शनिवार, 2 जुलाई 2016

HAPPY HORMONES



दुनिया में हँसना और हँसाना सिर्फ मनुष्यों की किस्मत में नसीब हैं.लेकिन आज की तनाव भरी जिन्दगी में कई लोगों के चेहरें से हँसी खुशी गायब सी हो गई हैं.लेकिन क्या आप जानतें हैं आपके खुश रहनें के पिछे कुछ विशेष हार्मोंन उत्तरदायी होतें हैं ,यदि आप खुश रहना चाहतें हो तो आसानी से इन हार्मोंन को शरीर में बढ़ाकर तनावमुक्त जीवन का आनंद ले सकते हैं,आईयें जानते हैं ऐसें हार्मोंन और उनकों बढ़ानें के प्राचीन तरीकों के बारें में

डोपामाईन  ::

यह सामाजिक, पारिवारिक जीवन में व्यक्ति को शांत,संयमित और अच्छा महसूस करवानें वाला न्यूरोट्रांसमीट़र हैं.यदि आप अपनें लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पा रहें हैं या आपनें ऐसें बड़े लक्ष्य निर्धारित कर लियें हैं जो आपकी कार्यक्षमता से अधिक हैं तो डोपामाईन का स्तर शरीर में घट़नें लगता हैं. और मनुष्य चिड़चिड़ा ,गुस्सेल और हिंसक हो जाता हैं.लेकिन कुछ यौगिक क्रियाओं को करनें से शरीर में इसका स्तर पर्याप्त बना रहता हैं.जैसें

भ्रामरी प्राणायाम ::

इस प्राणायाम को करनें से डोपामाईन का स्तर पूर्णत:संतुलित हो जाता हैं.इसके अलावा तनाव अनिद्रा,जैसी समस्या जड़ से समाप्त हो जाती हैं.विचार और व्यहवार सकारात्मक बनता हैं.एकाग्रता बढ़ती हैं.

विधि ::


::: सर्वप्रथम तर्जनी ऊँगली को दोंनों भोंहों के मध्य लगाते हैं.

::: मध्यमा से आँखों को बन्द करें.

::: अंगूठे से कानों को बंद करके गहरे श्वास के साथ 
"ऊँ" का उच्चारण करतें हैं जिससे भँवरें के मंडरानें के समान आवाज निकालती हैं.

:::  शुरूआत तीन से चार बार करके धिरें -  धिरें बीस से इक्कीस बार तक बढा सकतें हैं.

एस्ट्रोजन :::

महिलाओं का प्रमुख हार्मोंन हैं.इसकी कमी से तनाव,सिरदर्द, और छोट़ी--छोटी़ बातों में घबराहट़,बैचेनी बढ़ जाती हैं.माहवारी अनियमित हो जाती हैं, जिससे मानसिक तनाव हो जाता हैं.आत्मविश्वास में कमी हो जाती हैं.एस्ट्रोजन को नियमित और संतुलित करनें वाला प्राणायाम निम्न हैं-

उद्गीथ प्राणायाम:::

इस प्राणायाम को नियमित रूप से करते रहनें से एस्ट्रोजन का स्तर संतुलित रहता हैं.आत्मविश्वास बढ़ता हैं.माहवारी नियमित आती हैं.

विधि:::

::: सुखासन में बैठकर आँखें बंद करलें.

::: गहरा श्वास भरकर "ऊँ" का उच्चारण करें.

::: अन्त में दोंनों हथेलियों को रगड़कर आँखों से स्पर्श करें.

आक्सीटोसीन :::

यह हार्मोंन प्यार हार्मोंन भी कहलाता हैं.इसकी कमी सम्बंधों को बिगाढ़ देती हैं,व्यक्ति परिवार ,जीवनसाथी आदि के प्रति निष्ठुर हो जाता है फलस्वरूप तलाक अलगाव जैसी समस्या जन्म लेती हैं.मनपंसद काम नही होनें से भी इसका स्त्राव कम हो जाता हैं.इसको बढ़ानें वाला प्राणायाम निम्न हैं ::
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अनुलोम -- विलोम ::

यह प्राणायाम आक्सीटोसीन का स्तर बढ़ाकर व्यक्ति में प्रेम,ममता और संतुष्टी का स्तर बढ़ाता हैं.और काम में रूचि पैदा करता हैं.

