शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

बांस के औषधीय गुण benifits of bamboo in Hindi

Benifits of bamboo in hindi
 बांस के औषधीय गुण


बांस के औषधीय गुण benifits of bamboo in Hindi



बांस का परिचय 



बांस सम्पूर्ण भारतवर्ष में पाया जानें वाला पेड़ हैं । बांस का पेड़ bansh ka ped  पहाड़ों की तलहटी और घने जंगल में बहुतायत में उगता है। बांस के पेड़ एकदम सीधे  लम्बे और झाड़ीदार होते हैं। बांस के पेड़ की लम्बाई 40 से 50 फ़ीट तक हो जाती हैं । 


एक बांस की झाड़ी bansh ki jhadi में सौ दौ सौ तक बांस होते हैं । बांस जहां उगता है उसके आसपास की जमीन से खतरनाक और जहरीले तत्वों को खींच लेता है और जमीन को विषैले तत्वों से मुक्त कर देता है ।


बांस के पेड़ पर दो से ढाई फीट के अंतर से ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ पंगेर फूटती हैं । यह पंगेर वर्षा ऋतु में जब बादल गरजतें है तब फूटती हैं । बांस के पेड़ bansh ke ped पर पत्ते बहुत कम होते हैं।




बांस की दो जातियां होती हैं  एक नर और दूसरी मादा नर बांस अंदर से ठोस होते हैं जबकि मादा बांस अंदर से खोखले होते हैं । आयुर्वेद में जिस बांस का औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता हैं उसे पीत बांस, पीला बांस या



स्वर्ण बांस कहते हैं bambusa vulgaris scharad 




बांस में प्रचुर मात्रा में विटामिन, प्रोटीन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट पाये जातें हैं जिससे यह औषधि के साथ अचार,सब्जी, और मुरब्बे के रूप में बहुतायत में खाया जाता हैं ।


बांस के बर्तनों में खाना बनाया और खाया जाता हैं ।




बांस के पेड़ों की उम्र 60 से 90 वर्ष तक होती हैं और बांस के जीवन के उत्तरार्ध में फूल और फल आते हैं । ऐसा कहा जाता हैं कि बांस में फूल लगना मानव के लिए तबाही का मंजर लाता है क्योंकि बांस में लगने वाले फल और फूल चूहों को बहुत प्रिय होते हैं फलस्वरूप बांस में फलन के समय बांस के आसपास चूहे बहुतायत में निवास करने लग जाते हैं , और बांस के फल और फूल bansh ke fal aur ful खाकर  अपनी आबादी तेजी से बढ़ाते हैं । 



चूहों की यह बड़ी हुई आबादी आसपास की फसल और पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाती हैं फलस्वरूप भूखमरी की समस्या पैदा हो जाती हैं ।



बांस का संस्कृत नाम




बांस को संस्कृत में बहुपल्लव,वृहतृण,कंटकी,वंश,और यवफला कहते हैं ।




बांस का हिंदी नाम




बांस,


कांटाबास,


मलबास





बांस का english name




Throny bamboo



Spiny bamboo





बांस का लैटिन नाम 



Bambusoideae बेम्बूसोआईडियाई 



बैब्यूसा अरंडिनेसी (Bambusa arundinacea) इस प्रजाति के बांस का वर्णन भारतीय औषधि ग्रन्थों में किया गया है ।







बांस की प्रकृति 



बांस प्रकृति में शीतल, कड़वे,रुक्ष,कसेले और पित्त का शमन करने वाले होते हैं ।






Bansh ke oshdhiy gun बांस के औषधीय गुण benifits of bamboo in Hindi






स्त्री रोगों में बांस





बांस स्त्री रोगों की जनप्रिय औषधि हैं । प्रसव को सुरक्षित और दर्दरहित बनाने के लिए बांस के पत्तों का काढ़ा बनाकर गर्भवती स्त्री को पिलाया जाता हैं यह क्वाथ गर्भाशय को संकुचित करता हैं जिससे शिशु आसानी से बाहर आ जाता हैं ।



मासिक धर्म साफ़ नहीं हो रहा हो तो बांस के नरम तने या पत्तों  का क्वाथ बनाकर पीने से मासिक धर्म खुलकर आता हैं ।







मधुमेह में बांस 



मधुमेह में बांस के पत्तों और तने का क्वाथ पीने से मधुमेह नियंत्रित रहता है । 



बांस से बने पात्र में रखा जल शरीर की रक्त शर्करा को नियंत्रित करता हैं । रात को जल बांस पात्र में भरकर सुबह खाली पेट पीना चाहिए ।







