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kaishore gugul,कैशोर गुग्गुल, Trayodashanga gugul,त्रयोदशांग गुग्गुल

#कैशोर गुग्गुल (Kaishore gugul) :::


कैशोर गुग्गुल के बारें में एक प्रसिद्ध श्लोक वर्णन हैं,कि 

" कैशोरकाभिधानोsयं गुग्गुल: कान्तिकारक:"


 घट़क (content) :::


हरड़ (Terminalia chebula).

बहेड़ा (Terminal is bellerica).

आंवला (Emblica officinalis).

सौंठ (Zingiber officinale).

गिलोय (Tinospora cordifolia).

कालीमिर्च (piper nigrum).

पिपली (piper longum).

वायविड़ंग (Emblia robes).

निसोंठ (operculina turpethum).

दन्तीमूल ( Baliospermumm ontanum)

घृत (ghee).

शुद्ध गुग्गुल (commiphora makul).

रोगाधिकार (indication) :::




कुष्ठ      -     खैर क्वाथ या मंजिष्ठा क्वाथ के साथ


वातरक्त  -   मंजिष्ठा,गिलोय अथवा पंचतिक्त क्वाथ के साथ.


व्रण.      -  खैर क्वाथ के साथ.


प्रमेह ( Diabetes).     -  आंवला रस के साथ.


भगंदर.   -  त्रिफला क्वाथ के साथ.


मंदाग्नि   -  त्रिकटु के साथ .


कास.    -  मुनक्का व पीप्पली के साथ.


शोध.    -  पुनर्नवा,गोक्षरू क्वाथ के साथ.


#त्रयोदशांग गुग्गुल ( Trayodashan guggul) :::


घट़क (content) :::



अश्वगंधा ( Withania somnifera)


बबूल


हनुबेर


शतावरी (Asparagus racemosus)


गोखरू


विधारा 


रास्ना पत्ती


सौंफ


कपूर कचरी

यवानी


सोंठ (Zingiber officinale)


घी 


शटी


शुद्ध गुग्गुल (commiphora makul)

रोगाधिकार (indication) :::


कटिग्रह 

ग्रधसी (sciatica)

हनुग्रह

बाहुशूल 

जानू स्तंभ

योनिदोष 

० अस्थिभग्न

अस्थिवात 

मज्जावात 

स्नायुवात 

वातकफ शोध 

विद्रधी 

मात्रा :::


त्रिफला क्वाथ ,शहद ,लहसुन रस या दूध के साथ वैघकीय परामर्शानुसार.

० बिल्वादि चूर्ण








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गेरू के औषधीय प्रयोग

गेरू के औषधीय प्रयोग गेरू के औषधीय प्रयोग   आयुर्वेद चिकित्सा में कुछ औषधीयाँ सामान्य जन के मन में  इतना आश्चर्य पैदा करती हैं कि कई लोग इन्हें तब तक औषधी नही मानतें जब तक की इनके विशिष्ट प्रभाव को महसूस नही कर लें । गेरु भी उसी श्रेणी की   आयुर्वेदिक औषधी   हैं। जो सामान्य मिट्टी   से   कहीं अधिक   इसके   विशिष्ट गुणों के लिए जानी जाती हैं। गेरु लाल रंग की मिट्टी होती हैं। जो सम्पूर्ण भारत में बहुतायत मात्रा में मिलती हैं। इसे गेरु या सेनागेरु कहते हैं। गेरू आयुर्वेद की विशिष्ट औषधी हैं जिसका प्रयोग रोग निदान में बहुतायत किया जाता हैं । गेरू का संस्कृत नाम  गेरू को संस्कृत में गेरिक ,स्वर्णगेरिक तथा पाषाण गेरिक के नाम से जाना जाता हैं । गेरू का लेटिन नाम  गेरू   silicate of aluminia  के नाम से जानी जाती हैं । गेरू की आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति गेरू स्निग्ध ,मधुर कसैला ,और शीतल होता हैं । गेरू के औषधीय प्रयोग 1. आंतरिक रक्तस्त्राव रोकनें में गेरू शरीर के किसी भी हिस्से में होनें वाले रक्तस्त्राव को कम करने वाली सर्वमान्य औषधी हैं । इसके लिय

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