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भारतीय संविधान [INDIAN CONSTITUTION]


#1.रेग्युलेटिंग एक्ट कब पारित हुआ था ? तथा इसमें क्या प्रावधान थे ?

उत्तर = रेग्यूलेटिंग एक्ट सन् 1773 में पारित हुआ था .

रेग्यूलेटिंग एक्ट लानें का मुख्य उद्देश्य ईस्ट इंड़िया कम्पनी के कर्मचारीयों में व्याप्त अनुशासनहीनता पर ब्रिटिश संसदीय नियत्रंण स्थापित कर प्रशासनिक सुधार करना था.

इन सुधारों को अमल में लाने हेतू निम्न प्रावधान किये गये ::::

#१. बंगाल प्रेसीड़ेंसी के गवर्नर जनरल के नियंत्रण को विस्तारित करते हुये मद्रास और बम्बई का भी गवर्नर जनरल बना दिया गया .तथा बंगाल के गवर्नर जनरल को युद्ध ,संधि और राजस्व संबधी अधिकार प्रदान किये गयें.
इस प्रकार बंगाल का गवर्नर जनरल सम्पूर्ण अंग्रेजी क्षेत्रों का गवर्नर जनरल बन गया था.
गवर्नर जनरल की सहायता और सलाह हेतू चार सदस्यों को नियुक्त किया गया जो बहुमत से निर्णय ले सकें.

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क्रिकेट की जानकारी


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#२.कलकत्ता में उच्चतम न्यायालय की स्थापना जिसे दीवानी,फौजदारी,जल सेना और धार्मिक मामलों से संबधित अधिकार दिये गये.
इस न्यायालय के निर्णय को इंग्लैंड़ स्थित प्रिवी काँऊसिल में अपील की जा सकती थी.

कलकत्ता स्थित उच्चतम न्यायालय में सर एलीजाह इम्पे को प्रधान न्यायाधीश तथा चेम्बर्स लेमीस्टर और हाइड़ को अवर न्यायाधीश नियुक्त किया गया .

#३.इंग्लैंड़ में स्थित कम्पनी के संचालक मंड़ल के सदस्यों का कार्यकाल 4 वर्ष निर्धारित कर दिया गया .

सदस्य बननें के लिये भारत से वापसी के दो वर्ष बाद सदस्य बननें की शर्त निर्धारित की गई.

#४.इस अधिनियम के प्रावधान अनुसार वारेन हेस्टिंग को बंगाल का गवर्नर जनरल बनाया गया था.बंगाल का गवर्नर जनरल भारत का प्रथम गवर्नर जनरल कहलाया .

#५.इस अधिनियम द्धारा एक सुनिश्चित शासन पद्धति और लिखित संविधान की शुरूआत हुई.

#२.पिट्स इंड़िया एक्ट क्या था ? इसके क्या प्रावधान थे ?

उत्तर = रेग्यूलेटिंग एक्ट़ में व्याप्त दोषो को दूर करनें ,ब्रिटिश शासन के ईस्ट इंड़िया कम्पनी पर अपूर्ण नियंत्रण तथा भारत में ईस्ट इंड़िया कम्पनी के कर्मचारीयों द्धारा किये जा रहे अत्याचार के कारण कम्पनी की बिगड़ती छवि को बचानें के लिये 1784 का यह अधिनियम लाया गया था.


इस अधिनियम के निम्नलिखित प्रावधान थे 

#१.ईस्ट इंड़िया कंपनी के शासन को पुनर्गठित कर उसके राजनीतिक दायित्वों का भार 6 सदस्यीय नियंत्रक मंड़ल को सोंप दिया गया.इस नियत्रंक मंड़ल में 1 ब्रिट़ेन का अर्ध मंत्री,दूसरा विदेश सचिव तथा 4 अन्य ब्रिटिश सम्राट़ द्धारा प्रिवी कौंसिल के सदस्यों में से चुनकर किया जाता था.

 एक मंत्री को नियत्रंक मंड़ल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया.

#२.ईस्ट़ इंड़िया कम्पनी के निदेशकों की सलाह के बिना गवर्नर जनरल देशी राजाओं से युद्ध या संधि नही कर सकता था.

#३.इंग्लैंड़ में १ न्यायालय की स्थापना की गई जिसमें भारत में नियुक्त अंग्रेज अधिकारीयों द्धारा कानून उल्लघंन करनें पर मुकदमा चलाया जा सकें.

#४.ईस्ट़ इंड़िया कम्पनी के कर्मचारीयों द्धारा लिये जानें वाले उपहारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया.

#५.प्रांतीय सरकारों  को केन्द्रीय शासन का आदेश अनुपालन अनिवार्य कर दिया गया तथा केन्द्रीय सरकारों को प्रांतीय सरकार को बर्खास्त करनें का अधिकार दिया गया.

#६.प्रांतीय परिषद के सदस्यों की संख्या 4 से 3 कर दी गई तथा इन 4 सदस्यों में से कोई एक प्रांत का सेनापति होना अनिवार्य कर दिया गया.

#७.कंपनी के भारतीय अधिकृत प्रदेशों को पहली बार " ब्रिटिश अधिकृत भारतीय प्रदेश " कहा गया.

#८.कंपनी के निदेशकों कों कंपनी के आदेशों एंव निर्देशों को स्वीकृत करनें का अधिकार प्रदान किया गया.

#३.1786 का अधिनियम क्या था ?

उत्तर = वास्तव में यह अधिनियम लार्ड़ कार्नवालिस के लियें लाया गया था,ताकि वह भारत में पद संभाल सके.


