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EYE AND AYURVEDA

वर्तमान समय मे नेत्र विकार आधुनिक पीढी़ को बहुत तेज गति से अपनी गिरफ्त मे लेता जा रहा हैं, विश्व का हर युवा आँखों से सम्बंधित समस्या लेकर बहुत छोटी उमृ मे नेत्र रोग चिकित्सक के पास जानें लगा हैं, कम उमृ मे नेत्र रोग होनें का जो पृमुख कारण हैं, उनमें स्मार्टफोन, कम्प्यूटर, टी.वी. का घंटों तक लगातार इस्तेमाल पृमुख हैं.



लोग घंटों तक बेड़रूम की रोशनी बुझाकर लेटे-लेटे मोबाइल पर चेट करते रहते हैं, जिससे आँखों से सम्बंधित कई खतरनाक बीमारींयाँ होने लगी हैं, इनमें पृमुख रूप से शामिल हैं, आँखों का पानी सुखना,कम दिखाई देना, रेटिना मे तेज दर्द, ड्रायविंग करते वक्त सामनें से आने वाली दूसरे वाहन की रोशनी में आंखे चोंधिया जाना, और कभी-कभी तो आदमी अन्धा तक हो जाता हैं. आयुर्वैद में इस पृकार की परिस्थितियों में जो बातें बतायी गयी हैं उनमें:-




१.त्रिफला चूर्ण  चार चम्मच लेकर उसे 200ml पानी में रात भर भीगों दें, सुबह छानकर इस पानी से आँखों में छींटें डालें.



२. त्रिफला चूर्ण वयस्क दो चम्मच बच्चें एक चम्मच को रात को सोते समय गर्म जल से सेवन करवायें.



३.शहद को तिल तेल मे समानुपात मे मिलाकर आँखों में अंजन करें.



४.आंवला और गाजर का रस सेवन करें



५.घृतकुमारी(alo vera ) का गुदा निकालकर उसमें मुलतानी मिट्टी मिला ले इस पेस्ट को आँखों पर बांधें.




६.पके हुए पीले फलों जैसे आम, पपीता आदि में विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में पाया जाता हैं अतः आंखों से संबंधित बीमारियों में पीले फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए।






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