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गर्भावस्था के प्रथम तीन माह में किये जानें वाले योगासन और गर्भावस्था में खानपान pregnancy yoga in hindi and Diet plan for pregnancy in hindi

 "गर्भावस्था के प्रथम तीन माह में किये जानें वाले योगासन pregnancy yoga in hindi" :::



गर्भावस्था किसी भी स्त्री के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता हैं । भारत के सभी समाजों में गर्भावस्था के साथ स्त्री को संपूर्ण माना जाता हैं


माँ बनने के इस चरण में या गर्भ धारण करनें के दौरान स्त्री के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होतें हैं । शरीर में थकावट, चेहरा निस्तेज,जी मचलाना,उल्टी होना,भूख नहीं लगना जैसी समस्या गर्भावस्था के दौरान बहुत ही आम बन जाती हैं । कुछ समय तक तो ये समस्याए ठीक मानी जाती हैं किंतु लम्बें समय तक गर्भवती को यह समस्या बनी रहती हैं तो स्त्री के साथ उसके गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ भी नकारात्मक रूप से प्रभावित होता हैं। किंतु यदि हम गर्भावस्था की शुरूआत से कुछ योगाभ्यास करना शुरू कर दें तो उपरोक्त समस्याए तो कम होती हैं इसके अलावा नार्मल डिलेवरी Normal delivery ,जी मचलाना, उल्टी होना जैसी समस्या भी कम होकर जच्चा बच्चा स्वस्थ रहता हैं ।

आईयें जानतें हैं गर्भावस्था के प्रथम तीन माह में किये जानें वालें योगासन के बारें में pregnancy yoga in hindi



गर्भावस्था के प्रथम  माह में किये जानें वालें योगासन


गर्भावस्था का प्रथम माह स्त्री के शरीर में महत्वपूर्ण हार्मोनल बदलाव का समय होता हैं । इस दौरान निम्नलिखित योगासन करनें से स्त्री स्वस्थ प्रसन्न और तनावमुक्त रहती हैं ।



मार्जुरी आसन :::

मार्जुरी आसन
मार्जुरी आसन




1.सर्वप्रथम चार पैरों वालें जानवर जैसी मुद्रा बना लें ।


2.सांस भरकर पीठ को और गर्दन को धीरें धीरें ऊपर उठाएँ ।


3.कुछ सेकेंड सांस रोककर धिरें धिरें सांस छोडें और वापिस पहलें की मुद्रा में आनें का प्रयास करें ।



4.मार्जुरी आसन दो से तीन मिनिट तक करें ।



5.गर्भावस्था के प्रथम माह तक यह आसन करें ।



मार्जुरी आसन के लाभ :::



गर्भावस्था के प्रथम माह में यह आसन करनें से रीढ़ की हड्डी,पीठ की मांसपेशी लचीली और मजबूत बनती हैं । जिससे बढ़ते हुये गर्भस्थ शिशु का दबाव माँ को परेशान नही करता हैं ।


इस आसन से फेफड़ो में आँक्सीजन का स्तर बढ जाता है । जिससे मूड स्विंग होना,चक्कर आना ,और उल्टी होना जैसी समस्या में आराम मिलता हैं ।



 वीरभद्रासन :::

वीरभद्रासन



चित्रानुसार दोंनों पाँवों को फैलाकर हाथ ऊपर की और ले जाएँ और गहरी साँस भरें ।


धीरें धीरें सांस छोडकर पुन:सावधान की मुद्रा में आ जाँए । 


यह आसान दो तीन बार प्रथम एक माह तक करनें से कमर,पीठ,जांघ,और पेडू का क्षेत्र मजबूत होता हैं । जिससे गर्भावस्था के प्रथम माह में होनें वाला हाथ पाँवों का खिंचाव नहीं होता ।



बद्ध कोणासन :::

बद्ध कोणासन



1.सबसे पहलें शांतिपूर्वक दो तीन मिनिट बैठें ।


2.अपनें पैरों को बाहर की ओर निकालकर तितली वाली मुद्रा में बैठ जाँए दोनों पैर की एडी को आपस में चित्रानुसार मिला लें ।



