सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

बाकुची के फायदे। Bakuchi ke fayde

बाकुची के फायदे । Bakuchi ke fayde


बाकुची के पौधे बरसात में सामान्यतः उगते हैं । Bakuchi ke podho की लम्बाई एक से लेकर चार फीट तक होती हैं । बाकुची की डाली सीधी और पत्ते ग्वार के पत्तों के सदृश्य होते हैं । बाकुची के पत्तों के कोनों में से तीन इंच लम्बे ऊंगली के समान डंठल निकलते हैं और इनके ऊपर गहरे बैंगनी रंग के फूल निकलते हैं। बाकुची bakuchi के फूलों का आकार तुलसी की मंजरी के समान होता हैं ।


बाकुची के फूलों में से पतली तोते के समान फलियां निकलती हैं जो पकने पर काली पड़ जाती हैं । इन फलियों में बीज भी काले रंग के निकलते हैं । 

1.बाकुची के फायदे सफेद दाग में

2.गठान होनें पर बाकुची के फायदे

3.दाद खाज में बाकुची के फायदे

4.बालों के लिए बाकुची के फायदे

5.पीलिया होनें पर बाकुची के फायदे

6.दांतों की सड़न रोकनें में बाकुची के फायदे

7.दस्त रोकनें में बाकुची के फायदे

8.त्वचा के कैंसर को रोकनें में बाकुची के फायदे


बाकुची का संस्कृत नाम 

सोमराज,कृष्णफल,कुष्ठनाशिनी,सोमवल्ली


बाकुची का हिन्दी नाम


बावर्ची,बकुची


बाकुची का लेटिन नाम


Psoralea corylifolia सोरेलिया कोरिलीफोलिया


आयुर्वेद मतानुसार बाकुची की प्रकृति


आयुर्वेद मतानुसार बावची शीतल,कटु और पित्त शामक होती हैं ।


1.बाकुची के फायदे सफेद दाग में


बावची के बीजों को गोमूत्र में पांच घंटे के लिए भिगो दें तत्पश्चात निकालकर छाया में सूखा लें। और बाकुची के बीज से आधा भाग जीरे का मिलाकर इस मिश्रण को पीस लें। रोज सुबह शाम आधा आधा चम्मच इस मिश्रण को लगभग एक साल तक ले । सफेद दाग में बहुत फायदा होता हैं । 


2.गठान होने पर बाकुची के फायदे


बाकुची के बीजों को पीसकर चूर्ण बना लें,इस चूर्ण को पानी मिलाकर कुछ समय तक गर्म कर लें थोड़ा गर्म रहने पर गांठ पर बांध लें कुछ दिनों के प्रयोग से गठान बैठ जाती हैं ।


3.दाद खाज में बाकुची के फायदे

बाकुची के पत्तों को पीसकर दाद खाज खुजली वाली त्वचा पर लगाने से दाद खाज खुजली मिट जाती हैं ।


4.बालों के लिए बाकुची के फायदे


बाकुची की फलियों को पानी में उबाल लें,इस उबले हुए पानी से बालों को धो लें। बाल घने, चमकीले और घने हो जातें हैं ।



5.पीलिया होनें पर बाकुची के फायदे


बाकुची के फूलों को पानी में कुछ समय तक उबाल लें। और यह पानी थोड़ा थोड़ा करके पीलिया पीड़ित व्यक्ति को पीलाएं बहुत आराम मिलेगा ।


6.दांतों की सड़न रोकने में बाकुची के फायदे


बाकुची की जड़ सडे दांत पर लगाने से सडे हुए दांतों की सड़न रुक जाती हैं ।


7.दस्त रोकने में बाकुची के फायदे


बाकुची के पत्तों को पानी में उबालकर इस पानी को दस्त पीड़ित व्यक्ति को पीलाने से दस्त तीव्रता से बंद हो जातें हैं ।


8.त्वचा के कैंसर को रोकने में बाकुची के फायदे



त्वचा के कैंसर की प्रारंभिक अवस्था से ही यदि बावची के बीजों और काले तिल को मिलाकर लम्बे समय तक सेवन करना चाहिए ऐसा करने से त्वचा का कैंसर का प्रभाव बहुत सीमित हो जाता हैं ।


