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मृत्य से अमरता की ओर का विमर्श

                                 
मछली के माध्यम से अमरता का संदेश
  मृत्यु से अमरता कीओर
मृत्यु (Death) शाश्वत सत्य हैं.यह बात पृथ्वी पर रहनें वालें प्रत्येक जीव - जगत पर एक समान रूप से सिद्ध होती हैं. लेकिन एक बात और शाश्वत रूप से सत्य मानी जाती हैं,कि प्रत्येक सिद्धांत का विपरीत मोजूद हैं.दिन है तो रात हैं.सत्य है तो झूठ हैं.नर है तो नारी भी हैं.इसी प्रकार मृत्यु (Death) है तो अमरता (Immortality) भी तो हैं.


#क्या व्यक्ति और जीव जगत अमर हो सकता हैं ?

क्या हमारा science इतना उन्नत हो सकता हैं,कि मृत्यु दूर का सपना रह जावें. यदि गहराई में जाकर विश्लेषण करें तो एक बात पूर्ण रूप से स्पष्ट़ हो जाती हैं,कि "अमरता" प्राप्त करना असंभव नहीं हैं.भारतीय धर्मशास्त्र और जीवन दर्शन ने इस बात के ढ़ेरों प्रमाण दियें हैं और लोग इन प्रमाणों को आज भी ह्रदय की गहराई से मानते आ रहें हैं.उदाहरण के लिये अमरता प्राप्त करनें के लियें देवता और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया और अम्रत निकाला जिसे पीकर देवता अमर हो गये और दूसरे लोक या ग्रह पर जाकर बस गये तो फिर यह भी एक प्रश्न हैं,कि उनका प्रथ्वी से भौतिक सम्पर्क क्यों नहीं हैं. क्या अमरता विषयक यह सिद्धांत सत्य हैं,या कपोल कल्पना हैं.


#शोध (Research) क्या कहतें हैं  :::


यदि हम जीव - जगत की आयु विषयक शोधों की बात करें तो एक बात स्पष्ट हैं कि आयु का सीधा सम्बंध प्रथ्वी की परिक्रमण गति से हैं,जैसे - जैसे प्रथ्वी परिक्रमण करते हुये ब्रम्हाण्ड़ (space) में आगे बढ़ती हैं,जीव - जगत की आयु बढ़ती चली जाती हैं.और एक समय पूरा होनें या प्रथ्वी जब ब्रम्हाण्ड़ में एक विशेष अवस्था से होकर गुजरती हैं,तो उस आयु से सम्बधित जीव - जगत को शरीर त्यागना पड़ता हैं.तो क्या अमरता प्राप्त करनें के लिये प्रथ्वी ग्रह को त्यागकर किसी दूसरे ऐसे ग्रह पर शरण लेनी पड़ेगी जहाँ प्रथ्वी जैसी दशायें तो हो परन्तु परिक्रमण परिभ्रमण जैसी घट़नायें ना हो वास्तव में यही बात और अधिक शोध का विषय हैं.
मेरें विचार में अमरता निश्चित रूप में प्राप्त की जा सकती हैं.क्योंकि मृत्यु हैं तो अमरता भी तो है .क्योंकि भारतीय प्राचीन धर्मशास्त्र जिनका अस्तित्व लाखों वर्षों पूर्व घट़ित सत्य घट़नाओं पर आधारित हैं अमरता विषयक घट़नाओं का प्रमाण देतें हैं.बस आवश्कता इन घट़नाओं के गूढ़ रहस्यों को भेदनें की हैं.
                                 







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