बुधवार, 12 सितंबर 2018

उज्जैन के दर्शनीय स्थल UJJAIN KE DARSHNIY STHAL

परिचय :::

उज्जैन भारत के मध्यप्रदेश राज्य में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध धार्मिक पौराणिक और ऐतिहासिक नगर हैं । इस नगर को अन्य कई नामों जैसे अवन्तिका,कनकश्रृंगा,,उज्जयिनी,प्रतिकल्पा आदि से जाना जाता हैं ।इस नगर में ऐसे कई विश्व प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल हैं जिनके दर्शन हेतु देश विदेशों से लाखों श्रद्धालु आते हैं ।

आइये जानते हैं इन दर्शनीय स्थलों के बारे में

1.महाकाल मंदिर  🚩🚩🚩

उज्जैन
 महाकाल 
महाकाल भारत भर में फैले 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक ज्योर्तिलिंग हैं ।यह एक मात्र ज्योर्तिलिंग हैं जो दक्षिण मुखी हैं । इसी वज़ह से शैव मत के मानने वालों में इस ज्योर्तिलिंग का महत्व तांत्रिक साधना के लिये अधिक हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव लिंग रूप में विराजमान हैं ।

इस मंदिर का निर्माण वैसे तो अनादिकाल से ही हैं परंतु वर्तमान महाकाल मंदिर का निर्माण सिंधिया राजवँश के समय राणोजी सिंधिया के मंत्री रामचन्द्र शेणवी ने कराया था ।

महाकाल मंदिर में दर्शन के लिये आने वाले श्रद्धालुओं के लिये दो तरह की दर्शन व्यवस्था लागू की गई हैं 


1.सामान्य :::


इस दर्शन व्यवस्था में दर्शनार्थियों को मुफ़्त दर्शन कराया जाता हैं । दर्शन के पूर्व श्रद्धालुओं से मोबाइल और अन्य भारी सामान मन्दिर समिती द्वारा संचालित लॉकर रूम में रखवा लिया जाता हैं । 

सामान्य दर्शनार्थियों को दर्शन करने में 1 से 2 घन्टे लगते हैं साथ ही रास्ता 1से 2 किमी लम्बा और घुमावदार हैं अतः बच्चो और बुजुर्गों के लिये यह व्यवस्था अनुकूल नहीं हैं । बुजुर्गों के लिये मन्दिर समिति द्वारा संचालित तिपहिया से मन्दिर में दर्शन करवाया जा सकता हैं यह व्यवस्था पूर्णतः निशुल्क हैं।


2.विशेष दर्शन व्यवस्था :::


श्रद्धालुओं को जल्दी और सुगम दर्शन कराने के लिये मन्दिर समिति द्वारा सशुल्क दर्शन व्यवस्था लागू की गई हैं जिसमे 250 रुपए देकर श्रद्धालु सीधे दर्शन कर सकता हैं । 

मन्दिर में 1500 रुपये देकर विशेष दर्शन की व्यवस्था भी की गई हैं जिसमें श्रद्धालु को गर्भगृह के अंदर से दर्शन करने की सुविधा मिलती हैं ,परन्तु गर्भगृह से दर्शन करने के लिये पुरुषों को धोती कुर्ता और स्त्रियों को साड़ी पहनना अनिवार्य हैं।

उज्जैन
 महाकाल मन्दिर


3.सामान्य दिनों में दर्शन व्यवस्था


सामान्य दिनों यानि मंगलवार,बुधवार,गुरुवार,और शुक्रवार को श्रद्धालुओं की कम संख्या को देखते हुए मन्दिर समिति दर्शनार्थियों को सीधे गर्भगृह में प्रवेश करवाकर दर्शन करवाती हैं । गर्भगृह से दर्शन करने का एक अलग ही आध्यात्मिक आनन्द होता हैं।जिसे कोई भी दर्शनार्थी जीवनभर नहीं भूलना चाहता ।

4.विशेष दिनों या पर्व उत्सवों के समय दर्शन व्यवस्था 


पर्वों उत्सवों और भीड़भाड़ वाले दिनों में महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति विशेष दर्शन व्यवस्था लागू करती हैं जिसमे गर्भगृह में प्रवेश वर्जित कर दिया जाता हैं । और दर्शन दूर से करवाये जाते हैं । 


महाकाल मंदिर विश्व का एकमात्र मन्दिर हैं जहाँ प्रतिदिन तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती की जाती हैं।भस्मारती के लिये महाकाल मंदिर कार्यालय और वेबसाइट से अनुमति प्राप्त करनी होती हैं ।  इसके अलावा प्रतिदिन भोग आरती, संध्या आरती,और शयन आरती होती हैं ।

