सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

टैकीकार्डिया Techycardia :: ह्रदय की असामान्य धड़कन

टैकीकार्डिया Techycardia : ह्रदय की असामान्य धड़कन



हृदय की असामान्य धड़कन
 Techycardia



टैकीकार्डिया Techycardia को समझने से पहले  हमारें ह्रदय की धड़कन hraday ki dhadkan की कार्यप्रणाली को समझना होगा।


हमारा हृदय में 
चार कक्ष होते हैं दो ऊपरी कक्ष जिन्हें आलय या आट्रिया कहते हैं तथा दो निचले कक्ष जिन्हें निलय या वेन्ट्रिकल  कहा जाता हैं। हमारे ह्रदय की धड़कन दाहिने आरट्रियल में स्थित साइनस नोड़ से बनती व नियंत्रित होती हैं।  


साइनस नोड़ से निकलने वाली विधुत तरंगें सम्पूर्ण आट्रियम में जाती हैं जिसके कारण आट्रियम मांसपेशियां सिकुड़ती है और खून को ह्रदय के निचले कक्ष वेंट्रिकम में भेजती हैं। 


इसी प्रकार विधुत तरंगें कोशिकाओं के समूह adioventricule ( AV Node) में आकर सिग्नल देती हैं। इस प्रक्रिया द्वारा ह्रदय की धड़कन नियंत्रित होती हैं। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है तो ह्रदय की धड़कन असामान्य हो जाती हैं ।


जब ह्रदय की धड़कन बहुत ज्यादा होती हैं  तो इसे टैकीकार्डिया hraday ki dhadkan bhut jyda hoti hai to ise  techycardia और बहुत कम होती हैं तो उसे bradycardia कहते हैं। 


अब ज्यादा या कम धड़कन किसे माना जाय यह जानतें हैं 


सामान्य अवस्था में हमारा हृदय 60 से 100 प्रति मिनट की दर से धड़कता हैं। यदि यह धड़कन 100 प्रति मिनट से अधिक होती हैं तो इस स्थिति को techycardia टेकीकर्डिया कहते हैं ।



Techycardia भारत समेत विश्वभर के तमाम देशों की  एक आम चिकित्सकीय समस्या बनती जा रही हैं ।


हेपिटाइटिस सी के बारे में जानकारी



Techycardia के प्रकार :::




1.आट्रियल फाइब‌्रिलेशन Atrial fibrillation



 हृदय में गड़बड़ी और हृदय के ऊपरी कक्ष में विद्युत तरंगों के असंतुलन के कारण आट्रियल फाइब्रिलेशन होता हैं । आट्रियल फाइब‌्रिलेशन  सामान्य प्रकार का टैकीकार्डिया हैं । इस प्रकार के टैकीकार्डिया से पीड़ित रोगी को दूसरी अन्य समस्या जैसे उच्च रक्तचाप,हायपर थाइराडिज्म , होती हैं ।





2. आर्टियल फ्लटर artrial flutter



 हृदय के ऊपरी कक्ष आट्रिया के अनियमित और तेज रुप से धड़कने को आट्रियल फ्लटर कहते हैं। लगातार यह समस्या रहें पर ह्रदय वाल्व के अन्य विकार भी हो सकतें हैं ।






3.सुप‌्रावेंट्रिक्यूलर टैकीकार्डिया Supraventriculer techycardia



हृदय के निचले हिस्से में शुरू होने वाली असामान्य धड़कन Supraventriculer techycardia के नाम से जानी जाती हैं । यह हृदय की असामान्य विद्युत तरंगों के कारण होनें वाली स्थिति हैं ।





4. वेंट्रिक्यूल टैकीकार्डिया ventricular techycardia 



हृदय के निचले कक्षों  ventricular में विधुत संकेतों के असामान्य होने से वेंट्रिक्यूलर टैकीकार्डिया होता है । इसमें तीव्र ह्रदय गति के कारण ह्रदय के निचले कक्ष ventricule शरीर से पर्याप्त रक्त पंप करने का कार्य नहीं कर पाते है ।

