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फंगल इंफेक्शन। fungal infection प्रकार, कारण, लक्षण और उपचार

फंगल इंफेक्शन fungal infection प्रकार, कारण, लक्षण और उपचार

भारत समेत दुनियाभर के चिकित्सक और वैज्ञानिक इस समय फंगल इंफेक्शन fungal infection के बदलते रूप और फंगल इंफेक्शन fungal infection के घातक होते प्रभाव को लेकर बहुत चिंतित हो रहें हैं । फंगल इंफेक्शन का यह घातक रूप त्वचा,आँख,फेफडों,रक्त,हड्डी तक को निशाना बना रहा हैं । ऐसे समय में सबसे जरूरी हो जाता हैं कि fungal infection के प्रकार को समझकर फंगल इंफेक्शन का इलाज fungal infection ka ilaj किया जावें । तो आईयें फंगल इंफेक्शन के बारें में ,फंगल इन्फेक्शन के कारण,लक्षण, प्रबंधन और फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार के बारें में 



फंगल इन्फेक्शन fungal infection क्या होता हैं ?



फंगस जल,प्रथ्वी,आकाश में रहनें वाला अतिसूक्ष्म जीव हैं कुछ फंगस मानव,पशु,पौधों के लिए उपयोगी होतें हैं तो कुछ फंगस मनुष्य को नुकसान पहुँचानें वाले होतें हैं । 


यदि मनुष्य का प्रतिरोधक तंत्र हानिकारक फंगस से लड़नें में अक्षम हो जाता हैं तो फंगस मनुष्य को बीमार बना देतें हैं । ये फंगस प्रभावित व्यक्ति के भौतिक सम्पर्क,संक्रमित वस्तुओं के उपयोग से फैलतें हैं ।



फंगल इंफेक्शन के प्रकार Types of fungal infection :::



० एथलीट फूट फंगल Athletic foot fungal ::


फंगल इंफेक्शन
फंगल इंफेक्शन



एथलीट फूट बहुत प्रचलित और आम प्रकार का फंगल इंफेक्शन हैं । जो विश्व की बहुत बड़ी आबादी में फैला हुआ हैं ।


इस फंगल इंफेक्शन को फैलानें वाले फंगस का नाम टीनिया पेडिस Tinea pedis हैं ।यह फंगस गर्म नमी वाले स्थानों,जूतों मोजों और पांवों की उंगलियों में बहुत तेजी से फैलता हैं ।



एथलीट फूट के लक्षण :::



० फंगल प्रभावित अंग का लाल होना ।


० त्वचा पर सफेद परत जमना जो धीरें धीरें त्वचा को तोडना शुरू कर देती हैं ।


० खुजली चलना 


० त्वचा की परत निकलना।


० प्रभावित भाग में जलन होना ।



० फंगल प्रभावित भाग में सूजन आना ।



एथलीट फूट का इलाज और रोकथाम :::



० फंगल इंफेक्शन होनें पर प्रभावित भाग को अच्छे एंटीफंगल साबुन या फिटकरी से साफ करना चाहियें ।


० फंगस प्रभावित जगह को सूखा रखें क्योंकि गीली त्वचा या नमी वाली त्वचा फंगस को बजनें की आदर्श जगह होती हैं ।


० इस्तेमाल से पूर्व जूतों,मोजों को गर्म पानी में धोकर अच्छी धूप में सूखा लें ।


० जूतों की बजाय चप्पल या सेंडल पहनें ।


० फंगल इंफेक्शन होनें पर अच्छे एंटीफंगल क्रीम या डस्टिंग पावड़र का प्रयोग प्रभावित भाग पर लगानें हेतू करें ।


यीस्ट फंगल इंफेक्शन Yeast fungal infection



फंगल इंफेक्शन




यीस्ट फंगल इंफेक्शन yeast fungal infection केंडिडा एलबिकंस candida albicans नामक फंंगस से फैैैैलता हैं । 

