रविवार, 26 फ़रवरी 2017

भारत में सड़क दुर्घटनाएँ कारण और समाधान [ROAD ACCIDENT]

सड़क दुर्घट़ना
 सड़क दुर्घट़ना का दृश्य
#भारत में सड़कों के माध्यम से होनें वाला माल एँव यात्री परिवहन का क्षेत्र सर्वाधिक  हैं,जहाँ सम्पूर्ण यात्री परिवहन का 87% तथा माल परिवहन का 65% सड़कों के माध्यम से पूरा होता हैं.किन्तु इस मामलें का दूसरा स्याह पक्ष सड़कों पर बढ़ती वाहन दुर्घट़नाओं से जुड़ा हैं.

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड़़ ब्यूरों के आकंड़ो की मानें तो भारत में सड़क दुर्घट़नाओं में प्रतिवर्ष 1.50 लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं.और लगभग इतनें ही अपंग हो जातें हैं.बढ़ती सड़क दुर्घट़नाओं केे कारण भारत सड़क दुर्घट़नाओं की वैश्विक राजधानी (world capital) बनता जा रहा हैं.
इन बढ़ती दुर्घट़नाओं के कई कारण हैं जैसें

# कारण ::


#1.नशा करके वाहन चलाना ::

भारत में होनें वाली सड़क दुर्घट़नाओं में 75% दुर्घट़नाएँ किसी न किसी प्रकार का नशा करके वाहन चलानें से होती हैं.एक सर्वे के अनुसार भारतीय रोड़ पर वाहन चलानें वाला हर 7 वाँ व्यक्ति कभी न कभी नशा करके वाहन चलाता हैं.
इस प्रकार से नशा करके वाहन चलानें वाला अपनें आप को मानव बम में परिवर्तित कर देता हैं.जो अपनें साथ सड़क पर चलनें वाले दूसरें व्यक्ति की जिन्दगी को गंभीर ख़तरा पैदा करता हैं.

नशा करके सड़क दुर्घट़नाओं में जान गँवानें वालें 85% लोग युवा ओर घर के अकेले कमाने वालें होतें हैं.सोचियें यह स्थिति एक राष्ट्र और परिवार की अर्थव्यवस्था को कितना पीछे ले जाती हैं.

#2.गुणवत्ताहीन सड़क संरचनाँए :::

देश ही नहीं दुनिया के 70% राष्ट्रों में सड़क दुर्घट़नाओं का प्रमुख कारण घट़िया और गुणवत्ताहीन सड़क संरचनाएँ हैं.


भारत में तो स्थिति और भी भयावह हैं,यहाँ सड़क निर्माण के नाम पर इतनी मनमानीयाँ की जाती हैं,कि लगभग 99% सड़के सुगम यातायात की दृष्टि से ख़तरनाक हैं.तभी तो लगभग हर एक किलोमीट़र पर हमें अनेक ऐसे संकेतक मिल जायेंगें जो किसी न किसी प्रकार की बाधा होनें की जानकारी देतें हैं.
गुणवत्ताहीन सड़क संरचनाओं को हम निम्न प्रकार से समझ सकतें हैं.

#3. घट़िया सड़क निर्माण :::

भारतीय सड़कों के निर्माण में अन्तर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानको का पालन लगभग न के बराबर किया जाता हैं,फलस्वरूप सड़के मज़बूत और टीकाऊ नहीं बन पाती और एक बरसात के बाद ही इसमें से झाँकनें वाले बड़े-बड़ें गड्डे  दुर्घट़ना में इजाफा करते हैं.

#4.संकरे पुल - पुलिया ::

राष्ट्रीय राजमार्ग भारत के सड़क परिवहन का दो तिहाई परिवहन करतें हैं.किन्तु इन पर पड़नें वालें पुल - पुलिया से आमनें - सामनें से आनें वाले वाहन नहीं निकल पातें हैं.फलस्वरूप नये वाहन चालक सर्वाधिक दुर्घट़नाओं के शिकार होतें हैं.

