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Corona third wave : से बचने के सबसे बेस्ट तरीके

corona third wave की आहट सुनाई देने लगी हैं और इस corona third wave की चपेट में वो लोग अधिक हैं जिन्होंने corona vaccine की दोनों डोज लगवा ली हैं।

दोस्तों एक बात समझना बहुत जरूरी हैं कि कोराना अब आपके बीच बहुत लम्बें समय तक रहने वाला हैं यह अब आप पर निर्भर करता हैं कि आप इस वायरस के प्रति अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं या फिर कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता के साथ कोरोना को आप पर हावी करवाना चाहते हैं।


यदि कोरोनावायरस को खतरनाक वायरस से सामान्य फ्लू वायरस के रुप में बदलना हैं तो आपको प्राचीन आयुर्वेद जीवनशैली को हर हाल में अपनाना ही पड़ेगा।


तो आईए जानतें हैं 8 बेस्ट तरीकों के बारें में

corona third wave,कोरोना की तीसरी लहर


1.सुबह शाम दोड़ना शुरू करें


कोरोनावायरस सबसे ज्यादा श्वसन तंत्र पर हमला करता हैं,कोरोना की दूसरी लहर में में अनेक लोग श्वसन तंत्र फैल हो जानें से मरें थे। ऐसा corona third wave  में न हो इसकी तैयारी हमें पहले से ही करना है। 

मैंने अपने निजी अनुभव से देखा हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में खिलाड़ीयों को कोरोना के हल्के लक्षण ही प्रकट हुए थे और कोई भी खिलाड़ी गंभीर रूप से श्वसन तंत्र के संक्रमण से प्रभावित नहीं हुआ था। 

खिलाड़ियों के दूसरी लहर में कम हताहत होने का मुख्य कारण उनके मजबूत फेफड़े थे चूंकि खिलाड़ी बहुत तेजी से भागते हैं अतः उनके फेफड़ों की कोशिकाओं में पर्याप्त आक्सीजन होता हैं और कोशिकाओं की कार्यप्रणाली सुचारू रूप से चलती हैं।

ऐसे में यदि खिलाड़ी कोरोना संक्रमित होता भी है तो मजबूत फेफड़ों की वजह से श्वसन तंत्र कोरोनावायरस के हमले से सुरक्षित रहता है।

दोड़ना शरीर के रक्त संचार को सुचारू रखता हैं जिससे रक्त नलिकाओं में खून के थक्के नहीं बनतें हैं,कोरोना की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा मौतें मरीज को ख़ून के थक्के बनने से ही हुई थी।

 अतः corona third wave से सुरक्षित रहने के लिए सुबह-शाम नियमित दोड़ना शुरू कर दें।

शुरुआत में 100 मीटर दोड़ने से शुरुआत करें और उसके बाद धीरे-धीरे 1 से 2 किलोमीटर तक दोडे़।

सुबह-शाम नियमित रूप से दोड़ना आपको कोरोना की तीसरी लहर में सुरक्षित रखेगा।

2.खानपान में क्रांतिकारी बदलाव करें


कोरोना की दूसरी लहर ने यह स्पष्ट बता दिया हैं कि आपका पारंपरिक खान-पान और खानपान की आदतें आपको corona third wave में सुरक्षित नहीं रखेंगे। 

अतः कोरोना की तीसरी लहर में सुरक्षित रहने के लिए आपको अपने खान-पान में क्रांतिकारी बदलाव लाने पड़ेंगे।

क्या बंदर सुबह उठकर चाय पीता हैं ?

क्या वह अपने भोजन में मैदा,आटा और शक्कर इस्तेमाल करता हैं ?

क्या बंदर बार बार बीमार होता हैं ?

यदि इन सवालों के जवाब नहीं है तो फिर आपको भी इसी दिशा में आगे बढ़ना पड़ेगा।

√ सुबह उठकर चाय पीनें से पहले गर्म पानी या सादा पानी पीना शुरू करें ।

√ कोशिश करें चाय सुबह-शाम ही लें दिन में चार पांच कप चाय पीनें से पेट में पाचक रस उत्सर्जित नहीं हो पाएंगे और भोजन का पाचन नहीं हो पाएगा। फलस्वरूप रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाएगी।

√ भोजन में रोटी और चावल सम्पूर्ण भोजन का एक चौथाई रखें बाकि का तीन चौथाई भाग सलाद,सब्जी,और पानी का होना चाहिए।

√ परपंरागत नाश्ता और मिठाई जैसे पोहा,जलेबी,समोसा, नूडल्स,और जंक फूड को कम से कम कर दें इसके बजाय नाश्ते में फल, फलों का रस, अंकुरित अनाज और प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करें।

√ पानी बहुत अधिक पीएं।

3.योग को जीवन का अनिवार्य हिस्सा बना लें


कोरोना की दूसरी लहर में जो लोग नियमित कपालभांति, अनुलोम-विलोम,भ्रामरी,आदि यौगिक क्रिया कर रहें थे। उन्हें कोरोना से प्रभावित होने पर भी बहुत कम मानसिक तनाव हुआ जबकि जो लोग नियमित योग नहीं कर रहें थे वो लोग कोरोना काल में बीमार होने पर बहुत अधिक मानसिक तनाव से ग्रस्त हो गए फलस्वरूप उनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो गया और इनमें से कई लोग काल के गाल में समा गए।


शोध से यह प्रमाणित हो चुका हैं कि नियमित योग करने वाले लोग कोरोना समेत अन्य दूसरी बीमारियों से बहुत जल्दी उभर जातें हैं।