 • काला धतूरा के फायदे और नुकसान

• ब्लेक फंगस क्या होता हैं

• निर्गुण्डी

• बबूल के औषधीय गुण



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गेरू के औषधीय प्रयोग

गेरू के औषधीय प्रयोग गेरू के औषधीय प्रयोग   आयुर्वेद चिकित्सा में कुछ औषधीयाँ सामान्य जन के मन में  इतना आश्चर्य पैदा करती हैं कि कई लोग इन्हें तब तक औषधी नही मानतें जब तक की इनके विशिष्ट प्रभाव को महसूस नही कर लें । गेरु भी उसी श्रेणी की   आयुर्वेदिक औषधी   हैं। जो सामान्य मिट्टी   से   कहीं अधिक   इसके   विशिष्ट गुणों के लिए जानी जाती हैं। गेरु लाल रंग की मिट्टी होती हैं। जो सम्पूर्ण भारत में बहुतायत मात्रा में मिलती हैं। इसे गेरु या सेनागेरु कहते हैं। गेरू आयुर्वेद की विशिष्ट औषधी हैं जिसका प्रयोग रोग निदान में बहुतायत किया जाता हैं । गेरू का संस्कृत नाम  गेरू को संस्कृत में गेरिक ,स्वर्णगेरिक तथा पाषाण गेरिक के नाम से जाना जाता हैं । गेरू का लेटिन नाम  गेरू   silicate of aluminia  के नाम से जानी जाती हैं । गेरू की आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति गेरू स्निग्ध ,मधुर कसैला ,और शीतल होता हैं । गेरू के औषधीय प्रयोग 1. आंतरिक रक्तस्त्राव रोकनें में गेरू शरीर के किसी भी हिस्से में होनें वाले रक्तस्त्राव को कम करने वाली सर्वमान्य औषधी हैं । इसके लिय

टीकाकरण चार्ट [vaccination chart] और संभावित प्रश्न

 टीकाकरण चार्ट # 1.गर्भावस्था के समय टीकाकारण ::: गर्भावस्था की शुरूआत में Titnus का पहला टीका टी.टी - 1. टी.टी -1 के चार सप्ताह बाद टी.टी.-2 यदि पिछली गर्भावस्था में टी.टी - 2 दिया गया हैं,तो केवल बूस्टर दीजिए. # टीके की मात्रा ,कैसें और कहाँ दें 0.5 ml.मात्रा प्रशिक्षित व्यक्ति द्धारा ऊपरी बांह की मांसपेशी में. # महत्वपूर्ण गर्भावस्था के 36 सप्ताह हो गयें हो तो मात्र टी.टी.- बूस्टर देना चाहियें.  टीकाकरण का दृश्य # 2.शिशुओं के लियें टीकाकरण  #जन्म के समय ::: 1. B.C.G.  =     0.1 ml बाँह पर त्वचा के निचें. 2.हेपेटाइटिस बी.=  0.5 ml मध्य जांघ के बाहरी हिस्सें पर मांसपेशी में 3.o.p.v.या oral polio vaccine = दो बूँद मुहँ में . ०  जानिये पोलियो क्या होता हैं ? #6 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. = 0.5 ml 2.D.P.T. = 0.5 ml मध्य जांघ का बाहरी हिस्सें में माँसपेशियों में. 3.o.p.v.या oral polio vaccine. #10 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. 2.D.P.T. 3.o.p.v. #14 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. 2.D.P.T. 3.o.p.v.   #9 से 12 माह

काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan

धतूरा भगवान शिव का प्रिय पौधा है। भगवान शिव धतूरा अपने मस्तिष्क पर धारण करते हैं और जो लोग धतूरा भगवान शिव को अर्पण करते थे वे उन्हें मनचाहा आशीष प्रदान करते हैं। धतूरा भी कई प्रकार का होता है जैसे काला धतूरा, सफेद धतूरा, पीला धतूरा आदि। आज हम आपको "काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan" के बारे में बताएंगे।  काला धतूरा के फायदे और नुकसान आयुर्वेद आयुर्वेद चिकित्सा में काला धतूरा बहुत महत्वपूर्ण औषधि के रूप में बहुत लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है । धतूरा बहुत ही जहरीला फल होता है , प्रकृति में गर्म और भारी होता है। काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम धतूरा स्ट्रामोनियम DHATURA STRAMONIUM है । अंग्रेजी में इसे डेविल्स एप्पल Devil's apple, डेविल्स ट्रम्पेट Devil's trumpet के नाम से जाना जाता है। संस्कृत में इसे दस्तूर, मदन, उन्मत्त ,शिव प्रिय महामोधि, कनक आदि नाम से जानते हैं। काला धतूरा की पहचान कैसे करें  काला धतूरा के पत्ते नोक दार ,डंठल युक्त और बड़े आकार के होते हैं। काला धतूरा के फूल घंटी