गुरुवार, 1 दिसंबर 2016

polycystic ovarian syndrome पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम

#PCOS का परिचय :::

pcos या polycystic ovarian syndrome महिलाओं से संबधित समस्या हैं,जिसमें हार्मोंन असंतुलन की वज़ह से pco में एक परिपक्व फॉलिकल बननें के स्थान पर बहुत से अपरिपक्व फॉलिकल्स बन जातें हैं.सम्पूर्ण विश्व में इस बीमारी का ग्राफ तेज़ी से बड़ रहा हैं,विश्व स्वास्थ संगठन (W.H.O) के अनुसार 13 से 25 उम्र की हर 10 में से 2 स्त्रीयाँ pcos से पीड़ित होती हैं.

#लक्षण :::

० अण्ड़ेदानी में कई गांठे बनना.
० बार - बार गर्भपात .
० बालों का झड़ना,बाल पतले होना.
० चेहरें पर पुरूषों के समान दाड़ी मुंछ आना.
० चेहरें पर मुहाँसे, तैलीय त्वचा
० आवाज का भारी होना.
० स्तनों [Breast]का आकार घट़ना.
० पेट के आसपास चर्बी का बढ़ना.
० माहवारी के समय कमर ,पेडू में तीव्र दर्द,मासिक चक्र का एक या दो दिन ही रहना.
०मधुमेह, उच्च रक्तचाप होना,ह्रदय रोग और तनाव होना.

urinary tract infection के बारे में जानियें


#कारण :::

० आनुवांशिक रूप से स्थानांतरित होता हैं.
० अनियमित जीवनशैली जैसें कम शारीरिक श्रम,देर रात तक सोना सुबह देर तक उठना,फास्ट फूड़ ,जंक फूड़ का अत्यधिक प्रयोग.
० लेपटाप ,मोबाइल का अत्यधिक प्रयोग.
० मधुमेह का पारिवारिक इतिहास होना.

#प्रबंधन :::

० खानें पीनें में अत्यन्त सावधानियाँ आवश्यक हैं,एेसा भोजन ले जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, ओमेगा 3 फेटीएसिड़, विटामिन ओर मिनरल भरपूर हो जैसें काजू,बादाम,अखरोट़,सोयाबीन उत्पाद,हरी सब्जियाँ ,दूध ,फल ,अंड़े आदि.
० डाँक्टर ऐसी दवाईयाँ देतें हैं,जो हार्मोंन संतुलित रखें,कोलेस्ट्रॉल कम करें,मासिक चक्र नियमित रखे,किन्तु यह दवाईयॉ लम्बें समय तक लेना पड़ सकती हैं,अत : आयुर्वैदिक दवाईयों का सेवन करें ये दवाईयाँ शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं छोड़ती हैं.
० व्यायाम और योग उतना ही ज़रूरी हैं,जितना दवाईयाँ अत : नियमित रूप से तेरना,दोड़ना,नृत्य करना आदि करतें रहें.
० कपालभाँति, भस्त्रिका, सूर्यासन,मत्स्यासन करतें रहें.
० जवारें का जूस लेना चाहियें.
० पानी का पर्याप्त सेवन करनें से हार्मोंन लेवल संतुलित रहता हैं.
० अपनें स्वभाव को सकारात्मक चिंतन से सरोबार रखें .
० शांत, प्रशन्नचित्त और हँसमुख बनें ,प्रतिदिन ध्यान को अपनें जीवन का अंग बना लें.

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