3.दो तीन बार पाँवों को ऊपर निचें पिलायें ।



बद्ध कोणासन के  लाभ ::: 



इस आसन के करने से जांघें और गर्भवती स्त्री का पेडू मजबूत होता हैं । जिससे गर्भपात नहीं होता हैं ।


गर्भावस्था के प्रथम तीन माह में किये जानें वाले योगासन pregnancy yoga in hindi

ताडासन :::

ताडासन



1.सबसे पहले सावधान की मुद्रा में खड़ें हो जाँए ।


2. दोंनों टांगों को 10 सेंटीमीटर की दूरी पर रखें ।


3.दोंनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाकर आपस में बाँघ लें ।


4.धिरें धिरें श्वास परतें हुयें पंजो के बल खडे़ हो जांए और एडी को ऊपर उठा लें ।


5.30 सेकेंड तक इसी मुद्रा में खडें रहें  ।


6.दो तीन बार यह आसन करें ।




ताडासन के लाभ :::



1.कूल्हों की मांसपेशी मज़बूत होती हैं ।


2.स्तनों के आसपास की मांसपेशी मज़बूत होती हैं ।जिससे स्तनों खिंचाव नही होता हैं ।



3.हार्मोनल बदलाव के कारण मूड स्विंग की समस्या नहीं होती हैं ।



गर्भावस्था के दूसरें महिनें के दौरान किये जानें वाले योगासन :::



गर्भावस्था के द्धितीय माह में गर्भस्थ शिशु का विकास होना शुरू हो जाता हैं । इस दोरान अधिक रक्त की आवश्यकता गर्भवती को होती हैं । अधिक रक्तसंचार शरीर के लिए आवश्यक हो जाता हैं । शरीर को अधिक मेटाबालिज्म की आवश्यकता होती हैं जिससे भोजन अधिक मात्रा में ग्रहण हो सकें और गर्भस्थ शिशु का विकास हो सकें ।

इन आवश्यक्ताओं की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण योगासन निम्न हैं ।



वज्रासन :::

वज्रासन


1.सबसे पहले दोंनों पाँवों को मोड़कर घुटनों के बल बैठ जाँए ।


2.शरीर का सारा वजन दोनों पैरों पर समानरूप से होना चाहिए ।


3.दोनों हाथों को जांघों पर रखें ।



4.पीठ एक दम सीधी रखें ।


5.इस अवस्था में चार पाँच मिनिट तक बैठे रहें ।


वज्रासन के लाभ :::




1.यह आसन शरीर की मेटाबालिज्म दर को सुधारता हैं जिससे भोजन जल्दी पचता हैं । और गर्भस्थ शिशु को अधिक पोषण प्राप्त होता हैं ।


2.यह एकमात्र योगासन हैं जिसे भोजन के बाद किया जा सकता हैं ।





नमन आसन :::



नमन का अर्थ हैं मोड़ना शरीर के सभी जोडों को बारी बारी से मोड़कर घुमाना चाहिए । जैसें पैरों के पंजें,हथेली, घुटनें,बांहें आदि ।


लाभ :::


यह आसन शरीर के रक्तसंचार को सुधारता हैं और शरीर में लचीलापन लाता हैं ।


प्राणायाम :::


1.सुखपूर्वक आलथी पालथी मारकर बैंठ जांए ।


2.कुछ देर ध्यान की मुद्रा में बैठें रहें ।


3.ऐसा महसूस करें आपका शरीर ऊर्जा से भरा हुआ हैं ।


4.नकारात्मक विचारों को दूर करनें का संकल्प लें ।


लाभ :::


इस आसन से शरीर और मन मजबूत होकर गर्भस्थ शिशु पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं ।




गर्भावस्था के तीसरें माह में किये जानें वालें योगासन :::



सुखासन :::



1.आलथी पालथी मारकर सीटें सुखपूर्वक बैठ जांए ।


2.दोंनों हाथों की हथेलिंयों को एक दूसरें पर रखकर गोद में रख लें ।


3.अब आँखें बंदकर अपनें आराध्य ईश्वर को मन ही मन याद करें ।


5.ऐसा महसूस करें कि समस्त ब्रम्हांड से ऊर्जा निकलकर शरीर के अलग अलग भागों जैसें आँख,नाक,कान आदि से आप में प्रवेश कर रही हैं।


