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सौर मंडल [Solar System] सामान्य जानकारी

# सौर मंड़ल क्या हैं ?


सूर्य के चारों और चक्कर लगानें वालें ग्रहों,उपग्रहों,धूमकेतू,उल्काओं ,तथा पुच्छल तारों के समूह को सौर मंड़ल या Solar System कहतें हैं.

 सूर्य के चारों और चक्कर काट़नें वालें ग्रहो,उपग्रहों,धूमकेतू,पुच्छल तारें दीर्घवृतीय या अँड़ाकार कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करतें हैं.

आईंयें जानतें हैं सौर मंड़ल के बारें में ==

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#१.सूर्य [SUN]

सौरमंड़ल
 सूर्य

सूर्य सौरमंड़ल का सबसे बड़ा तारा हैं.यह सौरमंड़ल का जनक हैं,जिसका व्यास 13,93000 किलोमीटर हैं.

सूर्य का भार 2.18×10²7 टन हैं.यह प्रथ्वी से 14.96 किमी दूरी पर हैं.यह प्रथ्वी से 109 गुना बड़ा हैं.इसका प्रकाश प्रथ्वी पर पहुँचनें में लगभग 8 मिनिट लगतें हैं.

सूर्य में उपस्थित गैसों का संघटन


हीलियम.      :::::    71%

हाइड्रोजन.    :::::  26.5%

अन्य तत्व      ::::: 2.5%



उपरोक्त संघटन से स्पष्ट है कि सूर्य की संरचना गैसीय है .सूर्य की बाहरी सतह का तापमान 6000 डिग्री सेंटीग्रेड़ होता हैं,जबकि सूर्य के वे क्षेत्र जो अपेक्षाकृत ठंड़े होतें हैं उनका तापमान 1500° C होता हैं.

सूर्य अाकाशगंगा का चक्कर लगाता हैं,जो वह लगभग 25 करोड़ वर्ष में पूरा करता हैं.सूर्य द्धारा आकाशगंगा का एक चक्कर पूरा करनें में लगे समय को ब्रम्हांड़ वर्ष कहतें हैं.


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#२.बुध [Mercury]


बुध सूर्य का सबसे निकटतम और सौरमंड़ल का सबसे छोटा ग्रह हैं .

इसकी सूर्य से दूरी लगभग 5.7 करोड़ किमी है,और इसका व्यास 4878 किमी हैं.

यह सूर्य की परिक्रमा करनें में 88 दिन का समय लेता हैं.जो अन्य ग्रहों की अपेक्षा सबसे कम समय हैं.इसकी अपनें अक्ष पर गति 1,76 हजार किमी प्रतिघंट़े हैं.
Mercury
 Budh

बुध पर वायुमंड़ल नही हैं,यहाँ दिन का तापमान 427°C और रात का तापमान - 173° C तक पहुँच जाता हैं.यह तापांतर बुध को सर्वाधिक तापांतर वालें ग्रहों की श्रेणी में खड़ा करता हैं.

बुध का एक दिन प्रथ्वी के तीन महिनों के बराबर होता हैं और इतनी ही अवधि की रात होती हैं.

बुध का कोई उपग्रह नही हैं.


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#३.शुक्र [Venus]


ग्रह
 शुक्र ग्रह


यह ग्रह सूर्य से बुध के बाद दूसरें क्रम की दूरी पर स्थित हैं.इसका व्यास 12,102 किमी और सूर्य से दूरी 10.82 करोड़ किमी हैं.

यह ग्रह सूर्य की परिक्रमा 225 दिनों में पूरी करता हैं. प्रथ्वी के समीप स्थित होनें घनत्व,व्यास तथा आकार में प्रथ्वी के समान होनें के कारण इस ग्रह को प्रथ्वी की जुडवाँ बहन भी कहा जाता हैं.

यह ग्रह सबसे चमकीला और गर्म ग्रह हैं.सुबह और शाम को प्रथ्वी से पूर्व और पश्चिम में दिखाई पड़ने के कारण इस ग्रह को " सुबह का तारा" और "शाम का तारा" कहतें हैं.

शुक्र प्रथ्वी के विपरित पूर्व से पश्चिम की तरफ़ अपनें अक्ष पर घूमता हैं,इस ग्रह का भी बुध की भाँति कोई  'उपग्रह' नही हैं.


• शुक्र ग्रह की संरचना 

शुक्र ग्रह की सतह चट्टानों और ज्वालामुखियों से निर्मित हैं.इसका वायुमंड़ल निम्न गैसों से निर्मित हैं,

कार्बन डाई आँक्साइड़  ::::: 90%

सल्फ्यूरिक एसिड़,जलवाष्प,नाइट्रोजन आदि ::10%


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#३.प्रथ्वी [Earth]


सूर्य से दूरी के क्रम में यह तीसरा ग्रह हैं.यह एकमात्र ग्रह हैं,जिस पर जीवन हैं.जल की अधिकता के कारण प्रथ्वी अंतरिक्ष से नीली दिखाई देती हैं,इसी कारण इसे नीला ग्रह कहतें हैं.

