सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

5 तरीकों से आप फलों और सब्जियों से अधिक पोषण प्राप्त करेंगे ।5 Tricks for getting enough fruits and vegetables

 फल और सब्जियां जीवन के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन फल और सब्जियों को आहार में शामिल करना दिनोदिन मुश्किल हो रहा हैं चाहतें हुए भी आप और आपके बच्चों के लिए फल और सब्जियों की पर्याप्त मात्रा मिलना मुश्किल हो रहा हैं।

Fruit and vegetables ,फल और सब्जियां


प्रोड्यूस फॉर बेटर हेल्थ फाउंडेशन की 2020 स्टेट ऑफ द प्लेट रिपोर्ट के अनुसार, पोषण विशेषज्ञों की सलाह की अधिक फल और सब्जियां खाएं के बावजूद पिछले छह वर्षों में खपत में गिरावट आई है। 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्क, जो आमतौर पर सबसे अधिक फल और सब्जियां खाते हैं, में सबसे महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है।


सब्जियों और फलों का समुचित सेवन किसी भी उम्र के व्यक्तियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि फल और सब्जियों में मौजूद पोषक तत्व और फायबर बीमार होने से बचाते हैं।


अमेरिकी स्वास्थ्य और पोषण विशेषज्ञों का कहना हैं कि जैसे जैसे उम्र बढ़ती हैं वैसे वैसे व्यक्ति में ह्रदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा जैसी बीमारियों की संभावना बढ़ती जाती हैं। किन्तु आहार में सब्जियों और फलों की पर्याप्त मात्रा इन बीमारियों से बचाती हैं और शरीर को पोषण देने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं।


फलों में मौजूद एस्कार्बिक एसिड शरीर में आयरन तत्व के अवशोषण की दर को बढ़ा देता हैं जो उम्र बढ़ने के साथ पैदा होने वाली एक बहुत आम समस्या हैं।


सन् 2017 में फ्रंटियर इन एजिंग न्यूरो साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार के अनुसार 65 वर्ष से अधिक के जिन लोगों में नियमित फल और सब्जियां सेवन की आदत थी उनकी ह्रदय की कार्यप्रणाली बेहतर पाई गई।


एक बार में कितने फल और सब्जी खाना चाहिए


अमेरिकन डायटिशियन और अमेरिकन फूड़ डायट्री गाइडलाइंस के अनुसार चार भाग भोजन में से दो भाग फल और सब्जियों का होना चाहिए और इन फल और सब्जियों में मौसमी फल और अलग अलग तरह की सब्जियां शामिल होना चाहिए ताकि समुचित और पर्याप्त पोषण प्राप्त हो सकें।


भारत में फलों और सब्जियों की लोगों तक आसान पहुंच में क्या समस्या हैं


1.कीमत


भारत में फलों और सब्ज़ियों की सामान्य आदमी तक आसान पहुंच में फलों और सब्जियों की बढ़ी हुई कीमत बहुत बढ़ी बाधा हैं जिसके कारण आम आदमी बेहतर पोषण स्तर प्राप्त करने से वंचित रह जाता हैं।


2.आसान पहुंच की कमी


देश के दूरस्थ क्षेत्रों और पोषण की कमी वाले राज्यों में फलों और सब्जियों की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हैं और जिन क्षेत्रों में फल और सब्जियों की भरपूर पैदावार हैं वहां से इन फलों और सब्जियों को दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंचाने के लिए पर्याप्त कोल्ड चेन भी नहीं हैं फलस्वरूप ऐसे लोग जो फल और सब्जियों का सेवन करना चाहते हैं उन्हें भी फल और सब्जियों की वेराइटी नहीं मिल पाती हैं।



3.जंक फ़ूड और फास्ट फूड का बढ़ता चलन


युवाओं में जिस तेजी के साथ फास्ट फूड और जंक फूड का चलन हुआ है उसने भी शरीर में पोषण की कमी पैदा की हैं। आकर्षक विज्ञापन और फास्ट फूड में डाले जाने वाले एजिटोमोटो जैसे तत्वों की गिरफ़्त में आकर युवा फल और सब्जियों से परहेज़ करने लगा हैं। कालेज और स्कूल के आसपास मौजूद फास्ट फूड स्टॉल की भरमार से आसानी से समझा जा सकता हैं कि युवाओं में पोषण का स्तर क्या होगा।