6.पाँच सात मिनिट यह योगासन करें ।



सुखासन के लाभ :::



इस व्यायाम को करनें से गर्भवती का मन शांत रहता हैं । गर्भवती का रक्तचाप नियत्रिंत रहता हैं । और ऊर्जा का प्रवाह संपूर्ण शरीर में बना रहता हैं ।



शवासन :::

शवासन


1.सबसे पहले पीठ के बल सीधें  लेट जाँए ।


2.पूरें शरीर को ढ़ीला छोड दें ।


3.आँखें बंदकर बिना हिले डूले लेटे रहें ।


4.रात को बिस्तर पर सोनें से पूर्व यह योगासन करें ।


शवासन के लाभ :::



इस योगासन से नींद बहुत अच्छी आती हैं जिससे शरीर में होनें वाले हार्मोनल बदलाव के दौरान गर्भवती को कोई समस्या नहीं होती हैं । 


पर्वतासन :::


पर्वतासन



आम व्यक्ति इस आसन को खडे़ होकर करता हैं किंतु गर्भावस्था pregnancy में इस आसन को बैठकर करना चाहियें ।


1.आलथी पालथी मारकर बैंठ जाँए ,यदि आलथी पालथी मारकर बैठन
 संभव नहीं हो तो कुर्सी पर भी बैठ सकतें हैं ।



2.दोनों हाथ सांस भरते हुये उठाकर सिर के ऊपर प्रणाम या नमस्कार की मुद्रा बनाइए ।


3.सांस छोडते हुये हाथों को धिरें धिरें छाती के समीप लाकर नमस्कार की मुद्रा रखें ।



4.तीन चार बार यह प्रक्रिया दोहराँए ।



पर्वतासन के लाभ :::



1.शरीर में रक्तसंचार बेहतर होता हैं ।



2.स्तनों का आकार सही बनता हैं ।


3.शरीर में अनावश्यक फेट जमा नहीं होता हैं ।



बुद्धासन :::

बुद्धासन



बुद्ध के समान मुद्रा में आँख बंदकर कुछ मिनिट बैंठें रहें ।

साँस लेते और छोडतें समय यह महसूस करें कि आप दुनिया के सबसे खुशनसीब इंसान हैं जिन्हें जीवन देनें का ईश्वरीय सामर्थ्य प्राप्त हुआ हैं ।



लाभ :::


गर्भावस्था के दौरान होनें वाली मूड स्विंग की समस्या इस आसन से नहीं होती हैं ।


मन मजबूत बना रहता हैं जिसका सकारात्मक असर गर्भ में पल रहें शिशु पर पड़ता हैं ।


बुद्धासन,शवासन,सुखासन,प्राणायाम जैसें आसन गर्भवती नवें महिनें तक भी कर सकती हैं। यदि योगासन किसी योग गुरू के निर्देशन पर कियें जाँए तो बहुत उत्तम परिणाम मिलता हैं ।



गर्भावस्था के दौरान योगाभ्यास करतें समय कुछ सावधानी जरूर बरतें जैसें



० उबड खाबड असमतल जगहों पर योगासन न करें ।



० कोई बीमारी जैसे ह्रदयरोग,मधुमेह,उच्चरक्तचाप आदि होनें पर योगासन किसी योगाचार्य के परामर्श के बाद ही करें ।



० गर्भावस्था में लेनें वाली दवाईयों के तत्काल बाद योगासन नहीं करें ।




० योगासन करते समय ऐसे कपडे़ पहनें जो ढ़ीले ढाले और आरामदायक हो 



गर्भावस्था के प्रथम तीन माह में किये जानें वाले योगासन pregnancy yoga in hindi



० बरगद के फायदे




० MR खसरा टीकाकरण




गर्भावस्था में खानपान कैसा होना चाहिए ?