यीस्ट फंगल इंफेक्शन महिलाओं के जननांगों में ,बच्चों के जननांगों के आसपास और नाखूनों में अधिक तेजी से फैलता हैं । महिलाओं में यह इंफेक्शन होनें से योनि का सामान्य PH level प्रभावित होता हैं ।


यीस्ट फंगल इंफेक्शन फैलनें का प्रमुख कारण हैं ।


• एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक इस्तेमाल ।


• अत्यधिक तनाव ।


• हार्मोनल असंतुलन होना ।


• असंतुलित भोजन ।



यीस्ट फंगल इंफेक्शन लक्षण :::



० योनि मार्ग से बदबूदार सफेद स्त्राव होना ।


० योनि में खुजली होना ।


० योनि के आसपास लाल होना ।


० योनि में सूजन होना ।


० intercourse सहवास के दौरान दर्द होना ।


० पैशाब करते समय दर्द होना ।


० बच्चों में जांघों और कमर के निचले भाग में लालिमा होना ।


० नाखून भद्दे दिखाई देना । 


• 9 नेचुरल सुपरफूड फार हेल्दी वेजाइना


यीस्ट फंगल इंफेक्शन का इलाज और रोकथाम



प्रारंभिक अवस्था में पहचान होनें पर यीस्ट फंगल इंफेक्शन का इलाज और रोकथाम बहुत आसान हैं । इस बीमारी के प्रभावी उपचार के लिए एंटीफंगल वेजाइन क्रीम, एंटीफंगल दवाई आदि का प्रयोग किया जाता हैं । और बीमारी को फैलनें से रोकनें के लिए निम्न उपाय करें 


० योनि मार्ग की साफ सफाई का समुचित ध्यान रखना चाहिए इसके लियें फिटकरी, नीम,साबुन आदि का प्रयोग करना चाहियें।


० महिलाओं को अंतवस्त्र अच्छे तरीके से गर्म पानी में धोकर और धूप में सुखाकर प्रयोग करना चाहिए ।



० भोजन संतुलित होना चाहिए जिसमें पर्याप्त मात्रा में फल,सब्जी और दालें हो ।



० पानी पर्याप्त मात्रा में पीये ।



० नाखूनों की साफ सफाई का ध्यान रखें और इनकी नियमित सफाई करतें रहें ।




जोंक इच Jock itch



जोंक इच जननांगों के आसपास,जांघो पर बगल में और ऐसे भाग जहाँ नमी बनी रहती हैं में बहुत तेजी से फैलता हैं ।


जोंक इच के लिए उत्तरदायी फंगस का नाम Tinea cururis हैं ।


जोंक इच भी सीधे सम्पर्क से फैलता हैं ।


लक्षण 


० जांघों ,जननांगों के आसपास, जोडों पर लालिमा युक्त सूजन होना ।


० खुजली चलना ।


० त्वचा पर गोल घेरेयुक्त उभरी हुई संरचना उभरना ।


० त्वचा फटना ।


० त्वचा से पपडी निकलना ।




रिंगवर्म Ringworm


Tinea corperis


त्वचा,सिर,तथा शरीर के अन्य भागों में फैलनें वाला यह बहुत आम इन्फेक्शन हैं । इस फंगल इंफेक्शन के लिए उत्तरदायी फंगस का नाम Tinea corperis हैं । 


टीनिया कार्पेरिस मृत त्वचा Dead skin,नमी वाले स्थानों,मिट्टी आदि पर पाया जानें वाला फंगस हैं । यह फंगल इंफेक्शन पालतू जानवरों को भी प्रभावित करता हैं ।



रिंगवर्म के लक्षण 



० रिंगवर्म ringworm बहुत आसानी से पहचाना जानें वाला फंगल इन्फेक्शन हैं यह शरीर के विभिन्न भागों पर गोल उभरे हुए घेरे के रूप दिखाई देता हैं ।



० रिंगवर्म फंगल इंफेक्शन के आसपास खुजली चलती हैं और त्वचा लाल हो जाती हैं ।





प्रबंधन 



० रिंगवर्म फंगल इंफेक्शन को फैलनें से रोकनें के लिए संक्रमित व्यक्ति के तौलिये, साबुन,कपडे आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए ।