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सौरमंड़ल के बारें में विस्तारपूर्वक यहाँ जानियें

इंग्लैण्ड की क्रांति

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इस अधिनियम के द्धारा गवर्नर जनरल को प्रधान सेनापति की शक्तियाँ प्रदान की गई तथा गवर्नर जनरल को विशेष परिस्थितियों में अपनी परिषद के निर्णयों को रद्द करनें तथा अपनें निर्णय लागू करनें का अधिकार दिया गया. 

#४.1833 का चार्ट़र एक्ट़ लानें के क्या उद्देश्य थे तथा इसके क्या प्रावधान थे ?

उत्तर = सन् 1833 तक आतें - आतें कंपनी का शासन मध्य भारत,महाराष्ट्र ,पंजाब,सिंध,ग्वालियर और इंदौर तक विस्तारित हो गया .

इस शासन को स्थाई करनें हेतू समय ² पर अनेक कानून बनाये गये जिनमें 1814,1823 और 1829 के अधिनियम प्रमुख हैं.जिनके द्धारा कंपनी का राजस्व बढ़ानें,राजाओं को पेंशन देने का प्रावधान किया गया था ,किंतु यह कानून अपर्याप्त साबित होनें लगें थे.

इन अपर्याप्त कानूनों के स्थान पर एक व्यवस्थित कानून लानें की आवश्यकता के मद्देनजर ही 1833 का चार्ट़र एक्ट़ लाया गया था.

इस अधिनियम में निम्न प्रावधान थे ::::

#१.ईस्ट़ इंड़िया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार जिसमें चीन के साथ व्यापार और चाय का व्यापार शामिल था कि जगह कंपनी को प्रशासनिक और राजनितिक संस्था बना दिया गया.

ब्रिटिश शासकों की ओर से कंपनी को राजस्व के प्रबंधन का उत्तरदायित्व दिया गया.

#२.ईस्ट़ इंड़िया कंपनी के नियंत्रक मंड़ल के अधिकार को सीमित कर दिया गया और राज्य के प्रमुख मंत्रीयों जैसें कोषागार मंत्री,वित्त मंत्री आदि मंत्रीमंड़ल के सदस्यों को पदेन सदस्य बनाया गया.

#३.कानून बनानें हेतू गवर्नर जनरल की परिषद में विधि सदस्य को चोथे सदस्य के रूप में शामिल किया गया.

#४.प्रशासन का केन्द्रीकरण कर बंगाल के गवर्नर जनरल को संपूर्ण भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया.कानून बनानें का अधिकार भी गवर्नर जनरल की परिषद को सोंप दिया गया यह कानून

#५.दास प्रथा को गैर कानूनी घोषित कर दिया गया तथा ंभारत में प्रचलित समस्त रूढ़ियों और परम्परा के संहिताकरण हेतू लार्ड़ मेकाले की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया.

#६.भारतीय या ब्रिटीशजनों को धर्म ,मूलवंश ,जाति आदि आधार पर भेदभाव को समाप्त कर  कंपनी में पद प्राप्त करनें हेतू समान अवसर उपलब्ध करवाये गये.


#५.1858 का विधेयक किस पृष्ठभूमि में अस्तित्व में आया तथा इसमें क्या प्रावधान थे ?

उत्तर = प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दमन के बाद अंग्रेजी शासन ने भारत में शासन को पुनर्गठित करनें की कयावद की इसी कवायद में इंग्लैंड़ के निचले सदन हाउस आफ कामन्स ने 1858 का विधेयक प्रस्तुत किया गया.

इस अधिनियम में निम्न प्रावधान किये गये थे

#१.ईस्ट़ इंड़िया कंपनी से शासन का उत्तरदायी लेकर ब्रिटिश शासन को सौंप दिया गया.

#२.अधिकारों एंव शक्तियों के प्रयोग हेतू एक भारत राज्य सचिव नियुक्त किया गया जो इंग्लैंड़ की महारानी की ओर से शक्तियों एंव अधिकारों का प्रयोग करता था.

#३.भारत राज्य सचिव को सहायता एँव सलाह हेतू एक 'भारत परिषद' की स्थापना की गई जिसमें 8 सदस्य ब्रिटिश साम्राज्ञी द्धारा नियुक्त होतें थे और 7 सदस्य कंपनी के निदेशक मंड़ल से नामित होतें थे .

#४.भारत राज्य सचिव को ब्रिटिश संसद के समक्ष भारत का बजट़ रखनें,वायसराय के साथ पत्र व्यहवार करनें और बैंठकों में निर्णायक अधिकार दिया गया था.

#५.भारतीय गवर्नर जनरल का नाम परिवर्तित कर वायसराय कर दिया गया.


#६.मार्लें मिंटों सुधार क्या था ?

उत्तर =ब्रिटिश अधिकारीयों की असंतोषपूर्ण नितियों "फूट़ डालो राज करों " के कारण भारतीयों में ब्रिटिश शासन के प्रति क्षोभ व्याप्त था.

इसी तारत्म्य में लार्ड़ कर्जन ने बंगाल विभाजन कर इस निति पर मुहर लगा दी थी जिस कारण भारतीय जनमानस पूर्णत ब्रिटिश को विरूद्ध हो गया.

ब्रिट़ेन में सन् 1905 के चुनावों में उदारवादी दल की सरकार बनी जिसनें भारतीयों में व्याप्त असंतोंष को कम करनें हेतू भारत मंत्री लार्ड़ माले और वायसराव लार्ड़ मिंटों के नेतृत्व सुधार हेतू समिती का गठन किया .

इस समिती की सिफारिशों के आधार पर अधिनियम पारित किया गया जिसे "मार्लें - मिंट़ों सुधार " या भारत शासन अधिनियम  1909 कहा गया.