Ventricular techycardia लम्बें समय तक रहने से जीवन के लिए खतरा पैदा हो सकता हैं।





5. ventricular fibrillation  



Ventricular fibrillation के कारण ह्रदय के निचले हिस्से में दबाव आता है क्योंकि ह्रदय शरीर से खून को पंप नहीं कर पाता है । इस कारण ह्रदय की विधुत तरंगों में तेजी आ जाती हैं ।


यदि Defibrillator से ह्रदय की विधुत तरंगों को नियमित नहीं किया जाए तो यह स्थिति हृदय के लिए बहुत घातक होती हैं ।






टैकीकार्डिया के लक्षण :::




जब ह्रदय तीव्र गति से धड़कता है तो यह शरीर के दूसरे अंगों तक खून नहीं पंहुचा पाता है , जिसके कारण ह्रदय सहित शरीर के दूसरे अंगों तक ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाती है और निम्न लक्षण उभरते हैं :::


1. सांसों का उखड़ना 


2. सिर चकराना


3. सिर का भारी होना


4. तेज धड़कन महसूस होना



5. चक्कर आना


6. हृदय में दर्द





कुछ लोगों में टैकीकार्डिया के कोई लक्षण नहीं नजर आते हैं। और टैकीकार्डिया का पता तब चलता है जब ECG या इलेक्ट्रोकॉर्डियोग्राम टेस्ट करवाया जाता है ।





टैकीकार्डिया का कारण :::



टैकीकार्डिया  सामान्य धड़कन के विद्युत तरंगों के व्यवस्थित करने से होता है लेकिन कई अन्य कारक भी टैकीकार्डिया होने के लिए उत्तरदायी होते हैं , जैसे


1. अल्प रक्तता (एनीमिया)


2. चाय या कॉफी का अत्यधिक सेवन



3. अत्यधिक शराब का सेवन


4. अत्यधिक व्यायाम


5. बुखार


6. उच्च रक्तचाप


7. स्टेराइड़ का अत्यधिक प्रयोग



8. शरीर में सोडियम पोटेशियम आदि तत्वों की कमी हो जाना क्योंकि लगाए के विद्युत तरंगों को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक होते हैं ।



9. तनाव


10. डर



11. कोकिन,मैथामेटामाइन देसी दवाइयों के दुष्प्रभाव के कारण


कुछ मामलों में बिल्कुल सही कारण भी अज्ञात रहता है




13. मधुमेह



14. हाइपो या हाइपर थायराइड



15. नींद में चमकना



16. अत्यधिक वजन होना



17. तंबाकू का प्रयोग


18. उत्तेजक दवाओं का प्रयोग



19.शरीर में पानी की कमी ( Dehydration)





 टैकीकार्डिया से बचने का उपाय :::








1. नियमित व्यायाम और स्वास्थ्यप‌्रद खानपान   




टैकीकार्डिया से बचाव के लिए नियमित रूप से व्यायाम और स्वास्थ्य पर खान-पान अति आवश्यक है स्वास्थ्य पर खानपान में फल सब्जी साबुत अनाज और लो फैट प्रोडक्ट शामिल होना चाहिए।





० हर्ड इम्यूनिटी क्या होती हैं





2. वजन



यदि शरीर का वजन नियंत्रित रखा जाए तो ह्रदय रोग संबंधित तमाम तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है।




3. धूम्रपान तंबाकू शराब आदि का किसी भी रूप में प्रयोग नहीं करना चाहिए।




4. रक्तचाप को नियंत्रित रखा जाना चाहिए।




4.हृदय को‌ उत्तेजना प्रदान करने वाली दवाइयां अपने चिकित्सक के परामर्श के बाद ही सेवन करना चाहिए।


5. तनाव दूर करने के लिए और हृदय को बलशाली बनाने के लिए भ्रामरी ,, प्राणायम,,कपालभाति सेतुबंध आसन आदि आसन अपने योगाचार्य के परामर्श से करना चाहिए।