० प्रभावित भाग की साफ सफाई और संतुलित भोजन का प्रयोग करना चाहिए जिससे प्रतिरोधक क्षमता बनी रहें ।




म्यूकर  माइकोसिस फंगल इंफेक्शन 




कोविड़ -19 पीड़ित व्यक्ति के बीमारी से उभरनें के बाद होनें वाला यह फंगल इंफेक्शन नाक कान गला आँख और मस्तिष्क तक फैल रहा हैं । 


संक्रमण घातक होनें पर व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती हैं । इसे ब्लेक फंगल इंफेक्शन Black fungal infection के नाम से भी जाना जाता हैं ।





म्यूकर माइकोसिस फंगल इंफेक्शन का लक्षण



० म्यूकर माइकोसिस फंगल इंफेक्शन से प्रभावित नाक के अंदरूनी भाग पर पपड़ी जम जाती हैं । नाक बंद होती हैं ।



० गालों पर सूजन आना और गालों का सुन्न होना ।



० आँख लाल होना ।



० प्रभावित भाग की त्वचा का गलना ।



म्यूकर माइकोसिस फंगल इंफेक्शन का कारण 



० प्रतिरोधक क्षमता में कमी होना ।



० स्टेराइड दवाई का अधिक प्रयोग



० ह्रदय रोग,डायबिटीज़ का उच्च स्तर 



प्रबंधन 



० म्यूकर माइकोसिस फंगल इंफेक्शन को रोकने के लिए बीमारी की शुरूआत से ही पहचान कर उपचार शुरू कर देना चाहिए ।


० इन्फेक्शन गंभीर होनें पर प्रभावित भाग को सर्जरी कर निकालना पड़ता हैं ।



मधुमेह, ह्रदयरोग का नियत्रंण संक्रमण की रोकथाम के लिए अति आवश्यक हैं ।





कैंडिडा आँरिस candida oris 




कैंडिडा आँरिस जापान से पैदा हुआ फंगस का एक प्रकार हैं जो क्लोरोहैक्सीडीन और ब्लीच जैसें ताकतवर कीटाणुनाशक के प्रयोग के बाद भी जीवित रहता हैं । 


कैंडिडा आँरिस त्वचा के साथ साथ खून में भी विधमान रह सकता हैं । यह बहुत घातक और जानलेवा फंगल इंफेक्शन हैं । इस फंगल इंफेक्शन से ग्रसित 100 में से 50 मरीजों की मृत्यु हो जाती हैं ।


कैंडिडा आँरिस त्वचा पर, अस्पतालो के ICU में बहुत लम्बें तक जीवित रह सकता हैं ।


कैंडिडा आँरिस कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों,बच्चों,मधुमेह रोगीयों,और अत्यधिक एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करनें वालों को बहुत तेजी से अपनी चपेट में लेता हैं। 





कैंडिडा आँरिस फंगल इंफेक्शन के लक्षण 




० प्रभावित त्वचा का लाल होना ।


० बुखार आना ।


० थकान होना ।


० बदन दर्द होना ।



कैंडिडा आँरिस का कारण 




० कैंडिडा आँरिस फंगल इंफेक्शन साधारण फंगस का बहुत उन्नत प्रकार हैं जो एंटीबायोटिक्स और एंटीफंगल दवाओं के अत्यधिक इस्तेमाल से इस प्रकार के वातावरण में अपने आप को जीवित रखनें का आदी हो जाता हैं ।और व्यक्ति को अपनी चपेट में लेकर बीमार कर देता हैं ।



० कैंडिडा आँरिस फंगल इंफेक्शन का दूसरा कारण फसलों में बहुत अधिक प्रयोग होनें वाला फंगीसाइड हैं ,फंगीसाइड की अधिकता के कारण यह फंगल ऐसे वातावरण प्रतिरोधी हो जाता हैं । और मानव में फैलकर उन्हें बीमार बना रहा हैं ।