महाकाल के ऊपर इसी मंदिर में ओम्कारेश्वर भगवान का मंदिर हैं ।इस मंदिर में भी भगवान शिव लिंग रूप में विराजमान हैं,यहाँ दर्शन शीघ्र आसानी से और बिना शुल्क के हो जाते हैं ।

ओम्कारेश्वर मन्दिर के ऊपर नागचन्द्रेश्वर भगवान का मंदिर हैं । यहाँ दर्शन साल में केवल एक बार  नागपंचमी को ही होते हैं। बाकी पूरे साल यह मंदिर बन्द रहता हैं ।नागपंचमी के अवसर पर इस मंदिर में देश विदेश के भक्तों का जनसैलाब उमड़ता हैं ।

महाकाल मंदिर के प्रांगण में ही अनेक देवी देवताओं के मंदिर हैं जहाँ दर्शन उपरान्त श्रद्धालु तिलक लगवाते और कलेवा बंधवाते हैं ।

महाकाल मंदिर प्रांगण में ही मन्दिर समिति के काउंटर लगे हुए हैं जहाँ से आप सशुल्क प्रसाद,महाकाल के फोटो आदि प्राप्त कर सकते हैं साथ ही मंदिर समिति को दान भी दे सकते हैं ।

महाकाल अतिथि निवास महाकाल मंदिर के पास स्थित सर्वसुविधायुक्त निवास स्थान हैं यहाँ कमरा बुक कराने के लिये महाकालेश्वर मंदिर की वेबसाइट पर जाना होता हैं ।

अतिथि गृह के समीप ही महाकाल मंदिर समिति द्वारा संचालित अन्नक्षेत्र हैं हैं जहाँ सुबह शाम श्रद्धालुओं के लिये स्वादिष्ट भोजन प्रसादी की व्यवस्था निशुल्क की गई हैं ।



2.बड़ा गणेश मंदिर 🚩🚩🚩:::


महाकाल अतिथि निवास के सामने बड़ा गणेश का मंदिर स्थित हैं । इस मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा बहुत विशाल हैं इसलिए इसे बड़ा गणेश के नाम से जानते हैं । बड़े गणेश की प्राण प्रतिष्ठा पद्मविभूषण पंडित सूर्यनारायण व्यास के पिता श्री नारायण व्यास ने की थी । 

बड़े गणेश की प्रतिमा देश की प्रसिद्ध नदियों और मिट्टियों से निर्मित की गई हैं ।

इस मंदिर के अंदर विभिन्न देवी देवताओं की झांकी सजाई गई हैं । जिसके दर्शन से असीम शान्ति का अनुभव होता हैं ।


3.रुद्रसागर :::


बड़े गणेश मंदिर से कुछ ही मिनिट की दूरी पर सड़क के दाएं और बाएं जो तालाब हैं इसी को रुद्रसागर कहते हैं । आज से 50 वर्ष पूर्व इसी तालाब के जल से महाकाल का अभिषेक किया जाता था किंतु बाद में यह तालाब शहर के गंदे नालों की चपेट में आ गया जिससे इसका पानी गन्दा हो गया ।

सिंहस्थ 2016 में इस तालाब के सौंदर्यीकरण के प्रयास किये गये जिससे यह तालाब सीवेज मुक्त हुआ है । इस तालाब के किनारे उज्जैन के न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य 32 पुतलियों और उनके दरबारियों की मूर्ति स्थापित की गई हैं । इन मूर्तियों के नीचें इनके सम्बन्ध में रोचक वर्णन हैं । आज यह स्थल सेल्फी पॉइंट बन चुका हैं ।

यदि इस तालाब में बोटिंग सुविधा शुरू हो जाये तो पर्यटकों को एक नया अनुभव मिल सकता हैं ।


4.हरसिद्धी मन्दिर 🚩🚩🚩:::


रुद्रसागर से थोड़ा सा चलने पर एक चौराहा आता हैं इस चौराहे से दायीं ओर दस कदम चलने पर माता हरसिद्धि का मंदिर आता हैं ।
हरसिद्धि उज्जैन
 माता हरसिद्धी



उज्जैन विश्व का एकमात्र स्थान हैं जहाँ शिव और शक्ति उपासना के पौराणिक स्थान एक साथ उपलब्ध हैं ।

यह सिद्ध शक्तिपीठ  स्थल हैं जहाँ माता सती की कोहनी गिरी थीं । इस मंदिर में जहां माता सती की कोहनी गिरी थी वहाँ माता की मूर्ति स्थापित हैं । 
मन्दिर प्रांगण में दो विशाल दीपमाला स्तम्भ हैं जहां नवरात्रि पर्व उत्सवों और मन्नत पूरी होने दीपों का प्रज्वलन किया जाता हैं ।

दीप स्तम्बभ मराठा कालीन हैं । इन स्तम्भों पर प्रज्वलित होते दीप आपकी शाम को उर्जा से भर देते हैं और आँखों को असीम आंनद प्रदान करते हैं ।




