गुरुवार, 3 नवंबर 2016

Digital Disorder डिजीटल डिसआर्डर

सोशल मीडिया लत
 डिजिटल डिसऑर्डर
मनुष्य अपनी उन्नति के नित नये कीर्तिमान सदा से ही रचता आ रहा हैं. उसके इसी प्रयास ने भौगोलिक दूरियों को भी सिमटा कर दुनिया को छोटा सा गाँव बना दिया है.जबसे मोबाइल का अविष्कार हुआ है और सोशल नेट़वर्किंग के माध्यम से लोग एक दूसरे से जुड़नें लगें हैं,तबसे ही स्वास्थ पर इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी देखने में आ रहे हैं ।

आईयें जानतें हैं सोशल मिड़िया (social media) के कुछ नकारात्मक प्रभावों के बारें में

1).common mental disorder syndrome (c.m.d.) :::

 सोशल मिड़िया पर  सक्रिय रहनें वाला व्यक्ति यदि बार - बार अपनें पोस्ट पर आने वाले कमेन्टस,लाईक्स चेक करता हैं,बार - बार मेल बाक्स चेक करता हैं.और ऐसा वह अपनें महत्वपूर्ण कार्य करनें के दोरान ,आधी रात में बिस्तर से उठकर,करता हैं, और अपनें पोस्ट पर आने वाली नकारात्मक कमेंट़ ,कम लाईक्स से डिप्रेस्ड़, बैचेन,चिड़चिड़ा,और अपने ज़रूरी कार्यों को भी मन लगाकर नहीं कर पाता हैं, तो ऐसा व्यक्ति मनोचिकित्सकों की राय में common mental disorder syndrome से ग्रसित माना जाता हैं.

c.m.d.से पीड़ित व्यक्ति में उच्च रक्तचाप, टेकिकार्ड़िया जैसी समस्या आम हो जाती हैं. कभी - कभी सोशल मीड़िया तनाव को इतना बढ़ा देता है कि व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेता हैं. आत्महत्या करनें की यह प्रवृत्ति युवावर्ग में अधिक देखी जा रही हैं क्योंकि युवावर्ग सोशल साइट़ पर सक्रिय रहनें के साथ केरियर और पढ़ाई के दबाव में संतुलन स्थापित करनें में असफल हो रहा हैं.

2).सेल्फी सनक :::


आजकल सेल्फी लेकर सोशल मीड़िया पर पोस्ट करना हर किसी का शगल बनता जा रहा हैं,किन्तु हर ज़गह ,बिना उचित अवसर के सेल्फी लेना सनक की श्रेणी में आता हैं,और कई बार व्यक्ति सेल्फी में इतना मशगुल हो जाता हैं,कि अपनी जान तक दाँव पर लगा देता हैं. 

विश्व में होनें वाली अनेक सड़क दुर्घट़नाओं,रेल दुर्घट़नाओं,वायु दुर्घट़नाओं, जल दुर्घट़नाओं का प्रमुख कारण सेल्फी बनता जा रहा हैं,ऐसा व्यक्ति जो कार चलाते,रेल चलाते,वायुयान चलाते सेल्फी लेता हैं वह मानव बम के समान होता हैं,क्योंकि वह अपनें साथ अन्य व्यक्तियों की जान का दुश्मन बन जाता हैं.

3).टेक्स्ट नेक (Text neck) :::

लगातार एक ही पोजीशन में मोबाइल पर गर्दन झुकाए रहनें से कंधों ,गर्दन और रीढ़ की हड्डीयों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता हैं,यह दबाव यदि लगातार पड़ता रहे तो गर्दन और कंधों में तीव्र दर्द प्रारंभ हो सकता हैं,और गर्दन और कंधे एक जैसी पोजिशन में रह जातें हैं, यह अवस्था टेक्स्ट नेक कहलाती हैं,जिसके लिये सर्जरी तक करना पड़ सकती हैं.

4)Digital eye strain :::

कम्प्यूटर ,मोबाइल से निकलनें वाली नीली रोशनी स्क्रीन को स्पष्ट दिखानें के लिये प्रयोग की जाती हैं,क्योंकि यह हाई एनर्जी और शार्ट वेव लेंग्थ वाली होती हैं .कम्प्यूटर ,मोबाइल पर लगातार बिना किसी रूकावट के काम करतें रहनें से या रात को अंधेरे में इन पर काम करना आँखों के लिये कई समस्याओं का कारक होता हैं, Digital eye strain इनमें से एक हैं. इस समस्या के होनें पर

 ० व्यक्ति की आँखों का पानी सूख जाता हैं.

० आँखों में सूजन आ जाता हैं.

० आँखों के पिछले भाग में तीव्र दर्द होता हैं.जिससे नींद में बाधा आती है.

० पलकें बार - बार झपकती हैं.

० आँखों की कोशिकाएँ स्थाई रूप से खत्म होकर आदमी अँधा हो जाता हैं.

० आँखे फडफडाती हैं,जिसकी वज़ह से बेचेनी बढ़ जाती हैं.

5).खेल एडिक्सन :::

कुछ लोग लगातार मोबाइल कम्प्यूटर पर गेम खेलनें के इतनें आदि हो जाते हैं,कि इनका अधिकांश समय गेम्स की अलग - अलग स्टेप को पार करनें में खत्म होता हैं,ऐसे लोग जब तक अगली स्टेप नही पार करतें तब तक मोबाइल को नहीं छोड़तें हैं,फलस्वरूप इनकी बाँडी क्लाक परिवर्तित होकर अनेक हार्मोंनल समस्या पैदा हो जाती हैं,जैसें उल्टी ,चक्कर आनें की समस्या जो लगातार बढ़ती रहती हैं.

6).कार्पल टनल सिन्ड्रोम (carpal tunal syndrome) :::

लगातार मेसेज टाइप करनें या टच स्क्रीन पर ऊगंली ऊपर निचें करतें रहनें से हाथों की ऊँगलियों,माँसपेशियों में तीव्र दर्द और झनझनाहट़ पैदा हो जाती हैं,यह अवस्था कार्पल टनल सिन्ड्रोम कहलाती हैं.

7).समाधान :::

डिजीटल डिसआर्डर की समस्या से निपट़नें के लिये आवश्यक हैं,कि व्यक्ति सोशल मीड़िया पर सक्रि रहनें का निश्चित समय बना लें.

० बार - बार ई मेल ,और सोशल मीड़िया स्टेटस चेक करनें से बचें.

० यदि कम्प्यूटर पर काम करतें हैं,तो निश्चित करें कि एक डेढ़ घंटे के बाद 5 मिनिट का काम से अवकाश लेकर घूमें और आँखों से 5 बार 20 फीट़ तक देंखें.

० अंधेरें में मोबाइल या कम्प्यूटर का कदापि इस्तेमाल न करें.

० लोगों से सोशल मीड़िया पर चेट करनें के अतिरिक्त व्यक्तिगत रूप से मिलना सुनिश्चित करें.

० सोशल मीड़िया पर मिलनें वाली प्रतिक्रिया को सकारात्मक रूप से लें.




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