बुधवार, 28 दिसंबर 2016

Anidra prakar, karan aur prabhandhan [अनिद्रा प्रकार कारण और प्रबंधन]

अनिद्रा की समस्या:::

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अच्छी नींद भी एक सपना बन गई हैं.वे लोग वास्तव में ख़ुशनसीब होतें हैं,जिनकी रात को नींद लगनें के बाद सीधी सुबह ही होती हैं.नींद हमारें स्वास्थ के लियें उतनी आवश्यक हैं, जितनी की आँक्सीजन बगैर सोये हम ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रख सकते ,यदि हम 24 घंटे नहीं सो पायेगें तो उसका नकारातमक प्रभाव हमारें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ पर पड़ेगा.

आयुर्वेदाचार्यों ने निद्रा का वर्गीकरण कई प्रकार से किया हैं,आचार्य सुश्रुत के अनुसार जब ह्रदय तम से आवृत होता हैं,तो नींद आती हैं,और जब तम अल्प होकर सत्व प्रबल होता हैं,तो नींद खुल जाती हैं.

आधुनिक शोधार्थी और scientist नींद पर लगातार शोध कर रहे हैं,परन्तु उनका शोध आज तक नींद आनें को लेकर तर्कपूर्ण व्याख्या प्रस्तुत नहीं कर सका हैं.

उम्र के हिसाब से नींद की व्याख्या scientist द्धारा की गई हैं,जैसें
• 2 वर्ष तक 16 घंटे की नींद आवश्यक हैं.
• 3 से 12 वर्ष तक 10 घंटे.
• 13 से 18 वर्ष तक 10 घंटे.
• 19 से 55 वर्ष तक 8 घंटे.
• 55 से ऊपर उम्र के लोगों को 6 से 7 घंटे नींद लेनी आवश्यक हैं.

प्रकार :::

आधुनिक चिकित्सतको के मतानुसार अनिद्रा कई प्रकार की होती हैं,जैसें

1.Ideopethic insomnia

यह बीमारी गर्भ या बचपन से शुरू होकर वयस्क होनें तक बनी रहती हैं,इसमें व्यक्ति अधिक या कम सोता हैं.

2.Adjustment insomnia :::

यह बीमारी अत्यधिक तनाव की वज़ह से होती हैं.जिससे व्यक्ति बैचेनी में रातभर करवट बदलता रहता हैं.

3.psyco physiological :::

इस तरह के रोगी में यह ड़र बैंठ जाता हैं,कि नींद नहीं आयेगी.अत: वह रातभर  सो नही पाता हैं.

4.Behaviour insomnia:::

इस तरह की अनिद्रा की समस्या ऐसे लोगों में होती हैं,जिनको एक निश्चित जगह पर सोनें की आदत पड़ जाती हैं,या फिर कोई विशेष व्यक्ति पास में सोया हैं,तो ही व्यक्ति को नींद आती हैं,जैसें कि बच्चें अपनी माँ के उठते ही तुरन्त साथ में ही उठ जातें हैं.

कारण :::

नींद नहीं आनें या अनिद्रा के कई कारण हैं,जैसें
• उच्च रक्तचाप.
• मानसिक तनाव
• सोनें की अनियमित जीवनशैली
• कैफीन,तम्बाकू चाय जैसे उत्तेजना पैदा करनें वालें पदार्थों का सेवन.
• कोई शारीरिक समस्या होनें पर जैसें हाथ - पैरो,सिर,बदन,पेट आदि में दर्द या इनसे सम्बंधित कोई व्याधि होनें पर भी अनिद्रा की समस्या पैदा हो जाती हैं.
• डिजीटल डिसआर्ड़र की समस्या होनें पर भी नींद नहीं आती जैसें देर रात तक मोबाइल, लेपटाप,कम्प्यूटर को रात के अंधेरें में चलाना.
• सोशल साईट पर अत्यधिक सक्रिय रहेनें वालें तथा बार - बार अपनी पोस्ट ,लाईक्स,कमेंट़ जाँचनें वालों को भी नींद नहीं आनें की समस्या होती हैं.
• दवाईयों का अधिक सेवन करनें वालें व्यक्तियों को भी निद्रा की समस्या रहती हैं.
• खर्राटे लेनें वालें व्यक्तियों को भी अनिद्रा की समस्या रहती हैं.
• मानसिक रूप से असंतुलित व्यक्ति को भी नींद नहीं आती हैं.