इस अधिनियम में निम्न प्रावधान किये गये थे :::

#१. केन्द्रीय विधान परिषद में अतिरिक्त सदस्यों की संख्या 16 से बढ़ाकर 60 कर दी गई.

#२.केन्द्रीय विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या 69 हो गई,जिसमें 37 सरकारी और 32 गैर सरकारी सदस्य थे.

सरकारी सदस्यों में से 9 पदेन तथा 28 गवर्नर जनरल द्धारा मनोनीत होते थे.

गैर सरकारी सदस्यों में 5 गवर्नर जनरल द्धारा नामित तथा 27 निर्वाचित होतें थे.

#३.प्रांतीय विधान परिषदों में भी सदस्य सँख्या बढ़ायी गई बंगाल में 55,संयुक्त प्रांत,बम्बई तथा 
मद्रास में 47 - 47 ,पंजाब में 25 ,तथा बर्मा में 16 सदस्यों की सँख्या तय की गई.

#४.इस अधिनियम के द्धारा पहली बार पृथक निर्वाचन की व्यवस्था की गई तथा विभिन्न जातियों एँव धर्मों को विधान परिषदों में प्रतिनिधित्व दिया गया .

#५. विधान परिषद में प्रस्तुत होनें वाले बजट़ पर विस्तृत नियम बनाये गये, बजट़ की विवेचना करनें का सदस्यों को अधिकार दिया गया किंतु निंदा करनें व अविश्वास प्रस्ताव का अधिकार नही दिया गया.

#६.विधान परिषद में किसी भी विषय जानकारी के लिये प्रश्न एँव पूरक प्रश्न पूछनें की व्यवस्था की गई साथ ही सामान्य एँव सार्वजिक मामलों पर बहस के विस्तृत नियम बनाये गये.


#बहुउपयोगी वैकल्पिक प्रश्नोंत्तर ===

#१.भारत सरकार अधिनियम 1919  को अन्य किस नाम से जाना जाता हैं ?

उत्तर = मांटेग्यू - चेम्सफोर्ड़ सुधार 

#२.मांटेग्यू - चेम्सफोर्ड़ सुधारों द्धारा भारत में किस शासन प्रणाली शुरूआत की गई थी ?

उत्तर = द्धैध शासन प्रणाली

#३.भारतीय संविधान का अधिकांश स्त्रोंत किस ब्रिट़िशकालीन अधिनियम से लिया गया हैं ?

उत्तर = भारत शासन अधिनियम 1935

#४.द्धैध शासन की व्यवस्था किस अधिनियम द्धारा समाप्त कर दी गई ?

उत्तर = भारत शासन अधिनियम 1935 के द्धारा

#५.द्धिसदनात्मक शासन व्यवस्था किस अधिनियम द्धारा अपनायी गई थी ?

उत्तर = भारत शासन अधिनियम 1935

#६.क्रिप्स मिशन कब भारत आया था ?

उत्तर = 1942

#७.भारत छोड़ों आन्दोंलन की शुरूआत कब व कहाँ से हुई थी ?

उत्तर = 8 अगस्त 1942 को बम्बई से

#८.भारत छोड़ों आंदोंलन के दोरान किसनें "करो या मरों" का नारा दिया था ?

उत्तर = महात्मा गाँधी

#९.शिमला सम्मेलन कब हुआ था ?

उत्तर = 25 जून से 14 जुलाई 1945 तक

#१०.कांग्रेस के किस अधिवेशन में संविधान के अर्थ और महत्व की व्याख्या की गई थी ?

उत्तर = लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन 1936

#११.अन्तरिम मंत्रीमंड़ल में शामिल मंत्रीयों एँव उनके विभागों के बारें में बताईये ं?

उत्तर =

१. आसफ अली               =      रेलवे 

२.सरदार बल्देव सिंह        =      रक्षा विभाग

३.जगजीवन राम             =       श्रम मंत्री

४.वल्लभ भाई पट़ेल.        =      ग्रह, सूचना प्रसारण

५.जान मथाई                  =      उधोग तथा आपूर्ति

६.सी.राजगोपालाचारी     =      शिक्षा

८.राजेन्द्र प्रसाद.             = खाद्य और कृषि

९.जान मथाई.               =      उधोग

१०.लियाकत अली        =      वित्त

११.सी.एच.भाभा         =  खान तथा बंदरगाह

१२.गजांतर अली          = स्वास्थ्य

१३.जोगेन्द्र नाथ मंड़ल.  = विधि

१४.अब्दुल रब नश्तर.     = संचार

#१२.संविधान सभा की महिला सदस्यों के नाम बताईयें ?

उत्तर = श्रीमति हंसा मेहता,दुर्गा बाई देशमुख और सरोजनी नायडू

#१३. संविधान सभा की सदस्यता स्वास्थगत कारणों की वज़ह से किसनें अस्वीकार की थी ?

उत्तर = जयप्रकाश नारायण और तेज बहादुर सप्रु

#१४.संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव किसनें प्रस्तुत किया था ?

उत्तर = जवाहरलाल नेहरू ने

#१५.संविधान की विभिन्न समितियों के बारें में बताईयें?

उत्तर = 

१. संचालन समिती      = डाँ.राजेन्द्र प्रसाद

२.प्रारूप समिती         = डाँ.भीमराव अम्बेड़कर

३.संघ संविधान समिती = जवाहरलाल नेहरू

४.प्रांतीय संविधान समिती = वल्लभ भाई पटेल

५.झंड़ा समिती               = जे.बी.कृपलानी


#१६.संविधान का प्रारूप किसनें तैयार किया था?