5.चारधाम मन्दिर🚩🚩🚩:::


हरसिद्धि मन्दिर के दर्शन उपरांत सीधे दक्षिण दिशा की और लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्वामी शांतिस्वरूपानंद जी द्वारा स्थापित चारधाम मंदिर हैं जिसमें भारत के चारधाम मंदिर की प्रतिकृति स्थापित की गई हैं ।

इस मंदिर में एक कृत्रिम गुफा का निर्माण किया गया हैं जिसमें विभिन्न देवी देवताओं की लीलाओं को प्रदर्शित किया गया हैं ।गुफा में प्रवेश  सशुल्क हैं ।

मन्दिर में ही ब्राह्मण बच्चों को निशुल्क कर्मकांड शिक्षा प्रदान की जा रही हैं ।


6.रामघाट :::


शिप्रा के तट पर स्थित रामघाट करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र हैं । उज्जैन आने वाला कोई भी श्रद्धालु रामघाट पर क्षिप्रा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करना नहीं भूलता हैं । 

रामघाट का नाम भगवान राम के नाम से जुड़ा हैं इस स्थान पर भगवान राम ने अपने पिता दशरथ का पिंडदान किया था । 

रामघाट पर प्रतिदिन शाम के समय क्षिप्रा आरती होती हैं । यह आरती देखकर वाराणसी की गंगा आरती की याद तरोताजा हो जाती हैं ।

रामघाट पर अनेक छोटे बड़े मन्दिर हैं इन मंदिरों में कुछ मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध 84 मंदिर श्रृंखला के हैं । रामघाट पर अपने निकटस्थजनों का पिंडदान करते हुए लोग देखे जा सकते हैं ।



7.गोपाल मंदिर🚩🚩🚩 :::


 गोपाल मंदिर उज्जैन के व्यस्ततम बाज़ार में स्थित हैं । इस मंदिर का निर्माण सिंधिया वंश की रानी बायजा बाई ने कराया था । भगवान कृष्ण को समर्पित यह मंदिर भी लोगों की आस्था का केन्द्र हैं । 

मंदिर में दर्शन करने के बाद व्यक्ति इस मन्दिर के आसपास स्थित बाज़ार में खरीददारी करना नहीं भूलता । इस बाज़ार में धार्मिक पुस्तकें,कुंकुम,चन्दन,भगवान की मूर्तियां,चित्र आदि बहुतायात में मिलते हैं ।


8.काल भैरव मंदिर🚩🚩🚩 :::


काल भैरव मंदिर प्राचीन अवन्तिका नगर के नगरीय सीमा में स्थित हैं । इसका निर्माण राजा भद्रसेन ने करवाया था ।

  काल भैरव महाकाल के सेनापति हैं । इस मंदिर की प्रसिद्धि भी देश विदेश में हैं । यह मंदिर कपालिक अघोरी और तांत्रिक सम्प्रदाय के मानने वालों की आस्था का केंद्र बिन्दु हैं । 
कालभेरव उज्जैन
 मदिरापान करते कालभेरव

मंदिर के गर्भगृह में भगवान भैरव की प्रतिमा स्थापित हैं । इस प्रतिमा की एक बहुत बड़ी विशेषता हैं कि यह मदिरापान करती हैं , जी हाँ सही पढा  आपने यह प्रतिमा मदिरापान करती हैं । आपको मंदिर के बाहर देशी विदेशी शराब की दुकानें मिल जाएगी यहाँ से आप देशी विदेशी मदिरा ख़रीदये और मंदिर के पुजारी को दीजिए पुजारी मदिरा एक पात्र में डालकर जैसे ही भैरव बाबा की मूर्ति के होठों को स्पर्श कराता हैं पात्र में रखी शराब ग़ायब हो जाती हैं ।

काल भैरव भी बाबा महाकाल की तरह नगर भ्रमण पर निकलते हैं पर इनका नगर भ्रमण का दिन भैरव अष्टमी और डोल ग्यारस हैं । इस दिन काल भैरव बाबा महाकाल की तरह लाव लश्कर के साथ भैरव गढ़ भ्रमण पर निकलते हैं ।

इस मंदिर के प्रांगण में ही एक गुफ़ा स्थित हैं जहाँ अनेक साधु संत तान्त्रिक क्रिया करतें हैं ।

विश्व प्रसिद्ध भैरवगढ़ प्रिंट का सम्बन्ध इसी स्थान से हैं । यहाँ से निर्मित साड़ी कपड़े ,गलीचे आदि देश विदेश तक जातें हैं । उज्जैन आने वाला प्रत्येक व्यक्ति भैरवगढ़ प्रिंट से निर्मित वस्तु खरीदना नही भूलता हैं ।



9. मंगलनाथ मन्दिर 🚩🚩🚩:::



