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Dashmul kwath uses in Hindi । दशमूल क्वाथ के फायदे

 Dashmul kwath uses in Hindi दशमूल क्वाथ के फायदे  :::



दशमूल क्वाथ के फायदे से अधिकांश लोग आज अनभिज्ञ हैं आईये जानतें दशमूल क्वाथ के फायदे  Dashmul kwath uses in Hindi  बारें में 

यदि प्रसव होने के पश्चात 8 से 10 दिन हो गए हो, और स्त्री के गर्भाशय से  दुर्गंध युक्त रक्त स्त्राव हो रहा हो तो प्रतिदिन 10ml दशमूल क्वाथ सुबह-शाम देने से दुर्गंध युक्त रक्त स्त्राव बंद हो जाता है


दशमूल क्वाथ के बारे में भैषज्य रत्नावली में श्लोक है कि



वातव्याधिं क्षयं छर्दिं पाण्डुरोगच्च कामलाम शर्करामश्मरी मूतरकृच्छं धातुक्षयंजयेत।। कृशानांपुष्टिजननो बन्ध्यानां पुत्रद,:पर।अरिष्टो दशमूलाखयस्तेज: शुकरबलपृद:।।






1. गर्भाशय संबंधी विकारों में विकारों में :::


यदि प्रसव होने के पश्चात 8 से 10 दिन हो गए हो, और स्त्री के गर्भाशय से  दुर्गंध युक्त रक्त स्त्राव हो रहा हो तो प्रतिदिन 10ml दशमूल क्वाथ सुबह-शाम देने से दुर्गंध युक्त रक्त स्त्राव बंद हो जाता है।



यदि प्रसव के पश्चात प्रसूता स्त्री को ज्वर आ जाता हो तो दशमूल क्वाथ बहुत अच्छा लाभ प्रदान करता है इसके लिए दशमूल क्वाथ के साथ लक्ष्मी विलास रस का प्रयोग किया जाना चाहिए। लक्ष्मी विलास रस 3 ग्राम और दशमूल क्वाथ 5ml लेकर सुबह शाम प्रसूता स्त्री को सेवन करवाना चाहिए।




दशमूल क्वाथ गर्भाशय को बल प्रदान करने वाली आयुर्वेद की बहुत उत्तम औषधि है यदि कुमारी स्त्री शादी के पूर्व दशमूल क्वाथ का सेवन करती हैं तो गर्भाशय मजबूत और संतान हष्ट पुष्ट पैदा होती है।




यदि संतान उत्पन्न करने के पश्चात प्रसूता को शरीर में विभिन्न स्थानों पर सुई के चुभने जैसा दर्द महसूस होता हो तो दशमूल क्वाथ 10 मिली और महावात विध्संन रस 1 ग्राम सुबह शाम भोजन के पश्चात सेवन करवाना चाहिए , इससे कुछ ही दिनों में प्रसूता का दर्द समाप्त हो जाता है ।




यदि प्रसूता स्त्री के हाथ पांव खींचा रहें हों और आक्षेप आ रहे हो तो दशमूल क्वाथ चूर्ण सुबह शाम 15 15 एम एल समान मात्रा में पानी मिलाकर सेवन करवाना चाहिए।





 स्तनपान कराने वाली माताओं को यदि खून की कमी हो जाए तो दशमूल क्वाथ को लोहे की कढ़ाई मैं गर्म कर कर प्रतिदिन 5ml भोजन के पश्चात चलाएं कुछ ही दिनों में रक्त की कमी दूर हो जाएगी।





प्रसूता स्त्री का बच्चा यदि मर जावे और प्रसूता पागलों जैसी बातें करने लगे तो दशमूल क्वाथ 10 एमएम और त्रिकटु चूर्ण एक चुटकी मिलाकर प्रतिदिन सुबह दोपहर शाम को सेवन करवाएं कुछ ही दिनों में प्रसूता सामान्य हो जाएगी।