विधि :::

::: सर्वपृथम दाहिनें हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका का छिद्र बन्द करते हैं और बांयी नासिका से श्वास गहरा श्वास लेतें हैं.

::: अब बांयी नासिका को तर्जनी और मध्यमा से बंद कर दाहिनी नासिका से श्वास छोड़तें हैं.

::: यह योगिक क्रिया दस से पन्द्रह मिनिट तक कर सकतें हैं.धिरे धिरे समय में इच्छानुसार बढ़ोतरी कर सकतें हैं.

इस प्राणायाम से ह्रदय रोग भी दूर होतें हैं.इसके अलावा कुड़लिनी जागरण,नेत्र ज्योति बढ़ती हैं.इसको नियमित रूप से करनें से शरीर से समस्त विषेैले पदार्थों बाहर निकल जातें हैं.


सिरोटोनिन :::

 यह मनुष्य को अच्छा,खुशमिजाज रखनें वाला न्यूरोट्रांसमीटर हैं.इसका स्तर घट़नें पर मनुष्य आलसी,बेपरवाह और आत्महत्या करने वाला तक हो सकता हैं.इस हार्मोंन को बढ़ानें वाला आसन निम्न हैं.

कपालभाँति :::


इस योगिक क्रिया से सिरोटोनिन का स्तर बढ़नें के अतिरिक्त वज़न नियत्रिंत होता हैं.श्वास रोग,एलर्जी, पेट़ के समस्त रोग नष्ट हो जातें हैं.

विधि :::

:::  सुखासन में बैठकर मध्यम गति से श्वास बाहर की और निकालते हैंं.श्वास लेते नहीं हैं,बल्कि श्वास अपने आप अन्दर चला जाता हैं.

::: शरूआत दस बारह बार से करके धिरें धिरें बढ़ायें.

::: इस आसन को खाली पेट़ ही करें.

प्रोजेस्ट्रोन :::

मनुष्यों को लंबी बाधारहित नींद सुलानें के लियें यही हार्मोंन जिम्मेदार माना जाता हैं..इसके अलावा स्त्रियों में मासिक धर्म से संबधित परेशानियों के लिये यही हार्मोंन उत्तरदायी होता हैं.इसका स्तर संतुलित रखनें के लिये प्राणायाम हैं::::

शवासन ::: 

यह समस्त प्रकार की मानसिक समस्या और तनावों को दूर कर शरीर के समस्त हार्मोंन को संतुलित रखनें वाला आसन हैं.

विधि :::

::: जमीन पर लेट जावें और दोनों पावों ,दोनों भुजाओं को फैला लें.

::: शरीर को शव के समान ढीला छोड़ दें.तत्पश्चात आँखे बंद कर गहरा श्वास लें और धिरें धिरें छोड़ें.

::: यह आसन पन्द्रह मिनिट से अपनी सामर्थ्यानुसार बढ़ाते रहें.

यह कुछ योगिक क्रियाएँ हैं जो शरीर में हार्मोंन का स्तर संतुलित करती हैं,इसके अलावा मनपसंद संगीत सुनने,मनपसंद जगह घुमनें,मनपसंद व्यक्ति के साथ समय गुजारनें  तथा स्वस्थ खानपान की आदतों से भी शरीर में हार्मोंन संतुलित रहकर बीमारी दूर रहती हैं.अत: हमें हर समय सकारात्मक चिंतन करते हुये अपनें आसपास के माहोल को भी हँसी ठहाकों से लबरेज रखना चाहियें. किसी ने कहा भी हैं....जीनें के है चार दिन बाकि सब बेकार दिन......... ॉॉॉ

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