प्रबंधन



० कैंडिडा आँरिस की शुरूआती स्तर पर पहचान होना बहुत आवश्यक हैं यदि शुरूआत में इसका उचित उपचार कर लिया जाए तो यह ठीक हो जाता हैं स्थिति गंभीर होनें पर प्रभावित अँग काटना पड़ता हैं । यदि संक्रमण मस्तिष्क तक पहुँत जाता हैं तो मृत्यु तक हो सकती हैं ।






एस्पेरिगिल्स फ्यूमिंगटस फंगल इंफेक्शन 




एस्पेरिगल्स फ्यूमिंगटस फंगस भी कैंडिडा आँरिस प्रकार फंगस हैं । जो दवाओं के खिलाफ बहुत आक्रामक प्रतिरोधकता दर्शाता हैं । इस प्रकार के फंगल इंफेक्शन से दुनियाभर में प्रतिवर्ष दो लाख लोगों की मृत्यु हो जाती हैं ।


एस्पेरिगल्स फ्यूमिंगटस फंगस सडें गले खाद,खराब सब्जियों से मानव में फैलता हैं ।





फंगल इंफेक्शन का घरेलू उपचार home remedy for fungal infection




फिटकरी



फिटकरी अति उत्तम फँगसरोधी घरेलू दवा हैं । फिटकरी का प्रयोग त्वचा पर फँगस को रोकने के लिए किया जा सकता हैं । दिन में दो तीन बार फिटकरी को फंगस प्रभावित त्वचा पर पानी के साथ मिलाकर लगाना चाहिए ।




ग्रीन टी Green Tea 




ग्रीन टी में मोजूद एंटीऑक्सीडेंट Antioxidant शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर फंगस का सफाया कर देतें हैं । इसके लिए ग्रीन टी को खाली पेट दिन में दो बार पीना चाहियें। 


ग्रीन टी की पत्तियों को पीसकर फंगल प्रभावित भाग पर लगानें से भी संक्रमण रोका जा सकता हैं ।




रतनजोत




रतनजोत रेल की पटरियों, खेतों की मेड पर ,जंगलों में उगनें वाला विषैला पौंधा हैं जिसके बीज बहुत जहरीलें होतें हैं । 


रतनजोत के बीजों का तेल फंगल इंफेक्शन से प्रभावित भाग पर लगानें से फँगल इन्फेक्शन बहुत जल्दी समाप्त होता हैं ।



रतनजोत के पौधों से निकला दूध भी बहुत अच्छा फंफूदरोधी होता हैं । रतनजोत का दूध फंगस प्रभावित भाग पर लगानें से बहुत जल्दी फंगस समाप्त हो जाती हैं । 


रतनजोत के पौधें का दूध और तेल लगानें में सावधानी रखना चाहिए और इन पदार्थों से  संवेदनशील त्वचा होनें पर प्रयोग नहीं करना चाहिए ।




चाय पत्ती 



घरों में बनने वाली चाय की पत्तियाँ फंगस प्रभावित सिर की त्वचा पर लगानें से फंगस समाप्त हो जाता हैं । इसके लिए चार चम्मच चाय पत्ती को आधा लीटर पानी में उबालकर इस उबले हुये पानी से सिर धोना चाहिए ।




एलोवेरा 



एलोवेरा जेल फंगस से प्रभावित कटी फटी त्वचा की मरम्मत करता हैं । ऐलोवेरा से गुदा निकालकर इसमें थोडा सा नारियल तेल मिलाकर त्वचा पर लगानें से कटी फटी त्वचा की मरम्मत होकर फँगस संक्रमण नियंत्रित होता हैं ।



नारियल तेल coconut oil



नारियल तेल फंगल इंफेक्शन से प्रभावित त्वचा की खुजली ,सूजन और त्वचा के लालपन में बहुत तीव्र आराम प्रदान करता हैं ।


नारियल तेल को सीधे फंगल इंफेक्शन से प्रभावित त्वचा पर दिन में दो बार लगाना चाहियें ।



