जानियें spine stroke स्पाइन स्ट्रोक के बारें में

  
स्पाइन स्ट्रोक spine stroke क्या होता हैं ?



रीढ़ की हड्डी हमारें शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अँग हैं । यह हमारें केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र Central nerve system का भाग है। जब स्पाइन कार्ड में रक्त और आँक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती हैं तो रीढ़ की हड्डी के ऊतकों को गंभीर क्षति पहुंचती है । इस तरह  रीढ़ की हड्डी में गंभीर ब्लाकेज या ब्लीडिंग हो जाती हैं । यही अवस्था स्पाइन स्ट्रोक spine stroke कहलाती हैं ।


spine stroke in hindi
स्पाइन स्ट्रोक




स्पाइन स्ट्रोक मुख्यत: दो प्रकार के होतें हैं ।



1.हैमरेज स्पाइन स्ट्रोक hemorrhage spine stroke



इस तरह के स्ट्रोक में रीढ़ की हड्डी की नस फटनें से इसमें से खून निकलता हैं ।



2.नान हैमेरेजिक स्पाइन स्ट्रोक Non hemorrhagic spine stroke



इस प्रकार के स्ट्रोक रीढ़ की नसों में ब्लड क्लाट Blood clot की वज़ह से होतें हैं ।अधिकतर स्पाइन स्ट्रोक इसी तरह के होतें हैं ।




 भारत सहित पूरी दुनिया में ब्रेन स्ट्रोक की तुलना में स्पाइन स्ट्रोक के बहुत कम मामलें होतें हैं आँकडो के अनुसार कुल स्ट्रोक के महज दो प्रतिशत मामले ही स्पाइन स्ट्रोक के होते हैं ।


स्पाइन स्ट्रोक के कारण नस Nerve impulse संदेश भेजनें में असमर्थ हो जातें हैं फलस्वरूप शरीर के विभिन्न भागों को नियंत्रित करना असमर्थ हो जाता हैं । जिससे लकवा,मांसपेशियों में कमज़ोरी जैसी गंभीर बीमारी हो जाती हैं ।



स्पाइन स्ट्रोक spine stroke के लक्षण 



1.लम्बें समय तक हाथ पैरों में सुन्नपन जो बार बार हो ।


2.गर्दन में दर्द 



3.कमर में दर्द


4.पैरों और हाथ की मांसपेशियों में कमज़ोरी और हाथ पैरों में पतलापन होना ।


5.हाथ पैरों से कम वजन की वस्तु भी नहीं संभाल पाना ।


6.हाथ पैरों में ठंड़ा गर्म महसूस नहीं होना।


7.हाथ पांव में बार बार ऐंठन आना ।


8.ऐसा लगना जैसें शरीर में हाथ पांव और निचला भाग है ही नहीं ।



9.मलमूत्र पर नियत्रंण नहीं होना ।


10.लम्बें समय तक सिरदर्द जो साधारण सिरदर्द से अलग पीछें के हिस्सों से शुरू होकर आगें तक आता हो ।


11.गर्दन में जकडन महसूस होना ।


12.थोड़ा काम करनें में भी थकावट और चक्कर आना ।




कुछ लक्षण स्पाइन कार्ड के क्षतिग्रस्तता के आधार पर भी उभरतें हैं उदाहरण के लिए रीढ़ की हड्डी के निचलें भागों में स्ट्रोक होनें पर पैरों में सुन्नपन या लकवा हो जाना जैसी समस्या उभरती हैं जबकि रीढ़ की हड्डी के ऊपरी भाग में समस्या होनें पर मस्तिष्क संबंधी
जटिलताओं के साथ लकवा होना ,पैरों में सुन्नपन होना आदि समस्याए उभरती हैं ।



स्पाइन स्ट्रोक spine stroke के कारण  :::




1.रीढ़ की हड्डी में चोट लगना :::



जैसें जैसें sport utility vehicle SUV जैसें उच्च गतिशील वाहनों का विकास हो रहा हैं वैसे ही रीढ़ की हड्डी से संबधित मामलें भी बड़ रहें हैं और इन रीढ़ की हड्डी से संबधित मामलों में सबसे सामान्य स्पाइन स्ट्रोक हैं । सीट बेल्ट नही बांधना,अचानक तेज गति से ब्रेक लगाना, दुर्घटना होना । इन सभी मामलों में सबसे ज्यादा प्रभावित अँग रीढ़ की हड्डी ही होता हैं। रीढ़ की हड्डी में चोंट लगनें से हेमेरेजिक स्पाइन स्ट्रोक की संभावना बहुत ही सामान्य बात हैं । 