ऐसे में फल और सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन कैसे किया जाए इस विषय पर बहुत अधिक सोचने की आवश्यकता है


आईए जानतें उन 5 तरीकों के बारें में जिनसे फल और सब्जियों का अधिक सेवन संभव होता हैं


1.फल और सब्जियों का आपके मनपसंद भोजन में शामिल करना


जो भी भोजन आप खातें हैं उनमें फलों और सब्ज़ियों को मिलाकर खाना शुरू करें उदाहरण के लिए सेंडविच के बीच में मौसमी फलों को रखकर खाएं।

दही और दूध में मिलाकर फल का सेवन करें ।

पिज्जा या नूडल्स में मिलाकर सब्ज़ियों का सेवन करना चाहिए।


2.धीरें धीरें जंक फूड को कम करना शुरू करें


धीरें धीरें जंक फूड के स्टाल और घर में जंक फूड बनाना कम करें इसके स्थान पर फल और सब्जियों के बाजार में जाना शुरू करें ऐसा करने से फल और सब्जियों के प्रति रूचि पैदा होगी और ये आपके पोषण स्तर को उन्नत करने में मदद करेंगे।


3.फल और सब्जियों से बनने वाले रुचिकर पकवान के बारे में सर्च करें


आप यदि एक ही प्रकार की रैसिपी बनाकर उब गए हैं तो गूगल या यूट्यूब पर उन रूचिकर पकवानों को बनाना सीखें जो आपने अभी तक नहीं बनाएं हैं।


4.सप्ताह में एक दिन उपवास करें


बढ़ती उम्र के साथ जीभ की स्वाद ग्रंथियां कमज़ोर होना शुरू हो जाती हैं और गेस्ट्रिक जूस भी कम बनने लगता हैं फलस्वरूप भोजन में स्वाद नहीं आता और भोजन देर से पचता हैं चूंकि भारत में फलों का सेवन अधिकांश लोग भोजन के बाद करतें हैं अतः पेट भरा होने के कारण वे फलों से प्राप्त होने वाले पोषण को प्राप्त नहीं कर पातें।


सप्ताह में एक दिन उपवास करने से न केवल भूख खुलकर लगती हैं बल्कि भोजन के प्रति रूचि पैदा होती हैं और बाद में फलों का सेवन करने से फलों से मिलने वाले तत्व सही तरीके से आंतों द्वारा अवशोषित होते हैं।


5.मौसमी फलों और सब्जियों को महत्व दें


भोजन में मौसमी फलों और सब्जियों को शामिल करने से पोषण का स्तर तो प्राप्त होता ही हैं बल्कि मौसमी फल और सब्जियां सस्ती भी होती हैं। जिन्हें आसानी से हर वर्ग उपयोग कर सकता हैं।