प्रथ्वी का विषुवतीय व्यास 12,756 किमी ध्रुवीय व्यास  12,714 किमी हैं ,इसकी सूर्य से दूरी 14.96 करोड़ किमी हैं. 

प्रथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा करनें में 365 दिन 6 घंटे लगतें हैं.यह अपनें अक्ष पर 24 घंटे में एक चक्कर पूरा कर लेती हैं.इसे प्रथ्वी की 'घूर्णन गति'कहतें हैं.इसी घूर्णन गति के कारण प्रथ्वी पर दिन और रात होतें हैं. प्रथ्वी का एकमात्र उपग्रह  'चन्द्रमा'हैं.

प्रथ्वी पर उपस्थित स्थल और जल भाग

स्थल भाग ::: 29%

जल भाग  ::: 79%

प्रथ्वी अपनें अक्ष पर 23½°. झुकी हुई हैं.इस अक्षीय झुकाव के कारण ही प्रथ्वी पर मौसम परिवर्तन होतें हैं.

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#४.मंगल [Mars]


मंगल सूर्य से दूरी के क्रम में चौथा ग्रह हैं.इस ग्रह की सतह पर उपस्थित आइरन आक्साइड़ के कारण यह ग्रह लाल दिखाई देता हैं,इसी कारण इसे लाल ग्रह कहतें हैं.

मंगल का अक्ष प्रथ्वी के समान 25° के कोण पर झुका हुआ हैं,इसी कारण यहाँ ऋतु परिवर्तन होतें हैं.मंगल अपनें अक्ष पर 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करता हैं.

मंगल सूर्य की परिक्रमा करनें में 687 दिन लगाता हैं.

मंगल के दो उपग्रह हैं,जिन्हें फोबोस (Phobos) और डीमोस (Deimos) कहतें हैं.

मंगल पर सौर मंड़ल का सबसे ऊँचा पर्वत 'निक्स ओलम्पिया' (Nix Olympia)स्थित हैं.जो प्रथ्वी पर स्थित सबसे ऊँची पर्वत चोंटी माऊँट एवरेस्ट से तीन गुना बड़ा हैं.

सौरमंड़ल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी 'ओलिपस मेसी'भी मंगल पर स्थित हैं.

मंगल के वायुमंड़ल में मिथेन,अमोनिया,कार्बन डाइ आँक्साइड़ और जलवाष्प प्रचुरता में पाये जातें हैं.


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# ५.बृहस्पति [JUPITER]


यह सूर्य से पाँचवा ग्रह हैं जिसकी सूर्य से दूरी 77.83 करोड़ किमी हैं,यह ग्रह सौरमंड़ल का सबसे बड़ा ग्रह हैं.

इस ग्रह का व्यास 1,38,081 किमी हैं.यह सूर्य की परिक्रमा 11.9 वर्ष में पूरी करता हैं.

बृहस्पति की घूर्णन गति सर्वाधिक होती हैं.यह ग्रह 10 घंटे में अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा कर लेता हैं.

इस ग्रह के 69 उपग्रह हैं,जिनमें " गेनीमीड़"नामक उपग्रह सौरमंड़ल का सबसे बड़ा उपग्रह हैं अन्य उपग्रह हैं,आयो यूरोपा,कैलिस्टों,आलमथिया आदि.

बृहस्पति पर वायुंड़लीय दाब प्रथ्वी से एक करोड़ गुना अधिक हैं,इस ग्रह पर अमोनिया गैस के विशाल भंडार उपस्थित हैं.


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# ६.शनि (Saturn)


शनि सौरमंड़ल का दूसरा बड़ा ग्रह हैं,सूर्य से इस ग्रह का छठा क्रम आता हैं.

इस ग्रह का व्यास 1,20,500 लाख किमी हैं,इसकी सूर्य से दूरी 142.7 करोड़ हैं.

शनि सूर्य की परिक्रमा करनें में 30 वर्ष लगाता हैं.

शनि के आसपास वलय हैं जो छोटें - छोटें कणों से मिलकर बनें हैं.इन वलयों की मोटाई 18 किमी तक हैं.

शनि पर मुख्यत नाइट्रोजन, हीलियम,हाइड्रोजन गैस पाई जाती हैं,इसके अलावा कुछ मात्रा में मिथेन और अमोनिया भी विधमान हैं.

शनि के कुल 18 उपग्रह हैं ,इसका सबसे बड़ा उपग्रह "टाइटन" हैं,जो आकार में बुध ग्रह के बराबर हैं.