उत्तर = बी.एन.राव

#१७. संविधान सभा की अंतिम बैठक कब हुई थी ?

उत्तर = 24 जनवरी 1950 को


#१८.संविधान पारित करतें समय इसमें कितनें अनुच्छेद और अनुसूचियाँ थी ?

उत्तर = 395 अनुच्छेद तथा 8 अनुसूचियाँ

#१९.वर्तमान समय में कितनें अनुच्छेद और अनुसूचियाँ हैं ?

उत्तर = 444 अनुच्छेद तथा 12 अनुसूचियाँ

#२०.संविधान के भाग - 1 में कितनें अनुच्छेद शामिल हैं ?

उत्तर = संविधान के भाग - 1 में ,1 से 4 अनुच्छेद शामिल हैं,जिसमें संघ का नाम और राज्य क्षेत्र ,नये राज्यों का निर्माण तथा सीमाओं में परिवर्तन से संबधित प्रावधान शामिल हैं.


#२१.संविधान का भाग - 2 किस से संबधित हैं ?

उत्तर = नागरिकता से

#२२.संविधान के भाग - 3 में अनुच्छेद 14 से 18 तक किस अधिकार का उल्लेख हैं ?

उत्तर = समता के अधिकार का

#२३.धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार संविधान के किस भाग में और किस अनुच्छेद में हैं ?

उत्तर = भाग - 3 अनुच्छेद 25 से 28 तक


#२४.शिक्षा और संस्कृति से संबधित अधिकार संविधान के किस अनुच्छेद और किस भाग में हैं?

उत्तर = अनुच्छेद 29 - 30,भाग 3


#२५.संविधान के भाग - 4   में किस बात का उल्लेख किया गया हैं ?

उत्तर = कल्याणकारी राज्य की स्थापना करनें से संबधित निर्देश राज्य को दिये गये हैं.


#२६.संविधान का भाग - 4 (क) के बारें में बताईये ?

उत्तर = संविधान के भाग - 4 (क) में नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का वर्णन हैं.

#२७.संविधान में भाग - 4 क कब जोड़ा गया ?

उत्तर = 42 वाँ संविधान संशोंधन 1976 द्धारा संविधान में भाग - 4 क जोड़ा गया.

#२८.संविधान के भाग - 5 में अनुच्छेद 52 से 151 तक क्या प्रावधान किया गया हैं ?

उत्तर = कार्यपालिका और न्यायपालिका से संबधित शक्ति प्रथक्करण सिद्धांत का प्रावधान हैं.


#२९.अनुच्छेद 123 में किसके बारें में बताया गया हैं ?

उत्तर = अध्यादेश प्रख्यापित करनें की राष्ट्रपति की शक्ति


#३०.संविधान के भाग - 6 के बारें में बताईये ?

उत्तर = संविधान के भाग - 6 में अनुच्छेद 152 से 237 तक कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका से संबधित प्रावधान हैं.


#३१.अनुच्छेद 152 के बारें में बताईयें ?

उत्तर = अनुच्छेद 152 द्धारा जम्मू कश्मीर को राज्यों के सामान्य वर्गों से प्रथक कर दिया गया हैं.


#३२.राज्य की कार्यपालिका शक्ति के विस्तार का वर्णन किस अनुच्छेद में हैं ?

उत्तर = अनुच्छेद 162 में

#३३.राज्य महाधिवक्ता से संबधित प्रावधान किस अनुच्छेद में हैं ?

उत्तर = अनुच्छेद 165

#३४.विधानमंड़ल किन² विषयों पर विचार नहीं कर सकता यह किस अनुच्छेद में वर्णित हैं ?

उत्तर = अनुच्छेद 211


#३५.अनुच्छेद 212 में किसका वर्णन हैं ?

उत्तर = विधानमंड़ल की कार्यवाही को न्यायपालिका से मुक्त रखा गया हैं.


#३६.विधानमंड़ल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करनें की राज्यपाल की शक्ति का वर्णन किस अनुच्छेद में हैं ?

उत्तर = अनुच्छेद 213


#३७.संविधान का भाग - 7 किससे संबधित हैं ?

उत्तर = इस भाग में अनुच्छेद 238 शामिल था,जो प्रथम अनूसूची के भाग (ख) से संबधित राज्यों के बारें में प्रावधान करता था.किंतु 7 वें संविधान संशोंधन द्धारा इसे हटा दिया गया.

#३८.संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासन का प्रावधान संविधान के किस भाग व अनुच्छेद में हैं ?

उत्तर = भाग - 8 व अनुच्छेद 239 से 242 तक

#३९. पंचायतों से संबधित प्रावधान संविधान के किस भाग में किये गये हैं ?

उत्तर = भाग - 9 में

#४०.संविधान के भाग - 9 क में किसके संबध में प्रावधान किया गया हैं ?

उत्तर = नगरपालिकाओं के संबध में

#४१.अनूसूचित जाति तथा अनूसूचित जनजातियों से संबधित क्षेत्रों के प्रशासन से संबधित संविधान का भाग कौंन सा हैं ?

उत्तर = भाग - 10


#४२.संविधान का भाग - 11 किससे संबधित हैं ?
उत्तर = संविधान के इस भाग में विधायी प्रशासनिक शक्तियों का वितरण तथा अन्तर्राज्यिक परिषद के संबध में प्रावधान हैं.
#४३.संविधान के किस भाग में सम्पति,संविदा,आभार,वित्त आयोग आदि से संबधित प्रावधान हैं ?

 उत्तर = भाग - 12

#४४.व्यापार, वाणिज्य और समागम से संबधित प्रावधान संविधान के किस भाग में और किस अनुच्छेद तक हैं ?

