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विश्व स्वास्थ्य संगठन W.H.O. के अनुसार भारत में कैंसर के आँकड़े :: जानियें भारत कैंसर के मामलों में कहाँ खड़ा हैं

हाल ही में प्रकाशित विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि W.H.O. के आँकड़ों पर यदि गौर करें तो भारत कैंसर के मामलो में दुनिया के अग्रणी राष्ट्रों मे से एक बनकर उभर रहा हैं ।
 


w.h.o.के अनुसार भारत में सन् 2018 के दौरान कैंसर के 11 लाख 60 हजार रोगी थे, जबकि विश्व भर में कैंसर रोगियों की संख्या 1 करोड़ 81 लाख थी यानि  पूरी दुनिया के कैंसर रोगियों में से 15.60% रोगी भारतीय थे ।


इतना ही नही प्रत्येक 10 भारतायों में से एक भारतीय को कैंसर होनें की संभावना रहती हैं यानि आज के हालात में देश के 12 लाख व्यक्ति कैंसर की संभावना वालें हैं ।



यदि कैंसर से होनें वाली मौंत के आँकड़ो पर गौर करें तो प्रत्येक 15  भारतीय कैंसर रोगीयों में से एक रोगी की मृत्यु होनें की संभावना रहती हैं इसका मतलब यह हैं कि भारत कैंसर से निपटने और इसके प्रभावी इलाज की व्यवस्था में दुनिया के अति पिछड़े राष्टों के समकक्ष माना गया हैं ।


विभिन्न प्रकार के कैंसरों की बात करें तो भारत में सन् 2018 में 11 लाख 60 हजार कैंसर के मामलों में से सर्वाधिक मामले स्तन कैंसर के (1,52000 मामले) पाये गये जबकि वैश्विक स्तर पर स्तन कैंसर और फेफड़ों के कैंसर के मामले समान (18.40%) रूप से पाये गये ।



वैश्विक स्तर पर सबसे कम   प्रकार का कैंसर लीवर का कैंसर रहा  जो कि वैश्विक कैंसर का 4.70% था । भारत की बात करें तो यहाँ सबसे कम कैंसर का प्रकार कोलोरेक्टल कैंसर रहा जिसका प्रतिशत 4.90% रहा ।


भारत में दूसरे स्थान पर मुहँ के कैंसर का स्थान हैं जिसके सन् 2018 में 120000 मरीज थे जो कुल कैंसर का  9.60% था।


W.H.O के अनुसार सन् 2018 में कैंसर की वजह से 96 लाख लोग काल के गाल में समा गये। जबकि भारत में 7 लाख 84 हजार लोग कैंसर से मोंत के मुहँ में समा गयें।


 सबसे घातक रूप फेफडों का कैंसर हैं जिसकी वजह से विश्व में सर्वाधिक मौंते हुई । सन् 2018 में लगभग 17.60 लाख लोग फेफड़ों के कैंसर की वजह से मौंत के मुहँ में समा गयें ।


भारत में फेफड़ो के कैंसर वाले मरीजों की सँख्या विश्व में पाये गये कैंसर के मुकाबले काफी कम हैं क्योंकि हमारे देश में तम्बाकू  उत्पादों को धूम्रपान करनें बजाय मुहँ से खाने का चलन बहुत ज्यादा है । W.H.O. के अनुसार भारत में 68000 हजार फेफड़ों के कैंसर के मामले सन् 2018 में मिले थे ।


भारत में गर्भाशय से संबधित कैंसर भी बहुत अधिक मात्रा में प्रकाश में आ रहे हैं सन् 2018 में यह संख्या 97000 हजार थी ।


 इसी प्रकार पेट से सम्बधित कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर के मामले 57 - 57 हजार पाये गयें ।


सम्पूर्ण विश्व के साथ - साथ भारत में भी कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यदि भारत को कैंसर जैसी घातक बीमारी से प्रभावी रूप से निपटना हैं तो स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानको के अनुरूप करना होगा और कैंसर जैसी बीमारी के लिये शोध करने वाले अनुसंधान संस्थाओं को विश्व मानको के अनुरूप सुविधा संपन्न बनाना होगा ।


० निर्गुण्डी


० पंचनिम्ब चूर्ण


० जल प्रबंधन



० बिल्वादि चूर्ण




० कांकायन वटी




   

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