शनि सबसे कम घनत्व वाला ग्रह हैं इसका घनत्व पानी से भी कम होता हैं,यदि इस ग्रह को पानी में रखा जायें तो यह तेरनें लगेगा.

शनि अंतिम ग्रह हैं जिसे नंगी आँखों से देखा जा सकता हैं.


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# ७.अरूण (Uranus)


यह सूर्य से सातवें क्रम का ग्रह हैं,और आकार में तीसरा बड़ा ग्रह हैं.

अरूण का व्यास 51,400 किमी और इसकी सूर्य से दूरी 287 करोड़ किमी हैं.यह 84 वर्ष में सूर्य की परिक्रमा पूरी करता हैं.

यह ग्रह अपनें अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर घूमता हैं.यह ग्रह अपनें अक्ष पर इतना झुका हुआ हैं,कि लेटा हुआ दिखाई देता हैं,इसलिये इसे ' लेटा हुआ ग्रह'के नाम से भी जाना जाता हैं


इसके 18 उपग्रह हैं,जिसमें एरियल,अम्ब्रियल,टिटेनिया,ओबेरान,तथा मिरांड़ा प्रमुख हैं.टिटेनिया इसका सबसे बड़ा उपग्रह हैं.



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# ८.वरूण (Neptune)


सूर्य से सबसे दूरस्थ ग्रह हैं,जो सूर्य से 497 करोड़ किमी दूर हैं,यह सूर्य का एक चक्कर 165 वर्ष में पूरा करता हैं.इसका व्यास 48,600 किमी है.

यह ग्रह अपनें अक्ष पर 16 घंटे में एक चक्कर पूरा करता हैं.

यह ग्रह मिथेन गैस की उपस्थिति के कारण हरें रंग का दिखाई देता हैं.

इसके 8 उपग्रह हैं,जिसमें ट्रिटान सबसे बड़ा हैं.

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# पुच्छल तारें या धूमकेतू (Comets)


 धूमकेतू या पुच्छल तारें सौरमंड़ल के सबसे अधिक उत्केन्द्रित कक्षा वालें सदस्य हैं.जो सूर्य के चारों ओर लम्बी किंतु अनियमित कक्षा में घूमतें हैं,ये आकाशीय धूल,बर्फ और हिमानी गैसों के पिंड़ हैं जो सूर्य से दूर ठंड़े और अंधेरे क्षेत्र में रहतें हैं.

अपनी कक्षा में घूमतें हुये जब ये सूर्य के समीप से गुजरते हैं तो गर्म होकर इनसे गैस की फुहार निकलती है जो एक लम्बी चमकीली पूँछ के समान प्रतीत होती हैं.जबकि सामान्य अवस्था में पूच्छल तारें में यह पूँछ प्रकट नही होती हैं.

पुच्छल तारें की यह पूँछ लाखो किमी लम्बी होती हैं.सन् 1843 में विशाल पुच्छल तारा दिखा था जिसकी पूँछ 80 करोड़ किमी लम्बी थी.

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# एस्टराइँड़ (Asteroid)


मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह के मध्य 547 लाख किमी क्षेत्र में हजारों की सँख्या में लघु पिंड़,लघु ग्रह या एस्टराँइड़ सूर्य की परिक्रमा करतें रहतें हैं,जिन्हें सर्वपृथम इटली के खगोलशास्त्री पियाजी ने खोजा था.

खगोलशास्त्रीयों के मुताबिक  ग्रहों के विस्फोट़  फलस्वरूप टूटे हुये टुकड़ो से Asteroid का निर्माण हुआ हैं.

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# उल्का पिंड़ और उल्काश्म


अंतरिक्ष में घूमतें हुये धूल और गैस  और धूल के पिंड़ जब प्रथ्वी के समीप से गुजरतें हैं,तो प्रथ्वी के गुरूत्वाकर्षण के कारण प्रथ्वी की ओर खींचते चले आतें हैं,प्रथ्वी के वायुमंड़ल में प्रवेश करतें ही घर्षण के कारण ये पिंड़ जलनें लगतें हैं.जो पिंड़ प्रथ्वी के धरातल पर पहुँचनें से पूर्व ही जलकर राख  हो जातें हैं उन्हें उल्का पिंड़ कहतें हैं.

कुछ पिंड़ पूर्ण रूप में जल नही पातें हैं वे प्रथ्वी पर चट्टान बनकर गिर जातें हैं,इन्हें उल्काश्म कहतें हैं.



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# नक्षत्र


प्रथ्वी के आसपास 27 तारा समूह या नक्षत्र हैं,जो रात्री में आकाश से दिखाई देतें हैं.

