बच्चों की परवरिश कैंसे करें healthy parenting tips in hindi

 आजकल भारतीय समाज मे बढ़ते बच्चों की healthy परवरिश पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है, देखने में यह आ रहा है कि वर्किंग कपल working couple आफिस जाने से पहले बच्चों को electronic gazette देकर जाते और यह गेजेट ही बच्चों की दुनिया बन जाता है । आईये जानतें हैं बच्चों की परवरिश के कुछ ऐसे healthy parenting tipsके बारे में जिससे बच्चा समाज का जिम्मेदार नागरिक बन सके 


 
Parenting tips
बच्चों की परवरिश





बच्चों से मिलते या बात करते समय social media से दूर रहे




यदि आप  बच्चों से बात कर रहे हैं,और बच्चें आप की तरफ़ ध्यान देकर बात कर रहे हैं तो आप अपना पूरा ध्यान बच्चों में ही लगायें बच्चा क्या कह रहा है , उसकी बात गंभीर होकर सुने और उसकी बातों का जवाब दें । यदि आप बच्चों की बात को ध्यान से नहींं सुनेगें और सोशल मीडिया में या फोन में व्यस्त रहेंगें तो बच्चा भी कुछ समय बाद आपकों ध्यान से सुनना बंद कर देगा । और फिर जब आप दूसरों के सामने बच्चों को आपकीे बात मानने को कहेंगे तो बच्चा आपकीे बात अनसुना कर देगा इस तरह आपके और बच्चें के संबंधों में तनाव पैदा होगा ।



यदि आप चाहते हैं कि बच्चा आपकीे बात मानें आपको सम्मान दें तो आफिस से आने के बाद फेसबुक, ट्विटर,वाट्सअप,इन्स्टाग्राम आदि सोशल मीडिया प्लेटफार्म से दूरी बना ले । और बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय व्यतीत करें ।




बच्चों को प्यार दें :::



बच्चा छोटा हो या बड़ा उसे माता,पिता के प्यार की जरूरत हमेशा महसूस होती हैं अत: जब भी बच्चें को आपकी ज़रूरत महसूस हो उसे यह अहसास अवश्य करवाएं कि आप उनके साथ है । बच्चों को जरूरत के समय  गले लगाकर उनके साथ खड़े होने का अहसास अवश्य करवाएं । याद रखें आप बच्चों को जितना निस्वार्थ प्यार देंगें बच्चें  आपको उससे दुगना प्यार देंगें ।





बच्चों को बोलने का अवसर  दें :::




जब भी आप बच्चों के साथ बात करे तो उन्हें बोलनें का पूरा अवसर प्रदान करें  इस तरह आपको उनके मित्रों,टीचरों आदि के बारे मेँ विस्तार से जानकारी प्राप्त होती हैं । यदि कोई समस्या हैं तो आपको सुलझाने में आसानी होगी और आपका ओर बच्चें के बीच का रिश्ता मज़बूत होगा । इस तरह की परवरिश बच्चें को आगे चलकर जिम्मेंदार नागरिक बनाने में मदद करेगी ।





मेहनत का महत्व जरूर बताएं :::




बच्चों को मेहनत का महत्व जरूर बताएं और ये महत्व बोलकर नहींं बल्कि माता - पिता स्वंय मेहनत कर और बच्चों के सामनें उदाहरण प्रस्तुत कर बताएं । 





अच्छे संस्कारों का बीजारोपण करें :::



बच्चों को  जाति,धर्म, सम्प्रदाय और रंग के आधार पर भेदभाव करना नहीं सिखायें । ना ही अमीर गरीब का भेदभाव सिखाएं । बच्चों को बड़ों का आदर करना सिखायें। बांटकर खानें की आदत डालें । बड़ों का सम्मान करना सिखाएं । 


ईमानदारी,सच बोलना, बहादुरी ,कर्तव्य पालन जैसे गुण बच्चों में विकसित करें ।




मोबाइल ,कम्प्यूटर आदि का सही इस्तेमाल करना सिखाएं :::



बच्चों के रोने,परेशान करने आदि पर मोबाइल पकड़ा कर एक जगह बिठाने की बजाए बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल करते समय उनके पास बैठ कर बच्चों को मोबाइल को सही इस्तेमाल करना सिखाएं । इसके लिए बच्चों को कोड़िंग सीखा सकतें हैं । पढ़ाई के लिए आनलाईन कक्षा जॉइन करवा सकते हैं ।





पैसों के महत्व के बारें में बताएं :::



बच्चों को समय समय पर पैसों के महत्व के बारें में बताएं यदि बच्चों को पाकेट मनी दे रहें है तो उनसे उस पाकेट मनी का हिसाब जरूर लें यह भी ध्यान दें बच्चें ने पाकेट मनी को गैर जरूरी कामों में तो नही खर्च किया है । बच्चों को पाकेट मनी में से कुछ पैसें बचाकर गुल्लक तें डालनें हेतू प्रोत्साहित करें। जब यह पैसा भविष्य में बच्चें की जरूरत के समय काम आयेगा तो उसे भी बचत और पैसैं के महत्व के बारे में पता चलेगा ।