6.शरीर में पानी के साथ पर्याप्त खनिज लवण जैसे सोडियम, पोटेशियम आदि मिलते रहना चाहिए।





टैकीकार्डिया  की पहचान के लिए किए जाने वाले टेस्ट :::



1.E.C.G या इलेक्ट्रोकॉर्डियोग्राम




ईसीजी या इलेक्ट्रोकॉर्डियोग्राम टैकीकार्डिया की पहचान के लिए की जाने वाली सर्वमान्य टेस्ट विधि है जिसके माध्यम से ह्रदय विधुत की गतिविधियों को आसानी से रिकॉर्ड किया जा सकता है ।







2.इलेक्ट्रोफिजियोलाजिकल टेस्ट :::


टैकीकार्डिया  की वास्तविक स्थिति और जगह मालूम करने के लिए और समस्या का संपूर्ण पता लगाने के लिए इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिकल टेस्ट किया जाता है इस प्रकार के टेस्ट में रबर की लली ( कैथेटर) जिसमें इलेक्ट्रोड लगे होते हैं , गले या भुजाओं की खून नलिकाओं के माध्यम से ह्रदय के विभिन्न क्षेत्रों में प्रविष्ट करा कर ह्रदय की पल-पल की विद्युत तरंगों की गतिविधि रिकॉर्ड की जाती है जिससे इस समस्या का पता लगाया जा सकता है।





3. कार्डियक इमेजिंग टेस्ट ::



कार्डियक इमेजिंग टेस्ट की ह्रदय की बनावट संबंधी दोषों को जांचने के लिए किया जाता है इस टेस्ट के माध्यम से यह पता किया जाता है कि टैकीकार्डिया  ह्रदय की असामान्य बनावट का कारण तो नहीं है इसमें भी  कई प्रकार के सम्मिलित होते हैं।




4. इकोकार्डियोग्राम



इकोकार्डियोग्राम टेस्ट में आवाज तरंगों के माध्यम से कम खून दबाव वाली ह्रदय की मांसपेशियों और ह्रदय कपाट की पहचान की जाती है। 




5. मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग या MRI



कार्डियक एमआरआई द्वारा ह्रदय में खून के प्रभाव और अन्य असमानता की पहचान की जाता है।



6. कंप्यूटराइज टोमोग्राफी या CT SCAN



ह्रदय की सही बनावट को जानने के लिए कंप्यूटराइज टोमोग्राफी टेस्ट किया जाता है।



7. कोरोनरी एंजियोग्राफी :::


ह्रदय  और खून की नालियों में पैदा होने वाले रुकावट की पहचान इस टेस्ट के माध्यम से की जाती है जिससे ह्रदय में होने वाली असामान्य धड़कन का पता लगाया जा सकता है।



8.तनाव परीक्षण ::



कसरत करते हुए ह्रदय पर इलेक्ट्रोडस लगाकर इस टेस्ट के माध्यम से ह्रदय की असामान्य धड़कन का पता लगाया जाता है ।


इन परीक्षणों के अलावा कुछ अन्य प्रकार के और टेस्ट किए जाते हैं जैसे एक्सरे , टिल्ट टेबल टेस्ट, हॉल्टर मॉनिटर टेस्ट इवेंट मॉनिटर टेस्ट आदि ।




