बुधवार, 17 मई 2017

गर्मीयों में लू [Heat stroke] से बचाव के तरीके

गर्मी में सावधानियाँ
लू से बचाव
गर्मीयों की बात करतें ही कई लोगों को गांव के वो  दादी नानी के आंगन यादों में उतर आतें हैं,क्या जमाना था हैं ना पूरी गर्मीयों की छुट्टी वही बितती थी.साथ में पूरी की पूरी हमउम्र के बच्चों की  टीम हुआ करती थी,जिनमें मोसी के बच्चें, मामा के बच्चें, मामी के भाई के बच्चें और न जानें कितनें हमउम्र बच्चों का जमावड़ा नानी के ,दादी के आँगन में हुआ करता था.

आपको यह भी याद होगा जब आप सब बच्चें भरी दोपहरी में चुपके - चुपके  कच्ची केरी तोड़नें बागों में जाया करते थें,तो गर्म - गर्म हवा के थपेड़ों से कई बार बीमार भी पड़ें होंगें,तब दादी या नानी कहा करती थी,कि तुझे तो लू लगी हैं,चल उतार देती हूँ.


तब नानी केसें चुट़की में बिना किसी डाँक्टर के आपकी लू उतार कर फिर से भला चंगा कर देती थी,हैं,ना.


समय के साथ हमनें उन देशी तरीकों या दादी नानी के नुस्खों को विस्मृत कर दिया आईयें जानतें हैं,उन तरीकों के बारें में जो हमें लू से बचातें हैं.



परन्तु इससे पहलें लू के बारें में जान लेतें हैं.

# लू कैसें लगती हैं :::



मनुष्य के शरीर का तापमान 37° सेंण्टीग्रेट़ होता हैं.जब गर्मीयों में वातावरण का तापमान 47 - 48 तक पँहुच जाता हैं, और यदि हमारा शरीर लम्बें समय तक इस तापमान के सम्पर्क में रहता हैं,तो शरीर का तापमान भी वातावरण के तापमान के समान हो जाता हैं.


तब मस्तिष्क में स्थित हाइपोथैलेमस भाग शरीर को तापक्रम कम करनें का संकेत करता हैं.इसी क्रम में रक्त का प्रवाह तेज हो जाता हैं,और पसीनें की ग्रन्थियाँ शरीर से पसीना निकालकर शरीर का तापमान नियंत्रित करती हैं,किन्तु जब शरीर में पानी की कमी आ जाती हैं,तो यह प्रणाली फैल हो जाती हैं.और शरीर का तापमान अचानक बढ़नें लगता हैं,यह बढ़ा हुआ तापमान ही लू लगनें की निशानी हैं.


● ट्यूबरक्लोसिस


# लू लगनें पर लक्षण :::


# 01.शरीर से पसीना निकलना बंद हो जाता हैं.


# 02.त्वचा रूखी और खुश्क हो जाती हैं.


# 03.थकावट़ और कमजोरी महसूस होती हैं.


# 04.शरीर में पानी की कमी हो जानें पर उल्टी और दस्त लग जातें हैं.


# 05. सिरदर्द ,चक्कर आना शुरू हो जाता हैं, और नब्ज की गति  बढ़ जाती हैं.


# 06.आँखों के आगे अंधेरा छा जाता है.


# 07.नाक से नकसीर फूट़ना.


# 08.मतिभ्रम होना.


# 09.त्वचा तेज धूप की वज़ह से झुलसना.


# 10.शरीर में झट़के आना या शरीर अकड़ना.


# 11.लू की अत्यधिक घातक अवस्था में रोगी बेहोश हो जाता हैं.कभी - कभी मृत्यु तक भी हो जाती हैं.


# लू लगनें पर प्राथमिक उपचार :::



#_1. सबसे पहले रोगी के  शरीर का तापमान कम करनें का प्रयत्न करें,इसके लियें रोगी को लिट़ाकर उसके सिर,गर्दन दोनों हाथ की बांहों ,जांघों तथा तलुवों में बर्फ की मालिश करें.