क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित यह मंदिर मंगल ग्रह का जन्म स्थान माना जाता हैं । मन्दिर में स्थापित भगवान मंगलनाथ की मूर्ति शिवलिंग रूप में स्थापित हैं । खगोलशास्त्र में इस मन्दिर का विशेष महत्व हैं क्योंकि यहाँ से मंगल गृह सीधा दिखाई देता हैं ।

इस मंदिर में मंगल कार्यों जैसे मांगलिक कुंडली से विवाह में देरी ,घर के मंगल कार्य आदि हेतू विशेष पूजा की जाती हैं । प्रतिदिन यहाँ सैकड़ों श्रद्धालु यह विशेष पूजा करवाने देश विदेश से यहाँ आते हैं । 

मंगलनाथ मंदिर के पास ही क्षिप्रा किनारें अंगारेश्वर मंदिर,विक्रान्त भैरव मंदिर हैं जिनकी जानकारी बहुत कम श्रद्धालुओं को हैं । ये मंदिर भी अपनी अलग पहचान रखते हैं जिसकी जानकारी हमें इनके पुजारियों के माध्यम से ही मिलती हैं ।


10.अंगारेश्वर मंदिर 🚩🚩🚩::::

 मंगलनाथ मंदिर के समीप ही यह मंदिर क्षिप्रा नदी के बीचों बीच स्थित हैं । यह मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध 84 महादेव मंदिरों की कड़ी का मन्दिर हैं ।

अंगारेश्वर भगवान शिव के रुद्र अवतार थे जिन्हें भगवान शिव ने अपने विरोधियों का संहार करने हेतू  उत्पन्न किया था । 

इस मन्दिर में दूसरे शिव मंदिरों के विपरीत सुर्ख लाल कुंकुम अर्पित किया जाता हैं । 


11.सांदीपनि आश्रम :::


उज्जैन  सम्पूर्ण धरा का अनोखा धार्मिक स्थल हैं जहाँ  से भगवान शिव के साथ भगवान कृष्ण का भी जुड़ाव हैं । मंगलनाथ मार्ग पर ही यह पौराणिक आश्रम स्थित हैं । 

इस स्थान पर भगवान कृष्ण भाई बलराम और सखा सुदामा के साथ गुरू सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने आये थे जहाँ उन्होंने गुरु सांदीपनि से 64 विद्या और 16 कलाओं की शिक्षा ग्रहण की ।

सांदीपनि आश्रम में एक कुण्ड हैं जिसका नाम गोमती कुंड हैं ।

 जहाँ भगवान कृष्ण अपनी स्लेट साफ़ किया करते थे । इस आश्रम में गुरु सांदीपनि का मंदिर,भगवान शिव का मंदिर समेत अन्य छोटे मन्दिर हैं ।

 पुष्टिमार्गीय मत को मानने वाले व्यक्तियों के लिये यह स्थान विशेष महत्व रखता हैं क्योंकि यहाँ महाप्रभु जी की 84 बैठकों में से 73 वी बैठक हैं ।

इस आश्रम में भगवान कृष्ण की 64 कलाओं को प्रदर्शनी के रूप में मनोहारी रूप में प्रदर्शित किया गया हैं ।



12.भृतहरि गुफा :::


यह गुफा मंगलनाथ मंदिर के समीप ही क्षिप्रा नदी के किनारें स्थित हैं । भृतहरि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के सोतेले भाई थे जिन्होंने वैराग्य ग्रहण कर लिया था । इस गुफा का पुननिर्माण 11 वी शताब्दी में हुआ था ।गुफा पत्थरों से निर्मित हैं । कुल तीन गुफा हैं जिनके अन्दर शिवलिंग स्थापित हैं ।

 इस गुफा के आसपास बंदर बहुतायत में पाये जाते हैं अतः गुफा में जाते समय बंदरो के लिए कुछ ले ले ।




13.गढ़ कालिका मंदिर 🚩🚩🚩 


गढ़ कालिका मंदिर प्राचीन अवन्तिका नगरी के बाहरी भाग में स्थित था । आज भी इसकी अवस्थिति उज्जैन शहर के बाहर ही हैं । मन्दिर का निर्माण 7 वी सदी में हर्षवर्धन ने कराया था इसके पश्चात इसका पुनर्निर्माण परमारकाल में हुआ था ।

इस मंदिर में शक्ति रूपा देवी कालिका विराजमान हैं । देवी गढ़ कालिका महाकवि कालिदास की आराध्य देवी हैं । लोकश्रुति के अनुसार महाकवि कालिदास को देवी उपासना के बाद ही ज्ञान प्राप्त हुआ था ।यहाँ नवरात्रि में श्रद्धालुओं का तांता लगता हैं ।

मन्दिर में स्थापित देवी की मूर्ति अत्यंत चैतन्य और असीम ऊर्जा प्रदान करने वाली हैं । 




