सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

सूक्ष्म लघु और मध्यम उघोग [MSME]

#क्या हैं MSME 


सूक्ष्म लघु और मध्यम उघोग अधिनियम 2006,  के अनुसार सूक्ष्म, लघु,और मध्यम उघोग की तीन श्रेणी बनाई गई हैं,जिनमें मुख्यत दो श्रेणी बनाई गई हैं 1.,सेवा 2 . विनिर्माण .

#सूक्ष्म उघोग

25 लाख रूपये के निवेश वाले उघोग को सूक्ष्म उघोग के रूप में मान्यता प्रदान की गई है. 

#लघु उघोग 

25 लाख से 5 करोड़ रूपये वाले उघोग को लघु उघोग के रूप में अधिनियमित किया गया हैं.

#मध्यम उघोग 

5 करोड़ से 10 करोड़ रूपयों तक निवेश वाले उघोग मध्यम उघोग के रूप में पहचानें जातें हैं.

सेवा क्षेत्र के उघोगों में रूपये 10 लाख तक सूक्ष्म, 10 लाख से 2 करोड़ तक लघु,तथा 2करोड़ से 5 करोड़ तक निवेश वाले उघोग मध्यम उघोग कहलातें हैं.

भारत की अर्थव्यवस्था की तेजी का प्रमुख आधार और मंदी के दौर में भी अर्थव्यवस्था  को संभालने वाला प्रमुख आधार MSME ही हैं देश के कुल निर्यात का 45 प्रतिशत इसी उघोग से आता हैं.साथ ही लगभग 7 करोड़ कार्यबल को रोजगार प्रदान करता हैं.

#समस्या 

::::  वित्तीय समस्या इस क्षेत्र की बड़ी समस्या हैं,startup को loan देनें में बैंक संकोच करते फलस्वरूप नवउधमी परेशान योजना बीच में ही छोड़ देता हैं.

::::  विपणन का अभाव जिससे कि नवउधमी बाजार तक पहुँचनें में अधिकांश समय और पैसा खर्च कर देता हैं.

::::  अधोसंरचना का अभाव  MSME के सामनें सबसे बड़ा मुद्दा हैं बिजली ,पानी,गुणवत्ता पूर्ण परिवहन तथा बेहतर Broadband network प्रदान करनें में हम चीन,दक्षिण कोरिया,सिंगापुर जैसे देशों से बहुत पीछें हैं.

::::  गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षित कार्यबल का अभाव इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण समस्या हैं,जिसकी वज़ह से MSME अपना सर्वश्रेष्ठ उत्पादन देनें में बहुत पीछे रह जाता हैं.

::::  लालफीताशाही की वज़ह से अनेक MSME शुरू होनें के पूर्व अपना मन बदल देती हैं,उदाहरण के लियें investor summit में होनें वालें अनेक समझोते बाद में वास्तविक धरातल पर नही पहुचँ पाते हैं,क्योंकि उनसे किये गये अनेक वादे फाइलों के बीच वर्षों तक दोड़तें रहतें हैं.

MSME भारतीय अर्थव्यवस्था को गतिमान रखनें वाला प्रमुख आधार हैं,यदि महत्वपूर्ण क्षेत्र को महात्मा गांधी के सपनों के मुताबिक ढ़ालना हैं,तो समयबद्ध और ईमानदारीपूर्वक इस क्षेत्र की समस्या को समझकर सुलझाना होगा.




प्रदूषित होती नदिया(River) कही सभ्यताओं के अंत का संकेत तो नही

विश्व की तमाम सभ्यताएँ नदियों के किनारें पल्लवित हुई हैं,चाहे मेसोपोटोमिया हो या हड़प्पा यदि नदिया नही होती तो न ये सभ्यताएँ होती और ना ही...