सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सोरायसिस क्यों होता हैं



                *सोरायसिस(Psoriasis)*

🔻सोरायसिस क्रॉनिक यानी बार बार होनेवाला आॅटोइम्यून डिजीज हैं। इसके कारण त्वचा पर लाल और सफेद रंग के धब्बे हो जाते है। वैसे तो यह रोग 2-3 प्रतिशत के लोगों में ही पाया जाता है लेकिन फिर भी इस रोग में पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है। इस समस्या का इलाज न करवाने पर यह बार-बार होती रहती है। इसके बारे में पूरी जानकारी होने पर आप इसका सही इलाज करवा सकते है।

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦
*आइए जानते है 6 तरह में पाई जाने वाली इस बीमारी के बारे में।*

🔹 *1. प्लेक सोरायसिस*
8-10 प्रतिशत लोगों में होने वाली इस समस्या के कारण शरीर पर सिल्वर और सफेद रंग की लाइन बन जाती है। कोहनी, घुटने, स्कैल्प और पीठ मे नीचे होने वाला इस सोरायसिस से लाल धब्बे और जलन होने लगती है।

🔹 *2. गटेट या चित्तीदार सोरायसिस*
युवाओं में पाया जाने वाला ये सोरायसिस शरीर पर छोटे गुलाबी चित्ती सी उभर कर आती है। यह समस्या ज्यादातर बाजू, कोहनी और स्कैल्प पर पाई जाती है। इसमें तनाव, त्वचा में चोट जैसे निशान और दवाइयों का रिएक्शन होने लगता है। ज्यादातर मामलों में यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है।

🔹 *3. इन्‍वर्स सोरायसिस*

इस टाइप के सोरायसिस बाइट रेड, स्मूथ, शाइनी और बिना लाइन के होते है। यह समस्या आर्मपिट्स, ग्रोइन और स्तन के नीचे होती है। यह परेशानी पसीने और रगड़ने के कारण होती है।
🔹 *4. पस्‍चुलर सोरायसिस*

बड़ी उम्र के लोगों में पाई जाने वाली समस्या संक्रमित होती है। हाथों-पैरों में होनी वाली इस परेशानी के कारण बुखार, उल्टी और खुजली होने लगती है।

🔹 *5. एरि‍थ्रोडर्मिक सोरायसिस*
इस प्रकार के गंभीर सोरायसिस से खुजली, हार्ट रेट बढ़ जाना और शरीर का तापमान कम या ज्यादा होने जैसी समस्याएं हो जाती है। इस संक्रमित सोरायसिस का इलाज न करवाने पर निमोनिया भी हो सकता है।

🔹 *6. नेल सोरायसिस*

हाथों-पैरों के नाखूनों पर होने वाली यह समस्या अर्थराइटिस से पीड़ित लोगों में होती है। इसके कारण नाखून मे दर्द, नाखूनों के रंग में बदलाव, नाखूनों के अंदर चॉक जैसा तत्व भर जाता है। ज्यादातर यह समस्या फंगल इंफेक्शन के कारण होती है।
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
🔻सोरायसिस को एक ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया से चिह्नित किया गया है। शरीर के इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक प्रणाली की गड़बड़ी को इसका कारण माना जाता है। हमारी त्वचा पुरानी कोशिकाओं को बदलने के लिए और नई कोशिकाओं का निर्माण करने में लगभग 28 दिनों का समय लेती है, लेकिन सोरायसिस से पीड़ित लोगों की त्वचा सिर्फ 4-5 दिनों में नई कोशिकाओं का उत्पादन करती है। इससे कोशिकाओं का जमना शुरू हो जाता है।
🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃
         *सोरायसिस (छाल रोग) के लक्षण*
🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃
सोरायसिस एक बार बार होने वाली बीमारी है जो आपकी त्वचा को प्रभावित करती है। त्वचा पर बहुत खुजली होती है और कभी-कभी कंडीशन अधिक खराब होकर त्वचा पर सूजन हो सकती है। कई बार आप दर्द भी महसूस कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप त्वचा पर छोटे परतदार धब्बे, शुष्क, फटी त्वचा जिसमें से खून निकल सकता है। इसमें कई बार आपकी त्वचा पर छाले बनने लगते हैं। निरंतर खुजली की ज़रूरत बहुत परेशान कर सकती है। सोरायसिस जोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है और जोड़ों में सूजन का कारण बन सकता है।