14.राम जनार्दन मंदिर 🚩🚩🚩


भगवान राम को समर्पित यह मंदिर समूह भी अत्यन्त प्राचीन धार्मिक स्थल हैं । इस मंदिर के प्रांगण में एक तालाब हैं जिसमें बोटिंग की सुविधा उपलब्ध हैं । यह स्थान उज्जैन के स्थानीय निवासियों का प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट हैं । 

यहाँ बच्चों के लिये झूले, स्लाइडिंग आदि उपलब्ध हैं । 


15. चिंतामण गणेश मंदिर 🚩🚩🚩


जिस स्थान पर शिव और शक्ति हो वहाँ गणेश नहीं हो ऐसा हो ही नहीं सकता । इसी कड़ी में भगवान गणेश का यह मंदिर उज्जैन की आध्यात्मिक परम्परा को प्रतिष्ठित कर रहा हैं ।
चिन्तामण उज्जैन
 चिन्तामण गणेश

चिंतामण गणेश मन्दिर उज्जैन से पश्चिमी दिशा की ओर लगभग 3 किमी की दूरी पर चिंतामण जवासिया गाँव में स्थित हैं । इस मन्दिर में भगवान गणेश और रिद्धि सिद्धि  एक ही प्रतिमा में हैं ।

इस मंदिर की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह हैं की यहाँ अबूझ मुहर्त में पुरे वर्ष विवाह सम्पन्न होते हैं । बालिग प्रेमी युगल मन्दिर प्रांगण में विवाह सूत्र में बंधते दिख जायेंगे ।

मन्दिर प्रांगण में एक बावड़ी स्थित हैं जो पोराणिक महत्व की हैं और भक्तों की आस्था की केंद्र बिंदु हैं ।

चिन्तामण गणेश मन्दिर के आसपास दुकानों पर मिलने वाले लड्ड बहुत स्वादिष्ट होते हैं इन लड्डओ को अनेक भक्त दूर दूर तक पैक करवाकर ले जाते हैं ।

चिन्तामण गणेश मार्ग पर ही आपको केंद्र सरकार का महर्षि सान्दिपनी वेद विद्या प्रतिष्ठान और पंडित कमल किशोर नागर द्वारा संचालित गोशाला भी देखने को मिलेंगे । गोशाला की दीवारों पर आकर्षक चित्रकारी की गयी हैं ।



16.प्रशांति धाम :::


प्रशांति धाम इंदौर रोड पर शनि मन्दिर के समीप स्थित हैं  । यहाँ अनेक मन्दिर स्थित हैं किन्तु मुख्य मन्दिर साईं बाबा का हैं । यह मन्दिर क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित हैं । प्रशांति धाम बहुत ही मनोरम और प्रकृति के बीच स्थापित धार्मिक स्थल हैं जो मन को असीम शांति प्रदान करता हैं । प्रति गुरुवार यंहा दर्शनार्थियों की भीड़ लगती हैं ।

प्रशांति धाम के थोड़ा आगे वन विभाग द्वारा संधारित त्रिवेणी टूरिज्म पार्क हैं । यहाँ स्थित घने जंगल में पेड़ पोधों की विभिन्न प्रजातियाँ,जंगली पक्षी आदि बड़ी आसानी से देखे जा सकते हैं ।फोटोग्राफी और पिकनिक के लिये शहरवासियों का यह पसंदीदा स्थल हैं ।

17.शनि मन्दिर त्रिवेणी 🚩🚩🚩:::




शनि मन्दिर भी इंदौर रोड़ पर स्थित हैं । यहाँ  सभी ग्रहों के मन्दिर स्थापित हैं किन्तु मुख्य मन्दिर शनि देवता का हैं । इस मन्दिर की स्थापना उज्जयनी के राजा विक्रमादित्य ने की थी । इस जगह पर कान्ह नदी और क्षिप्रा नदी का मिलन बिन्दु भी हैं । इसी वजह से इसे त्रिवेणी संगम भी पुकारते हैं ।



शनि मन्दिर स्थित त्रिवेणी संगम पर अमावस्या और विशेष पर्वों पर लाखों आस्थावान डुबकी लगाते हैं ।







18.महावीर तपोभूमि :::

महावीर तपोभूमि इंदौर रोड पर ग्राम राघो पिपलिया में स्थित हैं । यह दिगम्बर जैन सम्प्रदाय का प्रमुख तीर्थ हैं । इस तीर्थ में भगवान महावीर की विशाल प्रतिमा स्थापित की गयी हैं ।जिसके दर्शन हेतू जैन धर्मावलम्बी पुरे भारत और विदेशों से उज्जैन आते हैं । यहाँ वर्षभर आयोजन चलते रहते हैं ।



19.पंचक्रोशी यात्रा मार्ग :::


