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congenital heart disease ,कांजिनेटल हार्ट डिजिज,पल्मोनरी एम्बोलिज्म,pulmonary embolism

#1.परिचय 

Congenital heart disease आमतौर पर जन्मजात शिशुओं में होनें वाला ह्रदय रोग हैं.जो ह्रदय से संबधित सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित करता हैं. यब बीमारी बच्चों को गर्भावस्था के दोरान ही होती हैं.                         

#2.लक्षण::


:::: शिशु की त्वचा नीली या बैंगनी दिखाई देती हैं,खासतोर पर मुंह,हाथों की ऊँगली,कान,होंठ और नाक .इस अवस्था को साइनोसिस कहतें हैं

:::: बार बार निमोनिया होना.फेफडों में गंभीर संक्रमण.

:::: बच्चा धोड़ा सा चलनें,व्यायाम करनें या खेल खेलनें में अत्यधिक थक जाता हैं.

:::: बच्चा बार बार बेहोश हो रहा हो.

:::: धड़कनों का अनियमित रूप से बढ़ना.

:::: भूख में कमी यदि बच्चा स्तनपान कर रहा हैं,तो स्तनपान के दोरान बार बार स्तनो को छोड़कर जोर जोर से साँस लेता हैं.

:::: बच्चें का वज़न कम होना.

:::: अत्यधिक पसीना निकलना.

:::: शरीर पर सूजन विशेषकर जन्मजात शिशुओं में,बड़े बच्चों में पेट़,पैर,हाथ और आँखों मेंं सूजन.

:::: गहरी नींद में अचानक जाग जाना या बार बार नींद टूटना.

#3.कारण 

Heart disease
above picture shows congenital abnormalities

1.congenital heart disease अधिकांशत: आनुवांशिक होती हैं,यदि माता पिता में से कोई एक जेनेटिक सिंड्रोम से पीड़ित हैं तो बच्चें में बीमारी होनें की संभावना 10 में से 5 होती हैं.

2.यदि माता धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन करती हैं,तो बीमारी होनें का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता हैं.कई शोधों के बाद sciencesist इस नतीजें पर पहुँचे हैं,कि धूम्रपान और शराब का सम्मिलित सेवन इस बीमारी का प्रमुख कारण बनता जा रहा हैं.W.H.O. के मुताबिक विश्व की एक तिहाई congenital heart disease  गर्भावस्था के दोरान शराब और धूम्रपान बंद करके रोकी जा सकती हैं.

3.गर्भावस्था के दोरान यदि सामान्य बीमारी में ली जानें वाली दवाईं बिना सोच समझकर ली गई हैं,तो यह बीमारी होनें की संभावना बढ़ जाती हैं.

4. यदि गर्भावस्था के समय पर्याप्त पोषक तत्वों का अभाव रहा हैं,तो बीमारी होनें की दोगुनी संभावना रहती हैं.

5. यदि किसी महिला को मधुमेह (Diabetes) हैं,और गर्भवती हैं,तो यह स्थिति भ्रूण के ह्रदय विकास में अत्यधिक बाधक होती हैं.भारत जो कि विश्व की मधुमेह राजधानी (capital of Diabetes) कहा जाता हैं में यह स्थिति अधिक देखी गई हैं,कि बीमारी से पीड़ित बच्चें की माँ मधुमेह से ग्रसित हैं,और उन्हें पता भी नहीं हैं,कि वे मधुमेह से पीडित हैं,और गर्भवती हो जाती हैं,इस बात की जानकारी उन्हें भी तब मिलती हैं जब बीमारी से पीड़ित बच्चें की family history निकालनें के लियें माता की जाँच की जाती हैं.

ह्रदय की अनियमित धड़कन के बारें में विस्तारपूर्वक जानियें इस लिंक पर


समय पर यदि congenital heart abnormalities को पहचान कर चिकित्सा शुरू कर दी जावें तो बीमारी को प्रभावी रूप से नियत्रिंत किया जा सकता हैं,आजकल शल्य चिकित्सा की नई नई तकनीकों ने इसकों ओर आसान बना दिया हैं.ऐसी ही एक पद्धति हैं,डिवाइस क्लोजर 

#4.डिवाइस क्लोजर :::

डिवाइस क्लोजर में बिना आपरेशन किये दिल के छेदों को बंद किया जाता हैं,इस पद्धति में न तो चीरा लगानें की आवश्यकता नही होती हैं,एंजियोग्राफी की तरह पैरों की नसों द्धारा प्रक्रिया सम्पन्न होती हैं.इसमें लम्बें समय तक अस्पताल में भर्ती रहनें की आवश्यकता नही होती हैं.एक दो दिन पश्चात अस्पताल से आसानी से छुट्टी मिल जाती हैं.यह पद्धति सुगम,सरल,और आपरेशन पश्चात की जट़िलताओं से मुक्त हैं.इस वज़ह से बच्चों विशेषकर शिशुओं के लियें वरदान हैं.

#पलमोनरी एमबोलिज्म (pulmonary embolisms)


पल्मोनरी एम्बोलिज्म (pulmonary embolism) फेफडों से संबधित बीमारी हैं,जिसमें फेफडें की रक्त नलिकाएं खून की रूकावट की वज़ह से जाम हो जाती हैं. और रोगी की तुरन्त मृत्यु हो जाती हैं.यह सबकुछ इतना तेजी से घटित होता हैं,कि एकाएक किसी को सम्भलनें का मोका ही नहीं मिलता किन्तु यदि समय रहते लक्षणों को पहचान कर उपचार शुरू कर दिया जावें तो मृत्यु की संम्भावना को क्षणिक किया जा सकता हैं.

#1.लक्षण :::


० पैरों बिना किसी वज़ह से होनें वाला दर्द.

०  दर्द के दो तीन दिन बाद साँस लेनें में परेशानी महसूस होना.

० फेफडों में जकड़न महसूस होना.

० रक्त नलिकाओं में सूजन होना.

० रक्त नलिकाओं का फूलना.

० चेहरा पीला पड़ना या एकदम कांतिहिन दिखाई देना.

० उल्टी होना.

० रोगी इच्छा व्यक्त करता हैं,कि उसे धूलें हुयें कपड़ों की भाँति नीचोया जावें. या फेफडों को दबाकर रखा जावें.


#2.कारण :::


कम चलनें फिरनें रक्त जमाने वाली दवाओं के सेवन या चोट की वज़ह से शिराओं में खून के थक्के (clots) जम जातें हैं. जब ये clots अधिक बनने लगते हैं,तो ऊपर सरककर फेफडों की रक्त नलिकाओं को जाम कर देते हैं,तब फेफडों को शुद्ध रक्त की आपूर्ति बाधित होती हैं,और ह्रदय पर दबाव पड़नें लगता हैं,और कुछ समय के पश्चात ह्रदय काम करना बंद कर देता हैं.

#3.प्राथमिक चिकित्सा :::


लक्षण दिखाई देने व रोगी को अस्पताल ले जानें के बीच कुछ प्राथमिक उपचार ज़रूर करना चाहियें जैसे कुछ योगिक क्रियाएँ इसमें अविश्वसनीय परिणाम देती हैं, इन योगिक क्रियाओं में शामिल हैं कपालभाँति और अनुलोम विलोम ये दोनों क्रियाएँ फेफड़ों से खून के थक्के हटाकर शुद्ध रक्त की आपूर्ति बढ़ाती हैं.



० आयुर्वेदिक औषधी सूचि


० यूटेराइन फाइब्राइड़


० अलसी है गुणों की खान



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