यदि बर्फ उपलब्ध नही हैं,तो पानी की पट्टी रखें .इस विधि से रोगी के शरीर का तापमान तुरन्त ही कम हो जाता हैं.



#_2.यदि रोगी मुँह से आहार लेनें की क्षमता रखता हो,तो उसे तुरन्त जीवनरक्षक घोल [O.R.S.] शुरू कर दें.ठोस आहार एक दम से ना दें.


#_3.रोगी को हवादार कमरें में लिटायें.और हाथ पैरों की मालिश करतें रहें.


#_4.एक गीला कपड़ा लेकर रोगी के सिर से लेकर पैर तक उतारतें रहें.


#_5.यदि नकसीर चालू हो गई हैं,तो रोगी के सिर ठंडा पानी या बर्फ रखें,और सिर ऊपर की और रखकर करें,इस तरह खून का प्रवाह नाक की ओर कम करनें में मदद मिलेंगी.


#_6.रोगी यदि बेहोशी की अवस्था में हैं,तो उसे तुरंत चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करायें.



# लू से बचाव के आसान तरीके :::




एक कहावत हैं,कि बचाव ही उपचार हैं,यदि हम इस कहावत को मानकर चलें और गर्मीयों में कुछ ज़रूरी कदम उठा लें,तो लू लगनें की संभावना खत्म हो जायेगी इसके लियें निम्न उपाय हैं.


#1.गर्मीयों में अधिक ठोस आहार लेनें की अपेक्षा तरल और ऊर्जा देंनें वालें आहार का सेवन प्राथमिकता से करें जैसें ग्लूकोज और फलों के रस.


# 2.छाछ का सेवन भोजन के बाद नियमित रूप से करें इसमें हल्का नमक,जीरा डालकर पीनें से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहता हैं.


# 3. दही का नियमित सेवन करनें से न केवल लू से बचाव होता हैं,वरन इसमें मोजूद लेक्टोबेसिलस दस्त रोकनें में मददगार होतें हैं,जो गर्मीयों में अक्सर पानी की कमी होनें से होनें वाली सामान्य बीमारी हैं.


# 4.गर्मीयों में शरीर का तापमान संतुलित करनें हेतू नियमित अंतराल पर कलाईयाँ,पेर और मुँह पानी से धोतें रहे.


# 5.कच्ची केरी का पना या झोलिया पीतें रहें,इसमें उपस्थित खनिज लवण जैसें मैग्नेशियम,फास्फोरस तथा ओमेगा 3 फेटीएसिड़ शरीर को लू से बचातें हैं.


# 6.यदि गर्मीयों में स्विमिंग पूल पर नहा रहें हो,तो पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर ही पूल में उतरें.


# 7.जौ,चनें,बाजरा आदि से बना सत्तू शरीर को अत्यंत शीतल रखता हैं,इसके नियमित इस्तेमाल से शरीर का तापमान संतुलित रहता हैं.


# 8.दूध और पानी को समान मात्रा में मिश्री मिलाकर लेनें से पेशाब की जलन नही होती जो लू लगनें की सबसे आम समस्या हैं.


# 9.नारियल पानी में पोटेशियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता हैं,जो शरीर का ब्लड़ प्रेशर नियंत्रित रखता हैं.नारियल पानी में धनिया पावड़र मिलाकर पीनें से पेशाब की जलन तुरन्त ही समाप्त होती हैं.


# 10.तरबूज और खरबूजा पानी और खनिज लवणों का अति उत्तम स्रोत हैं,इसमें उपस्थित मेग्नेशियम शरीर को झट़को से बचाता हैं.साथ ही शरीर को ऊर्जा प्रदान करता हैं.


# 11.निम्बू में मोजूद विटामिन सी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर लू लगनें पर होनें वालें सिरदर्द और थकावट़ को ख़त्म करता हैं.