० मुंह का कैंसर




० तुलसी के फायदे



० वात पित्त और कफ प्रकृति के लक्षण

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

टीकाकरण चार्ट [vaccination chart] और संभावित प्रश्न

 टीकाकरण चार्ट # 1.गर्भावस्था के समय टीकाकारण ::: गर्भावस्था की शुरूआत में Titnus का पहला टीका टी.टी - 1. टी.टी -1 के चार सप्ताह बाद टी.टी.-2 यदि पिछली गर्भावस्था में टी.टी - 2 दिया गया हैं,तो केवल बूस्टर दीजिए. ० गर्भावस्था के प्रथम तीन महिनें मे किए जानें वाले योगासन # टीके की मात्रा ,कैसें और कहाँ दें 0.5 ml.मात्रा प्रशिक्षित व्यक्ति द्धारा ऊपरी बांह की मांसपेशी में. # महत्वपूर्ण गर्भावस्था के 36 सप्ताह हो गयें हो तो मात्र टी.टी.- बूस्टर देना चाहियें.  टीकाकरण का दृश्य # 2.शिशुओं के लियें टीकाकरण  #जन्म के समय ::: 1. B.C.G.  =     0.1 ml बाँह पर त्वचा के निचें. 2.हेपेटाइटिस बी.=  0.5 ml मध्य जांघ के बाहरी हिस्सें पर मांसपेशी में 3.o.p.v.या oral polio vaccine = दो बूँद मुहँ में . ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// ० आँखों का सूखापन क्या बीमारी हैं ? जानियें इस लिंक पर ०  जानिये पोलियो क्या होता हैं ? ० चुम्बक चिकित्सा के बारें में जानें ० बच्चों की परवरिश कैसें करें healthy parating

SANJIVANI VATI ,CHANDRAPRABHA VATI,SHANKH VATI

१.संजीवनी वटी::-   संजीवनी वटी का वर्णन रामायण में भी मिलता हैं. जब मेघनाथ के साथ युद्ध में लक्ष्मण मूर्छित हुए तो  संजीवनी  बूटी ने लक्ष्मण को पुन: जीवन दिया था शांग्रधर संहिता में वर्णन हैं कि  "वटी संजीवनी नाम्ना संजीवयति मानवम" अर्थात संजीवनी वटी नाना प्रकार के रोगों में मनुष्य का संजीवन करती हैं.आधुनिक शब्दों में यह वटी हमारें बिगड़े मेट़ाबालिज्म को सुदृढ़ करती हैं.तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity)   बढ़ाती हैं. घटक द्रव्य:: विडंग,शुंठी,पीप्पली,हरीतकी,विभीतकी, आमलकी ,वच्च, गिलोय ,शुद्ध भल्लातक,शुद्ध वत्सना उपयोग::- सन्निपातज ज्वर,सर्पदंश,गठिया,श्वास, कास,उच्च कोलेस्ट्रोल, अर्श,मूर्छा,पीलिया,मधुमेह,स्त्री रोग ,भोजन में अरूचि. मात्रा::- वैघकीय परामर्श से Svyas845@gmail.com २.चन्द्रप्रभा वटी::- चन्द्रप्रभेति विख्याता सर्वरोगप्रणाशिनी उपरोक्त श्लोक से स्पष्ट हैं,कि चन्द्रप्रभा वटी समस्त रोगों का शमन करती हैं. घट़क द्रव्य::- कपूर,वच,भू-निम्बू, गिलोय ,देवदारू,हल्दी,अतिविष,दारूहल्दी,

गेरू के औषधीय प्रयोग

गेरू के औषधीय प्रयोग गेरू के औषधीय प्रयोग   आयुर्वेद चिकित्सा में कुछ औषधीयाँ सामान्य जन के मन में  इतना आश्चर्य पैदा करती हैं कि कई लोग इन्हें तब तक औषधी नही मानतें जब तक की इनके विशिष्ट प्रभाव को महसूस नही कर लें । गेरू भी उसी श्रेणी की आयुर्वेद औषधी हैं । जो सामान्य मिट्टी से कही अधिक इसके विशिष्ट गुणों के लियें जानी जाती हैं । गेरू लाल रंग की की मिट्टी होती हैं जो सम्पूर्ण भारत में बहुतायत मात्र में मिलती हैं । इसे गेरू या सेनागेरू भी कहतें हैं । गेरू आयुर्वेद की विशिष्ट औषधी हैं जिसका प्रयोग रोग निदान में बहुतायत किया जाता हैं । गेरू का संस्कृत नाम  गेरू को संस्कृत में गेरिक ,स्वर्णगेरिक तथा पाषाण गेरिक के नाम से जाना जाता हैं । गेरू का लेटिन नाम  गेरू   silicate of aluminia  के नाम से जानी जाती हैं । गेरू की आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति गेरू स्निग्ध ,मधुर कसैला ,और शीतल होता हैं । गेरू के औषधीय प्रयोग 1. आंतरिक रक्तस्त्राव रोकनें में गेरू शरीर के किसी भी हिस्से में होनें वाले रक्तस्त्राव को रोकनें वाली सर्वमान्य औषधी हैं । इसके लिय