प्रथ्वी का चक्कर लगातें समय चन्द्रमा प्रतिदिन किसी न किसी नक्षत्र या तारा समूह में से गुजरता हैं,जिससे उस दिन वह नक्षत्र दिखाई नही देता हैं.जिस दिन चंद्रमा नक्षत्र को चन्द्रमा पार करता हैं,उस दिन वह नक्षत्र दिखाई नहीं देता हैं.

प्रथ्वी एक नक्षत्र को पार करनें में 14 दिन का समय लगाती हैं, इसलिये नक्षत्रों की अवधि 14 दिनों की होती हैं.

प्रमुख नक्षत्र इस प्रकार हैं

१.अश्विनी

२.भरणी

३.कृतिका

४.रोहिणी

५.मृगसिरा

६.आद्रा

७.पुन्रवर्सु

८.मघा

९.अश्लेषा

१०.स्वाति

११.विशाखा

१२.अनुराधा

१३.ज्येष्ठा

१४.मूल

१५.पूर्वी हस्त

१६.चित्रा

१७.अषाढ़

१८.श्रावण

१९.घनिष्ठा

२०.शक्तिभिषा

२१.पूर्वाभा्द्र

२२.उत्तराभाद्र

२३.रेवती

२४.फाल्गुनी

२५.उत्तरा फाल्गुनी आदि


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# राशियाँ


प्रथ्वी सूर्य की परिक्रमा करतें समय अनेक तारा समूह में से होकर गुजरती हैं.इन तारा समूह के आकार किसी न किसी जानवर,वस्तु आदि से मिलतें जुलतें दिखाई देतें हैं.जिन्हें राशियाँ कहा जाता हैं.

राशियों की सँख्या 12 हैं

१.मेष

२.वृष

३.मिथुन

४.कर्क

५.सिंह

६.कन्या

७.तुला

८.वृश्चि

९.धनु

१०.मकर

११.कुम्भ

१२.मीन



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पारस पीपल के औषधीय गुण Paras pipal KE ausdhiy gun ::: पारस पीपल के औषधीय गुण पारस पीपल का  वर्णन ::: पारस पीपल पीपल वृक्ष के समान होता हैं । इसके पत्तें पीपल के पत्तों के समान ही होतें हैं ।पारस पीपल के फूल paras pipal KE phul  भिंड़ी के फूलों के समान घंटाकार और पीलें रंग के होतें हैं । सूखने पर यह फूल गुलाबी रंग के हो जातें हैं इन फूलों में पीला रंग का चिकना द्रव भरा रहता हैं ।  पारस पीपल के  फल paras pipal ke fal खट्टें मिठे और जड़ कसैली होती हैं । पारस पीपल का संस्कृत नाम  पारस पीपल को संस्कृत  में गर्दभांड़, कमंडुलु ,कंदराल ,फलीश ,कपितन और पारिश कहतें हैं।  पारस पीपल का हिन्दी नाम  पारस पीपल को हिन्दी में पारस पीपल ,गजदंड़ ,भेंड़ी और फारस झाड़ के नाम से जाना जाता हैं ।   पारस पीपल का अंग्रजी नाम Paras pipal ka angreji Nam ::: पारस पीपल का अंग्रेजी नाम paras pipal ka angreji nam "Portia tree "हैं । पारस पीपल का लेटिन नाम Paras pipal ka letin Nam ::: पारस पीपल का लेटिन paras pipal ka letin nam नाम Thespesia

भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र [BHAGVAN SHRI RAM]

 Shri ram #भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र रामायण या रामचरित मानस सेकड़ों वर्षों से आमजनों द्धारा पढ़ी और सुनी जा रही हैं.जिसमें भगवान राम के चरित्र को विस्तारपूर्वक समझाया गया हैं,यदि हम थोड़ा और गहराई में जाकर राम के चरित्र को समझे तो सामाजिक जीवन में आनें वाली कई समस्यओं का उत्तर उनका जीवन देता हैं जैसें ● आत्मविकास के 9 मार्ग #१.आदर्श पुत्र ::: श्री राम भगवान अपने पिता के सबसे आदर्श पुत्र थें, एक ऐसे समय जब पिता उन्हें वनवास जानें के लिये मना कर रहें थें,तब राम ही थे जिन्होनें अपनें पिता दशरथ को सूर्यवंश की परम्परा बताते हुये कहा कि रघुकुल रिती सदा चली आई | प्राण जाई पर वचन न जाई || एक ऐसे समय जब मुश्किल स्वंय पर आ रही हो  पुत्र अपनें कुल की परंपरा का पालन करनें के लिये अपने पिता को  कह रहा हो यह एक आदर्श पुत्र के ही गुण हैं. दूसरा जब कैकयी ने राम को वनवास जानें का कहा तो उन्होनें निसंकोच होकर अपनी सगी माता के समान ही कैकयी की आज्ञा का पालन कर परिवार का  बिखराव होनें से रोका. आज के समय में जब पुत्र अपनें माता - पिता के फैसलों