#5.ख़तरनाक चौराहे :::

जिस जगह से हाईवे निकल रहे हैं,उनके आसपास की ग्रामीण आबादी को जोड़नें के लियें जो सड़के बनाई गई हैं,उनका मुँह सीधा हाईवे पर आकर खुलता हैं. फलस्वरूप अनेक वाहन चालक साइड़ से आनें वाले वाहन को नहीं देख पातें नतीजन दुर्घट़ना होकर काफी जानमाल का नुकसान होता हैं.एक अनुमान के अनुसार ये चौराहे मौत के हाटस्पाट  बन गयें हैं,जहाँ कुल सड़क दुर्घट़नाओं की 26% मौंतें होती हैं.

#6.यातायात नियमों के पालन में ढ़ीलाई :::

भारत यातायात नियमों का पालन करनें वालें और करवानें वालें राष्ट्रों में अपनें कई पड़ोसीयों से बहुत पीछें हैं,श्री लंका और बांग्लादेश जैसें एशियाई देश हमसे काफी आगे निकल चुकें हैं.
यातायात नियमों का पालन नहीं करनें में शामिल हैं 
#१.बगैर लाइसेंस वाहन चलाना.
#२. सही तरीका अपनायें बिना सिर्फ कागजी औपचारिकता के आधार पर लाइसेंस जारी करना.
#३.वाहनों में क्षमता से अधिक सवारी और माल लादकर ले जाना.
#४.सीट बेल्ट का उपयोग नही करना.
#५.हेलमेट नहीं पहनकर वाहन चलाना.

#7.सड़क साक्षरता का पूर्ण अभाव :::

भारत में उच्च शिक्षित व्यक्ति भी सड़क साक्षरता में पूर्णत: निरक्षर हैं.जबकि विकसित देशों में सड़क साक्षरता प्रत्येक नागरिक के लियें अनिवार्य हैं,और इसके अभाव में नागरिक असभ्य माना जाता हैं.

# यातायात लेनों का अभाव :::

एक अन्तर्राष्ट्रीय एजेंसी के सर्वे के अनुसार भारत में यातायात के लियें अलग - अलग लेनों का नितान्त अभाव हैं,जिसके फलस्वरूप हल्के,भारी,साईकिल,हाथठेला,पैदल यात्री,मोटर साईकिल चालक,तेज गति के वाहन एक ही लेन में चलते हैं.इन लेनों में यदा - कदा बड़े वाहन,तेज वाहन छोट़े वाहन और पैदल यात्रीयों को टक्कर मारकर जान को नुकसान पहुँचात हैं.

# समाधान :::

भारत में सड़क दुर्घट़नाओं को रोकनें हेतू अविलम्ब सुधार की आवश्यकता हैं,जिससे की बेशकीमती जानों को असमय काल के गाल में जानें से बचाया जा सकें.

#१. सड़क निर्माण के लिये मानक अन्तर्राष्ट्रीय हो तथा सड़क निर्माण करनें वालें कार्मिक पूर्णत: प्रशिक्षित होनें चाहियें.
#२.लाइसेंस जारी करनें और वाहनों की फिट़नेस जारी करनें से पहले पर्याप्त जाँच पड़ताल होनी चाहियें.
#३.वाहनों में ऐसी टेक्नोलाजी का विकास करना जिससे नशा करनें वाले व्यक्तियों को वाहन चलानें से रोका जा सके.
#४.एक निश्चित अंतराल पर लम्बी दूरी के वाहन चालको के लिये सस्ते,सर्वसुलभ आवासग्रहों का निर्माण जिसमें वाहन चालक आराम कर सकें.
#५.प्रत्येक टोल बूथों पर सर्वसुविधायुक्त एम्बुलेंसों की व्यवस्था करना जँहा से तत्काल दुर्घट़नाओं के समय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जा सकें.
#६. वाहनों की गति सीमा का निर्धारण और इस गतिसीमा का कढ़ाई से पालन करवाना सुनिश्चित होना चाहियें.

यदि हम आनें वाले वर्षों में सड़क दुर्घट़नाओं को कम करनें में सफ़ल हो जातें हैं,तो निश्चित रूप से ये हमारें राष्ट्र के लिये राष्ट्रीय उपलब्धि होगी.



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