Ayurvedic medicine list । आयुर्वैदिक औषधि सूची

Ayurvedic medicine list  [आयुर्वैदिक औषधि सूची] #1.नव ज्वर की औषधि और अनुसंशित मात्रा ::: १.त्रिभुवनकिर्ती रस  :::::   १२५ से २५० मि.ग्रा. २.संजीवनी वटी       :::::    १२५ से २५० मि.ग्रा. ३.गोदन्ती मिश्रण.    :::::     १२५ से २५० मि.ग्रा. #2.विषम ज्वर ::: १.सप्तपर्ण घन वटी  :::::    १२५ से २५० मि.ग्रा. २.सुदर्शन चूर्ण.        :::::     ३ से ६ ग्रा.   # 3 वातश्लैष्मिक ज्वर ::: १.लक्ष्मी विलास रस.  :::::  १२५ से २५० मि.ग्रा. २.संशमनी वटी          :::::  ५०० मि.ग्रा से १ ग्रा. # 4 जीर्ण ज्वर :::: १. प्रताप लंकेश्वर रस.  :::::  १२५ से २५० मि.ग्रा. २.महासुदर्शन चूर्ण.     :::::   ३ से ६ ग्राम ३.अमृतारिष्ट              :::::    २० से ३० मि.ली. # 5.सान्निपातिक ज्वर :::: १.नारदीय लक्ष्मी विलास रस. :::::  २५० से ५०० मि.ग्रा. २.भूनिम्बादि क्वाथ.      ::::: १०से २० मि.ली. #6 वातशलैष्मिक ज्वर :::: १.गोजिह्यादि क्वाथ.      ::::: २० से ४० मि.ली. २.सितोपलादि चूर्ण.       ::

एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन क्या हैं

#1.एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन क्या हैं ?  एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली से अभिप्राय यह हैं,कि मृदा उर्वरता को बढ़ानें अथवा बनाए रखनें के लिये पोषक तत्वों के सभी उपलब्ध स्त्रोंतों से मृदा में पोषक तत्वों का इस प्रकार सामंजस्य रखा जाता हैं,जिससे मृदा की भौतिक,रासायनिक और जैविक गुणवत्ता पर हानिकारक प्रभाव डाले बगैर लगातार उच्च आर्थिक उत्पादन लिया जा सकता हैं.   विभिन्न कृषि जलवायु वाले क्षेत्रों में किसी भी फसल या फसल प्रणाली से अनूकूलतम उपज और गुणवत्ता तभी हासिल की जा सकती हैं जब समस्त उपलब्ध साधनों से पौध पौषक तत्वों को प्रदान कर उनका वैग्यानिक प्रबंध किया जाए.एकीकृत पौध पोषक तत्व प्रणाली एक परंपरागत पद्धति हैं. ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// यहाँ भी पढ़े 👇👇👇 विटामिन D के बारें में और अधिक जानियें यहाँ प्रधानमन्त्री फसल बीमा योजना ० तम्बाकू से होनें वाले नुकसान ० कृषि वानिकी क्या हैं ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// #2.एकीकृत पोषक त

karma aur bhagya [ कर्म और भाग्य ]