हल्दी 



हल्दी बहुत उत्तम एंटीसेप्टिक, एँटीफँगल और रक्त शोधक होती हैं । प्रतिदिन एक चम्मच हल्दी सुबह शाम गुनगुने जल के साथ लेनें से रक्त साफ होकर त्वचा में निखार आता हैं और फंगल इंफेक्शन बहुत तेजी से खत्म होता हैं ।


हल्दी रक्त में फैलें फंगस को भी समाप्त कर देती हैं ।



हींग 


हींग उत्तम रक्तशोधक मानी जाती हैं। हींग को भोजन में शामिल करने से फंगल इंफेक्शन होनें की संभावना नहीं होती हैं ।




दही



दही में मौजूद लैक्टिक एसिड़ lactic acid फंगल इंफेक्शन को समाप्त कर देता हैं । यदि फंगल इंफेक्शन से प्रभावित त्वचा,नाखून और सिर की त्वचा पर दही लगाया जाए तो फंगल इंफेक्शन जड़ से समाप्त हो जाता हैं ।



लहसुन Garlic



लहसुन में सल्फर नामक तत्व पाया जाता हैं यह यौगिक खुजली,फंगल इंफेक्शन और त्वचा संबधित बीमारी में बहुत शीघ्र आराम प्रदान करता हैं ।


लहसुन के पत्तों को फंगल इंफेक्शन से प्रभावित नाखून,त्वचा पर लगानें से शीघ्र राहत मिलती हैं ।



नीम



नीम की छाल,पत्ती,फल एंटीसेप्टिक गुणों से युक्त होतें हैं । नीम का तेल फंगल इंफेक्शन पर लगाना चाहिए।



० पंचनिम्ब चूर्ण




नीम की छाल पानी में घीसकर फंगल इंफेक्शन पर लगानें से बहुत शीघ्र आराम मिलता हैं ।


नीम की पत्तियों से बना चूर्ण सुबह शाम एक एक चम्मच लेनें से रक्त साफ होकर त्वचा निरोगी बनी रहती हैं ।



अदरक 



अदरक एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से संपन्न होता हैं । अदरक के दैनिक प्रयोग से डायबिटीज भी नियंत्रित होती हैं । अत: ऐसे फंगल इंफेक्शन से पीड़ित मरीज जिन्हें डायबिटीज़ भी हो को अदरक का सेवन करना चाहिए ।


अदरक को चाय में डालकर या इसका अचार बनाकर दैनिक जीवन में प्रयोग करना चाहिए। 



शहद 



शहद एंटीसेप्टिक के साथ एंटीऑक्सीडेंट पदार्थ हैं जो कि फंगस के विरूद्ध प्रभावी प्रतिरोधकता प्रदान करता हैं ।


सुबह शाम शहद मिश्रित पानी पीनें से फंगस के विरूद्ध शरीर में प्रतिरोधकता बढती है ।





आंवला



आयुर्वेद चिकित्सा में सर्वोत्तम महत्व रखता हैं । नियमित आँवला सेवन करने वाला व्यक्ति कभी बीमार नही होता हैं । 

