,कैसें और कहाँ दें 0.5 ml.मात्रा प्रशिक्षित व्यक्ति द्धारा ऊपरी बांह की मांसपेशी में. # महत्वपूर्ण गर्भावस्था के 36 सप्ताह हो गयें हो तो मात्र टी.टी.- बूस्टर देना चाहियें.  टीकाकरण का दृश्य # 2.शिशुओं के लियें टीकाकरण  #जन्म के समय ::: 1. B.C.G.  =     0.1 ml बाँह पर त्वचा के निचें. 2.हेपेटाइटिस बी.=  0.5 ml मध्य जांघ के बाहरी हिस्सें पर मांसपेशी में 3.o.p.v.या oral polio vaccine = दो बूँद मुहँ में . ०  जानिये पोलियो क्या होता हैं ? #6 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. = 0.5 ml 2.D.P.T. = 0.5 ml मध्य जांघ का बाहरी हिस्सें में माँसपेशियों में. 3.o.p.v.या oral polio vaccine. #10 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. 2.D.P.T. 3.o.p.v. #14 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. 2.D.P.T. 3.o.p.v.   #9 से 12 माह

काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan

धतूरा भगवान शिव का प्रिय पौधा है। भगवान शिव धतूरा अपने मस्तिष्क पर धारण करते हैं और जो लोग धतूरा भगवान शिव को अर्पण करते थे वे उन्हें मनचाहा आशीष प्रदान करते हैं। धतूरा भी कई प्रकार का होता है जैसे काला धतूरा, सफेद धतूरा, पीला धतूरा आदि। आज हम आपको "काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan" के बारे में बताएंगे।  काला धतूरा के फायदे और नुकसान आयुर्वेद आयुर्वेद चिकित्सा में काला धतूरा बहुत महत्वपूर्ण औषधि के रूप में बहुत लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है । धतूरा बहुत ही जहरीला फल होता है , प्रकृति में गर्म और भारी होता है। काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम धतूरा स्ट्रामोनियम DHATURA STRAMONIUM है । अंग्रेजी में इसे डेविल्स एप्पल Devil's apple, डेविल्स ट्रम्पेट Devil's trumpet के नाम से जाना जाता है। संस्कृत में इसे दस्तूर, मदन, उन्मत्त ,शिव प्रिय महामोधि, कनक आदि नाम से जानते हैं। काला धतूरा की पहचान कैसे करें  काला धतूरा के पत्ते नोक दार ,डंठल युक्त और बड़े आकार के होते हैं। काला धतूरा के फूल घंटी