शरीर के किसी भाग में सूजन होना




बांस के तने bansh ke tane पर लगने वाले अंकुरो को पीसकर सूजन वाली जगह पर बांधने से सूजन मिट जाती हैं । यदि सूजन शरीर के आंतरिक भाग में हो तो इसका क्वाथ बनाकर पीना चाहिए ।





हड्डी टूटने पर बांस 




प्राचीन काल से ही भारत में बांस का प्रयोग टूटी हड्डी को जोड़ने bansh ka prayog tuti haddi jodne ke liye के लिए हो रहा है । आज भी आदिवासी टूटी हड्डी को जोड़ने के लिए बांस का प्रयोग कुशलता से कर रहे हैं । 



बांस की सूखी किमची टूटे हुए अंग के आसपास रस्सी की सहायता से इस प्रकार बांधी जाती हैं कि प्रभावित अंग की हड्डी बिना हिले डुले जुड़ जाती हैं ।






शरीर की गर्मी बढ़ने पर बांस




बांस पर जो चावल समान फल आते हैं उन्हें बांस के चावल कहते हैं। ये बांस के चावल शीतल प्रकृति के होते हैं। इनको खाने से शरीर की गर्मी उतर जाती हैं ।






गंजेपन की चिकित्सा 




बांस की जड़ और बांस की छाल जलाकर इसकी राख नारियल तेल में मिलाकर गंजे सिर में लगाने से गंजापन समाप्त हो जाता हैं ।





दांत दर्द होनें पर बांस का प्रयोग 




बांस की पतली टहनी को आगे से कुचलकर कूचेदार बना लें इस कूचेदार टहनी से दातुन करने से दांतों का दर्द नहीं होता हैं । और दांत दर्द होनें पर दर्द बंद हो जाता हैं ।





त्वचा रोगों में बांस





बांस के पत्तों को जलाकर सरसों तेल के साथ खुजली वाली त्वचा पर लगाने से खुजली मिटती है । 



घाव होने पर बांस को उबालकर इसका पानी घाव पर गरम गरम डालने से घाव जल्दी भर जाता हैं ।






मुंह के छालों पर बांस का प्रयोग





बांस के तने का मुरब्बा बनाकर खाने से लम्बे समय से ठीक नहीं हो रहें मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं ।







पेट के छालों पर बांस




बांस के पत्तों का रस बनाकर सुबह शाम एक एक चम्मच लेने से पेट के छालों में आराम मिलता हैं ।



बांस की जड़ जलाकर इसकी राख को पेट के आसपास पानी मिलाकर लपेटने से पेट की गर्मी समाप्त हो जाती हैं ।






कैंसर रोकने में बांस




बांस की कोमल टहनियों में एंटीऑक्सीडेंट तत्व प्रचुरता में मिलते हैं अतः बांस की इन कोमल टहनियों को सब्जी के रूप में खाना चाहिए इससे कैंसर जैसी बीमारी से बचाव होता हैं ।







पैशाब रुकने पर बांस



बांस की जड़ का क्वाथ पिलाने से रुकी हुई पैशाब खुलकर आती हैं । इसके पत्तों का रस एक दो चम्मच पीनें से भी रूकी हुई पैशाब चालू हो जाती हैं ।





सिरदर्द में बांस का 




बांस की जड़ का रस एक दो बूंद नाक में डालने से पुराने सिरदर्द में राहत मिलती हैं ।


इसके अलावा माइग्रेन और तनाव से भी मुक्ति मिलती हैं ।






कानदर्द में बांस




कानों होने वाला तीव्र दर्द बांस के पत्तों का रस कानों में डालने से बंद हो जाता हैं । 


प्रतिदिन सुबह-शाम पांच बूंद बांस के पत्तों का रस कान में डालने से बहरापन भी दूर हो जाता हैं ।




टांसिलाइटिस Tonsillitis में बांस 



टांसिलाइटिस के कारण गले में तीव्र दर्द हो रहा हो तो बांस की पत्तियों का क्वाथ बनाकर गरारे करने से बहुत शीघ्रता से आराम मिलता हैं ।



यदि गला बैठ गया है तो बांस की पत्तियों से बने क्वाथ में चुटकी भर हल्दी और फिटकरी मिलाकर गरारे करने से आराम मिलता हैं ।




संक्रमण रोकने में बांस का प्रयोग




यदि शरीर में किसी भी जहरीली वस्तु का संक्रमण हो गया हो तो बांस बहुत प्रभावी तरीके से संक्रमण रोकता हैं । 


बांस की जड़ और पुनर्नवा समान मात्रा में मिलाकर क्वाथ बना लें यह क्वाथ सुबह शाम 5 - 5 मिली सेवन करने से संक्रमण के साथ शरीर की सूजन भी उतर जाती हैं ।