संयुक्त परिवार का महत्व समझाएँ




भारतीय परिवारों का संयुक्त परिवारों से एकाकी परिवारों में परिवर्तन बहुत तेजी के साथ हुआ है और इस तेज गति के परिवर्तन ने सबसे ज्यादा किसी को प्रभावित किया है तो वो है बच्चें आजकल के बच्चें एकाकी परिवारों में रहकर संयुक्त परिवारों से होनें वाले लाभों से पूरी तरह से दूर हो गये हैं ।


संयुक्त परिवारों में मिलनें वाली सीख बच्चें को पूरी जिंदगीभर स्वस्थ पारिवारिक वातावरण प्रदान करती थी । जिसके कारण तलाक,आत्महत्या ,बलात्कार जैसी घटनाएँ न के बराबर होती थी । आज के हालात में देखें तो इन घटनाओं की बाढ़ आ रही हैं जिसका मूल कारण संयुक्त परिवारों का टूटना है ।



 अभिभावक  अपने बच्चों को साल के कुछ दिन ऐसे माहोल में रखना चाहिए जंहा संयुक्त परिवार हो या फिर बच्चों को बुआ,मामा आदि के बच्चों के साथ भी छुट्टीयां बितानें भेज सकतें हैं । या उनके बच्चों को अपनें यहां बुला सकतें हैं ।


जब भी कही विवाह समारोह या किसी सामाजिक समारोह में जाएं बच्चों को दूर तक के रिश्तेदारो से परिचय करवाएं ऐसा करने से बच्चों में रिश्तों का सम्मान करनें की आदत विकसित होगी । 





बच्चों को उनकी रूचि का काम अवश्य करनें दें :::




प्रत्येक बच्चा अपनी कुछ विशेषताओं के साथ जन्म लेता हैं इन्ही विशेषताओं के अनुरुप उसे कुछ कामों में विशेष रूचि होती हैं । अत: माता पिता को बच्चें को उन विशेष कामों को करने हेतू प्रोत्साहित करना चाहिए न कि माता पिता को उनकी रूचि के काम हेतू दबाव ड़ालना चाहिए । 




पशु पक्षीयों पेड़ पौधों के साथ प्रेमपूर्वक व्यहवार करना सिखाएं :::



मनुष्य का संपूर्ण जीवन सह अस्तित्ववाद पर अधारित है अत: बच्चों को पैड़ पौधों जीव जंतुओं के साथ दोस्ताना व्यहवार करना सिखाएं । इसके लिए बच्चों को पेड़ पौधा लगाने उनकी देखभाल हेतू प्रेरित करें । घर से बाहर निकलें तो स्ट्रीट डाग ,गाय आदि के लिये खानें का कुछ अवश्य लें जाएं जिससे बच्चें प्रेरणा ले सकें ।







बच्चों के सवालों का सही जवाब जरूर दें :::



बच्चा बड़ा हो या छोटा उसके दिमाग में आसपास के वातावरण ,समाज,परिवार,कोई घटना आदि से संबधित सैकड़ो सवाल दिनभर में आतें हैं और बच्चा इनका जवाब भी जानना चाहता हैं लेकिन यदि घर का माहोल या परिवार के सदस्य बच्चें को ज्यादा सवाल पूछनें पर डांट देतें हैं तो बच्चा हतोत्साहित होता हैं । यह बच्चा आगे चलकर अपनी समस्या का समाधान ढूंढने की बजाय समस्या को टालनें या समस्या से तनाव लेकर अनुचित कदम उठानें वाला बनेंगा ।



अत: बच्चें के प्रत्येक सवाल का जवाब गंभीरता और प्राथमिकता के आधार पर दें ताकि आगे चलकर बच्चा राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे सकें ना कि राष्ट्र पर बोझ बनें ।





बाहर का खाना सीमित करें ::


आजकल हर दस में से आठ parent यह शिकायत करते मिल जाती हैं कि बच्चा घर का बना खाना खानें में आनाकानी करता हैं । जबकि रेस्टारेंट में वह आराम से खाना खा लेता हैं । घर पर भी अब वो आनलाईन  कुछ न कुछ खाना मंगानें का दबाव डालता रहता हैं । क्या करें मज़बूरी में मंगाना पड़ता हैं । 


वास्तव में उपरोक्त समस्या के पीछें घर के सदस्यों का ढुलमुल रवैया जिम्मेंदार रहता हैं जो बच्चों को घर का कुछ नहीं खानें पर बाहर का खानें की अनुमति दे देतें हैं । बच्चा यदि लगातार बाहर खाना खाता हैं तो उसे घर का सादा भोजन कभी पसंद नहीं आएगा क्योंकि बाहर के भोजन में कुछ ऐसे ऐसेंस और पदार्थ मिलाये जातें हैं जिनका प्रभाव मन मस्तिष्क पर पर नशे की तरह  पडता हैं और उनको खानें की लत सी लग जाती हैं । अत:बच्चों को हमेशा बाहर का खाना खिलानें की बजाय उनकी पसंद का खाना घर पर ही बनाकर दें । इससे बच्चें का स्वास्थ्य भी उत्तम रहेगा आपको बच्चें को भोजन करवानें की संतुष्टी भी मिलेगी ।









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