फंगल इंफेक्शन से बचने के लिए नियमित रूप से आँवलें का सेवन करना चाहिए ।



० बाकुची के फायदे






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म.प्र.की प्रमुख नदी [river]  म.प्र.भारत का ह्रदय प्रदेश होनें के साथ - साथ नदी,पहाड़,जंगल,पशु - पक्षी,जीव - जंतुओं के मामलें में देश का अग्रणी राज्य हैं.  river map of mp प्रदेश में बहनें वाली सदानीरा नदीयों ने प्रदेश की मिट्टी को उपजाऊ बनाकर सम्पूर्ण प्रदेश को पोषित और पल्लवित किया हैं.यही कारण हैं कि यह प्रदेश "नदीयों का मायका" उपनाम से प्रसिद्ध हैं. ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण नदियाँ प्रदेश में प्रवाहित होती हैं,जिनकी चर्चा यहाँ प्रासंगिक हैं. #१.नर्मदा नर्मदा म.प्र.की जीवनरेखा कही जाती हैं.इस नदी के कि नारें अनेक  सभ्यताओं ने जन्म लिया . #उद्गम  यह नदी प्रदेश के अमरकंटक जिला अनूपपुर स्थित " विंध्याँचल " की पर्वतमालाओं से निकलती हैं. नर्मदा प्रदेश की सबसे लम्बी नदी हैं,इसकी कुल लम्बाई 1312 किमी हैं. म.प्र.में यह नदी 1077 किमी भू भाग पर बहती हैं.बाकि 161 किलोमीटर गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में बहती हैं. नर्मदा प्रदेश के 15 जिलों से होकर बहती हैं जिनमें शामिल हैं,अनूपपुर,मंड़ला,डिंडोरी,जबलपुर,न

भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र [BHAGVAN SHRI RAM]

 Shri ram #भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र रामायण या रामचरित मानस सेकड़ों वर्षों से आमजनों द्धारा पढ़ी और सुनी जा रही हैं.जिसमें भगवान राम के चरित्र को विस्तारपूर्वक समझाया गया हैं,यदि हम थोड़ा और गहराई में जाकर राम के चरित्र को समझे तो सामाजिक जीवन में आनें वाली कई समस्यओं का उत्तर उनका जीवन देता हैं जैसें ● आत्मविकास के 9 मार्ग #१.आदर्श पुत्र ::: श्री राम भगवान अपने पिता के सबसे आदर्श पुत्र थें, एक ऐसे समय जब पिता उन्हें वनवास जानें के लिये मना कर रहें थें,तब राम ही थे जिन्होनें अपनें पिता दशरथ को सूर्यवंश की परम्परा बताते हुये कहा कि रघुकुल रिती सदा चली आई | प्राण जाई पर वचन न जाई || एक ऐसे समय जब मुश्किल स्वंय पर आ रही हो  पुत्र अपनें कुल की परंपरा का पालन करनें के लिये अपने पिता को  कह रहा हो यह एक आदर्श पुत्र के ही गुण हैं. दूसरा जब कैकयी ने राम को वनवास जानें का कहा तो उन्होनें निसंकोच होकर अपनी सगी माता के समान ही कैकयी की आज्ञा का पालन कर परिवार का  बिखराव होनें से रोका. आज के समय में जब पुत्र अपनें माता - पिता के फैसलों

पारस पीपल के औषधीय गुण

पारस पीपल के औषधीय गुण Paras pipal KE ausdhiy gun ::: पारस पीपल के औषधीय गुण पारस पीपल का  वर्णन ::: पारस पीपल पीपल वृक्ष के समान होता हैं । इसके पत्तें पीपल के पत्तों के समान ही होतें हैं ।पारस पीपल के फूल paras pipal KE phul  भिंड़ी के फूलों के समान घंटाकार और पीलें रंग के होतें हैं । सूखने पर यह फूल गुलाबी रंग के हो जातें हैं इन फूलों में पीला रंग का चिकना द्रव भरा रहता हैं ।  पारस पीपल के  फल paras pipal ke fal खट्टें मिठे और जड़ कसैली होती हैं । पारस पीपल का संस्कृत नाम  पारस पीपल को संस्कृत  में गर्दभांड़, कमंडुलु ,कंदराल ,फलीश ,कपितन और पारिश कहतें हैं।  पारस पीपल का हिन्दी नाम  पारस पीपल को हिन्दी में पारस पीपल ,गजदंड़ ,भेंड़ी और फारस झाड़ के नाम से जाना जाता हैं ।   पारस पीपल का अंग्रजी नाम Paras pipal ka angreji Nam ::: पारस पीपल का अंग्रेजी नाम paras pipal ka angreji nam "Portia tree "हैं । पारस पीपल का लेटिन नाम Paras pipal ka letin Nam ::: पारस पीपल का लेटिन paras pipal ka letin nam नाम Thespesia