रेडिएशन का प्रभाव





बांस रेडिएशन के प्रभाव को समाप्त कर देता हैं । अतः ऐसी जगह जहां मोबाइल टावर हो, खतरनाक रेडिएशन उत्सर्जन करने वाले उघोग हो इनके आसपास बांस के पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। 


इसी प्रकार यदि अस्पताल,CT SCAN सेंटरों, एक्स रे सेंटर आदि में काम करने वाले व्यक्ति खतरनाक रेडिएशन के दुष्प्रभाव से बचना चाहते हैं तो उन्हें कुछ समय बांस के पेड़ के नीचे अवश्य बैठना चाहिए ।





दस्त रोकने के लिए बांस




बांस की संधियों पर निकलने वाले अंकुर पीसकर खानें से दस्त बंद हो जातें हैं । 





बांस कैल्सियम का स्त्रोत




बांस के नव अंकुरों में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम मोजूद रहता है । अतः कैल्सियम की कमी से ग्रसित व्यक्ति को बांस के नव अंकुरों का सेवन अवश्य करना चाहिए ।






बांस की कोंपलों में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम मोजूद रहता है यदि बढ़ते बच्चों को इन कोंपलों से बना अचार, मुरब्बा या सब्जी नियमित रूप से खिलाई जाए तो बच्चे का कद प्रर्याप्त लम्बाई में बढ़ता है ।






पारा निगलने पर बांस




यदि किसी ने पारा निगल लिया हो तो बांस के पत्तों का रस पीलानें से पारें का विषैला प्रभाव समाप्त हो जाता हैं ।






प्रजनन क्षमता बढ़ाने में बांस का उपयोग





बांस के बीजों को पानी में उबालकर इस पानी को यदि संतानहीन पुरुष और महिला पीना शुरू करें तो कुछ ही समय में संतान उत्पन्न करने की क्षमता प्राप्त हो जाती हैं ।




ऊर्जा प्राप्त करने का उत्तम स्रोत




बांस के 100 ग्राम बीजों में 60 ग्राम के लगभग कार्बोहाइड्रेट और 265 किलो कैलोरी ऊर्जा प्राप्त की जा सकती हैं । इतनी ऊर्जा और कार्बोहाइड्रेट अन्य खाद्य पदार्थों से प्राप्त नहीं होती हैं। अतः शारीरिक श्रम और खेलों में हाथ आजमाने वालों को बांस के बीजों का सेवन अवश्य करना चाहिए ।







LDL कोलेस्ट्रॉल घटाने में बांस का उपयोग




बांस के नवीन अंकुरों में प्रचुर मात्रा में फायबर पाया जाता हैं । सौ ग्राम नव अंकुरों में 8 ग्राम तक फायबर होता हैं यह फायबर खून से low density lipoprotein या LDL कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करता हैं । अतः LDL कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने के लिए बांस के नव अंकुरों का प्रयोग मुरब्बे के रूप में किया जाना चाहिए ।







वजन घटाते हैं बांस के बीज




बांस के बीज जिन्हें बांस के चावल भी कहा जाता हैं, में उच्च कैलोरी प्रदान करने की क्षमता होने के कारण इनके सेवन के बाद लम्बे समय तक भूख नहीं लगती हैं । अतः जिन लोगों का वजन अधिक होता हैं उन्हें बांस के बीजों से बनी रोटी का सेवन अवश्य करना चाहिए ।





IMMUNITY इम्यूनिटी बढ़ाता है बांस 





बांस की नव अंकरित कोपल एंटी ऑक्सीडेंट, फाइटोकेमिकल्स और मिनरल्स का उत्तम स्रोत होती हैं । इनके सेवन से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता IMMUNITY बढ़ती है । 




कामोत्तेजना sex power बढ़ाते है बांस के बीज





बांस के बीजों में मौजूद ऊर्जा लिंग और योनि की रक्त शिराओं में खून का प्रवाह बढ़ा देती हैं जिससे महिला और पुरुष दोनों में कामोत्तेजना बढ़ जाती हैं । 



कामोत्तेजना बढ़ाने के लिए बांस के बीजों की खीर बनाकर पीना चाहिए ।





रात में आक्सीजन देता हैं बांस का पेड़



बांस रात के समय अन्य पेड़ों के विपरीत कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण कर आक्सीजन वातावरण में छोड़ता है । अतः इसके आसपास निवास करने वालों को पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन मिलती रहती हैं जिससे अस्थमा, ह्रदय रोग , आदि समस्याएं नहीं होती हैं और इसके आसपास रहने वाले निवासियों का स्वास्थ उत्तम बना रहता हैं ।





तनाव दूर करता हैं बांस का मुरब्बा




बांस के मुरब्बे में ऐसे फ्लेवेनाइड होते हैं जो तनाव दूर कर मस्तिष्क को शांत रखते हैं । और उत्तम नींद प्रदान करते हैं ।







वंशलोचन क्या है ?





