पुनर्जागरण या रेंनसा क्या हैं .इसका क्या महत्व और कारण था ?


# पुनर्जागरण :::
रेनसा
 पुनर्जागरण

14 वीं से 16 वीं शताब्दी के मध्य यूरोप में मध्यकालीन अंधकार को समाप्त करतें हुये एक नवीन चेतना का उदय हुआ जिसे पुनर्जागरण या रेंनसा के नाम से जाना जाता हैं.

# महत्व :::

१.पुनर्जागरण ने ज्ञान और सत्ता की प्रतिष्ठा को कायम किया.

२.पुनर्जागरण काल में धार्मिक एँव परंपरागत विचारों को झकझोरकर उन पर कुठाराघात किया गया.

३.इस काल में स्वतंत्र विचारों को महत्व दिया गया इन विचारों को बनाये रखनें के लिये विचारक मर मिट़नें को तैयार रहतें थे.

# पुनर्जागरण का कारण :::


                       १.धर्मयुद्ध

११ वीं से १३ वीं शताब्दी के मध्य ईसाई धर्मस्थल यरूशलम को लेकर ईसाई और मुसलमानों के मध्य युद्ध हुआ जिसे क्रूसेड़ या धर्मयुद्ध कहा गया.

धर्मयुद्ध के पश्चात सामंतवादी व्यवस्था का विरोध शुरू हो गया और आधुनिक तर्कपूर्ण विचारों को प्रश्रय दिया जानें लगा.

            २.व्यापार वाणिज्य का विकास

व्यापार वाणिज्य के विकास न
से एक नवीन  पूंजीपति वर्ग का उदय संभव हुआ, यह नवीन पूँजीपति वर्ग सामंतों के समक्ष ही था किंतु अधिकारों में उनसे कमज़ोर था .

नवीन चेतना के द्धारा पूंजीपतियों ने भी सामंतवादीयों के समान विशेषाधिकारों की माँग रखी फलस्वरूप इन दोंनों वर्गों में सत्ता संघर्ष पनपा.

० इंग्लैंड की क्रांति


            ३.कुस्तुनुतुनिया का पतन

453 ई.में तुर्की ने कुस्तुनुतिनिया पर हमला कर दिया कुस्तुनुतिनिया व्यापार वाणिज्य और कला क्षेत्र में संपन्न था.हमलें की वज़ह से व्यापारी कलाकार आदि इट़ली और जर्मनी की और निर्वासित हो गये ,जब ये लोग यहाँ पहुँचे तो अपनें साथ अपनी कला ,व्यापार भी लेकर गये जिससे यूरोप में नई चेतना का प्रादुर्भाव हुआ.


          ४.मुद्रणयंत्र और कागज का विकास


जर्मनी में गुंट़ेनबर्ग द्धारा मुद्रणयंत्र का आविष्कार हुआ ,इस आविष्कार ने और कागज के आविष्कार ने बाईबिल को जनसामान्य तक पहुँचा दिया फलस्वरूप पादरियों के लिये जो अब तक बाईबिल की मनमानी व्याख्या करतें थे और जनता पर शासन करतें रहें के प्रति रोष उत्पन्न हुआ और पुनर्जागरण संभव हो सका.









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