उज्जैन के आसपास चारों कोनों पर भगवान महाकाल के चार द्वारपाल शिव रूप में विराजित हैं । प्रथम द्वारपाल पिन्ग्लेश्वर ,दुसरे द्वारपाल कायावहेनेश्वर,तीसरे दुर्देश्वर,तथा चोथे बिल्केश्वर हैं । ये द्वारपाल 118 किलोमीटर के घेरे में विस्तृत हैं । पंचकोशी मार्ग अध्यात्म,ग्राम्य जीवन और प्रकृति का अनूठा संगम हैं । पंचकोशी मार्ग पर स्थित अम्बोदिया में गम्भीर बांध अपार जलराशि को अपने में संजोये हुए हैं । जंहा पर्यटकों का ताँता लगा रहता हैं।

अम्बोदिया में एक वृद्धआश्रम स्थित हैं इस आश्रम में रहने वाले  निः सहाय वृद्धो की सेवा करने और उनके साथ समय बिताने के बाद असीम आनन्द की अनुभूति होती हैं ।



20.इस्कान मन्दिर 🚩🚩🚩:::



इस्कान मन्दिर उज्जैन शहर में देवास रोड पर स्थित हैं ।

उज्जैन भगवान कृष्ण की शिक्षा स्थली हैं । उनके अनुयायियों ने भगवान कृष्ण की यादों को चिरस्थायी बनाने के लिए उज्जैन को चुना । इस्कान मन्दिर देश विदेश में फेले करोड़ो अनुयायियों की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं । यहाँ सालभर धार्मिक गतिविधियों का आयोजन होता रहता हैं ।

इस मन्दिर में प्रतिदिन हजारों दर्शनार्थी पहुँचते हैं । यहाँ की प्रसाद और कृष्ण से सम्बन्धित साहित्य बहुत प्रसिद्ध हैं ।



इन महत्वपूर्ण स्थलों के अतिरिक्त उज्जैन में पीर मछेन्द्र्नाथ की समाधि,गेबी हनुमान मन्दिर,मनछामण गणेश मन्दिर,रूमी की मस्जिद ,भूखी माता जैसे स्थल हैं । जो लाखों लोंगो की आस्था के केंद्र हैं ।


21.वेधशाला 


उज्जैन कालगणना  ज्योतिष और खगोल विज्ञान का केंद्र रहा हैं । यहाँ वराहमिहिर जेसे खगोलविद राजा विक्रमादित्य के राज में आश्रय पाते थे। उज्जैन की इस महान विशेषता को राजा सवाई जयसिंह ने समझा और यहाँ एक वेधशाला का निर्माण करवाया । यह वेधशाला तत्कालीन समय में कालगणना का प्रमुख केंद्र थी ।

यहाँ सम्राट यंत्र,नंदीवलय यंत्र ,दिमषा यंत्र और यम्योत्रा जैसे उपकरण निर्मित हैं जिनसे ग्रहों की स्थिति ,समय का पूर्वानुमान व्यक्त किया जाता हैं ।


22. केडी पेलेस या कालियादेह महल :::

इस महल का निर्माण मांडू के सुल्तान ने ईस्वी सन 1458 में कराया था । पिंडारियों के आक्रमण से ध्वस्त हुए महल को सिंधिया राजवंश के माधवराव सिंधिया ने सन1920 पुनर्निर्मित कराया था । यह महल क्षिप्रा नदी की दो धाराओं के बीच स्थित हैं । यहाँ क्षिप्रा नदी बहुत उथली होनें से यह स्थल उज्जैन शहर के युवाओं का पसंदीदा पिकनिक स्थल हैं जहाँ युवा क्षिप्रा की धाराओं के बीच अठखेलियाँ करना नही भूलते ।

महल के सामने की ओर स्थित धारा में 52 कुंड बने हैं जिसमें राजवंश के लोग स्नान करते थे ।

इस महल में सूर्य मन्दिर भी हैं । इस मन्दिर की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह हैं की इसमें स्थित सूर्य देव की प्रतिमा महल के बहुत अंदर स्थित हैं किन्तु फिर भी सूर्योदय के समय सूर्य की किरण इस प्रतिमा पर गिरती हैं ।

23.नौलखी पार्क :::


यह वन विभाग द्वारा 55 हेक्टयर में विकसित बहुत सुंदर जँगल हैं जो मक्सी रोड़ पर स्थित हैं । इस पार्क में जंगली जानवर,विभिन्न किस्म के पेड़ पोधें बहुतायत में मिलते हैं । यह स्थल भी बहुत अच्छा वीकेंड डेस्टिनेशन हैं ।




24.सिद्धवट :::


