मंगलवार, 14 जुलाई 2015

Ayurveda and jaundice

आज हम आयुर्वैद उपचार के अन्तर्गत कामला अर्थात पीलिया (jaundice) की चर्चा करेंगें आयुर्वैद में स्वस्थ शरीर के लिये वात, पित्त एँव कफ का संतुलित रहना आवश्यक है. इन तीनों का असन्तुलन रोग उत्पन्न करता हैं. पीलिया पित्त का असन्तुलन हैं, यह रोग लीवर यानि यकृत को पृभावित करता हैं, और रक्त निर्माण बाधित करता हैं, आयुर्वैद में पीलिया का बहुत सटीक उपचार वर्णित हैं,
१.पुर्ननवा मन्डूर, नवायस लोह, दृाछा, अश्वगंधा, शिलाजित ,हल्दी ,बायबिडंग को विशेष अनुपात मे मिलाकर रोगी को लगातार चार हफ्तों तक सेवन करवाने से बीमारीं समाप्त हो जाती हैं.
२.रोगी को दिन में दस बारह बार एक गिलास गन्नें का रस दाडिमाष्टक चूर्ण स्वादानुसार मिलाकर पिने से रोग जड़ मूल से नष्ट हो जाता हैं और भविष्य मे दुबारा वापस नहीं होता हैं.
३.योग की अनेक किृयाएँ जैसे कपालभांति, सू्र्यनमस्कार ,शीर्षासन ,पद्मासन और पृाणायाम इस रोग को समाप्त करता हैं.
Email-Svyas845@gmail.com

प्रदूषित होती नदिया(River) कही सभ्यताओं के अंत का संकेत तो नही

विश्व की तमाम सभ्यताएँ नदियों के किनारें पल्लवित हुई हैं,चाहे मेसोपोटोमिया हो या हड़प्पा यदि नदिया नही होती तो न ये सभ्यताएँ होती और ना ही...