सोमवार, 7 सितंबर 2015

DENGUE and AYURVEDA

#1.सामान्य जानकारी::-

डेँगू वायरस जनित रोग  हैं,जो कि एडिज एडिप्टि  मच्छर के संक्रमित व्यक्ति को काटने के पश्चात स्वस्थ व्यक्ति को काटनें से फैलता हैं. डेँगू की विकास अवधि हमारें शरीर में सात से चोदह दिन होती हैं. इसका मच्छर मुख्यत: दिन के समय और शरीर के निचले हिस्सों मे काटता हैं
डेँगू का प्रकोप उष्णकटिबंधीय देशों मे अधिक होता हैं.इस बीमारी का अभी तक कोई मान्यता प्राप्त ईलाज़ नहीं हैं.मात्र लाक्षणिक चिकित्सा ही की जाती हैं


#2.लक्षण::

१.बुखार लगातार १०४ डिग्री फेरेनाइट से अधिक चिकित्सा के बाद भी बनें रहना.
२. आँखों के निचें लगातार तेज़ दर्द  जिससे देखने की समस्या हो जाती हैं.
४.शरीर में चकते होना.
५.उल्टी.
६.रक्त में स्थित प्लेटलेट्स का अचानक कम होना

७. ब्लड़ प्रेशर का अचानक से कम होना.

#3.उपचार::-

१. रोगी को तनाव मुक्त रखनें का प्रयास करें निर्जलीकरण से बचानें के लिये पानी का पर्याप्त सेवन करवायें,इसके लिये ओ.आर.एस.का घोल बना के पीलावें.
२. खानें में दलिया ,चावल,दही, माँस रस दे सकते हैं.
३. गिलोय रस को दो से तीन चम्मच दिन में तीन से चार बार पीलायें
४. पुर्ननवारिष्ट चार से पाँच चम्मच सुदर्शन चूर्ण के साथ दें.
५. रोगी को पपीता के पत्तों का रस निकाल कर पीलायें.
६. खून पतला करनें वाली दवाईयाँ न दें.
७. हल्दी, लोंग,काली मिर्च,वत्सनाभ,और तुलसी को समान मात्रा में मिलाकर वटी बना ले इसे सुबह शाम दो-दो वटी ले.
८.बकरी का दूध पीनें से इस रोग की रोकथाम में मदद मिलती है.
९.कद्दू और ककड़ी के बीज 100 - 100 ग्राम लेकर उन्हें पीसकर रोगी को सुबह शाम एक-एक चम्मच देनें से डेँगू में रोग प्रतिरोधकता बढ़ती हैं.

#4.सावधानियाँ::-

१. मच्छरों से बचाव के लिये घर के आस-पास साफ़ सफ़ाई का विशेष ध्यान रखें .घर की छत पर बरसात के पानी को एकत्रित न होनें दे.
२.पानी के खुले स्रोतों पर केरोसिन का तेल ड़ालें.
३. पूरी बाँहो के वस्त्र पहनकर रखें.
४. डेँगू प्रभावित जगहों से दूरी बनाकर रखें.

सलाह के लियें लिखें

Svyas845@gmail.com

नोट- वैघकीय परामर्श आवश्यक 






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