Social media - आखिर क्यों कुछ लोग सोशल मीडिया एंग्जाइटी के शिकार बन रहें हैं

 हमारे समाज में कुछ लोग सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, वाट्स एप, ट्विटर,पिनट्रेस्ट, लिंक्डइन, इंस्टाग्राम कू आदि सोशल मीडिया साइट्स पर अकाउंट तो बना लेते हैं और अकाउंट बनाने के बाद ढेरों फ्रेंड और दर्जनों ग्रुप भी जाइन कर लेते हैं और इन साइट्स पर क्या चल रहा है , ग्रुप में क्या हो रहा हैं यह भी बराबर देखते रहते हैं, लेकिन ये लोग न के बराबर कोई फोटो अपलोड करतें हैं और बहुत कम किसी पोस्ट पर कमेंट,लाइक करतें हैं, ऐसा ये लोग इसलिए नहीं करते कि ये बहुत व्यस्त रहते हैं या इन्हें अपने काम से इतनी भी फुर्सत नहीं मिल पाती है कि सोशल मीडिया को देख सकें बल्कि ये लोग एक अजीब मानसिक समस्या से पीड़ित रहते हैं जिसे सोशल मीडिया एंग्जाइटी कहते हैं।

सोशल मीडिया एंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति के मन में सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने कमेंट करने,लाइक करने में इतनी घबराहट और चिंता उभर आती है कि  यदि वह इस तरह का काम करता है तो उसे करने से पहले घंटों तक सोचेगा और यदि उसने किसी पोस्ट पर कमेंट या लाइक किया है तो प्रतिउत्तर में कोई क्या कहेगा इसको लेकर बार बार अपना कमेंट चेक करेगा इस दोरान यदि किसी ने उसे नकारात्मक जवाब दे दिया तो वह इतना परेशान हो जाता है कि उसे उल्टी, सिरदर्द जी घबराना जैसी समस्या हो जाती हैं।

सोशल मीडिया एंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति यदि कोई पोस्ट शेयर करता है तो उस पर कितने कमेंट, कितने लाइक और कितने शेयर मिले इसको लेकर भी चिंतित रहता है और हर दो मिनट में अपना अकाउंट चेक करेगा।

सोशल मीडिया एंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति यदि अपना कोई फोटो शेयर करेगा तो उसे शेयर करने से पहले बहुत लम्बे समय तक फोटो को हर एंगल से जज करेगा उदाहरण के लिए मेरी ड्रेस कैसी लग रही है,मेरा चेहरा कैसा लग रहा है आदि ,यदि कोई दूसरा उसे कह दे कि फोटो अच्छी नहीं लग रही है तो ऐसा व्यक्ति फोटो अपलोड करने के बाद उसे डिलीट भी कर देता है चाहे उस फोटो पर सैकड़ों लाइक्स मिले हो।

सोशल मीडिया



सोशल मीडिया एंग्जाइटी क्यों होती हैं ?

मनोचिकित्सकों और समाजशास्त्रीयों के मुताबिक पूरी दुनिया में 4 से 5 प्रतिशत लोग सोशल मीडिया एंग्जाइटी के शिकार हैं । इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण है जैसे

• बचपन में बच्चों से माता पिता का बहुत ज्यादा रोक-टोक वाला व्यहवार जिससे बच्चा इतना भयभीत हो जाता है कि वह कोई काम करने से पहले अपने माता-पिता के मुंह की ओर देखने लगे। यही बच्चें जब आगे चलकर सोशल मीडिया पर अकाउंट बनातें हैं तो थोड़े से नकारात्मक कमेंट और कम लाइक्स की वजह से सोशल मीडिया एंग्जाइटी के आसान शिकार होते हैं।

• बलात्कार जैसी घटना घटना  जिससे कि व्यक्ति के आत्मविश्वास को इतना बड़ा आघात लगता हैं कि वह भविष्य में कोई काम सार्वजनिक रूप से नहीं कर पाता है।

• माता पिता के बीच होने वाले लगातार झगड़े जिससे बालमन बहुत आहत और डरा सहमा रहने को विवश हो ,यही बालमन आगे चलकर सोशल मीडिया एंग्जाइटी से बहुत आसानी से पीड़ित होता है।

• वर्तमान दौर के एकाकी परिवार जिसमें अकेली संतान हो और माता पिता बच्चें के बीच समय व्यतीत न करते हों।

• ऐसे किशोरवय बच्चें जो घर के तनावपूर्ण माहौल में पले बढ़े हो और जिनके घर के तनाव का आस-पड़ोस वाले और दोस्त मजाक बनाते हो।

• मनोचिकित्सकों के अनुसार मस्तिष्क में न्यूरो केमिकल के असंतुलन की वजह से भी व्यक्ति अपनी बात रखने में झिझक महसूस करता हैं।


• शारीरिक दिव्यांगता की वजह से भी कई लोग सोशल मीडिया एंग्जाइटी के बहुत आसान शिकार बन जातें यदि किसी ने उनका सोशल मीडिया पर मजाक उडा दिया तो ये बात उनके मन में बैठ जाती हैं।

सोशल मीडिया एंग्जाइटी के नुकसान क्या हो सकतें हैं?

