विश्व स्वास्थ संगठन । World health organization परिचय, क्षेत्रीय कार्यालय, संरचना और कार्यप्रणाली

विश्व स्वास्थ संगठन, डब्ल्यू एच ओ



#1.विश्व स्वास्थ संगठन परिचय :::


विश्व स्वास्थ संगठन (world health organisation) या W.H.O संयुक्त राष्ट्र संघ (U.N.O.) का आनुषंगिक अभिकरण हैं.


स्थापना ---7 अप्रेल 1948


मुख्यालय--- जेनेवा (स्विट्जरलेंड़)


सदस्य देश-- 194 अमेरिका ने जुलाई 2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन से अलग होने की घोषणा की है।



#2.क्षेत्रीय कार्यालय::-




विश्व के विभिन्न भागों में स्थित छ: क्षेत्रीय कार्यालय हैं,इनमें शामिल हैं:::-


1.दक्षिण-पूर्व एशिया ---- नई दिल्ली (भारत)


2.पूर्वी भू-मध्यसागर ---- अलेक्सजेन्ड्रिया (मिश्र)


3.पश्चिमी प्रशांत      ----  मनीला (फिलीपींस)


4.अमेरिका            ----   वाशिगंट़न डी.सी.


5.अफ्रीका             ----   ब्रेंजाविलें (कांगों)


6.यूरोप                 ----   कोपनहेगन (डेनमार्क)


#3.संरचना:::-



1.विश्व स्वास्थ महासभा.


2.कार्यकारी बोर्ड़.


3.क्षेत्रीय समितीयाँ.


4. सचिवालय.






#4.उद्देश्य:::-



विश्व के समस्त राष्ट्रों में निवासरत व्यक्तियों की बिना किसी जाति,प्रजाति, धार्मिक भेदभाव,राजनितिक भेदभाव ,तथा सामाजिक, आर्थिक,भेदभाव के बिना स्वास्थ दशा को उन्नतशील बनाना.


#5.कार्य:::-



संगठन अन्तरिम स्वास्थ कार्यों से संबधित समन्वयकारी प्राधिकरण के रूप में कार्य करता हैं.इनमें


1. स्वास्थ सेंवाओं का विकास.


2. रोग निवारण व नियंत्रण.


3. पर्यावरणीय स्वास्थ का संवर्धन.


4. स्वास्थ सेंवाओं से संबधित शोध,स्वास्थ कार्यक्रमों का विकास एँव प्रोत्साहन शामिल हैं.


5.दवाईयों तथा टीकों का उत्पादन और गुणवत्ता नियत्रंण.


6. समस्त विश्व के स्वास्थ आँकड़ों का संग्रहण,विश्लेषण और प्रसारित करना.


7. महामारीयों के सम्बंध में चेतावनी प्रसारित कर रोकथाम के उपाय करना.


ये स्वास्थ संगठन के कुछ महत्वपूर्ण कार्य हैं.

#6.मूल्याकंन::-



विश्व स्वास्थ संगठन संयुक्त राष्ट्र के अभिकरण के रूप में अपनी भूमिका निर्वाहित करनें में सफल रहा हैं.इसकी स्थापना के बाद से महामारीयों के रोकथाम का उल्लेखनीय प्रयास हुयें हैं.पूर्व में जहाँ महामारीयों से लाखों-- करोंड़ों लोग काल कवलित हो जातें थें,वहीं आज के परिदृश्य में यह सँख्या सिमटकर कुछ सेकड़ों  में रह गई हैं.



विश्व स्वास्थ संगठन के सामनें चुनोंतीयाँ भी लगातार बढ़ती जा रही हैं,संगठन जहाँ एक और पारपंरिक बीमारीयों  जैसे मलेरिया, एड्स, टी.बी.को पूर्णत: समाप्त करनें में असफल रहा हैं,वहीं नित नई बीमारीयों जैसें ज़ीका वायरस (zika virus),स्वाइन फ्लू (swine flu), कोरोनावायरस,संगठन के सामनें चुनोतीं प्रस्तुत कर रही हैं.



अत: आवश्यकता इस बात की हैं,की संगठन स्वास्थ से संबधित अनुसंधानों में विकासशील राष्ट्रों को और अधिक वित्तीय,तकनीकी,और मानवीय मदद मुहेया करवायें तभी संगठन अपने उद्देश्यों में सफल हो पायेगा. 





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