उत्तर = भाग - 13,अनुच्छेद 301 से 307 तक

#४५.संविधान का भाग - 14 किस प्रावधान से संबधित हैं ?

उत्तर= भाग - 14 में अनुच्छेद 308 से 323 तक शामिल हैं,जिसमें संघ तथा राज्य से संबधित सेवाओं तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोग का वर्णन हैं.

#४६.संविधान का भाग - 14 क किससे संबधित हैं ?

उत्तर = संविधान का भाग - 14 क में प्रशासनिक न्यायाधिकरण से संबधित हैं.

भाग - 14 क आरंभ में  संविधान का भाग नही था ,इसे 42 वें संविधान संशोंधन द्धारा अंतस्थापित किया गया था.

#४७.संविधान के भाग - 15 में किसका प्रावधान हैं ?

उत्तर = अनुच्छेद 324 से 329 तक निर्वाचन आयोग का


#४८.संविधान के भाग - 16 के बारें में बताईयें ?

उत्तर = संविधान के इस भाग में अनुच्छेद 330 से 342 तक शामिल हैं,जिसमें संसद तथा राज्य विधानसभा में अनूसूचित जाति, जनजाति तथा आंग्ल भारतीय सदस्यों के लिये आरक्षण का प्रावधान हैं.तथा अनूसूचित जाति,जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के लिये आयोग का प्रावधान हैं.



#४९.संघ की भाषा,प्रादेशिक भाषाओं तथा उच्चतम न्यायालय की भाषा के संबध में प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में हैं ?

उत्तर = भाग - 17 अनुच्छेद 343 से 351 तक



 #५०.आपातकालीन प्रावधान किस भाग में हैं ?

उत्तर = भाग - 18 में अनुच्छेद 352 से 360 तक


#५१.राष्ट्रपति, राज्यपालों के संरक्षण, संसद तथा राज्य विधानंंड़ल की कार्यवाहीयों के संरक्षण का प्रावधान किस भाग में हैं ?

 उत्तर = भाग - 19 में अनुच्छेद 361 से 367 तक ़

#५२. संविधान का भाग - 20 क्या कहता हैं ?

उत्तर = संविधान के भाग - 20 में अनुच्छेद 368 सम्मिलित हैं,जिसमें संविधान संशोंधन की प्रक्रिया का वर्णन हैं.


#५३.अस्थायी,संक्रमणकालीन और कुछ राज्यों के संन्दर्भ में विशेष उपबंध संविधान के किस भाग में हैं ?

उत्तर = भाग - 21 अनुच्छेद 369 से 392 तक

#५४.संविधान के भाग - 22 में क्या प्रावधान हैं ?

उत्तर = संविधान के भाग - 22 में अनुच्छेद 393 से 395 तक शामिल हैं,जिसमें संविधान का संक्षिप्त नाम,प्रारंभ और हिंदी भाषा में प्राधिकृत पाठ के बारें में प्रावधान हैं.


### संविधान की अनूसूची ::::


##१.प्रथम अनूसूची :::

इसमें भारत संघ में शामिल राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों के बारें में प्रावधान हैं.


##२.द्धितीय अनूसूची :::

इसमें विभिन्न पदाधिकारीयों जैसें राष्ट्रपति,राज्यपाल,नियंत्रक एँव महालेखा परीक्षक उच्चतम तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संसद और राज्य विधानमंड़लों के अधिकारीयों के वेतन से संबधित प्रावधान हैं.

##३.तीसरी अनूसूची :::

इसमें राष्ट्रपति, राज्यपालों, उच्चतम तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों,संसद तथा राज्य विधानमंड़ल के सदस्यों द्धारा ली जानें वाली शपथ तथा प्रतिज्ञान का प्रारूप हैं.

##४.चौथी अनूसूची :::

इसमें राज्यों तथा संघ शासित राज्यों से संबधित राज्यसभा के स्थानों के आँवट़नों का वर्णन हैं.



##५.पाँचवी अनूसूची :::

इसमें अनूसूचित क्षेत्रों तथा अनूसूचित जनजाति के प्रशासन संबधित प्रावधान हैं. 

##६.छठवी अनूसूची :::

इसमें असम,मेघालय तथा मिजोरम के प्रशासन से संबधित प्रावधान हैं.

##७.सातवी अनूसूची :::

इसमें तीन सूची शामिल हैं :::

१.संघ सूची ::: इसमें 98 विषय सम्मिलित हैं,जिनमें संघ कानून बना सकता हैं.

२.राज्य सूची ::: इसमें 66 विषय हैं,जिसमें राज्य कानून बना सकता हैं.

३.समवर्ती सूची ::: इसमें 47 विषय हैं,जिस पर केन्द्र और राज्य दोंनों कानून बना सकतें हैं.किंतु संघर्ष की स्थिति में केन्द्र का कानून प्रभावी  रहेगा.

##८.आठवी अनूसूची :::


इसमें उन 22 भाषाओं की सूची हैं,जिन्हें संविधान द्धारा मान्यता दी गई हैं.

##९.नवी अनूसूची :::


इसमें उन अधिनियमों को जगह दी गई हैं,जिनकी वैधानिकता को न्यायालय में चुनौंती नही दी जा सकती हैं.

यह अनूसूची आरंभ में संविधान का भाग नहीं थी,इसे प्रथम संविधान संशोंधन 1951 द्धारा अंतस्थापित किया गया था.

##१०.दसवी अनूसूची :::

यह अनूसूची भी आरंभ में संविधान का भाग नही थी,इसे 52 वें संविधान संशोंधन 1952 द्धारा अंतस्थापित कर दल बदल कानून को प्रभावी बनाया गया.