उज्जैन में स्थित यह स्थल पितरों के तर्पण के लियें विश्व प्रसिद्ध हैं । यहाँ एक वट वृक्ष हैं जिसके सम्बन्ध में कहा जाता हैं की यह अक्षय वट वृक्ष हैं अर्थात इसका कभी क्षय नहीं होता हैं । इस अक्षय वट वृक्ष को माता पार्वती ने अपने हाथों से लगाया था ।

मुगलों ने इस वट वृक्ष कों कटवाकर इसमें लोहे की कड़ाई चुनवा दी थी ताकि यह वट वृक्ष पुन : नहीं उग सकें किन्तु इसके बाद भी वट वृक्ष पुन: उग गया ।

इसी वट वृक्ष के नीचें देवताओं ने भगवान शिव के पुत्र कार्तिक को अपना सेनापति नियुक्त किया था ताकि वह तारकासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कर सकें।

अवन्तिका के सम्राट विक्रमादित्य ने इसी सिद्धवट के नीचें तपस्या कर बेताल को वश में किया था ।

सम्राट अशोक ने इसी सिद्धवट को साक्षी मानकर अपने पुत्र पुत्री को बोद्ध धर्म का प्रचार करनें हेतु श्री लंका रवाना किया था ।

यहाँ मृत आत्मा की शांति और पितरों के तर्पण हेतू सालभर श्रदालुओं का तांता लगा रहता हैं ।



25.चोबीस खम्बा माता मन्दिर :::


चोबीस खम्बा माता मन्दिर उज्जैन का अति प्राचीन मन्दिर हैं। जिसमे दो देवियाँ महालाया और महामाया विराजित हैं। ये दोनों देवियाँ उत्तर दिशा में स्थित प्राचीन प्रवेश द्वार के अगल बगल विराजित हैं । प्राचीनकाल में यह स्थल उज्जैन नगर का प्रवेश द्वार था । चोबीस खम्बों पर स्थित होनें के कारण इसे चोबीस खम्बा माता मन्दिर भी कहते हैं ।

कर सहस्त्र पदविस्तीर्ण महाकाल वनं शुभं।द्वारम्हाघ्र्नार्नात्र खन्चित सोभ्य दिग्भ्वम।।
अर्थात महाकाल वन एक हजार पैरों तक विस्तारित होकर इसका द्वार बेशकीमती रत्नों से सुसज्जित हैं। और यह उत्तर दिशा की और स्थित हैं ।

इस मन्दिर के सन्दर्भ में कई किवंदतीयाँ प्रचलित हैं जिसके अनुसार इस मन्दिर में स्थित 32 पुतलियाँ रोज रात को एक राजा बनाकर उनसे सवाल पूछती थी जवाब नही देनें पर राजा को मार देती थी । राजा विक्रमादित्य ने महाअष्टमी को इन पुतलियों को भोग खिलाकर अपने वश में कर लिया था । इन पुतलियों ने राजा को वरदान दिया था की वो जब भी न्याय करेगा वो साश्वत सत्य और राजा की कीर्ति बढ़ाने वाला होगा ।

ये पुतलियाँ राजा को आकाश और पाताल की खबर लाकर देती थी ।

इस मन्दिर में स्थित दोनों देवियों को प्रतिवर्ष महाअष्टमी को मदिरा का भोग प्रसासन द्वारा अर्पित किया जाता हैं । प्राचीनकाल में यहाँ मदिरा के अतिरिक्त भेसों की बलि भी दी जाती थी ।जिसे सम्भवत: बारहवी शताब्दी में बंद कर दिया गया था।



26.चोरासी महादेव :::-



1.अगस्तेश्वर महादेव ::: यह मन्दिर क्षिप्रा नदी के किनारे हरसिधि मन्दिर मार्ग पर हैं ।

2.गुरिहेश्व्रर महादेव ::: यह मन्दिर भी क्षिप्रा किनारे रामघाट पर स्थित हैं ।

3.दूदेशवर महादेव ::: रामघाट क्षिप्रा किनारे स्थित हैं ।

4.डमरूकेश्वर महादेव ::: रामघाट क्षिप्रा किनारे ।

5.



















उज्जैन पहुंचनें के लिये आवागमन के साधन ✈🚆🚌




उज्जैन देश के सभी रेलवे स्टेशनों से जुड़ा हुआ हैं । यहाँ से नजदीक एअरपोर्ट इंदौर हैं जो की 55 किमी की दूरी पर हैं । इंदौर देश के सभी प्रमुख हवाई अड्डों से जुड़ा हैं ।
उज्जैन देश के किसी भी भाग से सड़क मार्ग  द्वारा भी पहुँचा जा सकता हैं।

उज्जैन पहुँचने पर आप रिक्शा,टैक्सी ,लोक परिवहन की सहायता लेकर प्रमुख मन्दिरों में जा सकते हैं ।