# 13.गर्मीयों में तेज लू और धूप से त्वचा झुलसनें का खतरा अधिक रहता हैं,इसके लियें मुलतानी मिट्टी में खीरा ककड़ी का पेस्ट मिलाकर पूरें शरीर पर लगा लें और दस मिनिट बाद नहा लें,खीरा ककड़ी और मुलतानी मिट्टी रोम छिद्रों को खोलकर उनका पोषण करती हैं,जिससे ये लू से ज्यादा प्रभावित नहीं होतें.


# 14.गर्मीयों में लू लगनें से आँखें भी लाल हो जाती हैं,जिसकी वज़ह से उनमें खुजली हो सकती हैं,इससे बचनें के लियें आँखों में गुलाब जल की दो - दो बूँद रात को सोतें समय ड़ालतें रहें.


# 15.गर्मीयों में शहद का सेवन तुरन्त ही थके शरीर को ऊर्जा प्रदान करता हैं,अत: शहद सेवन को प्राथमिकता दें.


● केला एक अनुपम फ़ल



# 16.मिस्री और सौंफ मिलाकर खानें से लू लगनें पर होनें वालें शरीर की दाह शांत होती हैं,अत: इसके सेवन करनें से धूप में शरीर दाह नही होता हैं.


# 17.भोजन में प्याज का नियमित प्रयोग कभी लू नहीं लगनें देता हैं,क्योंकि इसमें पाया जानें वाला एंटीआक्सीडेंट़ क्वरसिटिन शरीर के तापक्रम को 50° सेंण्टीग्रेट़ में भी सामान्य बनाये रखता हैं.


# 18.यदि गर्मीयों में बाहर जातें हो तो घर आनें के बाद ग्वारपाठा (एलोवेरा) का गुदा त्वचा और सिर पर लगानें से त्वचा की रंगत खिलती हैं,और सिर का तापमान नियंत्रित होता हैं.


# 19.गर्मी त्वचा के साथ - साथ तलुवों से भी शरीर में प्रवेश करती हैं,इसके लियें घर से निकलनें से पूर्व सेंड़ल या चप्पल के स्थान पर जूतें मोंजे पहनकर निकलना चाहियें.


# 20.शहतूत की प्रकृति शीतल होती हैं,जिससे यह गर्मीयों में ठंड़क देकर प्यास मिट़ाता हैं.


# 21.शोधकर्ताओं के अनुसार इमली में पाँलिफिनाल नामक तत्व पाया जाता हैं,जो गर्मीयों में पैदा होनें वालें बैक्टेरिया से लड़नें में मदद करता हैं.अत: इमली का सिमित मात्रा में सेवन लू लगनें से पैदा होनें त्वचा के संक्रमण या खुजली में आराम दिलाता हैं.


# 22.लीची में सूरज की गर्मी से त्वचा को बचानें की अद्भूत क्षमता होती हैं,अत: लीची का सेवन गर्मीयों में करना चाहियें.




# 23. बैल फल का सेवन लू लगनें से होनें वाली पेट़ की समस्याओं का तुरन्त समाधान करता हैं.इसके लिये बैल फल का जूस गर्मीयों में सेवन करना चाहियें.


# 24.गर्मीयों में पुदीनें का किसी भी रूप में सेवन बहुत फायदे का सौदा हैं,यह थकावट़ दूर करता हैं,पेट़ की समस्याओं को दूर करता हैं तथा शरीर पर लू के प्रकोप को शांत करता हैं.


# 25.गर्मीयों में आंवलें का मुरब्बा पेट़ की गर्मी कम कर शीतलता प्रदान करता हैं.


# 26.गर्मीयों में सबसे बढ़कर कोई औषधि हैं,तो वो हैं मिट्टी के मट़के का पानी यदि इसमें भरे साफ स्वच्छ शीतल जल का भरपूर सेवन इन दिनों किया गया तो शरीर किसी भी प्रतिकूलता से निपट़ लेगा.

० निर्गुण्डी



० जल प्रबंधन


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