गर्भावस्था में पौष्टिक आहार लेनें से माता और शिशु दोनों का स्वास्थ उत्तम बना रहता हैं । लेकिन बहुत कम माताओं को पौष्टिक आहार के बारें में जानकारी होती हैं । तो आईयें जानतें हैं गर्भावस्था के प्रथम माह से गर्भावस्था के नोवे माह तक लिए जानें वाले पौष्टिक आहार के बारें में 


गर्भावस्था का पहला माह first month of pregnancy diet plan ::



• गर्भावस्था के पहले माह में प्रतिदिन सुबह शाम मिलाकर 500 मिलीलीटर दूध का सेवन करें ।



• हल्का और सुपाच्य भोजन जो मौसम अनूकूल हो का सेवन करें ।



• उल्टी होनें की अवस्था में तरल पदार्थों जैसें पानी,मौसमी फलों का रस,दलिया का सेवन अधिक करें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो ।


• मुलेठी ,अश्वगंधा और देवदारू का चूर्ण समान मात्रा में मिला लें और प्रतिदिन एक समय सुबह या शाम  3 ग्राम की मात्रा में एक गिलास दूध में मिलाकर लें । 




गर्भावस्था का दूसरा माह second month of pregnancy diet plan 




• हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन भूख के अनुसार दिन में चार पाँच बार करें ।



• अंगूर,अनार,चुकंदर, हरी पत्तेदार सब्जी,फ्रूट सलाद का सेवन नियमित रूप से करें ।



• खजूर या खारक ,शतावरी चूर्ण, अश्वगंधा, मुलैठी चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर 3 ग्राम दूध एक गिलास दूध में मिलाकर रात को लें ।




गर्भावस्था का तीसरा माह pregnancy diet plan third month of pregnancy



• हरी पत्तेदार सब्जियों,मौसमी फलों के साथ सुबह के नाश्ते में अंकुरित अनाज का भी सेवन करना चाहिए ।



• दूध में एक चम्मच देशी घी और एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन एक समय पीयें ।



• स्वादनुसार भोजन के अतिरिक्त खिचड़ी का भी सेवन करें ।


• लौह तत्व से भरपूर अनाज जैसें लोबिया,सेम और  गुड का सेवन भी करें ।





गर्भावस्था का चौथा माह Pregnancy diet plan fourth month of pregnancy



• नियमित रूप से दिन में तीन बार भोजन करें ।भोजन में दाल,सब्जी के अतिरिक्त दही चावल लें ।



• भोजन के अतिरिक्त 5 ग्राम मक्खन नियमित रूप से दिन में एकबार लें ।





• दूध में केशर ,खजूर,किशमिश, बादाम,अंजीर,काजू आदि सूखे मेवे मिलाकर पीयें ।





गर्भावस्था का पाँचवा माह Pregnancy diet plan for fifth month of pregnancy





• भोजन के अतिरिक्त दिन में फल और सूखे मेवे का सेवन करें ।



• पानी अतिरिक्त मात्रा में पीयें ताकि कब्ज न हो ।


• ब्राम्ही, दालचीनी,और अश्वगंधा चूर्ण दूध में मिलाकर दिन में दो बार लें ।





गर्भावस्था का छठा माह Pregnancy diet plan for six month of pregnancy





• गोक्षरू चूर्ण को घी में सेंककर 5 से 10 ग्राम प्रतिदिन सेवन करें ।



• भोजन के बाद थोड़ा बहुत मीठा लें ।



• विभिन्न अनाजों से बना सत्तू दिन में दो बार पानी मिलाकर सेवन करें ।




गर्भावस्था का सातवां महिना pregnancy diet plan for seventh month of pregnancy




• भोजन में जल्दी पचने वाली और बिना तेल वाली चीजों को अधिक शामिल करें । 



• तिल,गुड ,और अलसी को दिन में दो तीन बार लें ।



• मौसमी फलों के अतिरिक्त सूखे मेवे दूध में उबालकर लें ।




गर्भावस्था का आंठवा माह Diet plan for eighth month of pregnancy




• घी ,दूध और मक्खन का सेवन भरपूर मात्रा में करें ।


• मौसमी फल, सब्जी और दालों का सेवन भरपूर मात्रा में करें ।




गर्भावस्था का नवा माह Diet plan for ninth month of pregnancy




• पेट में कब्ज न हो इसके लिए रेशेदार खाद्यान्नों को जरूर भोजन में शामिल करें ।



• पैरो में या शरीर पर सूजन हो तो चिकित्सक के परामर्श से दूध में हल्दी मिलाकर सेवन करें ।