2.सोनें बैठनें उठनें की खराब आदतें :::



भारतीय लोगों में स्पाइन स्ट्रोक और रीढ़ की हड्डी से संबधित बीमारियों का सर्वप्रमुख कारण सोनें,उठनें,बैठनें की खराब आदतें हैं ।बसों,ट्रेनों,आदि में खडे़ होकर यात्रा करना । पीछें की जेब में पर्स रखकर घंटों तक बैठे रहना,गलत संरचना के खाट,बेड, पलंग पर सोना आदि की वजह से रीढ़ की हड्डी में दबाव या झटका लगता हैं फलस्वरूप स्पाइन स्ट्रोक की समस्या पैदा हो जाती हैं ।



3.रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर 



किसी कारणवश रीढ़ की हड्डी में कोई गांठ बन जाती हैं तो रीढ़ की हड्डी से जानें वाली नसों में दबाव पैदा होता हैं फलस्वरूप स्पाइन के ऊतक क्षतिग्रस्त होकर स्पाइन स्ट्रोक का कारण बनते हैं ।



4.उच्च रक्तचाप  


उच्च रक्तचाप के कारण रीढ़ की हड्डी की नसों पर दबाव पडता हैं फलस्वरूप नसें फट जाती हैं अधिक रक्तस्त्राव स्पाइन स्ट्रोक का कारण बन जाता हैं ।



5.उच्च कोलेस्ट्राँल



शरीर में कोलेस्ट्राँल की उच्च मात्रा के कारण धमनियों पर दबाव पडता हैं और धमनियाँ फट जाती हैं । जिससे स्पाइन स्ट्रोक होता हैं ।



6.मधुमेह 



मधुमेह का उच्च स्तर रहनें से रीढ़ की हड्डी में लगी चोट लम्बें समय तक ठीक नहीं होती हैं और स्पाइन स्ट्रोक का कारण बन जाती हैं ।



7.मोटापा :::


अत्यधिक मोटापा स्पाइन स्ट्रोक के लिए बहुत अधिक अनूकूल होता हैं । कई अध्ययनों ने यह साबित किया हैं कि मोटापे से स्पाइन स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती हैं ।






स्पाइन स्ट्रोक का इलाज



स्पाइन स्ट्रोक को कुछ नियमित योगाभ्यास ,दवाई और जरूरत पडने पर आसानी से ठीक किया जा सकता हैं । 


योगिक क्रियाएँ जैसें चक्रासन ,मंडूकासन,अर्ध चन्द्रयान,सूर्य नमस्कार नान हैमरेजिक स्पाइन स्ट्रोक में बहुत फायदेमंद होती हैं । इसी प्रकार पुनर्नवा मंडूर, गिलोय,संजीवनी वटी, हरिद्राखंड के द्धारा रीढ़ की हड्डी के सूजन को कम करती हैं ।और रक्तस्त्राव को नियंत्रित करती हैं ।


यदि रोगी की स्थिति गंभीर होती हैं तो सर्जरी की आवश्यकता पडती हैं सर्जरी के बाद व्यक्ति बहुत शीघ्रता से ठीक होकर घर जा सकता हैं ।



० फिटनेस का रखना हो ध्यान तो शुरु करो सतरंगी खानपान





० गौमुखासन




स्पाइन अर्थराइटिस spine arthritis



स्पाइन अर्थराइटिस रीढ़ की हड्डी से संबधित बीमारी हैं । जिस प्रकार घुटनों,हाथ के जोड़ो आदि में अर्थराइटिस होनें पर दर्द, सूजन होता हैं । उसी प्रकार गर्दन और रीढ़ की हड्डी के आसपास दर्द और सूजन लम्बें समय तक ठीक नहीं हो रहा हो तो यह स्पाइन अर्थराइटिस spine arthritis बन जाता हैं । स्पाइन अर्थराइटिस ठंड के मौसम में बहुत तेजी से उभरता हैं ।



स्पाइन अर्थराइटिस के लक्षण ::





