मंगलवार, 21 जून 2016

parasomnia treatment , नींद में बढ़बढ़ाना

पैरासोम्निया (parasomnia) क्या है 




यदि आप देर रात तक पढ़ाई कर रहें हो और आपके पास  गहरी नींद में सोया हुआ व्यक्ति अचानक तेज स्वर में नींद में ही बोलनें लगें तो शायद आप सुबह उठकर उसका मज़ाक उड़ायेगें कि रात को तुमनें क्या बोला परन्तु सामनें वाला आपकी बातों से असहमति ही प्रदर्शित करेगा कि वह तो जैसा सोया था वैसा ही उठा हैं,उसनें रात में कोई बढ़बढ़ नहीं की यही स्थिति parasomnia या नींद में बढ़बढ़ाना कहलाती हैं.


क्या पैरासोम्निया parasomnia से कोई नुकसान होता हैं.




अधिकांश लोग यही सवाल पूछतें हैं,कि क्या यह स्वास्थगत समस्या हैं,इसका जवाब भी सीदा सरल हैं,अधिकांशत: मामलों में ये समस्या नहीं मानी जाती परन्तु जहाँ बढ़बढ़ाना चिल्लानें के समान हो यह गंभीर नींद सम्बंधित बीमारी (sleep disorder) मानी जाती हैं जिनमें सम्मिलित हैं---



1.REM यानि sleep behaviour disorder.


2. नींद के अतिकारी sleep terror.


उपरोक्त दोनों प्रकार की बीमारीं में रोगी जोर -जोर से चिल्ला सकता हैं.


::  मारपीट़ कर सकता हैं.


::  नींद में चल सकता हैं.


::  किसी बहुमंजिला इमारत से निचें कूद सकता हैं.


पैरासोम्निया का कारण  ::


1. अत्यधिक मानसिक थकावट़.


2.शराब,गांजा ,चरस,भांग तथा अन्य नशीली वस्तुओं का अत्यधिक प्रयोग.


3.कुछ विशेष दवाईयों का दुष्प्रभाव.


4.मानसिक अस्वस्थता.


5. बुखार .


पैरासोम्निया का  Treatment 





इस समस्या को प्रभावी रूप से नियत्रिंत कर रोगी को स्वस्थ जीवनशैली पुन: प्रदान की जा सकती हैं,इसके लियें

:: रोगी को मानसिक रूप से शांतचित्त रखनें का    प्रयास करें.

:: रोगी से प्रसन्नतापूर्वक बातचीत करें.

:: रोगी पर्याप्त नींद लें इसका प्रयास हो पर्याप्त नींद से तात्पर्य 7 से 8 घंटे की बाधारहित नींद से हैं.

:: रोगी को योगिक क्रियाएँ जैसें शवासन ,अनुलोम --- विलोम, भ्रामरी करवातें रहें.

:: सोनें से पूर्व हो सके तो शीतल जल से स्नान करवायें.

:: औषधि जैसें सर्पगंधा का प्रयोग वैघकीय परामर्श से करवायें.

:: पंचकर्म जैसे शिरोधारा करवायें.

:: रोग को बढ़ानें वाली समस्यों पर मनोचिकित्सकीय (psychological) परामर्श अवश्य लें.

:: रोगी को ऐसे आहार न दे जो मानसिक उत्तेजना प्रदान करतें हों जैसे चाय,काँफी,शराब,तम्बाकू आदि.

:: तरल पदार्थों का जिसमें शामिल हैं,फलों का रस,आंवला रस का सेवन करवातें रहें.साथ ही रेशायुक्त खाद्य पदार्थ जैसे सलाद,प्याज,हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन अवश्य करवायें.

यदि उपरोक्त बताई गयी बातों को सुनियोजित तरीकें से अमल में लाया जावें तो समस्या को सम्पूर्ण रूप से समाप्त किया जा सकता हैं.


० तुलसी


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० यूटेराइन फाइब्राइड़

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