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25 जन॰ 2021

द्राक्षारिष्ट के फायदे [DRAKSHARISHTA KE FAYDE]

 द्राक्षारिष्ट के फायदे [DRAKSHARISHTA KE FAYDE]

 

आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथों में द्राक्ष यानि किशमिश का चिकित्सकीय उपयोग विस्तारपूर्वक बताया गया हैं । द्राक्ष से बनने वाली औषधि "द्राक्षारिष्ट" एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि हैं आईये जानतें हैं द्राक्षारिष्ट के फायदे के  बारें में


द्राक्षारिष्ट के घटक Draksharishta content :



द्राक्षारिष्ट के फायदे Draksharishta ke fayde
द्राक्षारिष्ट


                              

1.द्राक्षा (मुनुक्का).- ( Vitis vinifera)


2.परियांगु - (callicarpa macrophylla)

3.लोंग (piper longum)

4.सौंठ (Zingiber officinale)

5.पीपली ()

6.वायविडंग (Embelia ribes)

7.धायफूल (Woodfordia fruticosa)

8.इलायची

9.नागकेशर

10.गुड़ 

० द्राक्षारिष्ट के फायदे


द्राक्षारिष्ट के फायदे बताते हुए आयुर्वेद ग्रंथों में लिखा हैं 

तृष्णादाहज्वर श्वासरक्तपित्तक्षतक्षयान।वात्तपित्तमुदावर्तस्वरभेदंमदात्यम्।।तिक्तास्यतामास्यशोषंकाशच्चाशुव्यपोहति।मृद्धीकाबृंहणीवृष्यामधुरस्निग्धशीतला।।



 द्राक्ष या मुनुक्का प्यास,जलन,बुखार,श्वास,दूषित रक्त,चोंट,वातपित्त,स्वरभेद,खाँसी,क्षय को नष्ट करता हैं । यह शरीर के लिए पुष्टिकारक वीर्य की वृद्धि करने वाला,मधुर, स्निग्ध और शीतल होता हैं।

एक अन्य ग्रंथ में द्राक्ष का वर्णन करतें हुए लिखा हैं


उर:क्षतंक्षयं हन्ति कासश्वासगलामयान्।द्राक्षाअरिष्ठाह्रय:प्रोक्तो बलकृन्मलशोधन।।



सुश्रुतसंहिता में द्राक्षा के बारें में लिखा हैं

परूषकद्राक्षाकट्फलदाडिमराजद नकतकफलक शाक फलाने त्रिफलाचेति ।तेषां द्राक्षा सरा सावरिया मधुरास्निग्धशीतला।।रक्तपित्तज्वरश्वासतृष्णादाहक्षयापहा।।



इस प्रकार द्राक्षारिष्ट के फायदे निम्न प्रकार हैं



1.श्वास में द्राक्षारिष्ट का सेवन बहुत फायदेमंद होता हैं।

2.खाँसी में 

3.न्यूमोनिया में

4.बुखार में,

5.पेट संबधित विकारों जैसें पेटदर्द, कब्ज आदि में

6.भूख कम लगना,


8.मूत्र रूकावट में,

9.बाजीकरण कारक

द्राक्षारिष्ट में एंटीआक्सीडेंट़ और बैक्टेरिया गुण भी पाए जातें हैं ।


उपयोग विधि


12 से 24 मिलीलीटर दिन में दो बार समान मात्रा में जल मिलाकर

द्राक्षा फल के बारें में जानकारी



द्राक्षा या किशमिश अँगूर को सुखाकर बनने वाला एक प्रकार का ड्रायफ्रूट हैं । जब यह कच्चा होता हैं तो हरा और पकनें पर बैंगनी रंग का होता हैं । 

आयुर्वेदिक फार्मोकोपिया आफ इंडिया के अनुसार द्राक्षा फल में पाए जानें वाले प्रमुख घटक


1.फारेन मैटर - 2%


2.टोटल एश - 3%


3.अल्कोहल साल्यूबल एक्सट्रेट -25%


4.वाटर साल्यूबल एक्सट्रेट - 70%


द्राक्षा के प्रकार


निघंटु प्रकास में द्राक्षा के कई प्रकारों का वर्णन किया गया हैं जैसें


1.पक्व द्राक्षा


2.अपक्व द्राक्षा


3.लघु द्राक्षा


4.गो स्तनी द्राक्षा


5.पर्वतज द्राक्षा


6.काली द्राक्षा


7.मधुर द्राक्षा







० लोध्रासव के फायदे




# द्राक्षासव [Drakshasava]


द्राक्षासव के घटक द्रव


1.द्राक्षा


3.धायफूल

4.जायफल

5.लौंग

6.कंसोल

7.जल

8.गुड़

9.श्वेत चंदन

10.पिप्पली

11.दालचीनी

12.इलायची

13.तेजपत्ता


रोगाधिकार


1.अर्श में 


3.भोजन में अरूचि

4.पीलिया

5.पेट संबधी रोगों में

6.बुखार में

7.सूजन में


सेवन मात्रा


12 से 24 मिलीलीटर बराबर मात्रा में जल के साथ ,दिन में दो बार भोजन के बाद या चिकित्सकीय निर्देशानुसार


० नीम के औषधीय गुण





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