# 1 कर्म और भाग्य   कर्म आगे और भाग्य पिछे रहता हैं अक्सर लोग कर्म और भाग्य के बारें में चर्चा करतें वक्त अपनें - अपनें जीवन में घट़ित घट़नाओं के आधार पर निष्कर्ष निकालतें हैं,कोई कर्म को श्रेष्ठ मानता हैं,कोई भाग्य को ज़रूरी मानता हैं,तो कोई दोनों के अस्तित्व को आवश्यक मानता हैं.लेकिन क्या जीवन में दोनों का अस्तित्व ज़रूरी हैं ? गीता में श्री कृष्ण अर्जुन को कर्मफल का उपदेश देकर कहतें हैं.     " कर्मण्यें वाधिकारवस्तें मा फलेषु कदाचन " अर्थात मनुष्य सिर्फ कर्म करनें का अधिकारी हैं,फल पर अर्थात परिणाम पर उसका कोई अधिकार नहीं हैं,आगे श्री कृष्ण बतातें हैं,कि यदि मनुष्य कर्म करतें करतें मर  जाता हैं,और इस जन्म में उसे अपनें कर्म का फल प्राप्त नहीं होता तो हमें यह नहीं मानना चाहियें की कर्म व्यर्थ हो गया बल्कि यह कर्म अगले जन्म में भाग्य बनकर लोगों को आश्चर्य में ड़ालता हैं, ]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]][]]]]]][[[[[[[]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]] ● यह भी पढ़े 👇👇👇 ● आत्मविकास के 9 मार्ग ● स्वस्थ सामाजिक जीवन के 3 पीलर

गिलोय के फायदे । GILOY KE FAYDE

  गिलोय के फायदे GILOY KE FAYDE गिलोय का संस्कृत नाम क्या हैं ? गिलोय का संस्कृत नाम गुडुची,अमृतवल्ली ,सोमवल्ली, और अमृता हैं । गिलोय का हिन्दी नाम क्या हैं ? गिलोय GILOY का हिन्दी नाम 'गिलोय,अमृता, संशमनी और गुडुची हैं । गिलोय गिलोय का लेटिन नाम क्या हैं ? गिलोय का लेटिन नाम Tinospra cordipoolia (टिनोस्पोरा  कोर्ड़िफोलिया ) गिलोय की पहचान कैसें करें ? गिलोय सम्पूर्ण भारत वर्ष में पाई जानें वाली आयुर्वेद की सुप्रसिद्ध औषधी हैं । Ayurveda ki suprasiddh oshdhi hai यह बेल रूप में पाई जाती हैं, और दूसरें वृक्षों के सहारे चढ़कर पोषण प्राप्त करती हैं । गिलोय के पत्तें दिल के (Heart shape) आकार के होतें हैं।  गिलोय का तना अंगूठे जीतना मोटा और प्रारंभिक   अवस्था में हरा जबकि सूखनें पर धूसर हो जाता हैं । गिलोय के फूल छोटे आकार के और हल्का पीलापन लियें गुच्छों में लगतें हैं । गिलोय के फल पकनें पर लाल रंग के होतें हैं यह भी गुच्छों में पाये जातें हैं । गिलोय में पाए जाने वाले पौषक तत्व 1.लोह तत्व : 5.87 मिलीग्राम 2.प्रोटीन : 2.3

म.प्र.की प्रमुख नदी [river]