✍🏼✍🏼० केले के औषधीय प्रयोग 


० बैंगन के औषधीय उपयोग✍🏼✍🏼✍🏼



० पारस पीपल के औषधीय गुण



० तेल के औषधीय गुण



० गंधक के औषधीय गुण

✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गेरू के औषधीय प्रयोग

गेरू के औषधीय प्रयोग गेरू के औषधीय प्रयोग   आयुर्वेद चिकित्सा में कुछ औषधीयाँ सामान्य जन के मन में  इतना आश्चर्य पैदा करती हैं कि कई लोग इन्हें तब तक औषधी नही मानतें जब तक की इनके विशिष्ट प्रभाव को महसूस नही कर लें । गेरु भी उसी श्रेणी की   आयुर्वेदिक औषधी   हैं। जो सामान्य मिट्टी   से   कहीं अधिक   इसके   विशिष्ट गुणों के लिए जानी जाती हैं। गेरु लाल रंग की मिट्टी होती हैं। जो सम्पूर्ण भारत में बहुतायत मात्रा में मिलती हैं। इसे गेरु या सेनागेरु कहते हैं। गेरू आयुर्वेद की विशिष्ट औषधी हैं जिसका प्रयोग रोग निदान में बहुतायत किया जाता हैं । गेरू का संस्कृत नाम  गेरू को संस्कृत में गेरिक ,स्वर्णगेरिक तथा पाषाण गेरिक के नाम से जाना जाता हैं । गेरू का लेटिन नाम  गेरू   silicate of aluminia  के नाम से जानी जाती हैं । गेरू की आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति गेरू स्निग्ध ,मधुर कसैला ,और शीतल होता हैं । गेरू के औषधीय प्रयोग 1. आंतरिक रक्तस्त्राव रोकनें में गेरू शरीर के किसी भी हिस्से में होनें वाले रक्तस्त्राव को कम करने वाली सर्वमान्य औषधी हैं । इसके लिय

जीवनसाथी के साथ नंगा सोना चाहिए या नही।Nange sone ke fayde

  जीवनसाथी के साथ नंगा सोना चाहिए या नही nange sone ke fayde इंटरनेट पर जानी मानी विदेशी health website जीवन-साथी के साथ नंगा सोने के फायदे बता रही है लेकिन क्या भारतीय मौसम और आयुर्वेद मतानुसार मनुष्य की प्रकृति के हिसाब से जीवनसाथी के साथ नंगा सोना फायदा पहुंचाता है आइए जानें विस्तार से 1.सेक्स करने के बाद नंगा सोने से नींद अच्छी आती हैं यह बात सही है कि सेक्सुअल इंटरकोर्स के बाद जब हम पार्टनर के साथ नंगा सोते हैं तो हमारा रक्तचाप कम हो जाता हैं,ह्रदय की धड़कन थोड़ी सी थीमी हो जाती हैं और शरीर का तापमान कम हो जाता है जिससे बहुत जल्दी नींद आ जाती है।  भारतीय मौसम और व्यक्ति की प्रकृति के दृष्टिकोण से देखें तो ठंड और बसंत में यदि कफ प्रकृति का व्यक्ति अपने पार्टनर के साथ नंगा होकर सोएगा तो उसे सोने के दो तीन घंटे बाद ठंड लग सकती हैं ।  शरीर का तापमान कम होने से हाथ पांव में दर्द और सर्दी खांसी और बुखार आ सकता हैं । अतः कफ प्रकृति के व्यक्ति को सेक्सुअल इंटरकोर्स के एक से दो घंटे बाद तक ही नंगा सोना चाहिए। वात प्रकृति के व्यक्ति को गर्मी और बसंत में पार्टनर के साथ नंगा होकर सोने में कोई

काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan

धतूरा भगवान शिव का प्रिय पौधा है। भगवान शिव धतूरा अपने मस्तिष्क पर धारण करते हैं और जो लोग धतूरा भगवान शिव को अर्पण करते थे वे उन्हें मनचाहा आशीष प्रदान करते हैं। धतूरा भी कई प्रकार का होता है जैसे काला धतूरा, सफेद धतूरा, पीला धतूरा आदि। आज हम आपको "काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan" के बारे में बताएंगे।  काला धतूरा के फायदे और नुकसान आयुर्वेद आयुर्वेद चिकित्सा में काला धतूरा बहुत महत्वपूर्ण औषधि के रूप में बहुत लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है । धतूरा बहुत ही जहरीला फल होता है , प्रकृति में गर्म और भारी होता है। काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम धतूरा स्ट्रामोनियम DHATURA STRAMONIUM है । अंग्रेजी में इसे डेविल्स एप्पल Devil's apple, डेविल्स ट्रम्पेट Devil's trumpet के नाम से जाना जाता है। संस्कृत में इसे दस्तूर, मदन, उन्मत्त ,शिव प्रिय महामोधि, कनक आदि नाम से जानते हैं। काला धतूरा की पहचान कैसे करें  काला धतूरा के पत्ते नोक दार ,डंठल युक्त और बड़े आकार के होते हैं। काला धतूरा के फूल घंटी