० हाथ और पैरों में दर्द होना ।


० रीढ़ की हड्डी के आसपास सूजन और असहनीय दर्द होना ।


० हाथों और पैरों का सुन्न होना ।


० चक्कर के नियतकालिक दौरे ।


० गर्दन में जकड़न होना ।


० रीढ़ की हड्डी का लचीलापन कम होना ।


० शरीर में कमजोरी महसूस होना ।



० हाथ पाँवों में कम्पन होना ।


० मोबाइल या कम्प्यूटर पर काम करते समय चक्कर आना ।


० गर्दन या रीढ़ की हड्डी झुकाते समय अचानक चक्कर आना ।





स्पाइन अर्थराइटिस का कारण



० स्पाइन अर्थराइटिस पूर्णत: जीवनशैली lifestyle से संबधित बीमारी हैं अर्थात बहुत लम्बें समय तक कम्प्यूटर, मोबाइल पर चिपके रहना ।


० खानपान की गलत आदतें जैसें संतुलित भोजन की जगह जंक फूड का अधिक सेवन ।



० व्यायाम का पूरी तरह से अभाव ।


० शराब और धूम्रपान की आदतें ।



० सूर्य की रोशनी में नहीं रहना ।



० कैल्सियम युक्त आहार का अभाव ।



० बैठने उठने की खराब आदतें ।


० लम्बें समय तक ड्राइविंग करना ।


० रीढ़ की हड्डी में चोंट लगना ।


० अत्यधिक वजन होना ।





स्पाइन अर्थराइटिस का इलाज 



स्पाइन अर्थराइटिस पूरी तरह से जीवनशैली lifestyle से जुडी बीमारी हैं जिसको स्वस्थ जीवनशैली healthy lifestyle अपना कर शुरूआती स्तर पर ठीक किया जा सकता हैं ।


० स्पाइन अर्थराइटिस होनें पर योग,व्यायाम को जीवन का अंग बना लें ।


० गौमुखासन ,मत्स्यासन,भुजंगासन,और सूर्यनमस्कार करनें से रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढता है किन्तु ध्यान रहें उपरोक्त आसन किसी योग्य प्रशिक्षक की सहायता से ही करें ।



० हल्दी, और अदरक  शरीर से सूजन कम कर अर्थराइटिस की समस्या कम करतें हैं । अत:दोनों का सेवन भोजन के अतिरिक्त करना चाहिए ।


० गर्म पानी से गर्दन के आसपास और रीढ़ की हड्डी के आसपास सिकाई करें ।



० भोजन संतुलित और पोषक होना चाहिए जिसमें अंकुरित अनाज,दाले,सब्जी पर्याप्त मात्रा में हो ।



० कैल्सियम युक्त खाद्य पदार्थ जैसे दूध का इस्तेमाल नियमित रूप से करें ।



० वजन नियंत्रित रखें ।


० 35 साल के बाद हड्डीयों से कैल्सियम बहुत तेजी से घटना चालू हो जाता हैं अत: इस उम्र के बाद शरीर में अतिरिक्त कैल्सियम की पूर्ति जरूर करें ।


० प्रतिदिन कुछ समय सुबह की धूप में जरूर बैंठें ।



यदि स्पाइन अर्थराइटिस spine arthritis की समस्या बहुत लम्बें समय से हैं और इलाज के बाद भी ठीक नहीं हो रही हैं। तो सर्जरी surgery की सहायता से इसे ठीक किया जा सकता हैं । यदि ओपन सर्जरी के बजाय सेफ स्पाइन सर्जरी Safe spine surgery या आधुनिक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की सहायता ली जाए तो परिणाम बहुत सुरक्षित और मरीज बहुत जल्दी स्वस्थ होता हैं ।



Safe spine surgery में रीढ़ की हड्डी के पास बहुत बारिक छेद कर रोबोटिक आर्म और लेजर की सहायता से आपरेशन किया जाता हैं । यह आपरेशन मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त होनें से किसी भी प्रकार से रीढ़ की हड्डी काे नुकसान नहीं होता हैं जैसा कि पूर्व के ओपन पद्धति के आपरेशनों में होता था ।

चूकिं इस आपरेशन में चीर फाड़ नहीं होती हैं अत: मरीज बहुत जल्द घर जा सकता हैं और अपना सामान्य कामकाज शुरू कर सकता हैं।





० बरगद के फायदे














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