उज्जैन में रुकने की व्यवस्था 🏖🏖🏖


उज्जैन में हर आय वर्ग के लिए उत्तमश्रेणी की होटले,धर्मशाला और रेस्ट हाउस उपलब्ध हैं । इनमे निजी और सरकारी क्षेत्र के होटल सम्मिलित हैं ।



खानपान 🍽☕🥄



उज्जैन में हर प्रकार का खानपान उपलब्ध हैं किन्तु यदि आप उज्जैन पधारे हों तो आपको मालवा की शाही दाल बाटी या बाफला, चूरमा ,कड़ी ,सेव तथा लहसुन की चटनी का स्वाद अवश्य लेना चाहिये ।

बाटी या बाफला गेंहू  के आटे को गोलाकार रूप देकर उसे कंडे की आंच पर सेककर बनाया जाता हैं । तथा इस पर घी लगाकर दाल कड़ी और लहसुन की चटनी के साथ खाया जाता हैं ।

उज्जैन के आसपास के दर्शनीय स्थान


1.ओम्कारेश्वर 🚩🚩🚩

ओम्कारेश्वर उज्जैन से 116 किलोमीटर की दुरी पर हैं । ओम्कारेश्वर मध्यप्रदेश का दूसरा ज्योर्तिलिंग हैं तथा12 ज्योर्तिलिंगो में शामिल होकर अपना विशिष्ठ स्थान रखता हैं । ओम्कारेश्वर नर्मदा नदी के किनारे स्थित हैं । ओम्कारेश्वर में सिद्धनाथ मन्दिर प्रमुख मन्दिर हैं इसके अलावा यहाँ 24 अवतार मन्दिर,शन्कराचार्य गुफा,सप्तमात्रिका मन्दिर आदि प्रमुख मन्दिर हैं ।



2.महेश्वर 🚩🚩🚩


महेश्वर उज्जैन से 90 किमी दूर हैं । यहाँ होल्कर वंश की महान शासिका देवी अहिल्या बाई द्वारा निर्मित घाट ,मन्दिर और महल बहुत दर्शनीय हैं ।



3.देवास 🚩🚩🚩


देवास की दूरी उज्जैन से 36 किमी हैं । यहाँ पहाड़ी पर माता तुलजा भवानी और माता चामुंडा के मन्दिर हैं । इसके अतिरिक्त अन्य छोटे मन्दिर टेकरी पर स्थित हैं ।



4.आगर मालवा 🚩🚩🚩


आगर मालवा की दूरी उज्जैन से  65 किमी हैं । यहाँ बाबा बैजनाथ महादेव का मन्दिर हैं ।



5.नलखेडा 🚩🚩🚩


नलखेडा में शक्तिपीठ हैं । जँहा माता बगलामुखी विराजित हैं । इस स्थल की ख्याति भी बहुत दूर दूर तक हैं ।


6.मन्दसौर 🚩🚩🚩


मन्दसौर उज्जैन से 191 किमी दूर हैं । मन्दसौर रावण का ससुराल हैं उनकी रानी मन्दोदरी यही की थी इसी वजह से इसका नाम मन्दसौर पडा । यहाँ शिवना नदी के तट पर भगवान पशुपतिनाथ की अष्ट मुखी प्रतिमा स्थापित हैं जिसके दर्शन करने लोग बहुत दूर दूर से आते हैं ।


7.इंदौर 


इंदौर की दूरी उज्जैन से 55 किमी हैं । यह शहर मिनी बाम्बे के उपनाम से प्रसिद्ध हैं । यहाँ राजबाड़ा,लालबाग,होल्कर वंश की छतरी जैसे एतिहासिक स्थल स्थित हैं । वहीं इंदौर के आसपास 40 किमी की परिधि में चोरल बांध,तिंचा फाल,परशुराम की जन्मस्थली जनापाव जैसे सोंदर्य से परिपूर्ण प्राकृतिक स्थल भी स्थित हैं ।


8.मांडू 


मांडू उज्जैन से 130 किमी  की दुरी पर स्थित हैं । यह स्थल एतिहासिक इमारतों के लिये विश्व प्रसिद्ध हैं ।


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9.भोपाल


भोपाल उज्जैन से 190 किमी दूर हैं । यह मध्यप्रदेश की राजधानी हैं ।यहाँ की सुंदर झीले ,एतिहासिक इमारते बहुत प्रसिद्ध हैं ।भोपाल के आसपास 45 किमी की परिधी में विश्व धरोहर स्थल साँची और भीमबेटका हैं । जबकि भोजपुर में शिव मन्दिर और सलकनपुर में माता बिजासन विराजित हैं ।


उज्जैन का तापमान 🚩🚩🚩


उज्जैन का तापमान गर्मियों में 40 डीग्री के आसपास जबकि शीत ऋतु में 10 से 12 डिग्री के बीच रहता हैं । वर्षा यहाँ सामान्य ही होती हैं ।


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