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ज़ीका वायरस का आयुर्वेदिक इलाज Zika virus

#१.जीका वायरस (Zika virus)


"जीका वायरस" flaviviridae कुल का वायरस हैं, जो कि "aedes aegypti" मच्छर के शरीर में मोजूद रहता हैं, यदि संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता हैं,तो वह व्यक्ति जीका वायरस की चपेट में आ जाता हैं.यह वायरस लैंगिक सम्पर्क से भी फैलता हैं.

#२.मनुष्यों पर प्रभाव::-


जीका वायरस का प्रभाव डेँगू से पीड़ित व्यक्ति के समान होता हैं,अत: कभी -कभी डेँगू और जीका वायरस से पीड़ित व्यक्ति में  बिना विस्तृत जाँच के भेद कर पाना चिकित्सा जगत के लियें थोड़ा मुश्किल हैं. फिर भी कुछ सामान्य लछण निम्न हैं

१.सम्पूर्ण शरीर पर लाल दानें .

२. जोंड़ों में दर्द के साथ हल्का से तेज बुखार.

३.माँसपेशियों में खिंचाव.

४.आँखों के आसपास तेज दर्द.

५.सिरदर्द.

६. उल्टी और जी मचलाना.

७.आँखों में सूजन और लाल होना.

इस "वायरस" का के प्रभाव से गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क का आकार असामान्य रूप से बाधित होकर छोटा रह जाता हैं.अत:यह एक विचित्र वायरस हैं जो समय के साथ अपनी प्रकृति में बदलाव भी ला रहा हैं.

बचाव::-


इस रोग का अभी तक कोई सर्वमान्य उपचार विकसित नहीं किया गया हैं सिर्फ लाक्षणिक चिकित्सा उपलब्ध हैं आयुर्वैद चिकित्सा में कुछ योग हैं जिनकी सहायता से बीमारीं पर प्रभावी रूप से काबू पाया जा सकता हैं.जैसे::-

१.गिलोय का रस या वटी.

२. सुदर्शन चूर्ण या वटी.

३.पपीता की पत्तियों का रस.

४.काली मिर्च,तेजपान,तुलसी,हल्दी (Turmeric),शहद को मिलाकर बनाया गया काढ़ा.

५.जवारें ,"एलोवेरा" व आंवला का रस.

इसके अलावा यदि स्वस्थ व्यक्ति प्राणायाम, अनुलोम - विलोम  ,कपालभाँति नियमित रूप से करें तो रोग प्रतिरोधकता इतनी बढ़ जावेगी  कि मनुष्य आसानी से रोग से लड़ लेगा.


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