2.सूजन आने पर दशमुल का प्रयोग




शरीर के किसी भी भाग पर सूजन आने पर दशमूल क्वाथ 10 एमएम और गिलोय का रस 10ml सोंठ आधा चम्मच सफेद पुनर्नवा आधी चम्मच मिलाकर प्रतिदिन सुबह और शाम को भोजन के पश्चात सेवन करवाना चाहिए। 





हाथी पांव बीमारी में दशमूल क्वाथ चूर्ण दो चम्मच आधा गिलास पानी में रात भर भिगोकर रख दें सुबह इसे उबालकर आधा कर ले और महासुदर्शन चूर्ण दो चुटकी मिलाकर पिए लगभग 2 वाक्य प्रयोग करने से हाथी पाव बीमारी में बहुत आराम मिलता है।







3. बहरापन होने पर दशमूल क्वाथ का प्रयोग :



दशमूल क्वाथ 30ml लेकर इसमें 10ml तिल का तेल मिला लें इस मिश्रण को हल्की आंच पर गर्म करके एक शीशी में भर दे प्रतिदिन पांच पांच बूंद कान में डालें कुछ समय के प्रयोग के पश्चात कान से सुनाई देना प्रारंभ हो जाएगा, बहरापन का यह एक अनुभूत प्रयोग है।





4. शरीर में चींटी रेंगने जैसी अनुभूति होने पर दशमूल क्वाथ का प्रयोग :::




मधुमेह, शरीर में वात का अधिक बढ़ जाना, आदि समस्या होने पर शरीर में चींटी रेंगने जैसा एहसास होता है इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए दशमूल क्वाथ 10ml समान मात्रा में पानी और 2 ग्राम गाय का घी मिलाकर गर्म कर ले तत्पश्चात घुट घुट कर पिए दिन में एक बार यह प्रयोग करें कुछ दिनों के प्रयोग के पश्चात बहुत आराम मिलता है।






5. साइटिका रोग पर दशमूल क्वाथ के प्रयोग ‌:::




दशमूल क्वाथ चूर्ण एक चम्मच, त्रिफला चूर्ण आधा चम्मच, पुष्कर मूल चूर्ण आधा चम्मच, आधा चम्मच अरंडी की जड़ का चूर्ण इन चारों को मिलाकर एक गिलास पानी में रात भर भिगो दें सुबह इस चूर्ण को तीन चौथाई रहने तक उबाल लें। इस उबले हुए मिश्रण को दिन में तीन बार समान मात्रा में बांटकर टीमें । आराम मिलने पर मात्रा को आदि कर दे ।






6. अति निद्रा आने पर दशमूल क्वाथ का प्रयोग :::






दशमूल क्वाथ 10 एमएम 3 ग्राम पीपल चूर्ण को मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से अति निद्रा रोग में आराम मिलता है।







7. प्रोस्टेट में दशमूल क्वाथ के प्रयोग :::




प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ जाने पर दशमूल क्वाथ 15 एमएम और 5 ग्राम शिलाजीत ,10 ग्राम मिश्री मिलाकर प्रतिदिन खाली पेट सुबह शाम पीना चाहिए ।






9. हथेली और पाव  में से पसीना आना :::




यदि हाथ की हथेली और पांव से पसीना आता हो तो दशमूल क्वाथ 5 एम एल और शंखपुष्पी 5ml मिलाकर सुबह-शाम भोजन के पश्चात सेवन करें कुछ दिनों के प्रयोग से पसीना आना बंद हो जाता है।






10. विभिन्न प्रकार के  ज्वरों में दशमूल क्वाथ का प्रयोग :::




वातज,पित्तज,और कफज ज्वर में दशमूल क्वाथ 5  ml और गिलोय चूर्ण आधा चम्मच सुबह दोपहर शाम सेवन करने से उपरोक्त प्रकार के ज्वर शीघ्र समाप्त हो जाते हैं ।








11. मिर्गी के दौरे पर दशमूल क्वाथ का प्रयोग :::