• दही चावल मिलाकर लें ।


• पानी खूब सारा पीयें ।



सिंघाड़ा,गन्ना ,अंजीर,चुकंदर आदि का सेवन करें ।





गर्भावस्था के दौरान क्या नही करना चाहिए





• ठंडा और बासी भोजन नहीं करें ।


• अधिक मसालेदार,तीखा,अत्यधिक मीठा, भोजन नहीं करें ।


• एक साथ अधिक भोजन नहीं करें ।


• अत्यधिक चाय ,काफी का सेवन नहीं करें ।


• उपवास नहीं करें ।


• भोजन करनें के बाद तुरंत सोना नहीं चाहिए ।












टिप्पणियां

Unknown ने कहा…
,👌👌👌

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 Shri ram #भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र रामायण या रामचरित मानस सेकड़ों वर्षों से आमजनों द्धारा पढ़ी और सुनी जा रही हैं.जिसमें भगवान राम के चरित्र को विस्तारपूर्वक समझाया गया हैं,यदि हम थोड़ा और गहराई में जाकर राम के चरित्र को समझे तो सामाजिक जीवन में आनें वाली कई समस्यओं का उत्तर उनका जीवन देता हैं जैसें ● आत्मविकास के 9 मार्ग #१.आदर्श पुत्र ::: श्री राम भगवान अपने पिता के सबसे आदर्श पुत्र थें, एक ऐसे समय जब पिता उन्हें वनवास जानें के लिये मना कर रहें थें,तब राम ही थे जिन्होनें अपनें पिता दशरथ को सूर्यवंश की परम्परा बताते हुये कहा कि रघुकुल रिती सदा चली आई | प्राण जाई पर वचन न जाई || एक ऐसे समय जब मुश्किल स्वंय पर आ रही हो  पुत्र अपनें कुल की परंपरा का पालन करनें के लिये अपने पिता को  कह रहा हो यह एक आदर्श पुत्र के ही गुण हैं. दूसरा जब कैकयी ने राम को वनवास जानें का कहा तो उन्होनें निसंकोच होकर अपनी सगी माता के समान ही कैकयी की आज्ञा का पालन कर परिवार का  बिखराव होनें से रोका. आज के समय में जब पुत्र अपनें माता - पिता के फैसलों

पारस पीपल के औषधीय गुण

पारस पीपल के औषधीय गुण Paras pipal KE ausdhiy gun ::: पारस पीपल के औषधीय गुण पारस पीपल का  वर्णन ::: पारस पीपल पीपल वृक्ष के समान होता हैं । इसके पत्तें पीपल के पत्तों के समान ही होतें हैं ।पारस पीपल के फूल paras pipal KE phul  भिंड़ी के फूलों के समान घंटाकार और पीलें रंग के होतें हैं । सूखने पर यह फूल गुलाबी रंग के हो जातें हैं इन फूलों में पीला रंग का चिकना द्रव भरा रहता हैं ।  पारस पीपल के  फल paras pipal ke fal खट्टें मिठे और जड़ कसैली होती हैं । पारस पीपल का संस्कृत नाम  पारस पीपल को संस्कृत  में गर्दभांड़, कमंडुलु ,कंदराल ,फलीश ,कपितन और पारिश कहतें हैं।  पारस पीपल का हिन्दी नाम  पारस पीपल को हिन्दी में पारस पीपल ,गजदंड़ ,भेंड़ी और फारस झाड़ के नाम से जाना जाता हैं ।   पारस पीपल का अंग्रजी नाम Paras pipal ka angreji Nam ::: पारस पीपल का अंग्रेजी नाम paras pipal ka angreji nam "Portia tree "हैं । पारस पीपल का लेटिन नाम Paras pipal ka letin Nam ::: पारस पीपल का लेटिन paras pipal ka letin nam नाम Thespesia