##११.11 वी अनूसूची :::


इस अनूसूची में पंचायतों द्धारा किये जानें वाले कार्यों का उल्लेख हैं.इस अनूसूची को 73 वें संविधान संशोंधन द्धारा 1992 में अंत: स्थापित किया गया था.

##१२.12 वीं अनूसूची :::

यह अनूसूची भी 74 वें संविधान संशोंधन द्धारा जोड़ी गई थी.इसमें नगरपालिकाओं द्धारा किये जानें वाले कार्यों का वर्णन हैं.


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 टीकाकरण चार्ट # 1.गर्भावस्था के समय टीकाकारण ::: गर्भावस्था की शुरूआत में Titnus का पहला टीका टी.टी - 1. टी.टी -1 के चार सप्ताह बाद टी.टी.-2 यदि पिछली गर्भावस्था में टी.टी - 2 दिया गया हैं,तो केवल बूस्टर दीजिए. ० गर्भावस्था के प्रथम तीन महिनें मे किए जानें वाले योगासन # टीके की मात्रा ,कैसें और कहाँ दें 0.5 ml.मात्रा प्रशिक्षित व्यक्ति द्धारा ऊपरी बांह की मांसपेशी में. # महत्वपूर्ण गर्भावस्था के 36 सप्ताह हो गयें हो तो मात्र टी.टी.- बूस्टर देना चाहियें.  टीकाकरण का दृश्य # 2.शिशुओं के लियें टीकाकरण  #जन्म के समय ::: 1. B.C.G.  =     0.1 ml बाँह पर त्वचा के निचें. 2.हेपेटाइटिस बी.=  0.5 ml मध्य जांघ के बाहरी हिस्सें पर मांसपेशी में 3.o.p.v.या oral polio vaccine = दो बूँद मुहँ में . ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// ० आँखों का सूखापन क्या बीमारी हैं ? जानियें इस लिंक पर ०  जानिये पोलियो क्या होता हैं ? ० चुम्बक चिकित्सा के बारें में जानें ० बच्चों की परवरिश कैसें करें healthy parating

SANJIVANI VATI ,CHANDRAPRABHA VATI,SHANKH VATI

१.संजीवनी वटी::-   संजीवनी वटी का वर्णन रामायण में भी मिलता हैं. जब मेघनाथ के साथ युद्ध में लक्ष्मण मूर्छित हुए तो  संजीवनी  बूटी ने लक्ष्मण को पुन: जीवन दिया था शांग्रधर संहिता में वर्णन हैं कि  "वटी संजीवनी नाम्ना संजीवयति मानवम" अर्थात संजीवनी वटी नाना प्रकार के रोगों में मनुष्य का संजीवन करती हैं.आधुनिक शब्दों में यह वटी हमारें बिगड़े मेट़ाबालिज्म को सुदृढ़ करती हैं.तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity)   बढ़ाती हैं. घटक द्रव्य:: विडंग,शुंठी,पीप्पली,हरीतकी,विभीतकी, आमलकी ,वच्च, गिलोय ,शुद्ध भल्लातक,शुद्ध वत्सना उपयोग::- सन्निपातज ज्वर,सर्पदंश,गठिया,श्वास, कास,उच्च कोलेस्ट्रोल, अर्श,मूर्छा,पीलिया,मधुमेह,स्त्री रोग ,भोजन में अरूचि. मात्रा::- वैघकीय परामर्श से Svyas845@gmail.com २.चन्द्रप्रभा वटी::- चन्द्रप्रभेति विख्याता सर्वरोगप्रणाशिनी उपरोक्त श्लोक से स्पष्ट हैं,कि चन्द्रप्रभा वटी समस्त रोगों का शमन करती हैं. घट़क द्रव्य::- कपूर,वच,भू-निम्बू, गिलोय ,देवदारू,हल्दी,अतिविष,दारूहल्दी,

गेरू के औषधीय प्रयोग

गेरू के औषधीय प्रयोग गेरू के औषधीय प्रयोग   आयुर्वेद चिकित्सा में कुछ औषधीयाँ सामान्य जन के मन में  इतना आश्चर्य पैदा करती हैं कि कई लोग इन्हें तब तक औषधी नही मानतें जब तक की इनके विशिष्ट प्रभाव को महसूस नही कर लें । गेरू भी उसी श्रेणी की आयुर्वेद औषधी हैं । जो सामान्य मिट्टी से कही अधिक इसके विशिष्ट गुणों के लियें जानी जाती हैं । गेरू लाल रंग की की मिट्टी होती हैं जो सम्पूर्ण भारत में बहुतायत मात्र में मिलती हैं । इसे गेरू या सेनागेरू भी कहतें हैं । गेरू आयुर्वेद की विशिष्ट औषधी हैं जिसका प्रयोग रोग निदान में बहुतायत किया जाता हैं । गेरू का संस्कृत नाम  गेरू को संस्कृत में गेरिक ,स्वर्णगेरिक तथा पाषाण गेरिक के नाम से जाना जाता हैं । गेरू का लेटिन नाम  गेरू   silicate of aluminia  के नाम से जानी जाती हैं । गेरू की आयुर्वेद मतानुसार प्रकृति गेरू स्निग्ध ,मधुर कसैला ,और शीतल होता हैं । गेरू के औषधीय प्रयोग 1. आंतरिक रक्तस्त्राव रोकनें में गेरू शरीर के किसी भी हिस्से में होनें वाले रक्तस्त्राव को रोकनें वाली सर्वमान्य औषधी हैं । इसके लिय

