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शनिवार, 12 सितंबर 2015

ASHOKARISTH,DASMULARISTH,KHADIRARISTH

परिचय::-

अशोकारिष्ट़::-


भैषज्यरत्नावली में इस औषधि का परिचय देते हुये लिखा हैं
मासादूध्वेच्च पीत्वैनमसृग्दररूजां जयते ज्वरच्च रक्तापित्तार्शोमन्दाग्नित्वमरोचकम् मेहशोथदिकहरस्त्वशोकारिष्ट संञित:
 अर्थात यह अशोकारिष्ट रक्त प्रदर, रक्त पित्त, ज्वर,रक्तातिसार(खूनी बवासीर) मन्दाग्नि,प्रमेह, अरूचि, शोथ को नष्ट़ करने वाला उत्तम अरिष्ट हैं.
यह अरिष्ट रसायन और उत्तेजक हैं.

घट़क द्रव्य::

अशोक छाल, को पानी मिलाकर तब तक उबाला जाता हैं जब तक एक चोथाई पानी शेष नहीं रह जाता तत्पश्चात गुड़ मिलाकर सेवन योग्य बनाया जाता है.

स्वाद::

तिक्त ,कसेला

सेवन वैघकीय परामर्श से
svyas845@gmail.com

दशमूलारिष्ट::-

भैषज्य रत्नावली के अनुसार
वातव्याधिं छयं छर्दि पाण्डुरोगच्च कामलाम् शर्करामश्मरीं मूत्रकृच्छं धातुछयंजयेत्छं कृशानां पुष्टिजननो बन्ध्यानां पुत्रद: पर:अरिष्टो दशमूलाख्यस्तेज: शुक्रबलप्रद:
अर्थात इस आरिष्ट के सेवन करनें से वातव्याधि, वमम,कामला,मूत्र में शर्करा,मूत्र में धातु जाना,महिलाओं का बन्ध्यापन जैसी बीमारीं शीघृ नष्ट हो जाती हैं साथ ही पुरूषों के शुक्र में वृद्धि होती हैं.

यह अारिष्ट स्त्रीयों के गर्भाशय का शुद्धिकरण करता हैं ,एँव गर्भवती के गर्भ को बल देता हैं.

वातज श्वास रोगो में यह अम्रत के समान लाभकारी हैं.

मात्रा::-

वैघकीय परामर्श से
Svyas845@gmail.com

खदिरारिष्ट::-

घटक::
           देवदारू,बावची,दारूहल्दी,त्रिफला,खेर की छाल,शहद,धाय फूल,पीपल,लौंग,शीतलमिर्च,नागकेशर,इलायची,दालचीनी, और तेजपान.

उपयोग::-

१. इसका विशेष प्रभाव रक्त, त्वचा और आंत्र पर होता हैं.
२.इसके सेवन से कुष्ठ,कामला,केंसर,श्वास, कृमि ,पाण्डुरोग (anaemia), कास,tumour नष्ट हो जातें हैं.
३. यह औषधि ह्रदय को बलशाली बनाती हैं.
४. यह रक्त   शोधक और लसिका को बल देती हैं.
५.पाचन तंत्र को सबल कर आँतो को मज़बूती देती हैं.

सेवन विधि :: वैघकीय परामर्श से.






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विश्व की तमाम सभ्यताएँ नदियों के किनारें पल्लवित हुई हैं,चाहे मेसोपोटोमिया हो या हड़प्पा यदि नदिया नही होती तो न ये सभ्यताएँ होती और ना ही...