दशमूल क्वाथ 10 एमएम और जटा मासी 3 ग्राम को मिलाकर सुबह शाम सेवन करना चाहिए सेवन के पश्चात 5 ग्राम गाय का घी सिर में मालिश करें इस प्रकार के प्रयोग से मिर्गी के दौरे बार-बार नहीं आते हैं।





12. बांझपन में  दशमूलक्वाथ का प्रयोग :::




बहुत इलाज कराने के बाद भी यदि स्त्री को संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो तो रही हो तो एक बार दशमूल क्वाथ का प्रयोग भी करना चाहिए, इसके लिए दशमूल क्वाथ 15ml पलाश पुष्पासव 15 एम एल मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करवाना चाहिए




13. हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए दशमूल क्वाथ का प्रयोग :::




यदि हड्डियां कमजोर हो तो दशमूल क्वाथ 10 एमएम और 3 ग्राम शंख भस्म चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन सेवन करना चाहिए।




14. पीलिया रोग में दशमूल क्वाथ का प्रयोग:::




पीलिया होने पर दशमूल क्वाथ 15ml और गन्ने का रस 15ml समान मात्रा में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम भोजन के उपरांत पीना चाहिए।





15. पेट कम करने के लिए दशमूल क्वाथ का प्रयोग :::





यदि पेट बाहर की ओर निकल रहा है और लाख उपाय करने के बाद भी अंदर नहीं जा रहा है तो दशमूल क्वाथ 10ml और कुमारी आसव 10 एम एल मिलाकर प्रतिदिन रात को सोते वक्त सेवन करना चाहिए कुछ दिनों के प्रयोग के पश्चात पेट अंदर जाना शुरू हो जाता है।






16. रात को नींद में वीर्य निकल जाने पर दशमूल क्वाथ का प्रयोग:::





दशमूल क्वाथ 5ml को रात को सोते वक्त गुनगुने पानी के साथ लेने से रात में वीर्य निकलने की समस्या समाप्त हो जाती है।






17. मुत्राशय में जलन होने पर दशमूल क्वाथ का प्रयोग ,::




मुत्राशय में जलन हो रही हो तो दशमूल क्वाथ 10ml संभाग शीतल जल के साथ मिलाकर लेना चाहिए ऐसा करने से मुत्राशय मार्ग की जलन समाप्त हो जाती हैं।






18. चेहरे के निखार को पढ़ाने के लिए दशमूल क्वाथ के प्रयोग :::





दशमूल क्वाथ 10 एमएम प्रतिदिन खाली पेट सुबह शाम पीने से चेहरा कांतिमय और चमकीला बन जाता है लगातार इसके कुछ दिनों के प्रयोग से चेहरे की फुंसियां झाइयां और कालापन सांवलापन दूर हो जाता है।





19. मुंह में छाले हो जाने पर दशमूल क्वाथ का प्रयोग::





दशमूल क्वाथ 10ml लेकर उसमें 4 - 5 इलायची के दाने बांटकर मिला दे । इस मिश्रण से दिन में तीन चार बार कुल्ला करने से मुंह के छाले अति शीघ्र समाप्त हो जाते हैं। 






20.सिर दर्द में दशमूल क्वाथ के प्रयोग:::





सिर दर्द की समस्या रहने पर दशमूल क्वाथ 10ml और शिरसूलादि वज्र रस 3 ग्राम प्रतिदिन सुबह शाम लेने से सिर दर्द की समस्या समाप्त हो जाती है।





दशमूल क्वाथ चूर्ण के घटक द्रव्य :::




1. बेलछाल 



2.गंभारी छाल 




3.पाढ़ल छाल 




4.अरलू छाल 




5.अरणी की छाल 



6.गोखरू के पत्ते




7.छोटी अकेली के पत्ते 




8.बडी अकेली के पत्ते 



9.पुष्पार्णी के पत्ते 



10.शालपर्णी के पत्ते 



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