Ayurvedic medicine list । आयुर्वैदिक औषधि सूची

Ayurvedic medicine list  [आयुर्वैदिक औषधि सूची] #1.नव ज्वर की औषधि और अनुसंशित मात्रा ::: १.त्रिभुवनकिर्ती रस  :::::   १२५ से २५० मि.ग्रा. २.संजीवनी वटी       :::::    १२५ से २५० मि.ग्रा. ३.गोदन्ती मिश्रण.    :::::     १२५ से २५० मि.ग्रा. #2.विषम ज्वर ::: १.सप्तपर्ण घन वटी  :::::    १२५ से २५० मि.ग्रा. २.सुदर्शन चूर्ण.        :::::     ३ से ६ ग्रा.   # 3 वातश्लैष्मिक ज्वर ::: १.लक्ष्मी विलास रस.  :::::  १२५ से २५० मि.ग्रा. २.संशमनी वटी          :::::  ५०० मि.ग्रा से १ ग्रा. # 4 जीर्ण ज्वर :::: १. प्रताप लंकेश्वर रस.  :::::  १२५ से २५० मि.ग्रा. २.महासुदर्शन चूर्ण.     :::::   ३ से ६ ग्राम ३.अमृतारिष्ट              :::::    २० से ३० मि.ली. # 5.सान्निपातिक ज्वर :::: १.नारदीय लक्ष्मी विलास रस. :::::  २५० से ५०० मि.ग्रा. २.भूनिम्बादि क्वाथ.      ::::: १०से २० मि.ली. #6 वातशलैष्मिक ज्वर :::: १.गोजिह्यादि क्वाथ.      ::::: २० से ४० मि.ली. २.सितोपलादि चूर्ण.       ::

एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन क्या हैं

#1.एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन क्या हैं ?  एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली से अभिप्राय यह हैं,कि मृदा उर्वरता को बढ़ानें अथवा बनाए रखनें के लिये पोषक तत्वों के सभी उपलब्ध स्त्रोंतों से मृदा में पोषक तत्वों का इस प्रकार सामंजस्य रखा जाता हैं,जिससे मृदा की भौतिक,रासायनिक और जैविक गुणवत्ता पर हानिकारक प्रभाव डाले बगैर लगातार उच्च आर्थिक उत्पादन लिया जा सकता हैं.   विभिन्न कृषि जलवायु वाले क्षेत्रों में किसी भी फसल या फसल प्रणाली से अनूकूलतम उपज और गुणवत्ता तभी हासिल की जा सकती हैं जब समस्त उपलब्ध साधनों से पौध पौषक तत्वों को प्रदान कर उनका वैग्यानिक प्रबंध किया जाए.एकीकृत पौध पोषक तत्व प्रणाली एक परंपरागत पद्धति हैं. ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// यहाँ भी पढ़े 👇👇👇 विटामिन D के बारें में और अधिक जानियें यहाँ प्रधानमन्त्री फसल बीमा योजना ० तम्बाकू से होनें वाले नुकसान ० कृषि वानिकी क्या हैं ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// #2.एकीकृत पोषक त

karma aur bhagya [ कर्म और भाग्य ]

# 1 कर्म और भाग्य   कर्म आगे और भाग्य पिछे रहता हैं अक्सर लोग कर्म और भाग्य के बारें में चर्चा करतें वक्त अपनें - अपनें जीवन में घट़ित घट़नाओं के आधार पर निष्कर्ष निकालतें हैं,कोई कर्म को श्रेष्ठ मानता हैं,कोई भाग्य को ज़रूरी मानता हैं,तो कोई दोनों के अस्तित्व को आवश्यक मानता हैं.लेकिन क्या जीवन में दोनों का अस्तित्व ज़रूरी हैं ? गीता में श्री कृष्ण अर्जुन को कर्मफल का उपदेश देकर कहतें हैं.     " कर्मण्यें वाधिकारवस्तें मा फलेषु कदाचन " अर्थात मनुष्य सिर्फ कर्म करनें का अधिकारी हैं,फल पर अर्थात परिणाम पर उसका कोई अधिकार नहीं हैं,आगे श्री कृष्ण बतातें हैं,कि यदि मनुष्य कर्म करतें करतें मर  जाता हैं,और इस जन्म में उसे अपनें कर्म का फल प्राप्त नहीं होता तो हमें यह नहीं मानना चाहियें की कर्म व्यर्थ हो गया बल्कि यह कर्म अगले जन्म में भाग्य बनकर लोगों को आश्चर्य में ड़ालता हैं, ]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]][]]]]]][[[[[[[]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]] ● यह भी पढ़े 👇👇👇 ● आत्मविकास के 9 मार्ग ● स्वस्थ सामाजिक जीवन के 3 पीलर

गिलोय के फायदे । GILOY KE FAYDE

  गिलोय के फायदे GILOY KE FAYDE गिलोय का संस्कृत नाम क्या हैं ? गिलोय का संस्कृत नाम गुडुची,अमृतवल्ली ,सोमवल्ली, और अमृता हैं । गिलोय का हिन्दी नाम क्या हैं ? गिलोय GILOY का हिन्दी नाम 'गिलोय,अमृता, संशमनी और गुडुची हैं । गिलोय गिलोय का लेटिन नाम क्या हैं ? गिलोय का लेटिन नाम Tinospra cordipoolia (टिनोस्पोरा  कोर्ड़िफोलिया ) गिलोय की पहचान कैसें करें ? गिलोय सम्पूर्ण भारत वर्ष में पाई जानें वाली आयुर्वेद की सुप्रसिद्ध औषधी हैं । Ayurveda ki suprasiddh oshdhi hai यह बेल रूप में पाई जाती हैं, और दूसरें वृक्षों के सहारे चढ़कर पोषण प्राप्त करती हैं । गिलोय के पत्तें दिल के (Heart shape) आकार के होतें हैं।  गिलोय का तना अंगूठे जीतना मोटा और प्रारंभिक   अवस्था में हरा जबकि सूखनें पर धूसर हो जाता हैं । गिलोय के फूल छोटे आकार के और हल्का पीलापन लियें गुच्छों में लगतें हैं । गिलोय के फल पकनें पर लाल रंग के होतें हैं यह भी गुच्छों में पाये जातें हैं । गिलोय में पाए जाने वाले पौषक तत्व 1.लोह तत्व : 5.87 मिलीग्राम 2.प्रोटीन : 2.3