प्रबंधन :::

अच्छी और गहरी नींद प्राप्त करना कोई मुश्किल काम नहीं हैं,एक बार भगवान बुद्ध से उनके शिष्य ने प्रश्न किया कि प्रभु मैं कई दिनों से देख रहा हूँ,कि आप जिस करवट़ सोतें हैं,उसी करवट़ सुबह उठतें हैं और मैं रात भर करवट़ बदलतें - बदलतें गुजार देता हूँ,तब बुद्ध ने शिष्य को कहा कि मैं सोतें समय बुद्धत्व को प्राप्त हो जाता हूँ,अर्थात मेरा मन पूर्णत:शून्य को प्राप्त हो जाता हैं,ऐसी अवस्था में मात्र नींद ही शेष रह जाती हैं,जो मेरें मस्तिष्क को प्राप्त हो जाती हैं.अत: सोने से पहले मस्तिष्क शांत और प्रशन्न होना आवश्यक हैं.
• सोनें का एक निश्चित समय निर्धारित कर लें उस निश्चित समय पर सोनें से मस्तिष्क उस निश्चित समय पर सोनें का विवश कर देगा.
• बिस्तर पर सिर्फ सोनें का काम करें,लेपटाप,मोबाइल चलाना या लेटे हुये टी.वी.देखना नही करें,क्योंकि इन डिवाइसों से निकलनें वाली कृत्रिम नीली रोशनी आँखों पर सीधा असर डालती हैं,फलस्वरूप लम्बें समय तक आँखों में चमक बनी रहती हैं.
• सोतें समय बिस्तर पर शवासन करें, पूरें शरीर को ढीला छोड़कर सोयें.
• सोनें से 3 घंटे पहलें भोजन करले इसके पश्चात कुछ भी खाना वर्जित करें.
• रात के समय चाय,काँफी या अन्य उत्तेजना पैदा करनें वालें पदार्थों का सेवन नहीं करें.
• यदि सुबह तथा शाम के वक्त हल्की फुल्की कसरत जैसें पैदल घूमना,प्राणायाम, ध्यान करेंगें तो नींद बहुत ही गहरी आयेगी.
• पेट के बल सोनें से परहेज करें क्योंकि पेट के बल सोनें से श्वसन प्रकिया में बाधा पँहुचती हैं.
• यदि प्रोस्टेट संबधित कोई समस्या हैं,और बार - बार पैशाब जानी पड़ रही हो तो चिकित्सक द्धारा बताईं गई दवाईयों का सेवन सोनें से 1 घंटे पहलें अवश्य करें.
• सोनें से पहलें हाथ,पाँव और मुँह पानी से अवश्य धो लें.
• बादाम,काजू,अलसी, अखरोट़ का नियमित सेवन करना चाहियें क्योंकि इसमें पाया जानें वाला विटामिन E और ओमेगा 3 फेटीएसिड़ दिमाग को चुस्त रखता हैं.

• सिर के निचें या तकिये के नीचें मोबाइल रखकर कभी नहीं सोयें क्योंकि इससे निकलनें वाली तरंगे मस्तिष्क की कार्यपृणाली को बाधित करती हैं.
• जब तक बहुत तेज़ नींद नहीं आती हो तब तक बिस्तर पर नही सोयें इसके बजाय वह काम करें जो आपको अरूचिकर लगें,ऐसा करनें से तुरन्त नींद आ जायेगी.

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