Author:: Dr P.K.vyas 

B.A.M.S., Ayurveda Ratn



यह भी पढ़ें

• डायबिटीज में कोंन से फल खाना चाहिए



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गेरू के औषधीय प्रयोग

गेरू के औषधीय प्रयोग गेरू के औषधीय प्रयोग   आयुर्वेद चिकित्सा में कुछ औषधीयाँ सामान्य जन के मन में  इतना आश्चर्य पैदा करती हैं कि कई लोग इन्हें तब तक औषधी नही मानतें जब तक की इनके विशिष्ट प्रभाव को महसूस नही कर लें । गेरु भी उसी श्रेणी की   आयुर्वेदिक औषधी   हैं। जो सामान्य मिट्टी   से   कहीं अधिक   इसके   विशिष्ट गुणों के लिए जानी जाती हैं। गेरु लाल रंग की मिट्टी होती हैं। जो सम्पूर्ण भारत में बहुतायत मात्रा में मिलती हैं। इसे गेरु या सेनागेरु कहते हैं। गेरू आयुर्वेद की विशिष्ट औषधी हैं जिसका प्रयोग रोग निदान में बहुतायत किया जाता हैं । गेरू का संस्कृत नाम  गेरू को संस्कृत में गेरिक ,स्वर्णगेरिक तथा पाषाण गेरिक के नाम से जाना जाता हैं । गेरू का लेटिन नाम  गेरू   silicate of aluminia  के नाम से जानी जाती हैं । गेरू की आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति गेरू स्निग्ध ,मधुर कसैला ,और शीतल होता हैं । गेरू के औषधीय प्रयोग 1. आंतरिक रक्तस्त्राव रोकनें में गेरू शरीर के किसी भी हिस्से में होनें वाले रक्तस्त्राव को कम करने वाली सर्वमान्य औषधी हैं । इसके लिय

काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan

धतूरा भगवान शिव का प्रिय पौधा है। भगवान शिव धतूरा अपने मस्तिष्क पर धारण करते हैं और जो लोग धतूरा भगवान शिव को अर्पण करते थे वे उन्हें मनचाहा आशीष प्रदान करते हैं। धतूरा भी कई प्रकार का होता है जैसे काला धतूरा, सफेद धतूरा, पीला धतूरा आदि। आज हम आपको "काला धतूरा के फायदे और नुकसान kala dhatura ke fayde aur nuksan" के बारे में बताएंगे।  काला धतूरा के फायदे और नुकसान आयुर्वेद आयुर्वेद चिकित्सा में काला धतूरा बहुत महत्वपूर्ण औषधि के रूप में बहुत लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है । धतूरा बहुत ही जहरीला फल होता है , प्रकृति में गर्म और भारी होता है। काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम काला धतूरा का वैज्ञानिक नाम धतूरा स्ट्रामोनियम DHATURA STRAMONIUM है । अंग्रेजी में इसे डेविल्स एप्पल Devil's apple, डेविल्स ट्रम्पेट Devil's trumpet के नाम से जाना जाता है। संस्कृत में इसे दस्तूर, मदन, उन्मत्त ,शिव प्रिय महामोधि, कनक आदि नाम से जानते हैं। काला धतूरा की पहचान कैसे करें  काला धतूरा के पत्ते नोक दार ,डंठल युक्त और बड़े आकार के होते हैं। काला धतूरा के फूल घंटी

टीकाकरण चार्ट [vaccination chart] और संभावित प्रश्न

 टीकाकरण चार्ट # 1.गर्भावस्था के समय टीकाकारण ::: गर्भावस्था की शुरूआत में Titnus का पहला टीका टी.टी - 1. टी.टी -1 के चार सप्ताह बाद टी.टी.-2 यदि पिछली गर्भावस्था में टी.टी - 2 दिया गया हैं,तो केवल बूस्टर दीजिए. # टीके की मात्रा ,कैसें और कहाँ दें 0.5 ml.मात्रा प्रशिक्षित व्यक्ति द्धारा ऊपरी बांह की मांसपेशी में. # महत्वपूर्ण गर्भावस्था के 36 सप्ताह हो गयें हो तो मात्र टी.टी.- बूस्टर देना चाहियें.  टीकाकरण का दृश्य # 2.शिशुओं के लियें टीकाकरण  #जन्म के समय ::: 1. B.C.G.  =     0.1 ml बाँह पर त्वचा के निचें. 2.हेपेटाइटिस बी.=  0.5 ml मध्य जांघ के बाहरी हिस्सें पर मांसपेशी में 3.o.p.v.या oral polio vaccine = दो बूँद मुहँ में . ०  जानिये पोलियो क्या होता हैं ? #6 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. = 0.5 ml 2.D.P.T. = 0.5 ml मध्य जांघ का बाहरी हिस्सें में माँसपेशियों में. 3.o.p.v.या oral polio vaccine. #10 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. 2.D.P.T. 3.o.p.v. #14 सप्ताह पर ::: 1.हेपेटाइटिस बी. 2.D.P.T. 3.o.p.v.   #9 से 12 माह