सोशल मीडिया एंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति यदि लगातार इस समस्या से पीड़ित रहता है तो उसका पारिवारिक जीवन, सामाजिक जीवन बहुत अधिक प्रभावित होता हैं, ऐसा व्यक्ति यदि विधार्थी हैं तो वह पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाएगा । 

यदि कामकाजी वर्ग से संबंधित हैं तो आफिस में भी अकेला अलग थलग रहना पसंद करेगा।  योग्यता होने के बावजूद पदोन्नति लेने और जिम्मेदारी लेने में ऐसा व्यक्ति असहज महसूस करेगा।

ऐसा व्यक्ति परिवार को बाहर घूमाने भी नहीं ले जाना चाहता है जिससे घर का वातावरण निरस और उबाऊ हो जाता है और यही पारिवारिक कलह कारण बनता है। 

सोशल मीडिया एंग्जाइटी अधिक होने पर व्यक्ति इतना अधिक अवसाद में आ जाता हैं कि वह कभी कभी शराब की ओर उन्मुख हो जाता है और आत्महत्या तक कर लेता है।


सोशल मीडिया एंग्जाइटी से कैसे बचें

• सबसे पहले प्रकृति का एक सिद्धांत अपना लें कि जिस तरह से हर व्यक्ति का डीएनए अलग-अलग होता है उसी तरह व्यक्ति के विचार और व्यवहार एक दूसरे से पूरी तरह से भिन्न होते हैं। सभी व्यक्ति आपके विचारों से सहमत हो ऐसा संभव नहीं है।

• दूसरे आपके बातें में क्या सोचते हैं क्या बोलते हैं इसकी परवाह बिल्कुल भी नहीं करें बल्कि यह सोचें कि मैं जैसा हूं ठीक हूं और ईश्वर की बनाई सर्वश्रेष्ठ रचना हूं।

• यदि सोशल मीडिया एंग्जाइटी के लक्षण दिख रहे हैं तो सबसे पहले उन लक्षणों को दूर करने के लिए किसी बहुत करीबी सोशल मीडिया फ्रेंड्स का साथ लेकर उन्हें दूर करने का प्रयास करें, ऐसा व्यक्ति आपको पोस्ट डालने के लिए प्रोत्साहित करेगा और पोस्ट पर सबसे पहले लाइक्स और सकारात्मक कमेंट करेगा , धीरे धीरे ऐसा करने से आपका आत्मविश्वास पढ़ेगा।

• जिन कामों में रुचि हो ऐसे कामों को करने वालों का एक ग्रुप बनाए या जाइन करें जिससे हर वो व्यक्ति आपको समझेगा जो आपके समान कामों में रुचि रखता हो ।

• बच्चों को हर बात पर डांटने और टोकने की आदत से माता पिता दूरी बना लें ।

• बड़े बच्चों के पास मोबाइल हैं और वे सोशल साइट्स पर एक्टिव हैं तो हर अच्छी पोस्ट पर उन्हें लाइक, कमेंट और शेयर द्वारा प्रोत्साहित करें , आमतौर पर देखा जाता है कि बच्चों के पोस्ट पर माता पिता  भाई बहन बहुत कम लाइक्स और कमेंट करते हैं ऐसा करने से बच्चा हतोत्साहित होता है।

• परिवार दोस्तों में यदि कोई सोशल मीडिया एंग्जाइटी का शिकार हैं तो ऐसे लोगों पर विशेष ध्यान दें और इन्हें प्रोत्साहित और उत्साहवर्धक करें।

• सोशल मीडिया पोस्ट डालते समय इस बात को मन से निकाल दें कि दूसरे इस पर क्या कमेंट करेंगे बल्कि यह बात याद रखें कि पोस्ट आपको अच्छी लगी इसलिए डाली है न कि दूसरे की रुचि को ध्यान रखकर यदि किसी को अच्छी या बुरी लगी तो यह उनका विचार हैं आपका नही।

• मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अतः पोस्ट डालते समय दूसरों के धर्म जाति मजहब आदि की बुराई या टीका टिप्पणी नहीं करें, इससे आपका सोशल नेटवर्किंग हर जाति, धर्म और सम्प्रदाय में मजबूत होगा और आप सोशल मीडिया एंग्जाइटी से बचें रहेंगे।



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