4.छोटी छोटी समस्याओं में दवाईयां न लें


जो लोग कोरोनाकाल के पहले से थोड़ी सी स्वास्थ्य समस्या होनें पर दवाइयों का बहुत अधिक इस्तेमाल कर रहे थें या जो ओवर द काउंटर दवा ले रहें थे उन्हें कोरोना वायरस ने बहुत अधिक प्रभावित किया और उन पर दवा गोली का बहुत कम असर हुआ या कह लें ऐसे लोग दवाईयों के प्रति प्रतिरोधक हो गए। 

अतः सामान्य समस्याओं जैसे सिरदर्द,बदनदर्द,जुकाम आदि में बहुत अधिक दवा गोली न लें बल्कि कुछ प्राकृतिक उपाय अपनाकर इन्हें ठीक करें उदाहरण के लिए जुकाम होने पर भाप लें लें या फिर तुलसी,अदरक की चाय पी लें।

सिरदर्द, बदनदर्द होने पर गर्म पानी की सिकाई कर लें। 


5.lifestyle disease का management करें


 कोरोना की दूसरी लहर में मृत होने वालें उन‌ लोगों की संख्या अधिक थी जो पहले से चली आ रही Lifestyle disease जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, ह्रदय रोग, मोटापा आदि से पीड़ित थे।

अतः corona third wave में सुरक्षित रहने के लिए इन Lifestyle disease का management करें उदाहरण के लिए उच्च रक्तचाप, मधुमेह ह्रदय रोग से पीड़ित हैं तो इन बीमारियो को नियंत्रित रखें नियमित रूप से इन बीमारियो का चेकअप करवाते रहें।

6.नकारात्मक विचारों से दूर रहें

कोरोना की दूसरी लहर में कई लोग ऐसे थे जिनकें सारे शारीरिक पेरामीटर्स नार्मल थें लेकिन इसके बाद भी वो अस्पताल में भर्ती होकर आक्सीजन सपोर्ट पर थे। 

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वो आसपास की नकारात्मक खबरों से इतने डिप्रेशन में चले गए कि उन्हें अस्पताल में जानें और भर्ती होने के बाद ही संतोष मिला।

अतः corona third wave में इस तरह की परिस्थिति से बचनें के लिए मस्तिष्क में सिरोटीन हार्मोन का स्तर बढा़कर रखें।

आध्यात्मिक और मनपसंद मनोरंजन कार्यक्रम सुनने, बागवानी करने, मनपसंद काम करने, मेडिटेशन करने,हंसने, बच्चों के साथ खेलने और परिवार और समाज के लोगों से बातचीत करनें से मस्तिष्क में सेरोटीन का स्तर बढ़ा हुआ रहेगा।

हर चीज में नकारात्मक होने की बजाय हमेशा सकारात्मक रहें, सकारात्मक सोचें, सकारात्मक बात करें।

7.बच्चों का विशेष ध्यान रखें


Corona third wave में बच्चों के अधिक प्रभावित होनें की संभावना हैं और साथ ही बच्चों का टीकाकरण भी नहीं हुआ हैं अतः बच्चों पर विशेष ध्यान दें।

उन्हें संतुलित आहार खिलाएं जिसमें हरी सब्जी,फल,सलाद,दूध,दही,देशी घी शामिल हो। 

जंक फूड, नूडल्स,मोमो, तथा मैदे से बनी चीज बच्चों को न खिलाएं।

बच्चों को खेलने के लिए प्रोत्साहित करें तथा मोबाइल सिर्फ आनलाइन क्लास के समय ही दें।

जब भी बच्चों का कोरोना टीकाकरण चालू हो जिम्मेदारी से बच्चों को टीका लगवाएं।

8.मौसम के अनुरूप बनें उसका विरोध न करें

कोरोना की दूसरी लहर में जो लोग हमेशा बंद कमरों और एयर कंडीशन में रहते थे वह अधिक हताहत हुए थे। जबकि जिन्होंने गर्मी,बरसात,और ठंड का सामना किया था वह बहुत हद तक सुरक्षित रहें।

हर मौसम की अपनी विशेषता होती हैं जिसके सम्पर्क में रहकर व्यक्ति का शरीर बीमारियों की चपेट में आने से बचा रहता हैं अर्थात प्रकृति मनुष्य की डाक्टर भी हैं लेकिन आधुनिक आविष्कारों के गलत प्रयोग से मनुष्य प्रकृति का विरोधी हो गया।

उदाहरण के लिए जब ठंड बढ़ती है व्यक्ति में भूख बढ़ाने वाले और वसा को पचाने वाले हार्मोन सक्रिय हो जातें हैं। 

जब गर्मी आती हैं पसीने के साथ शरीर से विषैले तत्व बाहर निकल जातें हैं।

जब बरसात होती हैं तो भीगने से शरीर का आंतरिक सिस्टम की टेस्टिंग होती हैं जिससे यह पता चलता है कि शरीर बाहरी आक्रमणों से बचाव करने के लिए तैयार हैं या नहीं।

लेकिन आजकल व्यक्ति इन प्राकृतिक मौसमों का विरोधी हो गया है सर्दी से बचने के लिए हीटर इस्तेमाल करेगा।

गर्मी से बचने के लिए एयर कंडीशनर और बरसात में तो कभी भीगना ही नहीं चाहता।

अत्यधिक खतरनाक मौसमी परिस्थितियों जिनसे शरीर को नुकसान हो से बचाव करना आवश्यक हैं लेकिन सामान्य मौसमी बदलाव वाले प्राकृतिक वातावरण में रहोगे तो बीमार होने से बचें रहोंगे।




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