सोमवार, 19 दिसंबर 2016

13 अचूक गुण अरहर के [ 13 Great Benefit of pigeon pea ]

#1.परिचय :::

अरहर या तुवर (Tuvar) विश्वभर में खाई जानें वाली दलहन हैं,यह शाकाहारी लोगों के लियें प्रोटीन प्राप्ति का उत्तम स्रोंत हैं.अरहर या तुवर शुष्क क्षेत्रों में बहुतायत में बोई जाती हैं,इसका पौधा भूमि के लिये नाइट्रोजन स्थिरीकारक हैं.अरहर की दाल से अनेक व्यंजन बनायें जातें हैं.भारतीय अरहर के औषधिय गुणों को वर्षों से पहचानतें हैं,यही कारण हैं,कि भारतीय भोजन अरहर की दाल के बिना अधूरा हैं.


#2.पोषणीय संगठन :::

कार्बोहाइड्रेट.     कैल्सियम.       फाँस्फोरस

  57.3%.             178mg.       376mg.  

 प्रोटीन.             खनिज लवण.      फायबर 

20.2%.               3.8%.                8.1%

  वसा              पानी                  आयरन

1.5%.            10.2%.               16.6%

 एनर्जी

383 mg.                               [प्रति १०० ग्राम]

तुवर
अरहर पर लदी फलियाँ

चने की खेती और उपयोग के बारें में जानें


#3.अरहर के गुण :::

१.कब्ज होनें पर छिलकेयुक्त अरहर को  उबालकर  रात के समय सेवन करते रहना चाहियें. इसमें उपस्थित फायबर आंतों की गहरी सफाई कर दूषित मल को बाहर निकाल देता हैं.

२.अर्श रोग में साबुत अरहर को उबालकर छाछ या दही के साथ कद्दूकस कर खानें से अर्श खत्म हो जाता हैं.

३. जब अरहर पौधे पर हरी अवस्था में होती हैं,उस समय इसे खानें से कुपोषण समाप्त होता हैं.

४.अरहर की दाल बनातें वक्त निकला छिलका उबालकर प्रसूता को खिलानें से दूध पर्याप्त मात्रा में आता है.

५.इसकी फलियों के छिलके में आयोडीन उपस्थित रहता हैं,अत :हायपोथाइराड़िज्म (hypothyroidism) से पीड़ित व्यक्ति को इसकी फली को चूसना चाहियें.

६.इसमें उपस्थित पानी डायरिया रोग की उत्तम रोकथाम करता है,साथ ही शरीर को  ऊर्जा प्रदान करता हैं.तुवर की दाल में घी मिलाकर सूप की तरह पीनें से रोगी जल्दी ठीक होता हैं.

७.हड्डीयों से संबधित समस्या जैसे हड्डी कमज़ोर होना,अस्थिभग्न होना आदि में तुवर दाल का सेवन फायदेमंद होता हैं.

८.अरहर की पत्तियों का पेस्ट बनाकर रोज मुहँ पर लगाते रहनें से रूखी त्वचा पर नमी आ जाती हैं.गोरी सुन्दर त्वचा हो जाती हैं.

९.गठिया रोग में अरहर खानें से हड्डीयों का दर्द कम हो जाता हैं.

१०.त्वचा रोगों में अरहर के पोधें को पीसकर उसमें नीम तेल मिलाकर लगानें से आराम मिलता हैं.

११.इसमें उपस्थित लोहा गर्भवती स्त्रीयों तथा एनिमिया ग्रसित व्यक्तियों के लियें बहुत फायदेमंद होता हैं,अत: तुवर दाल का सेवन इन लोगों को अवश्य करना चाहियें.

१२.मेनोपाँज की अवस्था में साबुत अरहर का सेवन शरीर में कैल्सियम का स्तर बनायें रखता हैं.

१३.अरहर रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं,इसके लिये अरहर की दाल में अश्वगंधा पावड़र मिलाकर प्रतिदिन पीना चाहियें.

 ं


कोई टिप्पणी नहीं:

प्रदूषित होती नदिया(River) कही सभ्यताओं के अंत का संकेत तो नही

विश्व की तमाम सभ्यताएँ नदियों के किनारें पल्लवित हुई हैं,चाहे मेसोपोटोमिया हो या हड़प्पा यदि नदिया नही होती तो न ये सभ्यताएँ होती और ना ही...