रविवार, 23 अप्रैल 2017

मिट्टी में अम्लीयता का कारण प्रभाव और उसका समाधान [ cause effect and managment of acidic soil]


भारत सहित सम्पूर्ण विश्व में फसलों को उगानें के दृष्टिकोण से मिट्टी को अम्लीय और क्षारीय मिट्टी में विभाजित किया गया हैं.इस अम्लीयता और क्षारीयता की गणना PH मान से की जाती है.एक आदर्श मिट्टी का PH मान 7 होता हैं.आज हम मिट्टी की अम्लीयता की बात करेंगें.

खेत का pH
 मिट्टी में अम्लीयता

(अ).अम्लीय मिट्टी [Acidic soil] :::



• जिस मिट्टी का PH मान 7 से कम होता हैं,उसे अम्लीय मिट्टी की श्रेणी में रखा जाता हैं.मिट्टी में अम्लीयता होनें से इसमें कैल्सियम जैसें पोषक तत्वों की भारी कमी हो जाती हैं.


(ब).कारण [cause] :::



• मिट्टी में अम्लीयता का प्रमुख कारण अत्यधिक वर्षा हैं.जिन क्षेत्रों वार्षिक वर्षा 2,000 मिमी से अधिक होती हैं.वहाँ कि मिट्टी में यह आम समस्या हैं,क्योंकि पानी के साथ कैल्सियम बह जाता हैं,जो मिट्टी को क्षारीय बनाने वाला प्रमुख तत्व हैं.भारत में पूर्वी क्षेत्र की मिट्टी में यह आम समस्या हैं.


(स).अम्लीयता का जनजीवन पर प्रभाव :::




मिट्टी में अम्लीयता का व्यापक प्रभाव फसलों एंव जनजीवन पर देखा गया हैं,जैसें

#1. निम्न फसल उत्पादकता .


#2.खाद्य एँव चारा फसलों की निम्न गुणवत्ता जिसकी वजह से कुपोषण ,उदाहरण के लियें पूर्वोत्तर भारत में रहनें वाले लोग बोने होतें हैं,जिसका प्रमुख कारण फसलों में कैल्सियम की कमी हैं.


#3.फसलें कम पैदा होनें से व्यापक गरीबी और बेरोजगारी.

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० तुलसी 



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(द).समाधान :::




अम्लीय मिट्टी को सुधारकर व्यापक स्तर पर खेती के प्रयोग लायक बनाया जा सकता हैं,इसके लियें निम्न सुझाव अपनायें जा सकतें हैं.


#1.मिट्टी परीक्षण कर आवश्यकतानुसार अम्लीय मिट्टी के क्षेत्रों में चूनें का छिड़काव.


#2.जैविक खाद का खेतों में और पेड़ पौधों की जड़ में छिड़काव.


#3. फसलों को सिंचित करनें वालें पानी के स्रोतों में चूना मिलाकर उपयोग करना ताकि मिट्टी द्धारा बेहतर तरीके से कैल्सियम का अवशोषण हो सकें.
#4.पोल्ट्री फार्मों से निकलनें वाले अवशेषों को मिट्टी में गहराई तक जाकर मिलाना ताकि इनका बहाव नही हो सकें.


#5.वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग और निर्माण व्यापक स्तर पर कर मिट्टी में मिलाना चाहियें, इसके लियें अम्लीयता प्रभावित क्षेत्रों में वर्मी कम्पोस्ट बनाना प्रत्येक ग्राम या नगर सरकार के लिये अनिवार्य कर देना चाहियें.


यदि बेहतर प्रबंधन कर अम्लीय मिट्टी में फसल उगाई जावें तो इसमें उगनें वाली फसल भी सामान्य मिट्टी में उगनें वाली फसलों के समान गुणवत्तापूर्ण एँव पोषक पैदा होगी.


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