म.प्र.की प्रमुख नदी [river]

म.प्र.की प्रमुख नदी [river]  म.प्र.भारत का ह्रदय प्रदेश होनें के साथ - साथ नदी,पहाड़,जंगल,पशु - पक्षी,जीव - जंतुओं के मामलें में देश का अग्रणी राज्य हैं.  river map of mp प्रदेश में बहनें वाली सदानीरा नदीयों ने प्रदेश की मिट्टी को उपजाऊ बनाकर सम्पूर्ण प्रदेश को पोषित और पल्लवित किया हैं.यही कारण हैं कि यह प्रदेश "नदीयों का मायका" उपनाम से प्रसिद्ध हैं. ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण नदियाँ प्रदेश में प्रवाहित होती हैं,जिनकी चर्चा यहाँ प्रासंगिक हैं. #१.नर्मदा नर्मदा म.प्र.की जीवनरेखा कही जाती हैं.इस नदी के कि नारें अनेक  सभ्यताओं ने जन्म लिया . #उद्गम  यह नदी प्रदेश के अमरकंटक जिला अनूपपुर स्थित " विंध्याँचल " की पर्वतमालाओं से निकलती हैं. नर्मदा प्रदेश की सबसे लम्बी नदी हैं,इसकी कुल लम्बाई 1312 किमी हैं. म.प्र.में यह नदी 1077 किमी भू भाग पर बहती हैं.बाकि 161 किलोमीटर गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में बहती हैं. नर्मदा प्रदेश के 15 जिलों से होकर बहती हैं जिनमें शामिल हैं,अनूपपुर,मंड़ला,डिंडोरी,जबलपुर,न

पारस पीपल के औषधीय गुण

पारस पीपल के औषधीय गुण Paras pipal KE ausdhiy gun ::: पारस पीपल के औषधीय गुण पारस पीपल का  वर्णन ::: पारस पीपल पीपल वृक्ष के समान होता हैं । इसके पत्तें पीपल के पत्तों के समान ही होतें हैं ।पारस पीपल के फूल paras pipal KE phul  भिंड़ी के फूलों के समान घंटाकार और पीलें रंग के होतें हैं । सूखने पर यह फूल गुलाबी रंग के हो जातें हैं इन फूलों में पीला रंग का चिकना द्रव भरा रहता हैं ।  पारस पीपल के  फल paras pipal ke fal खट्टें मिठे और जड़ कसैली होती हैं । पारस पीपल का संस्कृत नाम  पारस पीपल को संस्कृत  में गर्दभांड़, कमंडुलु ,कंदराल ,फलीश ,कपितन और पारिश कहतें हैं।  पारस पीपल का हिन्दी नाम  पारस पीपल को हिन्दी में पारस पीपल ,गजदंड़ ,भेंड़ी और फारस झाड़ के नाम से जाना जाता हैं ।   पारस पीपल का अंग्रजी नाम Paras pipal ka angreji Nam ::: पारस पीपल का अंग्रेजी नाम paras pipal ka angreji nam "Portia tree "हैं । पारस पीपल का लेटिन नाम Paras pipal ka letin Nam ::: पारस पीपल का लेटिन paras pipal ka letin nam नाम Thespesia

भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र [BHAGVAN SHRI RAM]

 Shri ram #भगवान श्री राम का प्रेरणाप्रद चरित्र रामायण या रामचरित मानस सेकड़ों वर्षों से आमजनों द्धारा पढ़ी और सुनी जा रही हैं.जिसमें भगवान राम के चरित्र को विस्तारपूर्वक समझाया गया हैं,यदि हम थोड़ा और गहराई में जाकर राम के चरित्र को समझे तो सामाजिक जीवन में आनें वाली कई समस्यओं का उत्तर उनका जीवन देता हैं जैसें ● आत्मविकास के 9 मार्ग #१.आदर्श पुत्र ::: श्री राम भगवान अपने पिता के सबसे आदर्श पुत्र थें, एक ऐसे समय जब पिता उन्हें वनवास जानें के लिये मना कर रहें थें,तब राम ही थे जिन्होनें अपनें पिता दशरथ को सूर्यवंश की परम्परा बताते हुये कहा कि रघुकुल रिती सदा चली आई | प्राण जाई पर वचन न जाई || एक ऐसे समय जब मुश्किल स्वंय पर आ रही हो  पुत्र अपनें कुल की परंपरा का पालन करनें के लिये अपने पिता को  कह रहा हो यह एक आदर्श पुत्र के ही गुण हैं. दूसरा जब कैकयी ने राम को वनवास जानें का कहा तो उन्होनें निसंकोच होकर अपनी सगी माता के समान ही कैकयी की आज्ञा का पालन कर परिवार का  बिखराव होनें से रोका. आज के समय में जब पुत्र अपनें माता - पिता के फैसलों