वंशलोचन सुप्रसिद्ध शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक औषधि हैं जो मादा जाति के खोखले बांस के अंदर से मिलती हैं । इस जाति के बांस का लैटिन नाम है बैब्यूसा अरंडिनेसी (Bambusa arundinacea) 


असली वंशलोचन सफेद रंग का ठोस, नीले रंग की आभा लिए होता है । वंशलोचन को लकड़ी या पत्थर पर घिसने से किसी भी प्रकार का निशान नहीं पड़ता हैं ।



वंशलोचन को बांस कपूर ,त्वकक्षीरी,पिंगा, वंश शर्करा,तबाशीर आदि नामों से भी जाना जाता हैं ।







वंशलोचन की प्रकृति 



आयुर्वेद मतानुसार वंशलोचन रुक्ष,कसैला, शीतल और पित्त का शमन करने वाला होता हैं ।





वंशलोचन के फायदे vanshloshan ke fayde





सूखी खांसी की दवा 




3 ग्राम वंशलोचन शहद के साथ मिलाकर सुबह शाम चटाने से सूखी खांसी बंद हो जाती हैं । 




मूत्र मार्ग की जलन




गोखरु, मिश्री और वंशलोचन तीन तीन ग्राम मिलाकर आधा दूध और आधा जल मिले पानी के साथ सेवन करें । इससे मूत्र मार्ग की जलन शांत होती हैं ।






पुराने ज्वर में वंशलोचन





ऐसा ज्वर जो लम्बे समय से आ रहा हो और जो शरीर की गर्मी बढ़ाता हो के लिए वंशलोचन रामबाण दवा है । ऐसे ज्वर की पहचान कर 5 ग्राम वंशलोचन और 5 ग्राम गिलोय चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करवाना चाहिए ।






पागलपन की दवा



पित्त प्रकृति का रोगी यदि पागल हो जाता हैं तो वंशलोचन और ब्राम्ही घृत मिलाकर प्रतिदिन सेवन करवाना चाहिए ।






अमाशय के दोषों का निवारण




वंशलोचन को प्रतिदिन शीतल जल के साथ तीन ग्राम की मात्रा में लेने से अमाशय के सभी दोष दूर होकर अमाशय स्वस्थ्य बना रहता हैं ।





वीर्य के दोषों में





वंशलोचन को एक पोटली में भरकर पानी से भरे बर्तन में रख दें,इस पानी को दिन में तीन चार बार पीने से वीर्य के दोषों जैसे कम शुक्राणु, कमज़ोर शुक्राणु आदि समस्या दूर होती हैं ।


इसी प्रकार इस पानी के सेवन से नींद में वीर्य निकलने nightfall की समस्या समाप्त हो जाती हैं ।








शरीर में कैल्शियम की पूर्ति करता हैं



वंशलोचन प्राकृतिक कैल्शियम का विपुल भंडार होता हैं । अतः शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर इसकी थोड़ी थोड़ी मात्रा रोज पानी या शहद के साथ लेना चाहिए ।



बच्चा यदि मिट्टी खाता है तो उसे वंशलोचन की छोटी छोटी गोलियां बनाकर खिलाना चाहिए इससे बच्चा मिट्टी खाना बंद कर देता हैं।






 गर्भावस्था में 



यदि गर्भावस्था में महिलाओं में कैल्सियम की कमी हो जाती हैं तो वंशलोचन को शहद के साथ मिलाकर सेवन करवाना चाहिए इससे होने वाला बच्चा हष्ट पुष्ट होता हैं ।



हाथ पैरों में जलन होने पर 





यदि हाथ पैरों में जलन होती हो और हथेली और पांव के पंजे गर्म रहते हो तो एक ग्राम वंशलोचन और एक ग्राम शहद मिलाकर खाने से हाथ पैरों की जलन बंद हो जाती हैं ।


 



प्रदर रोगों में वंशलोचन




 पांच ग्राम वंशलोचन और पांच ग्राम मिश्री मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से प्रदर रोगों जैसे रक्त प्रदर और श्वेत प्रदर में लाभ होता है ।




० नीम के औषधीय गुण






० केले के फायदे




० हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन सल्फेट





० बबूल के औषधीय गुण



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