म.प्र.की प्रमुख नदी [river]  म.प्र.भारत का ह्रदय प्रदेश होनें के साथ - साथ नदी,पहाड़,जंगल,पशु - पक्षी,जीव - जंतुओं के मामलें में देश का अग्रणी राज्य हैं.  river map of mp प्रदेश में बहनें वाली सदानीरा नदीयों ने प्रदेश की मिट्टी को उपजाऊ बनाकर सम्पूर्ण प्रदेश को पोषित और पल्लवित किया हैं.यही कारण हैं कि यह प्रदेश "नदीयों का मायका" उपनाम से प्रसिद्ध हैं. ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण नदियाँ प्रदेश में प्रवाहित होती हैं,जिनकी चर्चा यहाँ प्रासंगिक हैं. #१.नर्मदा नर्मदा म.प्र.की जीवनरेखा कही जाती हैं.इस नदी के कि नारें अनेक  सभ्यताओं ने जन्म लिया . #उद्गम  यह नदी प्रदेश के अमरकंटक जिला अनूपपुर स्थित " विंध्याँचल " की पर्वतमालाओं से निकलती हैं. नर्मदा प्रदेश की सबसे लम्बी नदी हैं,इसकी कुल लम्बाई 1312 किमी हैं. म.प्र.में यह नदी 1077 किमी भू भाग पर बहती हैं.बाकि 161 किलोमीटर गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में बहती हैं. नर्मदा प्रदेश के 15 जिलों से होकर बहती हैं जिनमें शामिल हैं,अनूपपुर,मंड़ला,डिंडोरी,जबलपुर,न

पारस पीपल के औषधीय गुण

पारस पीपल के औषधीय गुण Paras pipal KE ausdhiy gun ::: पारस पीपल के औषधीय गुण पारस पीपल का  वर्णन ::: पारस पीपल पीपल वृक्ष के समान होता हैं । इसके पत्तें पीपल के पत्तों के समान ही होतें हैं ।पारस पीपल के फूल paras pipal KE phul  भिंड़ी के फूलों के समान घंटाकार और पीलें रंग के होतें हैं । सूखने पर यह फूल गुलाबी रंग के हो जातें हैं इन फूलों में पीला रंग का चिकना द्रव भरा रहता हैं ।  पारस पीपल के  फल paras pipal ke fal खट्टें मिठे और जड़ कसैली होती हैं । पारस पीपल का संस्कृत नाम  पारस पीपल को संस्कृत  में गर्दभांड़, कमंडुलु ,कंदराल ,फलीश ,कपितन और पारिश कहतें हैं।  पारस पीपल का हिन्दी नाम  पारस पीपल को हिन्दी में पारस पीपल ,गजदंड़ ,भेंड़ी और फारस झाड़ के नाम से जाना जाता हैं ।   पारस पीपल का अंग्रजी नाम Paras pipal ka angreji Nam ::: पारस पीपल का अंग्रेजी नाम paras pipal ka angreji nam "Portia tree "हैं । पारस पीपल का लेटिन नाम Paras pipal ka letin Nam ::: पारस पीपल का लेटिन paras pipal ka letin nam नाम Thespesia

भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र [BHAGVAN SHRI RAM]

 Shri ram #भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र रामायण या रामचरित मानस सेकड़ों वर्षों से आमजनों द्धारा पढ़ी और सुनी जा रही हैं.जिसमें भगवान राम के चरित्र को विस्तारपूर्वक समझाया गया हैं,यदि हम थोड़ा और गहराई में जाकर राम के चरित्र को समझे तो सामाजिक जीवन में आनें वाली कई समस्यओं का उत्तर उनका जीवन देता हैं जैसें ● आत्मविकास के 9 मार्ग #१.आदर्श पुत्र ::: श्री राम भगवान अपने पिता के सबसे आदर्श पुत्र थें, एक ऐसे समय जब पिता उन्हें वनवास जानें के लिये मना कर रहें थें,तब राम ही थे जिन्होनें अपनें पिता दशरथ को सूर्यवंश की परम्परा बताते हुये कहा कि रघुकुल रिती सदा चली आई | प्राण जाई पर वचन न जाई || एक ऐसे समय जब मुश्किल स्वंय पर आ रही हो  पुत्र अपनें कुल की परंपरा का पालन करनें के लिये अपने पिता को  कह रहा हो यह एक आदर्श पुत्र के ही गुण हैं. दूसरा जब कैकयी ने राम को वनवास जानें का कहा तो उन्होनें निसंकोच होकर अपनी सगी माता के समान ही कैकयी की आज्ञा का पालन कर परिवार का  बिखराव होनें से रोका. आज के समय में जब पुत्र अपनें माता - पिता के फैसलों